1.4.5 शैल चक्र

आग्नेय, अवसादी और कायांतरित शैलों का भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं द्वारा लगातार एक-दूसरे में बदलते रहना शैल चक्र (Rock Cycle) कहलाता है।

शैल चक्र यह समझाता है कि पृथ्वी की कोई भी प्रमुख शैल-श्रेणी स्थायी नहीं है। पर्याप्त समय और उपयुक्त परिस्थितियों में वह दूसरी शैल-श्रेणी में बदल सकती है।

शैल चक्र का सरल रूप

मैग्मा → शीतलन और क्रिस्टलीकरण → आग्नेय शैल

आग्नेय/अन्य शैल → अपक्षय और अपरदन → अवसाद

अवसाद → निक्षेपण और शैलन → अवसादी शैल

आग्नेय/अवसादी शैल → ताप और दबाव → कायांतरित शैल

कायांतरित/अन्य शैल → पिघलाव → मैग्मा

लेकिन यह केवल एक सरल चित्र है।

वास्तविक शैल चक्र में अनेक वैकल्पिक मार्ग होते हैं।

कोई निश्चित एक दिशा नहीं

आग्नेय शैल को अवसादी बनने से पहले कायांतरित होना आवश्यक नहीं है।

अवसादी शैल सीधे कायांतरित हो सकती है।

कायांतरित शैल सतह पर आकर अपक्षयित होकर अवसाद बना सकती है।

आग्नेय शैल पुनः पिघलकर नया मैग्मा बना सकती है।

इसलिए शैल चक्र वास्तव में जाल (Network) की तरह है, केवल वृत्त की तरह नहीं।

शैल चक्र की प्रमुख प्रक्रियाएँ

निर्माण

मैग्मा का ठंडना और क्रिस्टलीकरण आग्नेय शैल बनाता है।

अपक्षय

सतह पर शैलें भौतिक, रासायनिक और जैविक प्रक्रियाओं से टूटती और विघटित होती हैं।

अपरदन और परिवहन

जल, हवा, हिमनद और गुरुत्व टूटे पदार्थ को स्थानांतरित करते हैं।

अवसादन

परिवहन क्षमता घटने पर पदार्थ जमा होता है।

शैलन

संघनन और सीमेंटेशन से अवसाद अवसादी शैल बनते हैं।

कायांतरण

ताप, दबाव और द्रव पहले से मौजूद शैल की खनिजीय संरचना बदलते हैं।

पिघलाव

बहुत ऊँचे ताप पर शैल आंशिक या पूर्ण रूप से पिघलकर मैग्मा बन सकती है।

उत्थान

विवर्तनिकी और समस्थिति गहरी शैलों को सतह के निकट ला सकती हैं।

सतह पर आने के बाद वे फिर अपक्षय चक्र में प्रवेश करती हैं।

आंतरिक और बाह्य ऊर्जा

शैल चक्र दो मुख्य ऊर्जा प्रणालियों से चलता है।

पृथ्वी की आंतरिक ऊष्मा

चलाती है—

सौर ऊर्जा

चलाती है—

गुरुत्व

पदार्थ को ऊँचाई से नीचे ले जाता है और अपरदन–निक्षेपण में महत्वपूर्ण है।

प्लेट विवर्तनिकी और शैल चक्र

आधुनिक शैल चक्र को प्लेट विवर्तनिकी के बिना पूर्णतः नहीं समझा जा सकता।

मध्य-महासागरीय कटक

मैंटल पिघलाव → बेसाल्टिक मैग्मा → नई महासागरीय आग्नेय पर्पटी।

समुद्रतल

अपक्षयित महाद्वीपीय पदार्थ समुद्र तक पहुँचकर अवसाद बनाता है।

सबडक्शन

महासागरीय शैल और अवसाद गहराई में जाते हैं।

उच्च दबाव कायांतरण होता है।

जल निकलकर मैग्मा निर्माण में सहायता कर सकता है।

ज्वालामुखीय चाप

नया आग्नेय पदार्थ बनता है।

महाद्वीपीय टक्कर

क्षेत्रीय कायांतरण, पर्पटी-मोटापन और उत्थान।

उत्थान और अपरदन

गहरी शैलें सतह पर आती हैं और फिर अपक्षयित होती हैं।

इस प्रकार प्लेट चक्र और शैल चक्र परस्पर जुड़े हैं।

शैल चक्र और भू-रासायनिक चक्र

शैल चक्र तत्वों को पृथ्वी की विभिन्न परतों और भंडारों में पुनर्वितरित करता है।

उदाहरण—

कार्बन अवसादी कार्बोनेट में बंद हो सकता है।

सबडक्शन से कार्बन गहराई में जा सकता है।

ज्वालामुखिता से कार्बन डाइऑक्साइड पुनः वायुमंडल में लौट सकती है।

इस प्रकार शैल चक्र दीर्घकालीन कार्बन चक्र से भी जुड़ा है।

मिट्टी और शैल चक्र

अपक्षय से बनी सामग्री मिट्टी की मूल सामग्री बनाती है।

अतः शैल चक्र—

से भी जुड़ा है।

भारत का उदाहरण

दक्कन बेसाल्ट → अपक्षय → काली मिट्टी।

हिमालयी शैल → अपरदन → गंगा–ब्रह्मपुत्र अवसाद → मैदान और डेल्टा।

भारतीय–यूरेशियाई टक्कर → कायांतरण → हिमालयी शिस्ट और नीस → उत्थान → पुनः अपक्षय।

यह एक जीवंत शैल चक्र है।

2025–2026 समसामयिक संबंध

2025–26 के भारतीय भूविज्ञान अध्ययनों ने एक ही शैल-चक्र के अलग-अलग भागों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ा—

इससे स्पष्ट है कि शैल चक्र केवल पाठ्यपुस्तक का स्थिर चित्र नहीं, बल्कि आज भी चल रही ग्रह-व्यापी प्रक्रिया है।

सत्यापित UPSC प्रारंभिक परीक्षा PYQ

“शैल चक्र” शब्द को सीधे पूछने वाला स्पष्ट हालिया CSE प्रारंभिक प्रश्न सत्यापित नहीं मिला।

लेकिन UPSC 2001 के आग्नेय मैग्मा तथा अवसादी शैल प्रश्न शैल चक्र की अलग-अलग प्रक्रियाओं पर प्रत्यक्ष प्रश्न हैं।

सत्यापित UPSC मुख्य परीक्षा PYQ

शैल चक्र को पूर्ण चित्र के रूप में पूछने वाला प्रत्यक्ष सामान्य अध्ययन मुख्य परीक्षा प्रश्न सत्यापित नहीं मिला।

सत्यापित BPSC प्रारंभिक परीक्षा PYQ

70वीं BPSC 2024 में लावा के ठंडने से आग्नेय शैल बनने का प्रश्न शैल चक्र के “निर्माण” भाग से प्रत्यक्ष संबंधित है।

39वीं BPSC में अवसादी शैलों की स्तरित प्रकृति भी शैल चक्र के अवसादन भाग से जुड़ी है।

सत्यापित BPSC मुख्य परीक्षा PYQ

प्रत्यक्ष शैल-चक्र प्रश्न सत्यापित नहीं मिला।

प्रारंभिक परीक्षा के अंतिम तथ्य

शैल चक्र का कोई एक निश्चित मार्ग नहीं है।

आग्नेय शैल मैग्मा के ठंडने से बनती है।

अवसादी शैल अवसाद के शैलन से बनती है।

कायांतरित शैल बिना पूर्ण पिघलाव के ताप-दाब से बनती है।

पिघलाव से मैग्मा बनता है।

उत्थान गहरी शैलों को सतह पर लाकर अपक्षय के लिए उपलब्ध कराता है।

निष्कर्ष

शैल चक्र पृथ्वी की आंतरिक और बाह्य प्रक्रियाओं को एकीकृत करता है। मैग्मा, पर्वतनिर्माण, अपक्षय, नदियाँ, अवसादन, कायांतरण और पुनर्पिघलन मिलकर पृथ्वी की पर्पटी को निरंतर पुनर्गठित करते रहते हैं।