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संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति ( Pardon Power) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: Court Martial) द्वारा दी गई सजा को भी क्षमा कर सकते हैं। 1. राष्ट्रपति सैन्य न्यायालय ( 2. राष्ट्रपति अपनी क्षमादान शक्ति का प्रयोग केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना स्वतंत्र रूप से कर सकते हैं। 3. याचिकाकर्ता को राष्ट्रपति के समक्ष मौखिक सुनवाई ( Oral hearing) का कोई विधिक अधिकार नहीं है। 4. राष्ट्रपति के क्षमादान निर्णय की सीमित आधारों (जैसे दुर्भावना या मनमानापन) पर न्यायिक समीक्षा की जा सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · सेट प्रश्न 12/50 · संचयी प्रश्न 962/1000

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 20प्रश्न 12/50

विकल्प

Aकेवल 1, 2 और 3
Bकेवल 1, 3 और 4
Cकेवल 2, 3 और 4
D1, 2, 3 और 4
सही उत्तर: B. केवल 1, 3 और 4
कथन 2 गलत है क्योंकि राष्ट्रपति अपनी क्षमादान शक्ति का प्रयोग स्वतंत्र रूप से नहीं, बल्कि केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह पर करते हैं (मारू राम वाद 1980 व के हर सिंह वाद 1989)। कथन 1, 3 और 4 सही हैं; सैन्य न्यायालय की सजा माफ कर सकते हैं, मौखिक सुनवाई का अधिकार नहीं है, और सीमित न्यायिक समीक्षा संभव है।

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