ADMM-प्लस, आसियान केंद्रीयता और भारत की स्वायत्तता
प्रश्न
हिंद-प्रशांत क्षेत्र की बदलती सुरक्षा परिस्थिति में ADMM-प्लस, आसियान केंद्रीयता और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का महत्त्व स्पष्ट कीजिए। इस मंच की सीमाओं का विश्लेषण करें।
यह अध्ययनसार का मौलिक अभ्यास प्रश्न है, वास्तविक UPSC विगत वर्ष प्रश्न नहीं।
आदर्श उत्तर
भूमिका: हिंद-प्रशांत में समुद्री दावों, बड़ी शक्तियों की प्रतिस्पर्धा और आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा के बीच क्षेत्रीय संवाद आवश्यक है। ADMM-प्लस आसियान के 11 सदस्यों और आठ संवाद साझेदारों को एक रक्षा-सहयोग मंच पर लाता है। 13वीं बैठक 28–29 अक्टूबर 2026 के लिए सेबू, फिलीपींस में निर्धारित है।
रणनीतिक महत्त्व
- आसियान केंद्रीयता: बड़ी शक्तियों के मतभेद के बावजूद दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की संस्थागत भूमिका के साथ निरंतर रक्षा संवाद और विश्वास निर्माण संभव होता है।
- व्यावहारिक सहयोग: समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-निरोध, आपदा राहत, साइबर सुरक्षा और विशेषज्ञ प्रशिक्षण से संकट प्रतिक्रिया की सामूहिक क्षमता बढ़ सकती है।
- भारत की रणनीतिक स्वायत्तता: भारत किसी एक सैन्य गुट की अनिवार्य प्रतिबद्धता के बजाय विविध साझेदारों के साथ अपनी एक्ट ईस्ट नीति तथा समुद्री हितों के अनुरूप सहयोग करता है।
- क्षमता निर्माण: भारत और मलेशिया 2024–2027 में आतंकवाद-निरोध विशेषज्ञ कार्यसमूह के सह-अध्यक्ष हैं; यह संचालन-स्तर की साझेदारी का उदाहरण है।
सीमाएँ
- आसियान में सहमति-आधारित निर्णय से विवादास्पद मुद्दों पर सामूहिक कदम धीमे पड़ सकते हैं।
- सदस्यों की अलग सुरक्षा प्राथमिकताएँ और अमेरिका–चीन प्रतिस्पर्धा साझा स्थिति बनाना कठिन करती हैं।
- ADMM-प्लस बाध्यकारी सामूहिक रक्षा संधि अथवा समुद्री विवाद निस्तारण न्यायालय नहीं है।
- संयुक्त घोषणाओं को प्रभावी करने के लिए वित्त, अभ्यास, परस्पर भरोसा तथा राष्ट्रीय संस्थागत क्षमता आवश्यक है।
आगे की राह: समुद्री संपर्क-प्रक्रिया, आपदा राहत अभ्यास, नियमाधारित नौवहन, विशेषज्ञ आदान-प्रदान और छोटे सदस्य देशों की क्षमता-वृद्धि प्राथमिकता पाएँ।
निष्कर्ष: भारत के लिए आसियान-केंद्रित संवाद और रणनीतिक स्वायत्तता प्रतिस्पर्धा के बीच स्थिर, सहयोगात्मक हिंद-प्रशांत की परस्पर पूरक नींव हैं।