फॉर्म-7, मतदाता सूची और प्रक्रियात्मक न्याय
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प्रश्न
मतदाता सूची की शुद्धता और सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के संरक्षण के बीच संतुलन के लिए नाम विलोपन की प्रक्रिया में कौन-से प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं?
आदर्श उत्तर
भूमिका: कर्नाटक में अधिकारियों द्वारा दायर 61,059 फॉर्म-7 नाम-विलोपन आवेदनों—जिनमें रिपोर्ट किए गए मामलों में कारण दर्ज नहीं थे और अधिकांश दावा-अवधि के बाद आए—ने मतदाता सूची की शुचिता और प्रक्रियात्मक न्याय का प्रश्न उठाया है।
दोनों लक्ष्य आवश्यक हैं: सर्वोच्च न्यायालय ने 2026 में कहा कि मताधिकार एक महत्वपूर्ण संवैधानिक अधिकार है; मतदाता सूची की शुचिता पात्र व्यक्तियों के समावेशन और अपात्र व्यक्तियों के बहिष्करण—दोनों पर निर्भर करती है।
आवश्यक सुरक्षा उपाय:
- फॉर्म-7 में निर्धारित आधार और आवेदक की जवाबदेही हो; निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देश के अनुसार आपत्ति का कारण स्पष्ट होना चाहिए।
- निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 का नियम 17: समय अथवा निर्धारित प्रारूप के विपरीत दावे/आपत्तियाँ अस्वीकार की जाएँ।
- नाम हटाने से पहले व्यक्तिगत सूचना, सुनवाई का उचित अवसर और कारणयुक्त लिखित आदेश दिया जाए।
- निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी/सहायक अधिकारी की कार्रवाइयों का डिजिटल अभिलेख, सामूहिक विलोपन पर स्वत: चेतावनी और स्वतंत्र पर्यवेक्षणीय समीक्षा हो।
- समयबद्ध अपील/सुधार तथा अंतिम और पूरक मतदाता सूची के बीच स्पष्ट अंतर रखा जाए।
निष्कर्ष: मतदाता सूची का शुद्धीकरण स्वचालित सामूहिक विलोपन नहीं, बल्कि सत्यापन योग्य साक्ष्य और प्राकृतिक न्याय पर आधारित होना चाहिए।