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संसदीय विशेषाधिकारों ( Parliamentary Privileges) और नागरिकों के मौलिक अधिकारों के बीच टकराव के संदर्भ में ऐतिहासिक सर्चलाइट मामला (एमएसएम शर्मा बनाम श्रीकृ ष्ण सिन्हा, 1959) में उच्चतम न्यायालय ने क्या व्यवस्था दी थी?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 11 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 18प्रश्न 11 / 50

विकल्प

Aअनुच्छेद 19(1)(a) के तहत भाषण की स्वतंत्रता सदैव सदन के विशेषाधिकारों पर प्रभावी होगी।
Bअनुच्छेद 194(3) या 105(3) के तहत विधायिका के विशेषाधिकार अनुच्छेद 19(1)(a) की सामान्य वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर वरीयता रख सकते हैं।
Cविधायिका को सदन की कार्यवाही के प्रकाशन पर प्रतिबंध लगाने का कोई अधिकार नहीं है।
Dविशेषाधिकारों के किसी भी उल्लंघन की सुनवाई केवल उच्चतम न्यायालय द्वारा ही की जा सकती है।
सही उत्तर: B. अनुच्छेद 194(3) या 105(3) के तहत विधायिका के विशेषाधिकार अनुच्छेद 19(1)(a) की सामान्य वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर वरीयता रख सकते हैं।
सर्चलाइट मामले (1959) में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने माना कि जब सदन के विशेषाधिकारों और अनुच्छेद 19(1) के बीच a टकराव होता है, तो सदन के विशेषाधिकार प्रभावी होते हैं और सदन अपनी प्रतिबंधित कार्यवाहियों के प्रकाशन को रोक सकता है।

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