1.3.2.4 आंतरिक क्रोड
पृथ्वी के बिल्कुल केंद्रीय भाग में स्थित ठोस धात्विक परत को आंतरिक क्रोड कहा जाता है। यह लगभग 5,150 किमी गहराई से पृथ्वी के केंद्र 6,371 किमी तक फैला है।
इसकी त्रिज्या लगभग 1,220 किमी है।
आंतरिक क्रोड मुख्यतः लौह-समृद्ध पदार्थ से बना है और बाह्य क्रोड के विपरीत ठोस अवस्था में है।
पृथ्वी के केंद्र में तापमान अत्यंत अधिक है, फिर भी आंतरिक क्रोड ठोस है। इसका मुख्य कारण वहाँ उपस्थित अत्यधिक दबाव है।
आंतरिक क्रोड की सीमा
बाह्य और आंतरिक क्रोड के बीच की सीमा को आंतरिक क्रोड सीमा कहा जाता है।
इसे सामान्य भूगोल की पुस्तकों में प्रायः लेहमैन असांतत्य से जोड़ा जाता है।
यह सीमा लगभग 5,150 किमी गहराई पर स्थित है।
इसके बाहर द्रव बाह्य क्रोड और अंदर ठोस आंतरिक क्रोड स्थित है।
आंतरिक क्रोड की खोज
डेनमार्क की भूकंप विज्ञानी इंगे लेहमैन ने 1936 में भूकंपीय तरंगों के विश्लेषण के आधार पर पृथ्वी के भीतर ठोस आंतरिक क्रोड की उपस्थिति का प्रस्ताव दिया।
उन्होंने देखा कि कुछ P-तरंगें उन क्षेत्रों में भी दर्ज हो रही थीं जहाँ केवल द्रव बाह्य क्रोड के मॉडल से उनकी उपस्थिति की व्याख्या कठिन थी।
इससे यह निष्कर्ष निकला कि पृथ्वी के केंद्र में एक अलग ठोस क्षेत्र मौजूद है।
यह भूभौतिकी के इतिहास की अत्यंत महत्वपूर्ण खोज थी।
आंतरिक क्रोड ठोस क्यों है?
पृथ्वी के केंद्र में तापमान लगभग 5,000–6,000°C के क्रम का माना जाता है।
इतना तापमान लौह को पिघलाने के लिए पर्याप्त हो सकता है।
लेकिन आंतरिक क्रोड में दबाव अत्यंत अधिक है।
दबाव बढ़ने पर लौह का गलनांक भी बढ़ता है।
इसलिए—
अत्यधिक तापमान + अत्यधिक दबाव = ठोस आंतरिक क्रोड
जबकि अपेक्षाकृत कम दबाव वाला बाह्य क्रोड द्रव अवस्था में रहता है।
परीक्षा-फँद
आंतरिक क्रोड ठोस इसलिए नहीं है कि वह बाह्य क्रोड से ठंडा है।
वह ठोस मुख्यतः अत्यधिक दबाव के कारण है।
आंतरिक क्रोड की संरचना
आंतरिक क्रोड मुख्यतः—
- लौह,
- निकेल
से बना माना जाता है।
इसके अतिरिक्त कुछ हल्के तत्व भी उपस्थित हो सकते हैं।
संभावित हल्के तत्वों में—
- सिलिकॉन,
- सल्फर,
- कार्बन,
- ऑक्सीजन,
- हाइड्रोजन
जैसे तत्वों पर वैज्ञानिक अध्ययन किया गया है।
इनकी सही मात्रा पर अभी पूर्ण सहमति नहीं है।
इसलिए परीक्षा में सुरक्षित कथन है—
आंतरिक क्रोड मुख्यतः ठोस लौह-निकेल मिश्रधातु से बना है।
घनत्व
आंतरिक क्रोड पृथ्वी का सबसे अधिक घनत्व वाला प्रमुख क्षेत्र है।
इसका घनत्व लगभग 12.8–13.1 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर के क्रम का माना जाता है।
यह पर्पटी और मैंटल की तुलना में बहुत अधिक है।
उच्च घनत्व पृथ्वी के केंद्र में भारी धात्विक तत्वों के संकेंद्रण से जुड़ा है।
भूकंपीय प्रमाण
आंतरिक क्रोड का प्रत्यक्ष नमूना मनुष्य के पास नहीं है।
इसकी जानकारी मुख्यतः भूकंपीय तरंगों से मिलती है।
कुछ विशेष P-तरंगें द्रव बाह्य क्रोड से होकर आंतरिक क्रोड में प्रवेश करती हैं और फिर बाहर निकलती हैं।
इनके यात्रा समय और दिशा से आंतरिक क्रोड की—
- त्रिज्या,
- घनत्व,
- प्रत्यास्थता,
- ठोस अवस्था
का अनुमान लगाया जाता है।
भूकंप विज्ञान में आंतरिक क्रोड से होकर गुजरने वाली प्रमुख P-तरंग अवस्था को PKIKP कहा जाता है।
यहाँ—
P = मैंटल में P-तरंग,
K = बाह्य क्रोड में P-तरंग,
I = आंतरिक क्रोड,
K = पुनः बाह्य क्रोड,
P = पुनः मैंटल
को दर्शाता है।
UPSC के लिए इस संकेत को रटना अनिवार्य नहीं है, लेकिन अवधारणा महत्वपूर्ण है।
आंतरिक क्रोड की अनैसोट्रॉपी
आंतरिक क्रोड में भूकंपीय तरंगों का वेग सभी दिशाओं में समान नहीं पाया गया है।
इस गुण को भूकंपीय अनैसोट्रॉपी कहा जाता है।
कई अध्ययनों में P-तरंगें पृथ्वी के घूर्णन अक्ष के लगभग समानांतर दिशा में भूमध्यरेखीय दिशा की तुलना में अलग वेग से चलती दिखाई गई हैं।
इसका संभावित कारण आंतरिक क्रोड में लौह क्रिस्टलों का किसी विशेष दिशा में व्यवस्थित होना है।
इससे स्पष्ट होता है कि आंतरिक क्रोड साधारण समरूप ठोस गोला नहीं है।
पूर्वी और पश्चिमी गोलार्ध की भिन्नता
भूकंपीय अध्ययनों में आंतरिक क्रोड के विभिन्न भागों में तरंग वेग और अनैसोट्रॉपी में अंतर मिला है।
कुछ मॉडलों में पूर्वी और पश्चिमी गोलार्ध के बीच संरचनात्मक अंतर का संकेत मिलता है।
इसे—
- आंतरिक क्रोड के असमान विकास,
- क्रिस्टल संरचना,
- बाह्य क्रोड के प्रवाह,
- तापीय अंतर
से जोड़कर समझने की कोशिश की जाती है।
यह अभी सक्रिय शोध का विषय है।
आंतरिक क्रोड का निर्माण
पृथ्वी के प्रारंभिक इतिहास में पूरा क्रोड अधिक गर्म और अधिकांशतः द्रव था।
जैसे-जैसे पृथ्वी ठंडी हुई, केंद्र के निकट अत्यधिक दबाव वाली परिस्थितियों में लौह-समृद्ध पदार्थ का क्रिस्टलीकरण शुरू हुआ।
इससे ठोस आंतरिक क्रोड का निर्माण हुआ।
आंतरिक क्रोड आज भी बहुत धीरे-धीरे बढ़ता माना जाता है।
जब द्रव बाह्य क्रोड का लौह ठोस होकर आंतरिक क्रोड में जुड़ता है तो—
- गुप्त ऊष्मा मुक्त होती है,
- हल्के तत्व द्रव बाह्य क्रोड में बाहर निकलते हैं।
ये प्रक्रियाएँ बाह्य क्रोड में संवहन को ऊर्जा देती हैं।
आंतरिक क्रोड और भू-चुंबकीय क्षेत्र
आंतरिक क्रोड स्वयं पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का मुख्य स्रोत नहीं है।
मुख्य भू-चुंबकीय क्षेत्र द्रव बाह्य क्रोड में सक्रिय भू-डायनेमो से उत्पन्न होता है।
लेकिन आंतरिक क्रोड का धीरे-धीरे बढ़ना बाह्य क्रोड में संवहन को ऊर्जा देता है।
इसलिए—
आंतरिक क्रोड अप्रत्यक्ष रूप से भू-डायनेमो और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के दीर्घकालीन अस्तित्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
आंतरिक क्रोड की आयु
आंतरिक क्रोड पृथ्वी जितना पुराना नहीं है।
पृथ्वी लगभग 4.54 अरब वर्ष पुरानी है, लेकिन आंतरिक क्रोड बाद में पृथ्वी के ठंडा होने के दौरान बना।
आधुनिक वैज्ञानिक अनुमानों में इसकी आयु को लेकर अनिश्चितता है।
विभिन्न मॉडलों में इसे लगभग कुछ सौ मिलियन वर्ष से लगभग 1–1.5 अरब वर्ष के क्रम में रखा गया है।
UPSC/BPSC के लिए किसी एक निश्चित संख्या को अंतिम तथ्य की तरह याद करना उचित नहीं है।
परीक्षा में सुरक्षित कथन है—
आंतरिक क्रोड पृथ्वी के प्रारंभिक निर्माण के बाद, क्रोड के क्रमिक शीतलन और क्रिस्टलीकरण से विकसित हुआ।
क्या आंतरिक क्रोड घूमता है?
आंतरिक क्रोड पृथ्वी के बाकी भागों के साथ घूमता है, लेकिन शोध से संकेत मिला है कि वह मैंटल के सापेक्ष थोड़ा अलग गति से भी घूम सकता है।
इसे डिफरेंशियल रोटेशन कहा जाता है।
कुछ अवधियों में आंतरिक क्रोड मैंटल की तुलना में थोड़ा तेज और कुछ अवधियों में थोड़ा धीमा घूम सकता है।
इस अंतर की मात्रा बहुत छोटी है, लेकिन दशकों के भूकंपीय रिकॉर्ड से इसे समझने का प्रयास किया जाता है।
2025 का महत्वपूर्ण शोध — आकार में सूक्ष्म परिवर्तन
फरवरी 2025 में Nature Geoscience में प्रकाशित अध्ययन ने 1991 से 2024 के बीच दोहराए गए भूकंपों के सीस्मोग्रामों का विश्लेषण किया।
अध्ययन में संकेत मिला कि आंतरिक क्रोड की ऊपरी सतह पूरी तरह स्थिर नहीं हो सकती।
बाह्य क्रोड के द्रव प्रवाह के प्रभाव से आंतरिक क्रोड की बाहरी सीमा पर बहुत छोटे पैमाने की श्यान विकृति या आकार परिवर्तन संभव है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि पूरा आंतरिक क्रोड पिघला हुआ है।
मुख्य आंतरिक क्रोड अभी भी ठोस माना जाता है।
यह खोज केवल यह दर्शाती है कि उसकी सतही सीमा अपेक्षा से अधिक गतिशील हो सकती है।
2026 का समसामयिक अद्यतन — आंतरिक क्रोड का सापेक्ष घूर्णन
2026 में Geophysical Research Letters में प्रकाशित दीर्घकालीन अध्ययन ने 1982 से 2024 तक के दोहराए गए भूकंपों का विश्लेषण किया।
अध्ययन के अनुसार—
- 1980 के दशक में आंतरिक क्रोड मैंटल की तुलना में कुछ तेज घूम रहा था,
- बाद में इसकी सापेक्ष गति कम हुई,
- लगभग 2000 के आसपास अंतर बहुत कम हुआ,
- लगभग 2010 के बाद कुछ आँकड़े मैंटल की तुलना में धीमी सापेक्ष गति का संकेत देते हैं।
यह परिणाम कई दशकों के दोलनशील डिफरेंशियल रोटेशन मॉडल के अनुरूप है।
महत्वपूर्ण सावधानी
समाचारों में इसे कई बार “आंतरिक क्रोड ने घूमना बंद कर दिया” या “उल्टा घूमने लगा” लिखा जाता है।
यह भ्रामक है।
सही अर्थ है—
आंतरिक क्रोड की गति पृथ्वी के मैंटल के सापेक्ष बदलती है। पूरा आंतरिक क्रोड अचानक स्थिर नहीं हो जाता और पृथ्वी के विपरीत दिशा में सामान्य अर्थ में घूमना शुरू नहीं करता।
यह UPSC Mains में उपयोगी वैज्ञानिक सावधानी है।
आंतरिक क्रोड और दिन की लंबाई
आंतरिक क्रोड, बाह्य क्रोड और मैंटल के बीच कोणीय संवेग का आदान-प्रदान पृथ्वी के घूर्णन में अत्यंत छोटे परिवर्तन से जुड़ सकता है।
इससे दिन की लंबाई में मिलीसेकंड के स्तर पर परिवर्तन हो सकते हैं।
लेकिन दिन की लंबाई को प्रभावित करने वाले कई अन्य कारक भी हैं—
- वायुमंडलीय परिसंचरण,
- महासागरीय धाराएँ,
- चंद्र ज्वार,
- क्रोड–मैंटल अंतःक्रिया।
इसलिए दिन की लंबाई में हर परिवर्तन को केवल आंतरिक क्रोड से जोड़ना गलत होगा।
आंतरिक क्रोड और बाह्य क्रोड में अंतर
| आधार | बाह्य क्रोड | आंतरिक क्रोड |
|---|---|---|
| गहराई | 2,900–5,150 किमी | 5,150–6,371 किमी |
| अवस्था | द्रव | ठोस |
| प्रमुख पदार्थ | लौह-निकेल + हल्के तत्व | ठोस लौह-निकेल प्रधान |
| S-तरंग | नहीं गुजरती | प्रत्यक्ष S-तरंग अध्ययन जटिल; ठोस अवस्था भूकंपीय प्रमाणों से ज्ञात |
| चुंबकीय भूमिका | भू-डायनेमो का मुख्य क्षेत्र | संवहन को ऊर्जा देकर अप्रत्यक्ष योगदान |
| प्रमुख सीमा | ऊपर गुटेनबर्ग | ऊपर लेहमैन/आंतरिक क्रोड सीमा |
सत्यापित UPSC Prelims PYQ
UPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा, 2009
प्रश्न:
“पृथ्वी की संरचना में मैंटल के नीचे स्थित क्रोड मुख्यतः निम्नलिखित में से किससे बना है?”
विकल्प—
- एल्युमिनियम
- क्रोमियम
- लौह
- सिलिकॉन
सही उत्तर: लौह।
यह पूरे क्रोड की संरचना पर प्रत्यक्ष प्रश्न था और आंतरिक क्रोड की लौह-प्रधान संरचना के लिए भी प्रासंगिक है।
आंतरिक क्रोड पर प्रत्यक्ष UPSC Prelims PYQ
उपलब्ध सत्यापित CSE Prelims प्रश्नपत्रों में “आंतरिक क्रोड की ठोस अवस्था/लेहमैन सीमा/आंतरिक क्रोड के घूर्णन” पर अलग से प्रत्यक्ष प्रश्न सत्यापित नहीं मिला।
इसलिए कोई अभ्यास प्रश्न PYQ के नाम से नहीं जोड़ा गया है।
सत्यापित UPSC Mains PYQ
UPSC सामान्य अध्ययन मुख्य परीक्षा में इस सूक्ष्म उपविषय “आंतरिक क्रोड” पर प्रत्यक्ष सत्यापित प्रश्न नहीं मिला।
Geography Optional में पृथ्वी के आंतरिक भाग और भूकंपीय प्रमाणों पर व्यापक प्रश्न पूछे गए हैं, लेकिन उन्हें कृत्रिम रूप से आंतरिक-क्रोड विशिष्ट PYQ नहीं माना गया है।
इसलिए यहाँ कोई अनुमानित प्रश्न नहीं जोड़ा गया है।
सत्यापित BPSC Prelims PYQ
67वीं BPSC संयुक्त प्रतियोगिता पुनर्परीक्षा, 2022
प्रश्न:
“पृथ्वी की आंतरिक परत के निर्माण में कौन-से तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं?”
विकल्पों में—
- सिलिका और मैग्नीशियम
- बेसाल्ट और सिलिका
- निकेल और फेरम
- सिलिका और एल्युमिनियम
दिए गए थे।
सही उत्तर: निकेल और फेरम।
यह पृथ्वी के क्रोड की पारंपरिक NiFe संरचना से संबंधित वास्तविक BPSC Prelims PYQ है।
आधुनिक विज्ञान के अनुसार क्रोड में लौह और निकेल के साथ कुछ हल्के तत्व भी होते हैं।
आंतरिक क्रोड पर प्रत्यक्ष BPSC Prelims PYQ
आंतरिक क्रोड की ठोस अवस्था, अनैसोट्रॉपी या लेहमैन सीमा पर अलग से प्रत्यक्ष, वर्ष-सहित BPSC CCE Prelims PYQ सत्यापित नहीं मिला।
सत्यापित BPSC Mains PYQ
BPSC सामान्य अध्ययन मुख्य परीक्षा में आंतरिक क्रोड पर प्रत्यक्ष सत्यापित प्रश्न नहीं मिला।
68वीं BPSC Geology Optional में बाह्य क्रोड के द्रव होने पर प्रश्न था, लेकिन वह आंतरिक क्रोड पर नहीं था; इसलिए उसे यहाँ नहीं दोहराया गया है।
किसी अनुमानित प्रश्न को PYQ के नाम से शामिल नहीं किया गया है।
Prelims के लिए अंतिम तथ्य
आंतरिक क्रोड लगभग 5,150–6,371 किमी गहराई में स्थित है।
इसकी त्रिज्या लगभग 1,220 किमी है।
यह पृथ्वी का केंद्रीय और सबसे घना प्रमुख भाग है।
आंतरिक क्रोड ठोस है।
अत्यधिक तापमान के बावजूद अत्यधिक दबाव के कारण यह ठोस रहता है।
यह मुख्यतः लौह-निकेल से बना है।
लेहमैन असांतत्य बाह्य और आंतरिक क्रोड की सीमा से संबंधित है।
इंगे लेहमैन ने 1936 में ठोस आंतरिक क्रोड की उपस्थिति का प्रस्ताव दिया।
आंतरिक क्रोड में भूकंपीय अनैसोट्रॉपी पाई जाती है।
आंतरिक क्रोड का विकास बाह्य क्रोड के क्रमिक क्रिस्टलीकरण से जुड़ा है।
आंतरिक क्रोड का बढ़ना बाह्य क्रोड के संवहन और भू-डायनेमो को ऊर्जा देने में योगदान करता है।
आंतरिक क्रोड का सापेक्ष घूर्णन समय के साथ बदल सकता है।
“आंतरिक क्रोड ने घूमना बंद कर दिया” जैसी लोकप्रिय भाषा वैज्ञानिक रूप से भ्रामक है।
Mains के लिए उत्तर-ढाँचा
यदि प्रश्न हो—
“आंतरिक क्रोड की भौतिक प्रकृति तथा पृथ्वी की गहरी गतिशीलता में उसकी भूमिका की विवेचना कीजिए।”
उत्तर का क्रम रखें—
भूमिका — 5,150 किमी के नीचे स्थित केंद्रीय ठोस क्रोड।
भूकंपीय प्रमाण — P-तरंगों और लेहमैन की खोज।
ठोस अवस्था — अत्यधिक दबाव।
संरचना — लौह-निकेल प्रधान, हल्के तत्व संभव।
अनैसोट्रॉपी — दिशानुसार भूकंपीय वेग अंतर।
विकास — बाह्य क्रोड के क्रिस्टलीकरण से वृद्धि।
चुंबकीय संबंध — भू-डायनेमो को अप्रत्यक्ष ऊर्जा।
समसामयिक मूल्यवर्धन — 2025 की सतही विकृति और 2026 का differential rotation अध्ययन।
निष्कर्ष — आंतरिक क्रोड ठोस होने के बावजूद गतिशील पृथ्वी प्रणाली का सक्रिय घटक है।
निष्कर्ष
आंतरिक क्रोड पृथ्वी का अत्यधिक दबाव वाला ठोस लौह-प्रधान केंद्रीय भाग है। इसकी खोज ने यह सिद्ध किया कि पृथ्वी का क्रोड एक समान द्रव क्षेत्र नहीं है। आधुनिक भूकंपीय अध्ययनों से अब यह स्पष्ट हो रहा है कि आंतरिक क्रोड में अनैसोट्रॉपी, सूक्ष्म सीमा-विकृति और समय के साथ सापेक्ष घूर्णन परिवर्तन जैसी जटिल गतिशीलताएँ भी मौजूद हैं। इस प्रकार आंतरिक क्रोड पृथ्वी के तापीय विकास, बाह्य क्रोड के संवहन और दीर्घकालीन भू-चुंबकीय व्यवहार को समझने की महत्वपूर्ण कड़ी है।