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UPSC CSE Mains · GS Paper 4

2015 · Q3(a)

10 अंक150 शब्दअध्याय 1

प्रश्न

"कर्तव्यों के प्रभावी निर्वहन के लिए केवल कानून का अनुपालन ही पर्याप्त नहीं है, लोक सेवक में नैतिक मुद्दों के प्रति सुविकसित संवेदनशीलता भी होनी चाहिए।" क्या आप सहमत हैं? दो उदाहरणों की सहायता से स्पष्ट कीजिए जहाँ ( ) कोई कृत्य नैतिक रूप से सही है, किंतु कानूनी रूप से नहीं, और ( ) कोई कृत्य कानूनी रूप से सही है, किंतु नैतिक रूप से नहीं।

प्रश्न की मांग एवं दृष्टिकोण

कानून के यांत्रिक अनुपालन और नैतिक संवेदनशीलता के बीच अंतर को दो प्रकार के उदाहरणों से स्पष्ट करना है।

मॉडल उत्तर

भूमिका: हाँ, मैं इस कथन से पूर्णतः सहमत हूँ। कानून सामान्य परिस्थितियों के लिए बनाए जाते हैं और वे जीवन की हर जटिल मानवीय परिस्थिति
का पूर्वानुमान नहीं लगा सकते। अतः 'यांत्रिक कानून-पालन' ( Mechanical Rule-following) से ऊपर उठकर लोक सेवक में 'नैतिक
संवेदनशीलता' ( Ethical Sensibility) होना अनिवार्य है।

( ) कृत्य जो नैतिक रूप से सही है, किंतु कानूनी रूप से नहीं ( Ethically Right, Legally Wrong):
उदाहरण 1: सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की जान बचाने के लिए उसे अस्पताल ले जाते समय खाली सड़क पर रेड लाइट
Traffic Signal) पार करना।
(
उदाहरण 2: भीषण अकाल या बाढ़ के समय किसी भूख से मरते वृद्ध के पास आधार कार्ड/दस्तावेज न होने पर भी जिलाधिकारी द्वारा
नियम से हटकर तत्काल राशन उपलब्ध कराना।

( ) कृत्य जो कानूनी रूप से सही है, किंतु नैतिक रूप से नहीं ( Legally Right, Ethically Wrong):
उदाहरण 1: कड़ाके की ठंड या भारी बारिश की रात में बिना किसी वैकल्पिक आश्रय ( Shelter) की व्यवस्था किए अतिक्रमण हटाने के
कानूनी आदेश के तहत गरीब झुग्गीवासियों के घर गिरा देना।
Tax Avoidance Loopholes) का सहारा लेकर शून्य
उदाहरण 2: बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा कर-कानूनों की तकनीकी खामियों (
टैक्स चुकाना।

निष्कर्ष: अतः एक संवेदनशील प्रशासक कानून के 'शाब्दिक अर्थ' ( Letter of the Law) के साथ-साथ उसकी 'मानवीय आत्मा' (Spirit of
the Law) को साधकर ही सच्चा न्याय कर सकता है।

मॉडल उत्तर स्रोत PDF पर आधारित है; पठनीयता के लिए टंकण, विराम-चिह्न और स्पष्ट OCR त्रुटियों का संपादकीय परिष्कार किया गया है। प्रश्न क्रमांक/शब्द-सीमा सत्यापन के बाद प्रकाशित हैं।