ब्रिक्स संसदीय मंच और भारत की ग्लोबल साउथ रणनीति
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प्रश्न
विस्तारित ब्रिक्स के संदर्भ में संसदीय कूटनीति भारत की ग्लोबल साउथ रणनीति और बहुपक्षीय सुधार की मांग को किस प्रकार पूरक कर सकती है?
आदर्श उत्तर
भूमिका: भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता में 26–27 अक्टूबर को संविधान सदन में 12वाँ ब्रिक्स संसदीय मंच (BRICS Parliamentary Forum) आयोजित हो रहा है। इसका विषय “जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को सशक्त बनाना” है और विचार-विमर्श लचीलापन, नवाचार, सहयोग तथा संधारणीयता पर केंद्रित है।
रणनीतिक महत्व:
- लोकतांत्रिक संपर्क: कार्यपालिका-केंद्रित कूटनीति के साथ विधायिकाओं को जोड़कर विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के शासन और संधारणीयता पर अनुभव-साझाकरण बढ़ता है।
- ग्लोबल साउथ की आवाज: संसदीय संपर्क संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और व्यापक वैश्विक शासन-सुधार के लिए राजनीतिक समर्थन का आधार विस्तृत कर सकते हैं।
- संस्थागत निरंतरता: संसदीय समितियों, द्विपक्षीय आदान-प्रदान तथा युवा और महिला सांसदों के संपर्क सरकारों के बदलाव से परे स्थायी रिश्ते बनाते हैं।
सीमाएँ: विस्तारित ब्रिक्स के देशों की राजनीतिक प्रणालियाँ और राष्ट्रीय हित अत्यंत विविध हैं; संसदीय मंच के निर्णय बाध्यकारी नहीं होते।
निष्कर्ष: भारत इसे सहमति-आधारित, सुधारोन्मुख और जन-केंद्रित सहयोग का मंच बनाकर ग्लोबल साउथ की विकास प्राथमिकताओं को बहुपक्षीय संस्थानों तक अधिक संगठित ढंग से पहुँचा सकता है।