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राजा राम पाल बनाम माननीय अध्यक्ष, लोक सभा (2007) मामले में संसद सदस्यों के निष्कासन ( Expulsion of MPs) के संदर्भ में उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने क्या व्यवस्था दी? 1. संसद के पास सदन की गरिमा और शुचिता बनाए रखने के लिए गंभीर दुराचरण (जैसे पैसे लेकर सवाल पूछना) के दोषी सदस्यों को निष्कासित करने की अंतर्निहित शक्ति है। 2. संसद द्वारा सदस्यों के निष्कासन की यह शक्ति न्यायिक समीक्षा ( Judicial Review) के दायरे में आती है। 3. यदि निष्कासन दुर्भावनापूर्ण, असंवैधानिक या प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के पूर्ण उल्लंघन में किया गया हो, तो अदालतें हस्तक्षेप कर सकती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 13 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 18प्रश्न 13 / 50

विकल्प

Aकेवल 1 और 2
Bकेवल 2 और 3
Cकेवल 1 और 3
D1, 2 और 3
सही उत्तर: D. 1, 2 और 3
तीनों कथन सही हैं। कै श फॉर क्वेरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि संसद को सदस्यों को निष्कासित करने की शक्ति है, किंतु यह शक्ति असीमित नहीं है और न्यायिक समीक्षा के अधीन है। 14 (d) A तीनों कथन सही हैं। फिरोज गांधी अधिनियम के सिद्धांतों को 44वें संशोधन (1978) द्वारा अनुच्छेद 361 के रूप में संवैधानिक दर्जा दिया गया, जो मीडिया को संसदीय रिपोर्टिंग की स्वतंत्रता प्रदान करता है।

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