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UPSC CSE Mains · GS Paper 4

2015 · Q1(a)

10 अंक150 शब्दअध्याय 1

प्रश्न

‘पर्यावरणीय नीतिशास्त्र’ (Environmental Ethics) से क्या तात्पर्य है? इसका अध्ययन करना क्यों महत्त्वपूर्ण है? पर्यावरणीय नीतिशास्त्र के दृष्टिकोण से किसी एक पर्यावरणीय मुद्दे पर चर्चा कीजिए।

प्रश्न की मांग एवं दृष्टिकोण

पर्यावरणीय नीतिशास्त्र की अवधारणा, महत्व और किसी पर्यावरणीय मुद्दे पर उसके अनुप्रयोग की मांग।

मॉडल उत्तर

अर्थ: पर्यावरणीय नीतिशास्त्र अनुप्रयुक्त नीतिशास्त्र (Applied Ethics) की वह शाखा है जो नैतिक चिंता को केवल मानव समाज तक सीमित न रखकर वनस्पतियों, जीव-जंतुओं, नदियों और समूचे पारिस्थितिकी तंत्र तक विस्तारित करती है। यह प्रकृति के केवल उपयोगिता-मूल्य (Instrumental Value) के बजाय उसके आंतरिक मूल्य (Intrinsic Value) को भी स्वीकार करती है।

अध्ययन का महत्त्व: यह मानव-केंद्रित दृष्टिकोण पर अंकुश लगाता है, अंतर-पीढ़ीगत न्याय और सतत विकास को आधार देता है तथा अन्य प्रजातियों के अस्तित्व के अधिकार की रक्षा का नैतिक आधार प्रदान करता है।

उदाहरण—जलवायु परिवर्तन: ऐतिहासिक रूप से अधिक उत्सर्जन विकसित देशों और संपन्न वर्गों ने किया, जबकि बाढ़, सूखा और विस्थापन का सबसे बड़ा बोझ गरीब, द्वीपीय तथा आदिवासी समुदाय उठाते हैं। इसलिए ‘साझा किंतु विभेदित उत्तरदायित्व’ (CBDR) और जलवायु वित्त दान नहीं, बल्कि जलवायु न्याय से जुड़ा नैतिक दायित्व है।

मॉडल उत्तर स्रोत PDF पर आधारित है; पठनीयता के लिए टंकण, विराम-चिह्न और स्पष्ट OCR त्रुटियों का संपादकीय परिष्कार किया गया है। प्रश्न क्रमांक/शब्द-सीमा सत्यापन के बाद प्रकाशित हैं।