2015 · Q1(b)
प्रश्न
निम्नलिखित के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए: (क) कानून और नीतिशास्त्र (Law and Ethics), (ख) नैतिक प्रबंधन और नैतिकता का प्रबंधन (Ethical Management and Management of Ethics), (ग) भेदभाव और अधिमान्य उपचार (Discrimination and Preferential Treatment), तथा (घ) व्यक्तिगत नैतिकता और पेशेवर नैतिकता (Personal Ethics and Professional Ethics)।
प्रश्न की मांग एवं दृष्टिकोण
चार नैतिक अवधारणा-युग्मों के बीच स्पष्ट, उदाहरणयुक्त अंतर लिखना है।
मॉडल उत्तर
(क) कानून और नीतिशास्त्र: कानून राज्य द्वारा निर्मित, लिखित और दंड द्वारा प्रवर्तनीय नियम है; नीतिशास्त्र उचित-अनुचित के वे मानक हैं जिन्हें अंतरात्मा और सामाजिक चेतना भी संचालित करती है। कोई कार्य कानूनी होते हुए भी अनैतिक हो सकता है, जैसे कर-कानून की खामी का अनुचित लाभ उठाना।
(ख) नैतिक प्रबंधन और नैतिकता का प्रबंधन: नैतिक प्रबंधन का अर्थ भर्ती, खरीद और निर्णय जैसे प्रबंधकीय कार्यों को ईमानदारी व निष्पक्षता से करना है। नैतिकता का प्रबंधन संगठन में आचार संहिता, व्हिसलब्लोअर तंत्र और प्रशिक्षण जैसी व्यवस्थाएँ बनाना है।
(ग) भेदभाव और अधिमान्य उपचार: भेदभाव पूर्वाग्रह-आधारित अन्यायपूर्ण वंचना है; अधिमान्य उपचार ऐतिहासिक रूप से वंचित समूहों को समान अवसर देने वाला सकारात्मक संरक्षण है।
(घ) व्यक्तिगत और पेशेवर नैतिकता: व्यक्तिगत नैतिकता निजी विश्वासों से जुड़ी है; पेशेवर नैतिकता पद या पेशे की निष्पक्ष जिम्मेदारियों से। लोक सेवक को निजी पसंद से ऊपर उठकर संवैधानिक निष्पक्षता निभानी होती है।
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