उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन और भत्तों के संदर्भ में कौन-सा कथन सही है?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 8 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 8प्रश्न 8 / 50

विकल्प

Aवेतन राष्ट्रपति अपने विवेक से निर्धारित करते हैं।
Bवेतन, भत्ते और पेंशन संबंधी व्यय भारत की संचित निधि पर भारित होते हैं और नियुक्ति के बाद सेवा-शर्तों में अलाभकारी परिवर्तन सामान्यतः नहीं किया जा सकता, वित्तीय आपातकाल एक संवैधानिक अपवाद है।
Cवेतन भारत के मुख्य न्यायाधीश तय करते हैं।
Dपेंशन राज्य की संचित निधि से दी जाती है।
सही उत्तर: B. वेतन, भत्ते और पेंशन संबंधी व्यय भारत की संचित निधि पर भारित होते हैं और नियुक्ति के बाद सेवा-शर्तों में अलाभकारी परिवर्तन सामान्यतः नहीं किया जा सकता, वित्तीय आपातकाल एक संवैधानिक अपवाद है।
सही उत्तर (b) है। न्यायाधीशों के वेतन और सेवा-शर्तें संसद द्वारा कानून से निर्धारित की जाती हैं, राष्ट्रपति की निजी प्रशासनिक इच्छा से नहीं। संबंधित व्यय Consolidated Fund of India पर charged होता है, इसलिए annual voting के अधीन नहीं रहता। न्यायिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए नियुक्ति के बाद सेवा-शर्तों में अलाभकारी परिवर्तन पर संवैधानिक रोक है; अनुच्छेद 360 के वित्तीय आपातकाल की स्थिति में वेतन-संबंधी निर्देश एक अपवाद बन सकते हैं।

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