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के शब सिंह मामला (विशेष संदर्भ 1 of 1964 / Presidential Reference) में उच्चतम न्यायालय ने संसदीय विशेषाधिकारों बनाम न्यायपालिका और मौलिक अधिकारों पर क्या युगांतकारी निर्णय दिया? 1. सदन द्वारा किसी गैर-सदस्य को सदन की अवमानना ( Contempt of House) के लिए जेल भेजने पर, न्यायालय को अनुच्छेद 226 या 32 के तहत बंदी प्रत्यक्षीकरण ( Habeas Corpus) याचिका सुनने का अधिकार है। 2. न्यायालय के न्यायाधीश और याचिकाकर्ता का वकील सदन के समक्ष अवमानना के दोषी नहीं माने जा सकते क्योंकि वे अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पालन कर रहे होते हैं। 3. सदन के विशेषाधिकार नागरिकों के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार (अनुच्छेद 21) के अधीन हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 12 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 18प्रश्न 12 / 50

विकल्प

Aकेवल 1 और 2
Bकेवल 2 और 3
Cकेवल 1 और 3
D1, 2 और 3
सही उत्तर: D. 1, 2 और 3
तीनों कथन सही हैं। 1964 के राष्ट्रपति संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विधायिका निरपेक्ष नहीं है; नागरिक अनुच्छेद 21 के तहत अदालत जा सकते हैं और जज या वकील पर विशेषाधिकार हनन का आरोप नहीं लगाया जा सकता।

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