1.3.2.3 बाह्य क्रोड

पृथ्वी के मैंटल के नीचे और आंतरिक क्रोड के ऊपर स्थित द्रव धात्विक परत को बाह्य क्रोड कहा जाता है। यह लगभग 2,900 किमी से 5,150 किमी गहराई तक फैला है और इसकी मोटाई लगभग 2,250 किमी के क्रम की है।

बाह्य क्रोड पृथ्वी की आंतरिक संरचना का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है क्योंकि—

बाह्य क्रोड की सीमाएँ

ऊपरी सीमा — गुटेनबर्ग असांतत्य

लगभग 2,900 किमी गहराई पर मैंटल समाप्त होता है और बाह्य क्रोड प्रारंभ होता है।

इस सीमा को गुटेनबर्ग असांतत्य या क्रोड–मैंटल सीमा कहा जाता है।

यहाँ भूकंपीय तरंगों के व्यवहार में बड़ा परिवर्तन होता है—

यह पृथ्वी के ठोस सिलिकेट मैंटल से द्रव धात्विक बाह्य क्रोड में परिवर्तन का संकेत है।

निचली सीमा — लेहमैन असांतत्य

लगभग 5,150 किमी गहराई पर बाह्य क्रोड समाप्त होकर आंतरिक क्रोड शुरू होता है।

इस सीमा को सामान्यतः लेहमैन असांतत्य या आंतरिक क्रोड सीमा कहा जाता है।

इस सीमा पर द्रव बाह्य क्रोड से ठोस आंतरिक क्रोड में परिवर्तन होता है।

बाह्य क्रोड द्रव है — इसका प्रमाण

बाह्य क्रोड की द्रव अवस्था का सबसे महत्वपूर्ण प्रमाण भूकंपीय S-तरंगें हैं।

S-तरंगें कतरनी तरंगें हैं और केवल ऐसे माध्यम से गुजर सकती हैं जिसमें कतरनी कठोरता हो।

द्रव में कतरनी कठोरता लगभग शून्य होती है।

इसलिए—

S-तरंगें बाह्य क्रोड से नहीं गुजरतीं।

यही कारण है कि लगभग 105° के बाद प्रत्यक्ष S-तरंगें दर्ज नहीं होतीं और विशाल S-तरंग छाया क्षेत्र बनता है।

यह बाह्य क्रोड के द्रव होने का सबसे मजबूत प्रत्यक्ष भूभौतिकीय प्रमाण है।

P-तरंगों का व्यवहार

P-तरंगें ठोस और द्रव दोनों माध्यमों से गुजर सकती हैं।

जब P-तरंगें ठोस मैंटल से द्रव बाह्य क्रोड में प्रवेश करती हैं तो—

इससे लगभग 105° से 145° के बीच P-तरंग छाया क्षेत्र बनता है।

145° के बाद कुछ P-तरंगें फिर दर्ज होने लगती हैं।

इस प्रकार P और S दोनों तरंगों का संयुक्त व्यवहार बाह्य क्रोड की स्थिति और भौतिक अवस्था निर्धारित करने में सहायक है।

बाह्य क्रोड की संरचना

बाह्य क्रोड मुख्यतः लौह से बना माना जाता है।

इसके साथ—

जैसे अपेक्षाकृत हल्के तत्वों में से कुछ भी उपस्थित हो सकते हैं।

इन हल्के तत्वों की सही मात्रा और अनुपात पर वैज्ञानिक शोध जारी है।

इसलिए परीक्षा में सुरक्षित उत्तर है—

बाह्य क्रोड मुख्यतः लौह-निकेल से बना द्रव धात्विक क्षेत्र है, जिसमें कुछ हल्के तत्व भी उपस्थित हैं।

नाइफे

पुरानी भौगोलिक शब्दावली में पृथ्वी के क्रोड के लिए नाइफे शब्द प्रयुक्त होता है—

Ni = Nickel

Fe = Ferrum अर्थात Iron

यह शब्द परीक्षा में उपयोगी है, लेकिन आधुनिक विज्ञान क्रोड की संरचना को केवल निकेल और लौह तक सीमित नहीं मानता।

बाह्य क्रोड का घनत्व

बाह्य क्रोड का घनत्व मैंटल की तुलना में काफी अधिक है।

यह गहराई के साथ बढ़ता है और लगभग 10 से 12 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर के क्रम में माना जाता है।

शुद्ध लौह की तुलना में बाह्य क्रोड का वास्तविक घनत्व थोड़ा कम होना यह संकेत देता है कि इसमें कुछ हल्के तत्व भी मिले हुए हैं।

तापमान और दबाव

बाह्य क्रोड में तापमान अत्यंत अधिक है।

यह क्रोड–मैंटल सीमा के निकट लगभग 4,000°C के क्रम से लेकर आंतरिक क्रोड सीमा की ओर 5,000°C से अधिक तक पहुँच सकता है।

गहराई के साथ दबाव भी अत्यधिक बढ़ता है।

इन परिस्थितियों में लौह-समृद्ध पदार्थ द्रव अवस्था में बना रहता है।

सटीक तापमान सीधे मापा नहीं गया है; ये उच्च-दाब प्रयोगों, भूकंपीय आँकड़ों और भूभौतिकीय मॉडलों पर आधारित अनुमान हैं।

बाह्य क्रोड में संवहन

बाह्य क्रोड स्थिर द्रव नहीं है।

यहाँ विद्युत-चालक लौह-समृद्ध द्रव में लगातार गति और संवहन होता है।

संवहन को ऊर्जा मुख्यतः मिलती है—

इन प्रक्रियाओं के कारण बाह्य क्रोड में जटिल द्रव गति बनी रहती है।

भू-डायनेमो

पृथ्वी का मुख्य चुंबकीय क्षेत्र द्रव बाह्य क्रोड से उत्पन्न होता है।

इस प्रक्रिया को भू-डायनेमो कहा जाता है।

इसके लिए तीन मुख्य बातें महत्वपूर्ण हैं—

  1. विद्युत-चालक द्रव,
  2. द्रव का संवहन,
  3. पृथ्वी का घूर्णन।

द्रव बाह्य क्रोड में गतिशील लौह विद्युत धाराएँ उत्पन्न करता है।

पृथ्वी का घूर्णन कोरिऑलिस प्रभाव के माध्यम से इन प्रवाहों को व्यवस्थित करने में सहायता करता है।

इन विद्युत धाराओं से विशाल भू-चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है।

परीक्षा की महत्वपूर्ण सावधानी

पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र किसी विशाल स्थायी चुंबक से उत्पन्न नहीं होता।

इसका मुख्य स्रोत है—

द्रव बाह्य क्रोड का भू-डायनेमो।

आंतरिक क्रोड और बाह्य क्रोड का संबंध

आंतरिक क्रोड धीरे-धीरे ठोस होता जा रहा है।

जब द्रव बाह्य क्रोड का लौह-समृद्ध पदार्थ आंतरिक क्रोड पर क्रिस्टलीकृत होता है, तो—

ये दोनों प्रक्रियाएँ संवहन को ऊर्जा देती हैं।

इस कारण पृथ्वी का आंतरिक क्रोड और बाह्य क्रोड पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के विकास से गहराई से जुड़े हैं।

क्रोड–मैंटल सीमा

लगभग 2,900 किमी गहराई पर स्थित क्रोड–मैंटल सीमा पृथ्वी की सबसे महत्वपूर्ण आंतरिक सीमाओं में से है।

इसके ऊपर ठोस सिलिकेट मैंटल और नीचे द्रव धात्विक बाह्य क्रोड स्थित है।

यहाँ—

में तीव्र परिवर्तन होता है।

क्रोड से मैंटल की ओर जाने वाला ऊष्मा प्रवाह मैंटल संवहन और बाह्य क्रोड की गतिशीलता दोनों को प्रभावित करता है।

बाह्य क्रोड और पृथ्वी का घूर्णन

बाह्य क्रोड एक गतिशील द्रव है और उसका प्रवाह पृथ्वी के घूर्णन से प्रभावित होता है।

कोरिऑलिस बल बाह्य क्रोड में संवहनीय प्रवाह को बड़े स्तंभनुमा पैटर्न में व्यवस्थित करने में सहायता कर सकता है।

इसीलिए भू-डायनेमो को समझने में पृथ्वी का घूर्णन अत्यंत महत्वपूर्ण है।

बाह्य क्रोड और चुंबकीय ध्रुवीय उलटाव

पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र समय के साथ बदलता है।

भूवैज्ञानिक इतिहास में अनेक बार चुंबकीय उत्तर और दक्षिण ध्रुवों की ध्रुवीयता उलटी है।

ये उलटाव बाह्य क्रोड की जटिल द्रव गतियों और भू-डायनेमो के दीर्घकालीन व्यवहार से जुड़े हैं।

ध्रुवीय उलटाव नियमित निश्चित समय-अंतराल पर नहीं होते।

2026 का समसामयिक अद्यतन

क्रोड–मैंटल सीमा पर ऊष्मा प्रवाह

जून 2026 में Nature Geoscience में प्रकाशित अध्ययन ने दिखाया कि क्रोड–मैंटल सीमा पर ऊष्मा प्रवाह पूरी पृथ्वी में समान नहीं है।

अफ्रीका और प्रशांत के नीचे स्थित बड़े निम्न-कतरनी-वेग क्षेत्रों के नीचे कुछ स्थितियों में स्थानीय ऊष्मा प्रवाह की दिशा सामान्य अपेक्षा से उलटी भी हो सकती है।

इसका अर्थ है कि कुछ क्षेत्रों में निचला मैंटल बाह्य क्रोड से अपेक्षित मात्रा में ऊष्मा नहीं खींचता, और विशिष्ट परिस्थितियों में मॉडल स्थानीय रूप से मैंटल से क्रोड की ओर ऊष्मा प्रवाह भी दिखा सकते हैं।

यह खोज महत्वपूर्ण है क्योंकि क्रोड–मैंटल ऊष्मा प्रवाह बाह्य क्रोड के संवहन और भू-डायनेमो को प्रभावित करता है।

बाह्य क्रोड की ऊपरी सीमा पर चुंबकीय परत

जुलाई 2026 में Journal of Geophysical Research: Solid Earth में प्रकाशित संख्यात्मक भू-डायनेमो अध्ययन ने बाह्य क्रोड के शीर्ष पर एक जटिल चुंबकीय और श्यान सीमा-परत का अध्ययन किया।

यह सीमा-परत बाह्य क्रोड के भीतर की वास्तविक द्रव गतियों और पृथ्वी की सतह से पुनर्निर्मित चुंबकीय क्षेत्र के बीच एक प्रकार के फ़िल्टर की तरह व्यवहार कर सकती है।

इससे स्पष्ट होता है कि सतह पर दिखाई देने वाला चुंबकीय क्षेत्र सीधे बाह्य क्रोड के हर आंतरिक प्रवाह का सरल प्रतिबिंब नहीं है।

बाह्यतम क्रोड का घनत्व

2026 में प्रकाशित दीर्घ-अवधि भूकंपीय और ज्वारीय डेटा आधारित पृथ्वी-मॉडल ने संकेत दिया कि बाह्य क्रोड का सबसे ऊपरी भाग कुछ पुराने मानक मॉडलों की तुलना में थोड़ा अधिक घना हो सकता है।

इसका प्रभाव बाह्य क्रोड में हल्के तत्वों के वितरण और क्रोड की संरचना संबंधी मॉडलों पर पड़ सकता है।

परीक्षा-योग्य निष्कर्ष

बाह्य क्रोड की द्रव अवस्था स्थापित तथ्य है, लेकिन उसके भीतर की संरचना, सीमा-परतें, ऊष्मा प्रवाह और हल्के तत्वों का वितरण आज भी सक्रिय शोध के विषय हैं।

सत्यापित UPSC Prelims PYQ

UPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा, 2009

प्रश्न:

“पृथ्वी की संरचना में मैंटल के नीचे स्थित क्रोड मुख्यतः निम्नलिखित में से किससे बना है?”

विकल्पों में—

दिए गए थे।

सही उत्तर: लौह।

यह पूरे क्रोड की संरचना पर प्रश्न था। बाह्य क्रोड भी मुख्यतः लौह-समृद्ध है, इसलिए इस उपविषय से प्रत्यक्ष रूप से प्रासंगिक है।

सत्यापित UPSC Mains PYQ

UPSC Geography Optional, 2011

प्रश्न:

“भू-चुंबकत्व और पुराचुंबकत्व पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।”

यह Geography Optional Paper-I का वास्तविक प्रश्न है।

बाह्य क्रोड की दृष्टि से इसका सबसे महत्वपूर्ण आधार है—

द्रव विद्युत-चालक बाह्य क्रोड में भू-डायनेमो पृथ्वी के मुख्य चुंबकीय क्षेत्र का स्रोत है।

UPSC GS Mains

इस सूक्ष्म उपविषय “बाह्य क्रोड” पर सामान्य अध्ययन मुख्य परीक्षा में प्रत्यक्ष सत्यापित प्रश्न नहीं मिला।

इसलिए कोई अभ्यास प्रश्न PYQ के रूप में नहीं जोड़ा गया है।

सत्यापित BPSC Prelims PYQ

67वीं BPSC संयुक्त प्रतियोगिता पुनर्परीक्षा, 2022

प्रश्न:

“पृथ्वी की आंतरिक परत के निर्माण में कौन-से तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं?”

विकल्पों में—

दिए गए थे।

सही उत्तर: निकेल और फेरम।

यह प्रश्न पृथ्वी के क्रोड की पारंपरिक NiFe संरचना से संबंधित है।

ध्यान रहे कि आधुनिक विज्ञान के अनुसार क्रोड में लौह और निकेल के साथ कुछ हल्के तत्व भी मौजूद हैं।

सत्यापित BPSC Mains PYQ

68वीं BPSC मुख्य परीक्षा, Geology Optional, 2023

प्रश्न:

“हमें कैसे पता चलता है कि बाह्य क्रोड द्रव है?”

विकल्पों में सही आधार था—

S-तरंगें बाह्य क्रोड से नहीं गुजरतीं।

यह बाह्य क्रोड की भौतिक अवस्था पर प्रत्यक्ष BPSC Mains Geology Optional प्रश्न है।

इसे BPSC सामान्य अध्ययन मुख्य परीक्षा का प्रश्न नहीं समझना चाहिए।

BPSC GS Mains

इस सूक्ष्म उपविषय पर BPSC सामान्य अध्ययन मुख्य परीक्षा का प्रत्यक्ष सत्यापित प्रश्न नहीं मिला।

इसलिए कोई अनुमानित प्रश्न नहीं जोड़ा गया है।

Prelims के लिए अंतिम तथ्य

बाह्य क्रोड लगभग 2,900–5,150 किमी गहराई के बीच स्थित है।

इसकी मोटाई लगभग 2,250 किमी है।

गुटेनबर्ग असांतत्य मैंटल और बाह्य क्रोड के बीच है।

लेहमैन असांतत्य बाह्य और आंतरिक क्रोड के बीच है।

बाह्य क्रोड द्रव है।

S-तरंगें बाह्य क्रोड से नहीं गुजरतीं।

P-तरंगें बाह्य क्रोड से गुजरती हैं लेकिन उनका वेग कम होता है और तीव्र अपवर्तन होता है।

बाह्य क्रोड मुख्यतः लौह-निकेल से बना है तथा उसमें हल्के तत्व भी उपस्थित हैं।

पृथ्वी का मुख्य चुंबकीय क्षेत्र बाह्य क्रोड के भू-डायनेमो से उत्पन्न होता है।

आंतरिक क्रोड के क्रिस्टलीकरण से बाह्य क्रोड संवहन को ऊर्जा मिलती है।

पृथ्वी का चुंबकीय ध्रुवीय उलटाव बाह्य क्रोड के भू-डायनेमो के दीर्घकालीन व्यवहार से जुड़ा है।

Mains के लिए उत्तर-ढाँचा

यदि प्रश्न हो—

“बाह्य क्रोड की प्रकृति और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के निर्माण में उसकी भूमिका स्पष्ट कीजिए।”

उत्तर का क्रम रखें—

भूमिका — 2,900–5,150 किमी का द्रव धात्विक क्षेत्र।

भूकंपीय प्रमाण — S-तरंग अनुपस्थिति और P-तरंग अपवर्तन।

संरचना — लौह-निकेल + हल्के तत्व।

गतिशीलता — तापीय और संरचनात्मक संवहन।

भू-डायनेमो — विद्युत-चालक द्रव + संवहन + पृथ्वी का घूर्णन।

सीमा — गुटेनबर्ग और लेहमैन।

समसामयिक मूल्यवर्धन — 2026 क्रोड–मैंटल ऊष्मा प्रवाह और outer-core boundary-layer अध्ययन।

निष्कर्ष — बाह्य क्रोड पृथ्वी की आंतरिक गतिशीलता और चुंबकीय सुरक्षा प्रणाली दोनों की केंद्रीय परत है।

निष्कर्ष

बाह्य क्रोड पृथ्वी की लगभग 2,900 से 5,150 किमी गहराई के बीच स्थित द्रव लौह-समृद्ध परत है। S-तरंगों का इसमें न गुजरना इसकी द्रव अवस्था का सबसे महत्वपूर्ण प्रमाण है। बाह्य क्रोड की संवहनीय धात्विक गति पृथ्वी के भू-डायनेमो को संचालित करती है और इसी से मुख्य भू-चुंबकीय क्षेत्र बनता है। इस प्रकार बाह्य क्रोड पृथ्वी की आंतरिक संरचना, तापीय विकास और चुंबकीय सुरक्षा—तीनों को समझने की केंद्रीय कड़ी है।