ABS लाभ-साझाकरण और कृषि जैव-विविधता
प्रश्न
भारत का पहुँच एवं लाभ साझाकरण तंत्र कृषि जैव-विविधता के संरक्षण और वाणिज्यिक नवाचार के बीच किस प्रकार संतुलन बनाने का प्रयास करता है? क्षेत्र-आधारित वितरण पद्धति के संदर्भ में समझाइए।
आदर्श उत्तर
पहुँच एवं लाभ साझाकरण (ABS) का उद्देश्य जैविक संसाधनों के उपयोग से उत्पन्न लाभ का न्यायसंगत हिस्सा उन क्षेत्रों और समुदायों तक पहुँचाना है, जिनकी जैव-विविधता उस उपयोग का आधार बनी है।
संरक्षण–नवाचार संतुलन: जैव विविधता अधिनियम और NBA की व्यवस्था उद्योग को अनुसंधान तथा वाणिज्यिक उपयोग का नियामक मार्ग देती है, जबकि लाभ-साझाकरण संरक्षण और स्थानीय हितों को आर्थिक मूल्य से जोड़ता है। इससे नवाचार पर रोक के बजाय उत्तरदायी उपयोग प्रोत्साहित होता है।
क्षेत्र-आधारित पद्धति: जब किसी एक प्रदाता की पहचान संभव न हो, तब खेती के भौगोलिक वितरण और बुवाई क्षेत्र के अनुपात से लाभ राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में बाँटा जा सकता है।
मुख्य चुनौती राशि को स्थानीय जैव विविधता प्रबंधन समितियों और वास्तविक ज्ञान-धारकों तक पहुँचाना है। अतः पारदर्शी वितरण, बेहतर संसाधन-अभिलेखीकरण और स्थानीय भागीदारी ABS को संरक्षण तथा वाणिज्यिक नवाचार के बीच टिकाऊ सेतु बना सकते हैं।