13वीं ADMM-प्लस बैठक: आसियान, हिंद-प्रशांत सुरक्षा और भारत की भूमिका
सेबू, फिलीपींस में 28–29 अक्टूबर 2026: 11 आसियान सदस्य, आठ संवाद भागीदार, भारत-मलेशिया आतंकवाद-निरोध समूह और रक्षा सहयोग।
प्रकाशन: 28 अक्टूबर 2026 · पाठ्यक्रम: GS-II क्षेत्रीय संगठन और GS-III सुरक्षा
चर्चा में क्यों?
28–29 अक्टूबर 2026 के लिए फिलीपींस के सेबू में 13वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) निर्धारित है। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार वे क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों पर अपने विचार रखेंगे और अन्य रक्षा मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
इस खबर का महत्त्व केवल विदेश यात्रा नहीं है। दक्षिण-पूर्व एशिया हिंद-प्रशांत के महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्गों का केंद्र है। यहाँ समुद्री सुरक्षा, आपदा राहत, साइबर चुनौतियाँ और बड़ी शक्तियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा भारत की सुरक्षा और व्यापार पर प्रभाव डालती है। ADMM-प्लस संवाद और व्यावहारिक सहयोग का ऐसा मंच है जिसमें क्षेत्र के देश तथा आठ प्रमुख साझेदार साथ बैठते हैं।
तथ्य सावधानी: आज उपलब्ध रक्षा मंत्रालय का प्रेस नोट बैठक का कार्यक्रम बताता है; भविष्य की संयुक्त घोषणा, समझौते या अंतिम बैठक-निष्कर्ष को पहले से पूरा हुआ नहीं बताया जा सकता।
आधिकारिक तथ्य: एक नजर में
- 13वीं ADMM-प्लस: सेबू, फिलीपींस; 28–29 अक्टूबर 2026।
- 2026 में ADMM-प्लस अध्यक्षता फिलीपींस के पास है।
- आसियान के 11 सदस्य और आठ बाहरी संवाद भागीदार: कुल 19 प्रतिभागी देश।
- आठ साझेदार: भारत, अमेरिका, चीन, रूस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड।
- भारत 1992 में आसियान का संवाद भागीदार बना; पहली ADMM-प्लस बैठक 12 अक्टूबर 2010 को हनोई (वियतनाम) में हुई।
- भारत एवं मलेशिया 2024–27 के लिए आतंकवाद-निरोध विशेषज्ञ कार्यसमूह के सह-अध्यक्ष हैं।
आसियान, ADMM और ADMM-प्लस में अंतर
| मंच | मुख्य भूमिका |
|---|---|
| आसियान (ASEAN) | दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का क्षेत्रीय संगठन; आर्थिक, राजनीतिक एवं सामाजिक सहयोग |
| ADMM | आसियान देशों के रक्षा मंत्रियों का प्रमुख परामर्श और सहयोग मंच |
| ADMM-प्लस | आसियान सदस्य तथा आठ संवाद भागीदार; साझा सुरक्षा चुनौतियों पर सहयोग |
प्लस का सदस्य बन जाने से कोई बाहरी देश आसियान का पूर्ण सदस्य नहीं बनता। ADMM-प्लस नाटो जैसा सामूहिक रक्षा दायित्व वाला सैन्य गठबंधन नहीं है। इसकी मूल प्रकृति चर्चा, क्षमता निर्माण और व्यावहारिक समन्वय की है।
आसियान के 11 देश: नई सूची याद रखें
ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्याँमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, तिमोर-लेस्ते और वियतनाम। 2026 के रक्षा मंत्रालय के विवरण में तिमोर-लेस्ते को आसियान सदस्य सूची में शामिल किया गया है। इसलिए 'आसियान में सदैव दस देश' जैसी पुरानी बात से भ्रम न हो।
सेबू फिलीपींस के मध्य भाग में स्थित महत्त्वपूर्ण द्वीपीय क्षेत्र और शहर है। मानचित्र पर दक्षिण चीन सागर, लूज़ोन जलडमरूमध्य, मलक्का जलडमरूमध्य, सुलु सागर और फिलीपींस सागर को पहचानें। इन समुद्री मार्गों का व्यापार, ऊर्जा परिवहन और नौसैनिक संपर्क में विशेष महत्त्व है।
आठ संवाद साझेदार और बहुध्रुवीय सुरक्षा
ADMM-प्लस के संवाद भागीदार हैं—भारत, अमेरिका, चीन, रूस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया तथा न्यूज़ीलैंड। इनमें कुछ देशों के बीच सामरिक प्रतिस्पर्धा या मतभेद हैं। फिर भी समुद्री डकैती, आतंकवाद, आपदा तथा साइबर खतरे जैसी चुनौतियों पर व्यावहारिक बातचीत आवश्यक है।
आसियान केंद्रीयता का आशय दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों को क्षेत्रीय संस्थागत व्यवस्था में केंद्रीय भूमिका देना है। भारत की एक्ट ईस्ट नीति और व्यापक हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण में यह महत्त्वपूर्ण है। सहयोग का अर्थ भारत की रणनीतिक स्वायत्तता छोड़ देना नहीं है।
रक्षा सहयोग के मुख्य क्षेत्र
- समुद्री सुरक्षा: समुद्री डकैती, अवैध गतिविधियों, महत्वपूर्ण नौवहन मार्गों और संकट संचार से जुड़े मुद्दे।
- मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR): सुनामी, चक्रवात और भूकंप के बाद संयुक्त राहत क्षमता।
- आतंकवाद-निरोध: प्रशिक्षण, विशेषज्ञता, अनुभव-साझाकरण तथा सुरक्षित क्षेत्रों की निगरानी।
- साइबर सुरक्षा: महत्त्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा और घटनाओं का समन्वित उत्तर।
- शांति स्थापना एवं सैन्य चिकित्सा: संकट प्रबंधन और मानव-केंद्रित सहायता।
ये ADMM-प्लस के रक्षा सहयोग के प्रमुख आयाम हैं; इन्हें 13वीं बैठक में निश्चित रूप से हुए सभी नए समझौतों की सूची न मानें।
भारत–मलेशिया आतंकवाद-निरोध सह-अध्यक्षता
भारत और मलेशिया 2024–2027 की अवधि में ADMM-प्लस के आतंकवाद-निरोध विशेषज्ञ कार्यसमूह (Experts' Working Group on Counter-Terrorism) का संयुक्त नेतृत्व कर रहे हैं। विशेषज्ञ कार्यसमूह मंत्री-स्तरीय चर्चा को प्रशिक्षण, प्रक्रियात्मक सहयोग और क्षमता-विकास जैसे व्यावहारिक कार्यों से जोड़ सकता है।
परीक्षा में गलती: भारत और मलेशिया सभी ADMM-प्लस विशेषज्ञ समूहों के सह-अध्यक्ष नहीं हैं। आधिकारिक सूचना इस विशिष्ट समूह और सीमित अवधि से संबंधित है।
भारत के लिए रणनीतिक महत्त्व
दक्षिण-पूर्व एशिया के समुद्री मार्गों पर किसी संकट का असर भारत के व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति-शृंखला पर पड़ सकता है। भारत के लिए इस मंच से समुद्री सहयोग, रक्षा वार्ता और आपदा प्रतिक्रिया में विश्वास निर्माण का अवसर है। द्विपक्षीय रक्षा संपर्क संयुक्त प्रशिक्षण, सूचना साझाकरण और मानवीय सहायता की क्षमता बढ़ाने में सहयोग कर सकते हैं।
समुद्र में घटनाओं का गलत आकलन, सीमा और समुद्री दावों के मतभेद, बड़ी शक्तियों की प्रतिस्पर्धा तथा हथियारों की बढ़ती तकनीकी जटिलता भरोसे को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में क्षेत्रीय संवाद असहमति समाप्त नहीं करता, पर संकट को नियंत्रित रखने की संस्थागत संभावना प्रदान करता है।
कठिनाइयाँ और आगे की राह
चुनौतियाँ: आसियान देशों के अलग-अलग हित, बड़ी शक्तियों की प्रतिद्वंद्विता, सहमति-आधारित निर्णय की धीमी गति, रक्षा संसाधनों में असमानता, क्षेत्रीय भरोसे की कमी और असमान कार्यान्वयन क्षमता। केवल संयुक्त विज्ञप्ति को वास्तविक सहयोग का पर्याय नहीं मान सकते।
समाधान: समुद्री घटनाओं के लिए तत्काल संचार, पारदर्शी संयुक्त अभ्यास, राहत-सामग्री और चिकित्सा प्रबंधन का समन्वय, साइबर क्षमता-विकास, समुद्री स्थितिजन्य जागरूकता एवं आसियान-नेतृत्व वाले ढाँचे का समर्थन। भारत को अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के साथ ऐसे कार्यों पर सहयोग बढ़ाना चाहिए जिनसे साझा हितों को ठोस लाभ मिले।
क्वाड, ARF और ADMM-प्लस: भ्रम न करें
क्वाड भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का अलग चार-पक्षीय सहयोग है। आसियान क्षेत्रीय मंच (ARF) व्यापक सुरक्षा संवाद का अन्य संस्थागत मंच है। ADMM-प्लस में आसियान के 11 देश और आठ विशेष रक्षा संवाद भागीदार सम्मिलित हैं। इनकी सदस्यता, कार्यप्रणाली और दायित्व अलग हैं।
मुख्य परीक्षा में आसियान केंद्रीयता + भारत की रणनीतिक स्वायत्तता + समुद्री सुरक्षा + व्यावहारिक सहयोग को एक ही उत्तर में जोड़ना अधिक उपयुक्त होगा।
त्वरित प्रारंभिक पुनरीक्षण
- पहली ADMM-प्लस बैठक: 12 अक्टूबर 2010, हनोई।
- 13वीं बैठक: 28–29 अक्टूबर 2026, सेबू, फिलीपींस।
- आसियान सदस्य: 11; बाहरी संवाद भागीदार: 8।
- भारत–मलेशिया सह-अध्यक्षता: 2024–27, आतंकवाद-निरोध समूह।
- भारत आसियान संवाद भागीदार: 1992 से।
- ADMM-प्लस सहयोग मंच है; सामूहिक रक्षा संधि नहीं।
आसियान का विकास: तिमोर-लेस्ते 11वाँ सदस्य कैसे बना?
आसियान की स्थापना 8 अगस्त 1967 को बैंकॉक घोषणा से हुई थी। प्रारंभिक संस्थापक सदस्य थे—इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड। बाद के दशकों में ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्याँमार और कंबोडिया जुड़े। इस क्रम से दक्षिण-पूर्व एशिया के बड़े हिस्से को एक क्षेत्रीय संस्थागत मंच मिला।
तिमोर-लेस्ते ने 2011 में सदस्यता हेतु आवेदन किया। 2022 में सदस्यता के लिए सैद्धांतिक सहमति और पर्यवेक्षक दर्जा मिला। 2023 में पूर्ण सदस्यता के लिए कार्य-योजना बनी। अंततः 26 अक्टूबर 2025 को 47वें आसियान शिखर सम्मेलन में तिमोर-लेस्ते को 11वें सदस्य के रूप में स्वीकार किया गया। इसलिए 2026 में दस सदस्यों वाली पुरानी सूची अपर्याप्त है।
दो घटनाओं का अंतर: तिमोर-लेस्ते का आसियान सदस्य बनना 2025 की घटना है, जबकि फिलीपींस में 13वीं ADMM-प्लस बैठक 2026 की घटना है। प्रश्न में तिथि से भ्रमित न हों। आसियान का आधिकारिक सदस्यता विवरण।
सदस्यता बढ़ने से संगठन की भौगोलिक कवरेज, संसाधन और विविधता बढ़ती है, लेकिन सहमति-आधारित निर्णय प्रणाली में प्राथमिकताओं के अंतर भी बढ़ सकते हैं। यही विस्तार और संस्थागत प्रभावशीलता के बीच परीक्षा-योग्य संबंध है।
दक्षिण-पूर्व एशिया का मानचित्र: रक्षा कूटनीति से संबंध
| महत्त्वपूर्ण स्थल | कहाँ स्थित? | रणनीतिक प्रासंगिकता |
|---|---|---|
| सेबू | फिलीपींस का मध्य द्वीपीय भाग, विसायस | 2026 ADMM-प्लस बैठक का स्थल |
| मलक्का जलडमरूमध्य | मलय प्रायद्वीप व सुमात्रा के बीच | हिंद महासागर–प्रशांत संपर्क का प्रमुख मार्ग |
| सिंगापुर जलडमरूमध्य | सिंगापुर के पास | व्यस्त नौवहन व क्षेत्रीय व्यापार |
| लूज़ोन जलडमरूमध्य | ताइवान और उत्तरी फिलीपींस के बीच | समुद्री आवागमन और रणनीतिक स्थिति |
| दक्षिण चीन सागर | दक्षिण-पूर्व एशिया का महत्त्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र | दावों के विवाद और व्यापारिक समुद्री मार्ग |
| तिमोर सागर | तिमोर द्वीप और उत्तरी ऑस्ट्रेलिया के बीच | ऑस्ट्रेलिया–दक्षिण-पूर्व एशिया भूगोल |
भारत का मुख्य समुद्री संपर्क बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर से होकर दक्षिण-पूर्व एशिया की ओर जाता है। इसलिए अंडमान-निकोबार द्वीपों की भौगोलिक स्थिति, मलक्का मार्ग तथा समुद्री परिवहन को भारत की एक्ट ईस्ट नीति और ऊर्जा सुरक्षा से जोड़कर पढ़ें।
मानचित्र अभ्यास: फिलीपींस को वियतनाम, इंडोनेशिया और तिमोर-लेस्ते के साथ रखें; याद करें कि फिलीपींस एक द्वीपसमूह है, जबकि वियतनाम दक्षिण चीन सागर के पश्चिमी तट पर मुख्यभूमि से जुड़ा देश है। आसियान की राजधानी नहीं है; उसका सचिवालय जकार्ता में है। संगठन के सचिवालय के शहर और किसी वार्षिक बैठक के स्थल में अंतर होता है।
आसियान केंद्रीयता: इसका वास्तविक अर्थ क्या है?
आसियान केंद्रीयता (ASEAN Centrality) का आशय क्षेत्रीय सहयोग के प्रमुख मंचों की कार्यप्रणाली में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की संस्थागत भूमिका और एजेंडा निर्माण को केंद्र में रखना है। बड़ी शक्तियों—अमेरिका, चीन, रूस, भारत आदि—के बीच मतभेद होने पर आसियान ऐसा साझा मंच देता है जहाँ प्रतिस्पर्धी देश भी संपर्क बनाए रख सकें।
इसका अर्थ यह नहीं कि आसियान हर महासागरीय विवाद को तुरंत समाप्त कर सकता है। सदस्य देशों की राजनीतिक व्यवस्था, आर्थिक निर्भरता, सुरक्षा प्राथमिकता और बाहरी साझेदार अलग-अलग होते हैं। आसियान सामान्यतः परामर्श और सहमति-आधारित शैली अपनाता है। यह संवाद को स्वीकार्य बनाती है, पर कठिन फैसले धीमे कर सकती है।
भारत के लिए लाभ: एक बड़े सैन्य गठबंधन में शामिल हुए बिना समुद्री सुरक्षा, आपदा राहत और आतंकवाद-निरोध पर सहयोग। सीमा: मंच में नीति सहमति होने के बाद भी अलग-अलग देशों को संसाधन, प्रशिक्षण और प्रशासनिक क्षमता जुटानी पड़ सकती है। इसे 'संयुक्त घोषणा = सुरक्षा समस्या का समाधान' नहीं कहा जा सकता।
ADMM-प्लस का व्यावहारिक काम: मंत्री-स्तर से विशेषज्ञ स्तर तक
ADMM-प्लस में रक्षा मंत्रियों के विचार-विमर्श से व्यापक प्राथमिकताएँ सामने आती हैं। लेकिन रक्षा सहयोग केवल उच्चस्तरीय भाषणों से पूरा नहीं होता। विशेषज्ञ समूह, परामर्श तंत्र और समय-समय पर प्रशिक्षण व संयुक्त गतिविधियाँ साझा कौशल का निर्माण करती हैं। इनकी विषय-वस्तु में समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-निरोध, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत, साइबर सुरक्षा और अन्य सहमत रक्षा क्षेत्रों पर काम हो सकता है।
उदाहरण—बड़े चक्रवात के बाद राहत: यदि किसी दक्षिण-पूर्व एशियाई द्वीप पर भयंकर चक्रवात आए तो हेलीकॉप्टर, नौसैनिक पोत, चिकित्सा दल और राहत सामग्री भेजने वाले देशों को उड़ान अनुमति, बंदरगाह समन्वय, संचार आवृत्ति, स्थानीय आवश्यकताओं और सहायता वितरण की जानकारी चाहिए। शांति काल में किए गए साझा अभ्यास ऐसे कामों में तालमेल बढ़ा सकते हैं।
अंतर-संचालन क्षमता (Interoperability) का मतलब यह नहीं कि सभी देशों के हथियार एक जैसे हों। इसका व्यावहारिक अर्थ भिन्न देशों की टीमों, संचार और कार्य-पद्धतियों का साझा कार्य में सहयोग कर पाना है। किसी HADR अभ्यास को सामूहिक सैन्य आक्रमण की तैयारी मानना अनुचित होगा।
भारत–मलेशिया सह-अध्यक्षता: 2024–2027 क्यों महत्त्वपूर्ण है?
भारत और मलेशिया 2024–2027 के चक्र के लिए ADMM-प्लस आतंकवाद-निरोध विशेषज्ञ कार्यसमूह के सह-अध्यक्ष हैं। ऐसी सह-अध्यक्षता कार्ययोजना बनाने, बैठकें आयोजित करने, विशेषज्ञ आदान-प्रदान तथा कार्यगत सहयोग के अवसर प्रदान कर सकती है। इसका लक्ष्य संभावित आतंकवादी जोखिमों की बेहतर पहचान और सदस्य देशों की प्रतिक्रिया-क्षमता में सहायता करना है।
आतंकवाद-निरोध में केवल सैनिक बल की भूमिका नहीं होती। सूचना साझाकरण, समुद्री मार्गों का दुरुपयोग रोकना, आतंकवादी वित्त का पता लगाना, डिजिटल माध्यमों के खतरे समझना तथा राष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप आपसी सहयोग आवश्यक है। किसी साझा समूह की गतिविधियाँ संबंधित देशों की संप्रभुता और घरेलू विधि से अलग नहीं चलतीं।
कथन आधारित प्रश्न में सावधानी: भारत–मलेशिया की यह जिम्मेदारी विशेष आतंकवाद-निरोध समूह की है; वे 2024–2027 में समूचे आसियान या सभी ADMM-प्लस समूहों की अध्यक्षता नहीं कर रहे।
समुद्री कानून और रणनीतिक स्वायत्तता: भूमिका और सीमा
समुद्री सुरक्षा के विचार में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही, समुद्री डकैती और अवैध गतिविधियों से रक्षा, आपदा प्रतिक्रिया, समुद्री पर्यावरण तथा विभिन्न देशों के समुद्री दावों के प्रश्न आते हैं। समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCLOS), 1982 अनेक समुद्री अधिकारों और दायित्वों का महत्त्वपूर्ण कानूनी आधार है। लेकिन ADMM-प्लस स्वयं UNCLOS पर फैसला सुनाने वाला न्यायाधिकरण या सभी समुद्री विवादों का बाध्यकारी निस्तारण मंच नहीं है।
रणनीतिक स्वायत्तता का अर्थ है कि भारत अपने राष्ट्रीय हित, अंतरराष्ट्रीय कानून, क्षेत्रीय स्थिरता और अलग-अलग देशों के साथ सहयोग के बीच स्वतंत्र निर्णय लेने का प्रयास करे। ADMM-प्लस, क्वाड, द्विपक्षीय रक्षा अभ्यास और बहुपक्षीय आर्थिक मंच—इन सभी में भारत की भागीदारी अलग उद्देश्यों और सदस्यताओं के साथ होती है।
तर्क की सीमा: किसी मंच में चीन और अमेरिका दोनों के शामिल होने से यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि वे एक-दूसरे के सभी दावों से सहमत हैं। परस्पर मतभेद के बावजूद संवाद बने रहना स्वयं क्षेत्रीय संकट प्रबंधन में एक महत्त्वपूर्ण उद्देश्य हो सकता है।
13वीं बैठक का UPSC विश्लेषण: अवसर, चुनौतियाँ, आगे की राह
| आयाम | भारत के लिए अवसर | संभावित चुनौती |
|---|---|---|
| समुद्री मार्ग | व्यापार एवं ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा में सहयोग | प्रतिस्पर्धी दावे, घटनाओं में गलत अनुमान |
| आपदा राहत | साझा अभ्यास और समयबद्ध प्रतिक्रिया | संसाधनों और प्रक्रियाओं में अंतर |
| आतंकवाद-निरोध | विशेषज्ञ सहयोग और क्षमता निर्माण | सूचना संवेदनशीलता एवं अलग घरेलू कानून |
| साइबर सुरक्षा | प्रशिक्षण, सर्वोत्तम प्रक्रियाएँ और अनुभव साझा करना | विश्वास की कमी और प्रौद्योगिकी विषमता |
| क्षेत्रीय संस्थाएँ | आसियान केंद्रीयता व एक्ट ईस्ट नीति का समर्थन | सहमति आधारित फैसलों में विलंब |
आगे की राह: समुद्री घटनाओं के लिए संपर्क तंत्र, संकट-प्रतिक्रिया अभ्यास, पारदर्शी सूचना साझा करने की व्यवस्था, व्यावहारिक आपदा राहत सहयोग, क्षेत्रीय देशों की क्षमता का विकास तथा अंतरराष्ट्रीय कानून और आसियान-केंद्रित मंचों का समर्थन। बड़ी शक्तियों की प्रतिस्पर्धा के बीच भारत को टकराव बढ़ाने के बजाय सहयोग योग्य साझा हितों पर ध्यान देना चाहिए।
मुख्य परीक्षा निष्कर्ष: “हिंद-प्रशांत में भारत के लिए टिकाऊ सुरक्षा केवल सैन्य शक्ति का सवाल नहीं; आसियान केंद्रीयता के माध्यम से विश्वास निर्माण, नियमाधारित समुद्री व्यवस्था और मानवीय सहयोग को एक साथ मजबूत करना भी उतना ही आवश्यक है।”
प्रारंभिक परीक्षा: वस्तुनिष्ठ अभ्यास
स्पष्टता: ये स्वनिर्मित अभ्यास प्रश्न हैं; वास्तविक UPSC विगत वर्ष प्रश्न नहीं।
प्रश्न 1. ADMM-प्लस के बारे में सही कथन:
- पहली ADMM-प्लस बैठक 2010 में हनोई में हुई।
- 2026 में आसियान के 11 सदस्य और आठ बाहरी संवाद भागीदार थे।
- यह नाटो जैसी बाध्यकारी सामूहिक रक्षा संधि है।
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- सभी
सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या देखें
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2
आधिकारिक रक्षा मंत्रालय के विवरण के अनुसार पहले दो कथन सही हैं। ADMM-प्लस सामूहिक रक्षा संधि नहीं है।
प्रश्न 2. भारत की सह-अध्यक्षता के बारे में:
- भारत एवं मलेशिया 2024–2027 में आतंकवाद-निरोध विशेषज्ञ समूह के सह-अध्यक्ष हैं।
- 2026 की बैठक फिलीपींस के सेबू में निर्धारित थी।
- तिमोर-लेस्ते 2026 की आसियान सदस्य सूची में नहीं था।
- केवल 1 और 2
- केवल 1 और 3
- केवल 2 और 3
- सभी
सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या देखें
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2
पहले दो सही हैं। रक्षा मंत्रालय ने तिमोर-लेस्ते को आसियान की 2026 की सूची में शामिल किया है।
प्रश्न 3. आसियान की सदस्यता-वृद्धि से संबंधित कौन-से कथन सही हैं?
- तिमोर-लेस्ते 26 अक्टूबर 2025 को 11वें सदस्य के रूप में स्वीकार किया गया।
- तिमोर-लेस्ते ने सदस्यता के लिए 2011 में आवेदन किया था।
- तिमोर-लेस्ते के शामिल होने के बाद 2026 में आसियान के दस सदस्य थे।
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- तीनों
सही उत्तर और व्याख्या देखें
उत्तर: A — केवल 1 और 2। आसियान की आधिकारिक घोषणा के अनुसार 2025 में तिमोर-लेस्ते 11वाँ सदस्य बना, इसलिए तीसरा कथन गलत है।
प्रश्न 4. सामरिक भूगोल के युग्मों को देखिए:
- सेबू — फिलीपींस
- मलक्का जलडमरूमध्य — मलय प्रायद्वीप और सुमात्रा के बीच
- गैलापागोस — दक्षिण चीन सागर
- केवल 1
- केवल 2
- केवल 1 और 2
- सभी
सही उत्तर और व्याख्या देखें
उत्तर: C — केवल 1 और 2। पहले दो युग्म सही हैं। गैलापागोस प्रशांत महासागर में इक्वाडोर के अधीन है।
प्रश्न 5. ADMM-प्लस की प्रकृति के बारे में:
- यह परामर्श एवं रक्षा सहयोग का मंच है।
- इसके सदस्य देशों में स्वतः सामूहिक युद्ध में शामिल होने का बाध्यकारी दायित्व होता है।
- विशेषज्ञ कार्यसमूह व्यावहारिक क्षमता-विकास में सहायक हो सकते हैं।
- केवल 1 और 3
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- तीनों
सही उत्तर और व्याख्या देखें
उत्तर: A — केवल 1 और 3। ADMM-प्लस नाटो जैसा सामूहिक रक्षा संधि तंत्र नहीं है। साझा अभ्यास और सहयोग को युद्ध-प्रतिबद्धता से अलग रखना जरूरी है।
मुख्य परीक्षा: प्रश्न और उत्तर-लेखन दिशा
मुख्य परीक्षा में समाचार, स्थिर पृष्ठभूमि, भारत के लिए महत्त्व, संस्थागत चुनौती और आगे की राह के बीच संतुलित विश्लेषण लिखें। दोनों प्रश्नों के आदर्श उत्तर नीचे उपलब्ध हैं।
- 15 अंक / 250 शब्द: हिंद-प्रशांत क्षेत्र की बदलती सुरक्षा परिस्थिति में ADMM-प्लस, आसियान केंद्रीयता और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का महत्त्व स्पष्ट कीजिए। इस मंच की सीमाओं का विश्लेषण करें।
- 10 अंक / 150 शब्द: ADMM और ADMM-प्लस में अंतर बताते हुए समुद्री सुरक्षा एवं आपदा राहत में इनके व्यावहारिक सहयोग की भूमिका का परीक्षण कीजिए।
मुख्य परीक्षा के आदर्श उत्तर: दोनों अभ्यास प्रश्नों के अलग-अलग उत्तर प्रकाशित हैं।