कार्टाजेना और नागोया: जैव-सुरक्षा बनाम लाभ-साझाकरण
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प्रश्न
जैव विविधता अभिसमय के अंतर्गत कार्टाजेना और नागोया प्रोटोकॉल की अलग-अलग भूमिकाएँ स्पष्ट कीजिए।
यह अध्ययनसार का मौलिक अभ्यास प्रश्न है, वास्तविक UPSC विगत वर्ष प्रश्न नहीं।
आदर्श उत्तर
भूमिका: जैव विविधता अभिसमय (CBD), 1992 का लक्ष्य संरक्षण, सतत उपयोग तथा आनुवंशिक संसाधनों से लाभों का न्यायपूर्ण वितरण है। इसके दो प्रमुख प्रोटोकॉल अलग कार्य करते हैं।
मुख्य अंतर
- कार्टाजेना प्रोटोकॉल: आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी से बने जीवित संशोधित जीवों (LMO) की सीमा-पार आवाजाही और जैव-सुरक्षा जोखिम प्रबंधन से संबंधित है।
- नागोया प्रोटोकॉल: आनुवंशिक संसाधनों तक पहुँच एवं उपयोग से मिलने वाले लाभों का न्यायसंगत और समान साझाकरण (ABS) सुनिश्चित करने के मानदंड देता है।
- उद्देश्यगत अंतर: पहला संभावित पारिस्थितिक जोखिम कम करता है; दूसरा संसाधन प्रदाता समुदायों एवं शोधकर्ता/उद्योग के बीच न्यायसंगत भागीदारी बढ़ाता है।
- प्रक्रियागत अंतर: कार्टाजेना सावधानीपूर्ण जोखिम आकलन पर जोर देता है; नागोया पूर्व सूचित सहमति और पारस्परिक सहमत शर्तों के माध्यम से लाभ-साझाकरण को आगे बढ़ाता है।
भारतीय संदर्भ: जैव विविधता अधिनियम, 2002 और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ABS का संस्थागत आधार देते हैं; जैव-सुरक्षा के लिए अलग नियामकीय व्यवस्था है।
निष्कर्ष: कार्टाजेना सुरक्षित जैव प्रौद्योगिकी और नागोया न्यायपूर्ण लाभ-वितरण को बढ़ावा देते हैं।