'परमादेश' (Mandamus) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह सामान्यतः ऐसे पूर्णतः निजी व्यक्ति या निकाय के विरुद्ध नहीं जारी होती जिस पर कोई सार्वजनिक कर्तव्य न हो। 2. यह केवल विवेकाधीन कार्य को किसी खास तरीके से कराने या शुद्ध निजी संविदात्मक दायित्व लागू कराने के लिए सामान्यतः उपलब्ध नहीं है। 3. राष्ट्रपति या राज्यपाल को उनके संवैधानिक कृत्यों के निर्वहन के संबंध में सीधे परमादेश जारी नहीं किया जाता। 4. कोई निजी निकाय यदि सार्वजनिक कर्तव्य निभा रहा हो तो भी अनुच्छेद 226 के तहत उसके विरुद्ध परमादेश कभी जारी नहीं हो सकती। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 38 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 3प्रश्न 38 / 50

विकल्प

Aकेवल 1 और 2
Bकेवल 1, 2 और 3
Cकेवल 2 और 4
D1, 2, 3 और 4
सही उत्तर: B. केवल 1, 2 और 3
कथन 1, 2 और 3 सही हैं; कथन 4 गलत है। परमादेश सार्वजनिक कर्तव्य के प्रवर्तन की रिट है। उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के तहत किसी निजी निकाय के विरुद्ध भी रिट जारी कर सकता है यदि वह सार्वजनिक कार्य/कर्तव्य निभा रहा हो और विवाद उसी सार्वजनिक कर्तव्य से जुड़ा हो। शुद्ध निजी संविदात्मक विवाद इसका सामान्य क्षेत्र नहीं है।

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