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GS-III • पर्यावरण और अंतरराष्ट्रीय संधियाँ • UPSC

CBD COP-17: भारत के चार प्रकाशन, OECM और जैव विविधता संरक्षण की नई दिशा

येरेवन, आर्मेनिया में COP-17 के दौरान भारत ने OECM, जैव-सुरक्षा, CBD मार्गदर्शिका और लाभ-साझाकरण से जुड़े चार दस्तावेज़ जारी किए।

प्रकाशन: 29 अक्टूबर 2026 · पाठ्यक्रम: GS-III • पर्यावरण और अंतरराष्ट्रीय संधियाँ

चर्चा में क्यों? सम्मेलन और घटना

28 अक्टूबर 2026 को आर्मेनिया की राजधानी येरेवन में जैव विविधता अभिसमय (Convention on Biological Diversity—CBD) के 17वें पक्षकार सम्मेलन (COP-17) के दौरान भारतीय पर्यावरण मंत्रालय, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) से जुड़े एक कार्यक्रम में चार महत्त्वपूर्ण प्रकाशन जारी किए गए।

यह 28 अक्टूबर का स्वतंत्र नीति-विकास है, जबकि 29 अक्टूबर के अध्ययन में इसकी पृष्ठभूमि रखी गई है। इसे IUCN की प्रवाल जोखिम रिपोर्ट या जलवायु परिवर्तन वाली UNFCCC COP बैठक के साथ न मिलाएँ।

चारों प्रकाशन: पूरा आधिकारिक क्रम

  1. Guidelines for the Designation of India's Other Effective Area-Based Conservation Measures (I-OECMs), 2026: पारंपरिक संरक्षित क्षेत्रों के बाहर भी प्रभावी संरक्षण परिणामों की पहचान और मान्यता हेतु मार्गदर्शन।
  2. Cartagena Protocol on Biosafety की पाँचवीं राष्ट्रीय रिपोर्ट: आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी तथा जैव-सुरक्षा प्रतिबद्धताओं की रिपोर्टिंग।
  3. The Convention on Biological Diversity Handbook: Reference Guide and Indian Perspective: CBD प्रक्रिया, भारतीय दृष्टिकोण और नीतिगत क्रियान्वयन का संदर्भ।
  4. India's ABS Success Story: जैविक संसाधनों और संबद्ध पारंपरिक ज्ञान के उपयोग से मिलने वाले लाभों के न्यायसंगत साझाकरण के भारतीय अनुभव।

इनमें से कोई प्रकाशन अपने-आप नया अंतरराष्ट्रीय समझौता नहीं बन जाता; ये कार्यान्वयन, रिपोर्टिंग और अनुभव-साझाकरण की सामग्री हैं।

CBD 1992: तीन मूल उद्देश्य

जैव विविधता अभिसमय (1992, रियो पृथ्वी सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षर के लिए खुला) के तीन आधार हैं: (1) जैव विविधता संरक्षण; (2) उसके घटकों का सतत उपयोग; (3) आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से प्राप्त लाभों का न्यायसंगत और समान साझाकरण।

इसे कार्टाजेना प्रोटोकॉल (जैव-सुरक्षा) और नागोया प्रोटोकॉल (पहुँच एवं लाभ साझाकरण—ABS) से जोड़कर पढ़ना चाहिए। तीनों को एक ही संधि मानना सामान्य परीक्षा-भ्रम है।

OECM क्या है और राष्ट्रीय उद्यान से कैसे अलग?

Other Effective Area-Based Conservation Measures (OECM) ऐसे भौगोलिक रूप से पहचाने गए क्षेत्र हो सकते हैं जो औपचारिक संरक्षित क्षेत्र घोषित न हों, लेकिन जिनका संचालन लंबे समय तक जैव विविधता संरक्षण के प्रभावी, टिकाऊ परिणाम देता हो। उदाहरण के तौर पर समुदाय-प्रबंधित परिदृश्य, कुछ पारंपरिक उपयोग क्षेत्र और जिम्मेदारी से प्रबंधित संस्थागत भूमि पर उपयुक्त मानदंड के तहत विचार हो सकता है। हर ग्राम-भूमि या निजी खेत अपने-आप OECM नहीं है।

मापदंडसंरक्षित क्षेत्रOECM
मुख्य मान्यताकानूनी/प्रशासनिक संरक्षण-प्रणालीवास्तविक दीर्घकालीन संरक्षण परिणाम
स्थानीय समुदायपरिस्थिति के अनुसार भागीदारीमान्यता एवं शासन में महत्त्वपूर्ण भूमिका हो सकती है
सभी क्षेत्र स्वतः शामिल?नहीं, विधिक मानदंड जरूरीनहीं, परिणाम आधारित मान्यता जरूरी

कुनमिंग–मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढाँचा

2022 में CBD COP-15 के दौरान अपनाए गए कुनमिंग–मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढाँचे (KMGBF) में 2030 तक कम-से-कम 30% स्थलीय, अंतर्देशीय जल, तटीय और समुद्री क्षेत्रों के प्रभावी संरक्षण की दिशा शामिल है, जिसे सामान्यतः 30×30 कहा जाता है। यहाँ लक्ष्य केवल कागज पर संरक्षित क्षेत्र बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रतिनिधित्व, पारिस्थितिक संपर्क, शासन और प्रभावी प्रबंधन है।

OECM की पहचान इस व्यापक लक्ष्य में योगदान दे सकती है; पर एक बार क्षेत्र दर्ज होने के बाद उसे हमेशा प्रभावी मान लेना उचित नहीं—निगरानी आवश्यक है।

जैव-सुरक्षा और ABS की अलग भूमिकाएँ

कार्टाजेना प्रोटोकॉल जीवित संशोधित जीवों (Living Modified Organisms—LMO) की सीमा-पार आवाजाही और जैव-सुरक्षा के नियामकीय आयाम से जुड़ा है। नागोया प्रोटोकॉल आनुवंशिक संसाधन तक पहुँच एवं लाभ-साझाकरण के नियमों पर केंद्रित है। भारत में जैव विविधता अधिनियम, 2002 तथा संशोधित प्रावधान, NBA, राज्य जैव विविधता बोर्ड और स्थानीय जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ संबंधित संस्थागत आधार हैं।

ABS उदाहरण: किसी कंपनी द्वारा जैविक संसाधन से व्यावसायिक लाभ कमाने पर उपयुक्त नियमों के अनुसार लाभ का हिस्सा संसाधन-समुदायों या संरक्षण व्यवस्था तक पहुँचाना न्याय और संरक्षण-प्रोत्साहन का साधन हो सकता है।

भारत के लिए अवसर, चुनौतियाँ और आगे की राह

  • संरक्षित क्षेत्र से बाहर जैव विविधता और सामुदायिक संरक्षण को स्पष्ट पहचान मिल सकती है।
  • आदिवासी तथा स्थानीय समुदायों की सहमति, संसाधन अधिकार और पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा महत्त्वपूर्ण है।
  • संरक्षण परिणाम मापना, वित्त उपलब्ध कराना और लंबी अवधि की निगरानी चुनौती है।
  • LMO से जुड़े जैव-सुरक्षा मूल्यांकन में विज्ञान, नियमन और जन-संवाद की आवश्यकता है।
  • ABS में कंपनियों, वैज्ञानिक शोधकर्ताओं और स्थानीय हितधारकों के बीच विश्वास तथा उचित जानकारी जरूरी है।

आगे की राह: स्पष्ट OECM मानदंड, स्वतंत्र पारिस्थितिक आकलन, समुदाय-आधारित निर्णय, पारदर्शी ABS व्यवस्था तथा KMGBF के राष्ट्रीय लक्ष्यों से मापनीय जोड़ विकसित करें।

प्रारंभिक परीक्षा: व्याख्यासहित अभ्यास

यहाँ दिए प्रश्न मूल अभ्यास प्रश्न हैं; वास्तविक UPSC विगत वर्ष प्रश्न नहीं।

अभ्यास प्रश्न 1. CBD के तीन मूल उद्देश्य कौन-से हैं?

  1. संरक्षण, सतत उपयोग, न्यायपूर्ण लाभ साझाकरण
  2. केवल कार्बन व्यापार
  3. समुद्री सीमा, भूजल और जलवायु
  4. एक ही देश में पर्यावरण कानून
सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या

उत्तर: विकल्प A — संरक्षण, सतत उपयोग, न्यायपूर्ण लाभ साझाकरण। CBD संरक्षण, सतत उपयोग और आनुवंशिक संसाधनों से लाभों के समान/न्यायसंगत साझाकरण पर आधारित है।

अभ्यास प्रश्न 2. OECM का सही अर्थ है—

  1. हर निजी भूमि स्वतः राष्ट्रीय उद्यान
  2. संरक्षित क्षेत्र के बाहर प्रभावी दीर्घकालीन जैव विविधता संरक्षण परिणाम वाला मान्यता-योग्य क्षेत्र
  3. केवल विश्व धरोहर स्थल
  4. समुद्र के बाहर कोई क्षेत्र नहीं
सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या

उत्तर: विकल्प B — संरक्षित क्षेत्र के बाहर प्रभावी दीर्घकालीन जैव विविधता संरक्षण परिणाम वाला मान्यता-योग्य क्षेत्र। OECM की पहचान वास्तविक संरक्षण परिणाम, उपयुक्त शासन और मानदंडों पर निर्भर होती है।

मुख्य परीक्षा: विश्लेषणात्मक अभ्यास

  1. अभ्यास प्रश्न 115 अंक250 शब्द

    OECM भारत के संरक्षण तंत्र में पारंपरिक संरक्षित क्षेत्रों की किस प्रकार पूरक भूमिका निभा सकते हैं? विश्लेषण कीजिए।

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  2. अभ्यास प्रश्न 210 अंक150 शब्द

    जैव विविधता अभिसमय के अंतर्गत कार्टाजेना और नागोया प्रोटोकॉल की अलग-अलग भूमिकाएँ स्पष्ट कीजिए।

    पूरा आदर्श उत्तर पढ़ें
उत्तर लेखन के लिए मार्गदर्शन

उत्तर लेखन मार्गदर्शन: घटना की तिथि, कानूनी अथवा वैज्ञानिक पृष्ठभूमि, कारण, प्रभाव, चुनौतियाँ, उदाहरण, आगे की राह और निष्कर्ष को प्रश्न की माँग के अनुसार रखें। प्रश्नों के आदर्श उत्तर अब अलग पृष्ठों पर उपलब्ध हैं।

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मूल स्रोत और संबंधित अध्ययन