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संविधान के अनुच्छेद 123 (राष्ट्रपति) और अनुच्छेद 213 (राज्यपाल) के अंतर्गत अध्यादेश जारी करने की शक्ति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अध्यादेश केवल तभी जारी किया जा सकता है जब संसद (या विधानमंडल) के दोनों सदनों में से कम से कम एक सदन सत्र में न हो। 2. अध्यादेश निर्माण शक्ति एक समानांतर विधायी शक्ति ( Parallel legislative power) नहीं है, बल्कि असाधारण परिस्थितियों से निपटने का साधन है। 3. डी.सी. वाधवा वाद (1987) में उच्चतम न्यायालय ने बिना विधानमंडल के समक्ष रखे बार-बार अध्यादेश को पुनः प्रख्यापित करने को संविधान पर कपट ( Fraud on the Constitution) घोषित किया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · सेट प्रश्न 13/50 · संचयी प्रश्न 963/1000

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 20प्रश्न 13/50

विकल्प

Aकेवल 1 और 2
Bकेवल 2 और 3
Cकेवल 1 और 3
D1, 2 और 3
सही उत्तर: D. 1, 2 और 3
तीनों कथन सही हैं। अध्यादेश निर्माण शक्ति विधायी शक्ति के सह-विस्तृत है लेकिन यह विधायिका की जगह नहीं ले सकती। डी.सी. वाधवा (1987) और कृ ष्ण कु मार सिंह (2017) वादों में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अध्यादेश को विधायिका के पटल पर न रखकर बार-बार पुनः प्रख्यापित करना असंवैधानिक है।

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