1.4.5.2 अपक्षय
पृथ्वी की सतह या उसके निकट शैलों का अपने स्थान पर भौतिक रूप से टूटना, रासायनिक रूप से विघटित होना या जैविक क्रियाओं से बदलना अपक्षय (Weathering) कहलाता है।
अपक्षय में पदार्थ का स्थानांतरण आवश्यक नहीं है।
जब टूटे पदार्थ को नदी, हवा, हिमनद या गुरुत्व हटाकर ले जाए, तो वह अपरदन (Erosion) कहलाता है।
सबसे महत्वपूर्ण अंतर
अपक्षय = शैल का अपने स्थान पर टूटना या बदलना।
अपरदन = टूटे पदार्थ का हटना और परिवहन।
अपक्षय के मुख्य प्रकार
- भौतिक अपक्षय
- रासायनिक अपक्षय
- जैविक अपक्षय
वास्तविक प्रकृति में ये प्रक्रियाएँ अक्सर एक साथ काम करती हैं।
भौतिक अपक्षय
शैल का रासायनिक संघटन बदले बिना छोटे टुकड़ों में टूटना भौतिक अपक्षय (Physical Weathering) कहलाता है।
तापीय प्रसार और संकुचन
दिन में गर्म और रात में ठंडा होने से शैल की बाहरी परतें फैलती-सिकुड़ती हैं।
शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में इसका योगदान महत्वपूर्ण हो सकता है।
पर्तीय अपक्षय
ऊपरी भार हटने पर गहरे बने ग्रेनाइट जैसे शैलों में दाब कम होता है।
सतह के समानांतर संधियाँ बन सकती हैं और बाहरी परतें छिल सकती हैं।
इसे पर्तीय अपक्षय (Exfoliation) कहते हैं।
हिम क्रिया
दरारों में जल जमकर फैलता है।
बार-बार जमने-पिघलने से दरारें चौड़ी हो सकती हैं।
यह ठंडे पर्वतीय क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है।
लवण क्रिस्टलीकरण
शैल के छिद्रों में लवणीय जल वाष्पित होने पर लवण क्रिस्टल बढ़ते हैं।
उनका दबाव शैल को तोड़ सकता है।
यह शुष्क और तटीय क्षेत्रों में महत्वपूर्ण हो सकता है।
रासायनिक अपक्षय
खनिजों की रासायनिक संरचना बदलने वाली प्रक्रियाएँ रासायनिक अपक्षय (Chemical Weathering) कहलाती हैं।
यह गर्म और आर्द्र जलवायु में सामान्यतः अधिक तीव्र होता है।
विलयन
जल में घुलनशील खनिज सीधे घुल सकते हैं।
उदाहरण—हैलाइट।
कार्बोनेशन
कार्बन डाइऑक्साइड युक्त जल हल्का कार्बोनिक अम्ल बनाता है।
यह चूना पत्थर को घोल सकता है।
कार्स्ट स्थलरूप इसी प्रक्रिया से जुड़े हैं।
जलयोजन
खनिज जल ग्रहण कर नई संरचना बना सकते हैं।
जलअपघटन
जल के साथ अभिक्रिया से सिलिकेट खनिज नए खनिजों में बदल सकते हैं।
उदाहरण—
फेल्सपार → मृत्तिका खनिज।
ऑक्सीकरण
लौह-युक्त खनिज ऑक्सीजन से अभिक्रिया कर लौह ऑक्साइड बनाते हैं।
इससे शैल और मिट्टी में लाल, पीला या भूरा रंग विकसित हो सकता है।
जैविक अपक्षय
जीवों द्वारा शैल के भौतिक या रासायनिक परिवर्तन को जैविक अपक्षय (Biological Weathering) कहते हैं।
उदाहरण—
- जड़ों का दरारों में प्रवेश,
- बिल बनाने वाले जीव,
- लाइकेन द्वारा कार्बनिक अम्ल,
- सूक्ष्मजीवों की खनिज अभिक्रियाएँ।
जलवायु का प्रभाव
गर्म और आर्द्र जलवायु
रासायनिक अपक्षय अधिक तीव्र।
ठंडी जलवायु
हिम क्रिया महत्वपूर्ण।
शुष्क जलवायु
तापीय परिवर्तन और लवण क्रिस्टलीकरण महत्वपूर्ण।
इसलिए जलवायु अपक्षय का प्रमुख नियंत्रक है।
शैल और खनिज का प्रभाव
सभी खनिज समान गति से अपक्षयित नहीं होते।
क्वार्ट्ज रासायनिक अपक्षय के प्रति अपेक्षाकृत प्रतिरोधी है।
फेल्सपार अधिक आसानी से मृत्तिका खनिजों में बदल सकता है।
ऑलिवीन और पाइरॉक्सीन सतही परिस्थितियों में अपेक्षाकृत शीघ्र बदलते हैं।
बोवेन श्रेणी और अपक्षय
जो खनिज बहुत ऊँचे ताप पर पहले क्रिस्टलीकृत होते हैं, वे सतह की ठंडी और जलयुक्त परिस्थितियों में सामान्यतः कम स्थिर होते हैं।
इसलिए ऑलिवीन की तुलना में क्वार्ट्ज सतह पर अधिक स्थिर है।
अपक्षय और मिट्टी निर्माण
मूल शैल के अपक्षय से—
- खनिज कण,
- मृत्तिका,
- घुले पोषक तत्व
उत्पन्न होते हैं।
जैविक पदार्थ के साथ मिलकर ये मिट्टी बनाते हैं।
इसलिए मिट्टी निर्माण शैल चक्र और जैवमंडल के बीच महत्वपूर्ण कड़ी है।
भारत के उदाहरण
दक्कन बेसाल्ट
रासायनिक अपक्षय से काली मिट्टी का विकास।
पश्चिमी घाट
उच्च वर्षा के कारण तीव्र रासायनिक अपक्षय और लेटराइट निर्माण।
राजस्थान
शुष्क परिस्थितियों में भौतिक अपक्षय और लवण क्रिया महत्वपूर्ण।
हिमालय
हिम क्रिया, ढाल अस्थिरता और भौतिक अपक्षय महत्वपूर्ण।
लेटराइट निर्माण
गर्म और आर्द्र जलवायु में तीव्र रासायनिक अपक्षय तथा निक्षालन से सिलिका और क्षार तत्व बाहर निकल सकते हैं।
लौह और एल्युमिनियम ऑक्साइड का सापेक्ष संकेंद्रण हो सकता है।
इससे लेटराइट (Laterite) विकसित होती है।
2026 का समसामयिक अद्यतन — भारत में जल-अपरदन
2026 में प्रकाशित अखिल भारतीय अध्ययन ने पिछले दो दशकों के जलवायु और भूमि-उपयोग परिवर्तन के कारण जल-अपरदन प्रतिरूपों में बदलाव का आकलन किया।
यद्यपि अपक्षय और अपरदन अलग प्रक्रियाएँ हैं, यह अध्ययन महत्वपूर्ण है क्योंकि अपक्षय द्वारा उपलब्ध ढीली सामग्री को वर्षा और सतही प्रवाह अपरदित कर नदियों में पहुँचाते हैं।
परीक्षा-योग्य संबंध
अपक्षय सामग्री बनाता है; अपरदन उसे हटाता है; नदी उसे परिवहन करती है; अवसादन उसे जमा करता है।
पश्चिमी घाट का समसामयिक संदर्भ
2025 के पश्चिमी घाट के महत्वपूर्ण क्षेत्र संबंधी अध्ययनों में जल–शैल अभिक्रिया और घुले अकार्बनिक कार्बन के प्रवाह का अध्ययन किया गया।
यह आधुनिक उदाहरण रासायनिक अपक्षय, जल-रसायन और कार्बन चक्र के बीच संबंध दिखाता है।
सत्यापित UPSC प्रारंभिक परीक्षा PYQ
UPSC प्रारंभिक परीक्षा, 2021
काली कपासी मिट्टी के निर्माण को दरारी ज्वालामुखीय शैल के अपक्षय से जोड़ा गया था।
यह शैल अपक्षय का प्रत्यक्ष परीक्षा-संबंध है।
सत्यापित UPSC मुख्य परीक्षा PYQ
अपक्षय को अकेले प्रत्यक्ष सामान्य अध्ययन प्रश्न के रूप में सत्यापित नहीं मिला।
सत्यापित BPSC प्रारंभिक परीक्षा PYQ
पुराने BPSC प्रश्नों में मृदा संरक्षण और अवसादी शैल से संबंधित अवधारणाएँ पूछी गई हैं, पर इस सूक्ष्म शीर्षक पर प्रत्यक्ष वर्ष-सहित भरोसेमंद प्रश्न का मिलान नहीं मिला।
सत्यापित BPSC मुख्य परीक्षा PYQ
प्रत्यक्ष सत्यापित प्रश्न नहीं मिला।
प्रारंभिक परीक्षा के अंतिम तथ्य
अपक्षय स्थान पर होता है।
अपरदन में पदार्थ हटता है।
फेल्सपार के अपक्षय से मृत्तिका बन सकती है।
लौह खनिजों का ऑक्सीकरण लाल-भूरा रंग देता है।
चूना पत्थर कार्बोनेशन से घुलता है।
गर्म-आर्द्र जलवायु में रासायनिक अपक्षय तीव्र।
ठंडे क्षेत्र में हिम क्रिया महत्वपूर्ण।
क्वार्ट्ज सतही परिस्थितियों में अपेक्षाकृत स्थिर।
निष्कर्ष
अपक्षय शैल चक्र का वह सतही द्वार है जहाँ ठोस शैल टूटकर अवसाद, घुले तत्व और मिट्टी की मूल सामग्री बनाती है। जलवायु, शैल-प्रकार, स्थलाकृति और जैविक गतिविधि इसकी गति नियंत्रित करते हैं।