एग्री-वोल्टिक्स: एक ही भूमि पर खेती और सौर ऊर्जा का भारतीय मॉडल
AgriVoltaics World Conference 2026, भारत की 3,000–14,000 GW अनुमानित क्षमता, PM-KUSUM, छोटे किसानों की आय, जल उपयोग और भूमि-ऊर्जा-खाद्य संबंध का विस्तृत अध्ययन।
24 अक्टूबर 2026
26 अक्टूबर 2026 का नया अपडेट: PM-KUSUM के अगले चरण में बड़ा AgriPV कार्यक्रम
7वें AgriVoltaics World Conference 2026 के दौरान नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री ने घोषणा की कि PM-KUSUM के अगले चरण के अंतर्गत एक बड़ा एग्रीवोल्टाइक कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। सरकार कृषि कार्यक्रमों और बिजली-ग्रिड योजना के साथ AgriPV को जोड़ने, लागत-अंतर कम करने और छोटे किसानों की भागीदारी बढ़ाने पर काम कर रही है।
- उन्नत/झुकी संरचनाओं के कारण AgriPV की लागत पारंपरिक ग्राउंड-माउंटेड सौर परियोजनाओं से लगभग 25–30% अधिक हो सकती है।
- अगस्त 2025 तक भारत में 36 परिचालन परियोजनाएँ, 37.54 MW स्थापित क्षमता और 10 पायलट परियोजनाएँ थीं।
- सरकारी पृष्ठभूमि-पत्र भारत की तकनीकी क्षमता को लगभग 3,000 GW से 14,000 GW के दायरे में रखता है; 47.35 मिलियन हेक्टेयर ‘restricted cropland’ को GIS screening में उपयुक्त पाया गया।
- फलों, सब्जियों, मसालों, औषधीय पौधों और अन्य उपयुक्त फसलों में सह-उपयोग की संभावना अधिक बताई गई है।
UPSC संकेत: इसे PM-KUSUM, किसान आय, भूमि-उपयोग प्रतिस्पर्धा, जल दक्षता, ऊर्जा संक्रमण और छोटे/सीमांत किसानों के संस्थागत मॉडल (FPO/सहकारी) से जोड़कर पढ़ें।
स्रोत
चर्चा में क्यों?
भारत ने 21–23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में पहली बार Global South में 7th AgriVoltaics World Conference की मेजबानी की। 23 अक्टूबर को सम्मेलन के समापन के साथ सरकार ने किसान-केंद्रित agrivoltaics को बड़े पैमाने पर आगे बढ़ाने और PM-KUSUM के अगले चरण में इसके लिए समर्पित घटक विकसित करने की दिशा स्पष्ट की।
एग्री-वोल्टिक्स क्या है?
Agrivoltaics (AgriPV) में उसी कृषि भूमि पर फसल/पशुपालन और photovoltaic solar power generation साथ-साथ किए जाते हैं। पैनल ऊँचे ढाँचे पर, फसल कतारों के बीच या tracking configuration में लगाए जा सकते हैं। लक्ष्य भूमि को खेती से हटाना नहीं, बल्कि food + energy की संयुक्त उत्पादकता बढ़ाना है।
भारत की वर्तमान स्थिति और क्षमता
- अगस्त 2025 तक भारत में 36 operational agrivoltaic projects की कुल क्षमता लगभग 37.54 MW थी; 10 pilot projects विकासाधीन थे।
- विभिन्न आकलनों में भारत की तकनीकी AgriPV क्षमता लगभग 3,000 GW से 14,000 GW तक बताई गई है; सरकार ने इसे feasibility-dependent technical estimate माना है।
- GIS screening ने लगभग 47.35 million hectares “restricted cropland” को पर्यावरणीय, कृषि और तकनीकी filters के बाद संभावित रूप से उपयुक्त पाया।
- महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश मिलकर अनुमानित क्षमता का लगभग आधा हिस्सा रखते हैं।
किसान, फसल और पानी पर प्रभाव
Partial shading कुछ horticulture, vegetables, spices, medicinal plants और fodder crops के लिए heat stress तथा soil-moisture loss कम कर सकती है। सरकारी सम्मेलन में प्रस्तुत field studies ने उपयुक्त परिस्थितियों में कुछ फसलों के लिए 10–20% तक yield improvement और लगभग 30% water-use reduction की संभावना बताई; इसे सभी फसलों और क्षेत्रों पर सार्वभौमिक निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।
सौर बिजली farm operations को ऊर्जा दे सकती है और surplus sale किसान की आय का अतिरिक्त स्रोत बन सकती है।
PM-KUSUM और नीतिगत संबंध
- PM-KUSUM फरवरी 2019 में शुरू हुआ; decentralised solar plants, standalone solar pumps और grid-connected pumps की solarisation इसके मुख्य आयाम हैं।
- सरकार ने PM-KUSUM के अगले चरण में agrivoltaics के लिए dedicated component की घोषणा की है।
- National Institute of Solar Energy और ICAR–Indian Agricultural Research Institute ने agrivoltaics research, demonstration और capacity building के लिए Centre of Excellence स्थापित किया है।
लाभ और प्रमुख जोखिम
लाभ: land-use efficiency, farm income diversification, daytime clean power, irrigation resilience, rural jobs, reduced diesel dependence और distributed generation।
जोखिम: ऊँचा प्रारंभिक निवेश, crop-specific design की जरूरत, mechanisation में बाधा, land leasing/ownership concerns, DISCOM tariff और grid connectivity, पैनल के नीचे microclimate change, छोटे किसानों की bargaining power तथा solar developers द्वारा कृषि को गौण कर देने का खतरा।
मुख्य परीक्षा: food–energy–water nexus
Agrivoltaics को केवल solar capacity बढ़ाने की परियोजना नहीं, बल्कि food–energy–water nexus नीति की तरह देखना चाहिए। भारत में small and marginal holdings को देखते हुए FPO/cooperative aggregation, crop-wise standards, farmer land ownership की सुरक्षा, transparent PPAs और agronomic monitoring जरूरी हैं। किसान को “भूमि देने वाला” नहीं बल्कि revenue-sharing partner बनाना दीर्घकालिक स्वीकृति की कुंजी होगी।
प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास
प्रश्न 1. Agrivoltaics का सबसे उपयुक्त अर्थ क्या है? (a) कृषि अवशेष से ethanol (b) समान भूमि पर कृषि और solar PV (c) केवल solar pumps (d) greenhouses में LED खेती
उत्तर
(b).
प्रश्न 2. PM-KUSUM के संबंध में कौन-सा सही है? 1. यह कृषि में solar energy से जुड़ा है। 2. standalone solar pumps इसके घटकों में रहे हैं। 3. इसका संचालन स्वास्थ्य मंत्रालय करता है।
उत्तर
1 और 2 सही; 3 गलत। योजना नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय से संबंधित है।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
“एग्री-वोल्टिक्स भारत में भूमि-प्रतिस्पर्धा को भूमि-सहउत्पादकता में बदल सकता है, परंतु छोटे किसानों की सुरक्षा के बिना यह मॉडल असमानता भी बढ़ा सकता है।” विश्लेषण कीजिए।
15 अंक · 250 शब्द · GS-III