'Judicial Restraint' का सिद्धांत मुख्यतः क्या कहता है?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 41 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 8प्रश्न 41 / 50

विकल्प

Aन्यायालयों को नीति और राजनीतिक प्रश्नों में अनावश्यक हस्तक्षेप से बचना चाहिए और कानून को तभी अमान्य करना चाहिए जब पर्याप्त संवैधानिक आधार हो।
Bन्यायालयों को सरकार के किसी निर्णय की कभी समीक्षा नहीं करनी चाहिए।
Cन्यायालयों को PIL स्वीकार नहीं करनी चाहिए।
Dन्यायालय अपने पुराने निर्णय कभी नहीं बदल सकते।
सही उत्तर: A. न्यायालयों को नीति और राजनीतिक प्रश्नों में अनावश्यक हस्तक्षेप से बचना चाहिए और कानून को तभी अमान्य करना चाहिए जब पर्याप्त संवैधानिक आधार हो।
सही उत्तर (a) है। Judicial Restraint न्यायिक समीक्षा समाप्त करने की वकालत नहीं करता; इसका अर्थ है कि अदालतें separation of powers, democratic legitimacy और संस्थागत competence का सम्मान करें। जहाँ संविधान स्पष्ट रूप से अधिकार देता है या उल्लंघन स्पष्ट है, वहाँ न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक हो सकता है। लेकिन आर्थिक, प्रशासनिक या नीति-निर्माण के क्षेत्र में केवल इसलिए न्यायालय अपना preferred policy choice नहीं थोपता कि दूसरा विकल्प उसे बेहतर लगता है।

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