UPSC CSE Mains · GS Paper 1
UPSC 2020
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प्रश्न
शैलकृत स्थापत्य प्रारंभिक भारतीय कला एवं इतिहास के हमारे ज्ञान के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण स्रोतों में से एक का प्रतिनिधित्व करता है। विवेचना कीजिए।
प्रश्न की मांग
प्रश्न के दो भाग हैं—(1) यह दिखाना कि शैलकृत स्थापत्य 'प्रारंभिक भारतीय कला' (काष्ठ से प्रस्तर संक्रमण, मूर्तिकला, भित्ति-चित्रकला) को समझने का प्रमुख स्रोत कैसे है, और (2) यह 'प्रारंभिक भारतीय इतिहास' (राजनीतिक संरक्षण, आर्थिक-व्यापारिक मार्ग, सामाजिक संरचना और धार्मिक विकास) पर कैसे प्रकाश डालता है।
उत्तर-लेखन रूपरेखा
- परिचय: लकड़ी और कच्ची ईंट जैसी नाशवान सामग्रियों के नष्ट हो जाने के कारण तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व (बाराबर) से दसवीं शताब्दी ईस्वी (एलोरा) तक की 1,200 से अधिक शैलकृत गुफाएँ प्राचीन भारत की सबसे सुरक्षित 'प्रस्तर अभिलेखागार' (Stone Archives) हैं।
- काष्ठ वास्तुकला और तकनीकी ज्ञान का स्रोत: बाराबर की लोमस ऋषि गुफा का मेहराब तथा भाजा व कार्ले चैत्य की लकड़ी की पसलियाँ प्राचीन भारत की लुप्त हो चुकी काष्ठ-वास्तुकला (Timber architecture) और मौर्य पॉलिश तकनीक की जानकारी देती हैं।
- कला और चित्रकला के क्रमिक विकास का साक्ष्य: अजंता (गुफा 1, 2, 16, 17), बाघ और सित्तनवासल (जैन गुफा) के भित्ति-चित्र तथा अजंता (महापरिनिर्वाण), उदयगिरि और एलोरा के मूर्तिशिल्प भारतीय सौंदर्यशास्त्र (षडंग) के शिखर को दर्शाते हैं।
- धार्मिक इतिहास और संप्रदायों के विकास का दर्पण: बाराबर (आजीवक), भाजा-कार्ले (हीनयान से महायान), एलोरा की गुफा 10–12 (वज्रयान बौद्ध) और गुफा 30–34 (दिगंबर जैन) तथा उदयगिरि-खंडगिरि धार्मिक दर्शन के क्रमिक बदलाव और बहुलतावादी सह-अस्तित्व को प्रमाणित करते हैं।
- राजनीतिक इतिहास और वंशावली का स्रोत: हाथीगुम्फा अभिलेख (खारवेल), नासिक की गुफा 3 में गौतमी बलश्री का अभिलेख (गौतमीपुत्र सातकर्णी) और अजंता गुफा 16 में वराहदेव का अभिलेख (वाकाटक नरेश हरिषेण) राजवंशों के राजनीतिक इतिहास के प्राथमिक स्रोत हैं।
- आर्थिक इतिहास, व्यापारिक मार्ग और श्रेणियाँ: भोरघाट और नानेघाट जैसे दर्रों पर स्थित कार्ले, नासिक और कन्हेरी के दान-अभिलेख हिंद-रोमन व्यापार, वणिक श्रेणियों (बैंकिंग प्रणाली—अक्षय नीवी) और समृद्ध बंदरगाहों की पुष्टि करते हैं।
- सामाजिक इतिहास एवं जनजीवन: अजंता के चित्रों और रानी गुम्फा के शिल्पों से तत्कालीन समाज के वस्त्र, आभूषण, संगीत वाद्ययंत्र, महिलाओं की स्थिति और विदेशी यात्रियों (जैसे पुलकेशिन द्वितीय के दरबार से जुड़े दृश्य) का सजीव ज्ञान मिलता है।
- निष्कर्ष: इस प्रकार शैलकृत स्थापत्य केवल धार्मिक आश्रय नहीं, बल्कि प्राचीन भारत के कलात्मक, सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक इतिहास का जीवंत विश्वकोश है।