यूपीएससी भूगोल › भौतिक भूगोल › 1.4 खनिज, शैल और शैल चक्र › 1.4.3 अवसादी शैल › 1.4.3.5

1.4.3.5 जीवाश्म

प्राचीन जीवों के संरक्षित अवशेष, छाप, गतिविधि-चिह्न या उनके जैविक प्रमाणों को जीवाश्म (Fossils) कहा जाता है।

जीवाश्म पृथ्वी के जैविक इतिहास का प्रत्यक्ष अभिलेख हैं। इनसे जीवों के विकास, विलुप्ति, प्राचीन पर्यावरण, जलवायु तथा शैल-परतों की सापेक्ष आयु का अध्ययन किया जाता है।

जीवाश्म कहाँ अधिक मिलते हैं?

जीवाश्म मुख्यतः अवसादी शैलों में सुरक्षित मिलते हैं क्योंकि—

आग्नेय शैलों के उच्च ताप और तीव्र कायांतरण में जीवाश्म सामान्यतः नष्ट हो जाते हैं।

जीवाश्मीकरण की अनुकूल परिस्थितियाँ

जीवाश्म बनने के लिए अनुकूल स्थितियाँ—

हर मृत जीव जीवाश्म नहीं बनता। जीवाश्मीकरण एक दुर्लभ प्रक्रिया है।

जीवाश्म के प्रमुख प्रकार

वास्तविक अवशेष

मूल जीव का कुछ भाग सुरक्षित रह सकता है।

उदाहरण—

खनिज प्रतिस्थापन

मूल जैविक पदार्थ धीरे-धीरे खनिजों से प्रतिस्थापित हो सकता है।

उदाहरण—

शिलीकृत लकड़ी (Petrified Wood)

सांचा

जीव का खोल या शरीर घुल जाए लेकिन उसका बाहरी आकार शैल में सुरक्षित रह जाए तो सांचा (Mould) बनता है।

प्रतिरूप

सांचे में बाद में खनिज या तलछट भर जाए तो जीव के आकार की ठोस प्रतिकृति बनती है।

इसे प्रतिरूप (Cast) कहते हैं।

कार्बनीकरण

वनस्पति या नरम जीव का अधिकांश पदार्थ नष्ट होकर पतली कार्बन परत छोड़ सकता है।

छाप

पत्तियों, त्वचा या शरीर की सपाट छाप शैल में सुरक्षित हो सकती है।

चिह्न जीवाश्म

जीव के शरीर के बजाय उसकी गतिविधि का प्रमाण भी जीवाश्म हो सकता है।

इन्हें चिह्न जीवाश्म (Trace Fossils) कहते हैं।

उदाहरण—

परीक्षा-सावधानी

चिह्न जीवाश्म जीव का शरीर नहीं, उसकी गतिविधि का प्रमाण है।

सूक्ष्मजीवाश्म

बहुत छोटे जीवाश्म जिन्हें देखने के लिए सूक्ष्मदर्शी की आवश्यकता होती है, सूक्ष्मजीवाश्म (Microfossils) कहलाते हैं।

उदाहरण—

इनका महत्व—

में बहुत अधिक है।

सूचक जीवाश्म

ऐसा जीवाश्म जो—

वह सूचक जीवाश्म (Index Fossil) कहलाता है।

इसका उपयोग दूर-दूर स्थित शैल-परतों का काल-सहसंबंध करने में किया जाता है।

जीवाश्म उत्तराधिकार का सिद्धांत

जीवों के समूह भूवैज्ञानिक समय में निश्चित क्रम में प्रकट और विलुप्त होते हैं।

इस क्रम को जीवाश्म उत्तराधिकार का सिद्धांत (Principle of Faunal Succession) कहा जाता है।

यह सापेक्ष आयु और शैल-परत सहसंबंध का आधार है।

जीवाश्म और पुरापर्यावरण

जीवाश्म बताते हैं कि शैल बनने के समय पर्यावरण कैसा था।

उदाहरण—

प्रवाल जीवाश्म → उथला, गर्म समुद्री जल।

परागकण → स्थल वनस्पति और जलवायु।

फोरामिनिफेरा → समुद्री पर्यावरण और जल-गहराई।

कोयला वनस्पति → दलदली, वनस्पति-संपन्न परिवेश।

भारत के महत्वपूर्ण जीवाश्म क्षेत्र

शिवालिक

शिवालिक शैल समूह स्तनधारी जीवाश्मों के लिए प्रसिद्ध है।

कच्छ

कच्छ क्षेत्र समुद्री जीवाश्मों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

स्पीति और हिमालय

समुद्री जीवाश्म प्राचीन टेथिस समुद्र के प्रमाण देते हैं।

नर्मदा घाटी

डायनासोर, अंडे और अन्य कशेरुकी जीवाश्मों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र।

विंध्य महासमूह

सूक्ष्मजीवाश्म और प्राचीन जीवन के संभावित अभिलेखों के कारण महत्वपूर्ण।

जीवाश्म और प्लेट विवर्तनिकी

हिमालय में समुद्री जीवाश्मों का ऊँची पर्वतीय शैलों में मिलना बताता है कि ये शैलें कभी समुद्र तल पर थीं।

भारतीय और यूरेशियाई प्लेटों की टक्कर ने इन समुद्री अवसादों को ऊपर उठाया।

जीवाश्म और विलुप्तियाँ

शैल-परतों में जीवाश्मों का अचानक गायब होना सामूहिक विलुप्ति घटनाओं का संकेत दे सकता है।

जीवाश्म अभिलेख पृथ्वी की प्रमुख सामूहिक विलुप्ति घटनाओं की पहचान का आधार है।

2026 का समसामयिक अद्यतन

2026 में भारतीय पुराजीव विज्ञान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और गहन शिक्षण का उपयोग सूक्ष्मजीवाश्म, परागकण और जीवाश्म-छवियों की पहचान के लिए उभरते क्षेत्र के रूप में सामने आया।

मध्य गंगा मैदान और भारतीय मानसून क्षेत्र में आधुनिक पराग–वनस्पति संबंधों के अध्ययन से प्राचीन वनस्पति और जलवायु के जीवाश्मीय अभिलेखों की व्याख्या अधिक सटीक की जा रही है।

परीक्षा-योग्य संबंध

परागकण सूक्ष्मजीवाश्म के रूप में पुराजलवायु पुनर्निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

सत्यापित UPSC प्रारंभिक परीक्षा PYQ

UPSC प्रारंभिक परीक्षा, 2001

अवसादी शैलों के संबंध में कथन था कि इनमें जीवाश्म मिल सकते हैं

यह कथन सही था।

सत्यापित UPSC मुख्य परीक्षा PYQ

UPSC भूविज्ञान वैकल्पिक के हाल के प्रश्नों में जीवाश्मीकरण की अनुकूल परिस्थितियाँ और भारतीय गोंडवाना पौध जीवाश्म पूछे गए हैं।

इसे सामान्य अध्ययन मुख्य परीक्षा का प्रश्न नहीं समझना चाहिए।

सत्यापित BPSC प्रारंभिक परीक्षा PYQ

इस सूक्ष्म विषय पर प्रत्यक्ष, विश्वसनीय रूप से सत्यापित BPSC CCE प्रारंभिक प्रश्न नहीं मिला।

सत्यापित BPSC मुख्य परीक्षा PYQ

प्रत्यक्ष सत्यापित प्रश्न नहीं मिला।

प्रारंभिक परीक्षा के अंतिम तथ्य

जीवाश्म सबसे अधिक अवसादी शैलों में सुरक्षित मिलते हैं।

सूचक जीवाश्म शैल-परतों का सहसंबंध करने में उपयोगी हैं।

चिह्न जीवाश्म गतिविधि का प्रमाण हैं।

परागकण और फोरामिनिफेरा सूक्ष्मजीवाश्म हैं।

शिवालिक स्तनधारी जीवाश्मों के लिए प्रसिद्ध है।

कच्छ समुद्री जीवाश्मों के लिए महत्वपूर्ण है।

नर्मदा क्षेत्र डायनासोर जीवाश्मों के लिए प्रसिद्ध है।

निष्कर्ष

जीवाश्म पृथ्वी के प्राचीन जीवन और पर्यावरण की समय-मुद्राएँ हैं। इनसे जैविक विकास, विलुप्ति, पुराजलवायु, प्राचीन समुद्र और शैल-परतों की आयु का पुनर्निर्माण किया जाता है।