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UPSC CSE Mains · GS Paper 4

2015 · Q4(a)

10 अंक150 शब्दअध्याय 1

प्रश्न

"सामाजिक मूल्य आर्थिक मूल्यों की अपेक्षा अधिक महत्वपूर्ण हैं।" राष्ट्र के समावेशी विकास ( Inclusive Growth) के संदर्भ में उदाहरणों के साथ चर्चा कीजिए।

प्रश्न की मांग एवं दृष्टिकोण

समावेशी विकास के संदर्भ में सामाजिक और आर्थिक मूल्यों के सापेक्ष महत्व का विश्लेषण।

मॉडल उत्तर

भूमिका: आर्थिक मूल्य (लाभ, दक्षता, जीडीपी वृद्धि) राष्ट्र को संसाधन और समृद्धि देते हैं, किंतु सामाजिक मूल्य (समता, करुणा, बंधुत्व,
सामाजिक न्याय) यह तय करते हैं कि उस समृद्धि का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।

समावेशी विकास में सामाजिक मूल्यों की सर्वोच्चता क्यों है?
1. विषमता और क्रोनी कैपिटलिज्म पर रोक: केवल आर्थिक मूल्यों के पीछे भागने से धन कुछ हाथों में केंद्रित हो जाता है (जैसा कि
ऑक्सफैम रिपोर्ट दर्शाती है), जबकि सामाजिक मूल्य प्रगतिशील कराधान और कल्याणकारी योजनाओं ( MGNREGA, NFSA) का
आधार बनते हैं।
2. मानव को साधन नहीं, साध्य मानना: आर्थिक दृष्टि से सुदूर आदिवासी गाँव में स्कू ल या अस्पताल खोलना 'घाटे का सौदा'
Economically Unviable) हो सकता है, किंतु सामाजिक मूल्य प्रत्येक नागरिक के स्वास्थ्य व शिक्षा को सर्वोपरि मानते हैं।
(
3. सामाजिक स्थिरता और मानव विकास: केरल या नॉर्डिक देशों का उदाहरण दिखाता है कि जहाँ लैंगिक समानता और सामाजिक
HDI) और दीर्घकालिक आर्थिक विकास भी अधिक स्थायी होता है।
समावेशन के मूल्य मजबूत हैं, वहाँ मानव विकास सूचकांक (

निष्कर्ष: अमरत्य सेन के 'क्षमता दृष्टिकोण' (Capability Approach) के अनुसार, आर्थिक विकास केवल एक 'साधन' है, जबकि सामाजिक
मूल्यों से युक्त मानवीय खुशहाली और समावेशी विकास ही राष्ट्र का वास्तविक 'साध्य' है।

मॉडल उत्तर स्रोत PDF पर आधारित है; पठनीयता के लिए टंकण, विराम-चिह्न और स्पष्ट OCR त्रुटियों का संपादकीय परिष्कार किया गया है। प्रश्न क्रमांक/शब्द-सीमा सत्यापन के बाद प्रकाशित हैं।