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1.4 खनिज, शैल और शैल चक्र

पृथ्वी की भूपर्पटी अनेक प्रकार के खनिजों और उनसे निर्मित शैलों से बनी है। खनिज (Mineral) पृथ्वी के पदार्थों की मूल प्राकृतिक इकाई हैं, जबकि शैल (Rock) एक या एक से अधिक खनिजों का प्राकृतिक समुच्चय होती है। शैल स्थायी नहीं हैं; वे समय के साथ एक प्रकार से दूसरे प्रकार में बदल सकती हैं। इस निरंतर परिवर्तन को शैल चक्र (Rock Cycle) कहा जाता है।

UPSC और BPSC के लिए इस अध्याय का महत्व केवल परिभाषाओं तक सीमित नहीं है। इससे पृथ्वी की भूपर्पटी की संरचना, आग्नेय-अवसादी-कायांतरित शैल, अपक्षय, खनिज संसाधन, मिट्टी निर्माण, प्लेट विवर्तनिकी और ज्वालामुखिता जुड़े हैं।

खनिज क्या है?

सामान्यतः खनिज वह प्राकृतिक, अकार्बनिक, ठोस पदार्थ है जिसकी निश्चित अथवा सीमित सीमा में निश्चित रासायनिक संरचना, व्यवस्थित आंतरिक परमाण्विक संरचना और विशिष्ट भौतिक गुण होते हैं।

उदाहरण—

खनिज और शैल में अंतर

खनिज एक विशिष्ट प्राकृतिक पदार्थ है।

शैल एक या अनेक खनिजों का समुच्चय है।

उदाहरण—ग्रेनाइट एक शैल है जिसमें मुख्यतः क्वार्ट्ज, फेल्सपार और अभ्रक जैसे खनिज मिल सकते हैं।

शैलों के तीन मुख्य प्रकार

आग्नेय शैल

मैग्मा या लावा के ठंडा होकर ठोस बनने से बनने वाली शैलें आग्नेय शैल (Igneous Rocks) कहलाती हैं।

उदाहरण—ग्रेनाइट, बेसाल्ट, गैब्रो, रायोलाइट।

अवसादी शैल

पहले से मौजूद शैलों के अपक्षय, अपरदन, परिवहन, निक्षेपण और शैलन के बाद बनने वाली शैलें अवसादी शैल (Sedimentary Rocks) कहलाती हैं।

उदाहरण—बलुआ पत्थर, शेल, चूना पत्थर, कोयला।

इनमें स्तर और जीवाश्म पाए जाने की संभावना अपेक्षाकृत अधिक होती है।

कायांतरित शैल

पहले से मौजूद शैलें जब उच्च ताप, दबाव और रासायनिक रूप से सक्रिय द्रवों के प्रभाव में बिना पूर्ण पिघले नई बनावट और खनिज संरचना प्राप्त करती हैं, तो उन्हें कायांतरित शैल (Metamorphic Rocks) कहते हैं।

उदाहरण—

शैल चक्र

एक सरल क्रम—

मैग्मा → ठंडना → आग्नेय शैल → अपक्षय और अपरदन → अवसाद → शैलन → अवसादी शैल → ताप और दबाव → कायांतरित शैल → पिघलाव → मैग्मा

लेकिन वास्तविक शैल चक्र अधिक जटिल है। किसी भी शैल के लिए केवल एक निश्चित मार्ग नहीं होता।

शैल चक्र को चलाने वाली शक्तियाँ

पृथ्वी की आंतरिक ऊर्जा

प्लेट विवर्तनिकी, पर्वतनिर्माण, मैग्मा निर्माण और कायांतरण को ऊर्जा देती है।

सौर ऊर्जा

वायुमंडल, जलचक्र और बाह्य भू-आकृतिक प्रक्रियाओं को चलाती है।

गुरुत्व

अपरदित पदार्थों के परिवहन, भूस्खलन और निक्षेपण में भूमिका निभाता है।

खनिजों का महत्व

शैल-निर्माण

प्रमुख शैल-निर्माणकारी खनिज—

आर्थिक उपयोग

खनिज और अयस्क में अंतर

अयस्क (Ore) वह प्राकृतिक पदार्थ है जिससे किसी उपयोगी तत्व या पदार्थ का आर्थिक रूप से निष्कर्षण संभव हो।

हर खनिज अयस्क नहीं होता और किसी निक्षेप का अयस्क होना बाजार मूल्य, सांद्रता, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा लागत और पर्यावरणीय नियमों पर निर्भर करता है।

भूपर्पटी के प्रमुख खनिज समूह

भूपर्पटी में सबसे महत्वपूर्ण खनिज समूह सिलिकेट खनिज (Silicate Minerals) हैं।

प्रमुख गैर-सिलिकेट वर्ग—

मिट्टी निर्माण से संबंध

शैलों और खनिजों के अपक्षय से मिट्टी का खनिजीय अंश बनता है।

फेल्सपार के रासायनिक अपक्षय से मृत्तिका खनिज बन सकते हैं। लौह-युक्त खनिजों के ऑक्सीकरण से लाल और पीले रंग के लौह ऑक्साइड बन सकते हैं। कैल्साइट के विलयन से कार्स्ट भू-आकृतियाँ विकसित हो सकती हैं।

प्लेट विवर्तनिकी से संबंध

अपसारी सीमाओं पर मैग्मा से नई आग्नेय महासागरीय पर्पटी बनती है।

अभिसारी सीमाओं पर अवसाद और महासागरीय पर्पटी सबडक्शन में जा सकते हैं, जहाँ कायांतरण और आंशिक पिघलाव होता है।

महाद्वीपीय टक्कर में पर्पटी मोटी होती है और व्यापक क्षेत्रीय कायांतरण होता है।

भारत में शैल और खनिज विविधता

प्रायद्वीपीय भारत में प्राचीन आग्नेय और कायांतरित शैलें व्यापक हैं।

दक्कन ट्रैप विशाल बेसाल्टिक लावा प्रवाह से बना है।

गोंडवाना बेसिन कोयला-युक्त अवसादी अनुक्रमों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

हिमालय में अवसादी, कायांतरित और आग्नेय शैलों की जटिल संरचना मिलती है।

केरल, तमिलनाडु, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के कुछ तटीय भागों में मोनाजाइट, इल्मेनाइट, रूटाइल, जिरकॉन और गार्नेट जैसे भारी खनिज मिलते हैं।

समसामयिक अद्यतन — राष्ट्रीय महत्त्वपूर्ण खनिज मिशन

29 जनवरी 2025 को भारत सरकार ने राष्ट्रीय महत्त्वपूर्ण खनिज मिशन (National Critical Mineral Mission) को मंजूरी दी।

इसमें 7 वर्षों के लिए 16,300 करोड़ रुपये सरकारी व्यय और लगभग 18,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त सार्वजनिक क्षेत्रीय तथा अन्य निवेश की परिकल्पना की गई है।

मुख्य उद्देश्य—

2025–26 क्षेत्र सत्र में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने 458 खनिज अन्वेषण परियोजनाएँ संचालित कीं, जिनमें 230 महत्त्वपूर्ण खनिजों पर और 92 दुर्लभ मृदा तत्वों पर केंद्रित थीं।

जून 2026 तक 56 महत्त्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी की जा चुकी थी।

2025 का महत्वपूर्ण वर्गीकरण परिवर्तन

20 फरवरी 2025 से—

को लघु खनिजों की सूची से हटाकर प्रमुख खनिजों की श्रेणी में रखा गया।

सत्यापित UPSC प्रारंभिक परीक्षा PYQ

UPSC प्रारंभिक परीक्षा, 2022

मोनाजाइट के संबंध में कथन दिए गए थे—

  1. यह दुर्लभ मृदा तत्वों का स्रोत है।
  2. इसमें थोरियम होता है।
  3. यह भारत की पूरी तटीय बालू में प्राकृतिक रूप से मिलता है।
  4. भारत में केवल सरकारी संस्थाएँ मोनाजाइट का प्रसंस्करण या निर्यात कर सकती हैं।

सही उत्तर: कथन 1, 2 और 4।

सत्यापित UPSC मुख्य परीक्षा PYQ

UPSC भूगोल वैकल्पिक, 2025

महत्त्वपूर्ण खनिजों के निष्कर्षण और प्रसंस्करण से जुड़े प्रमुख पर्यावरणीय और आर्थिक चुनौतियों की व्याख्या पूछी गई थी।

सत्यापित BPSC प्रारंभिक परीक्षा PYQ

63वीं BPSC संयुक्त प्रतियोगिता प्रारंभिक परीक्षा

प्रश्न:

घड़ियों में प्रयुक्त क्वार्ट्ज क्रिस्टल किसका बना होता है?

सही उत्तर:

सिलिकॉन डाइऑक्साइड — SiO₂।

सत्यापित BPSC मुख्य परीक्षा PYQ

68वीं BPSC मुख्य परीक्षा — भूविज्ञान वैकल्पिक, 2023

खनिज और शैल से संबंधित प्रश्नों में—

पूछा गया।

महत्वपूर्ण उत्तर—मैग्नेटाइट, बोवेन और फेल्सपार

प्रारंभिक परीक्षा के अंतिम तथ्य

खनिज प्राकृतिक पदार्थ है; शैल खनिजों का समुच्चय है।

तीन मुख्य शैल प्रकार—आग्नेय, अवसादी और कायांतरित।

शैल चक्र में कोई एक निश्चित मार्ग नहीं होता।

सिलिकेट भूपर्पटी के प्रमुख खनिज हैं।

क्वार्ट्ज = SiO₂।

मोनाजाइट फॉस्फेट खनिज है और दुर्लभ मृदा तत्व तथा थोरियम से संबंधित है।

निष्कर्ष

खनिज पृथ्वी की शैलों के मूल निर्माण घटक हैं और शैलें पृथ्वी की भूपर्पटी की प्रमुख संरचनात्मक इकाइयाँ हैं। शैल चक्र आंतरिक ऊर्जा, बाह्य भू-प्रक्रियाओं और प्लेट विवर्तनिकी को एक निरंतर प्रणाली में जोड़ता है।