1.5.5.2 मैंटल प्लूम
मैंटल के गहरे भाग से आसपास की तुलना में अधिक गर्म और कम घनत्व वाला पदार्थ स्तंभाकार रूप में ऊपर उठे तो इसे मैंटल उष्ण स्तंभ (Mantle Plume) कहा जाता है।
यह अवधारणा प्लेट के आंतरिक ज्वालामुखी, कुछ विशाल आग्नेय प्रांतों और दीर्घकालीन उष्ण बिंदु शृंखलाओं को समझाने के लिए उपयोग की जाती है।
अवधारणा का विकास
उष्ण बिंदुओं को प्लेट गति के संकेतक के रूप में समझाने में तुजो विल्सन का महत्वपूर्ण योगदान था।
बाद में डब्ल्यू. जेसन मॉर्गन ने गहरे मैंटल प्लूम को प्लेट विवर्तनिकी से जोड़कर व्यवस्थित मॉडल विकसित किया।
प्लूम की आदर्श संरचना
सिर
विशाल मशरूम-जैसा गर्म भाग।
स्थलमंडल से टकराने पर बड़े पैमाने के पिघलाव और बाढ़-बेसाल्ट से जोड़ा जाता है।
पूँछ
लंबा संकरा गर्म स्तंभ।
लंबे समय तक स्थानीय उष्ण बिंदु ज्वालामुखिता बनाए रख सकता है।
परीक्षा-सावधानी
यह आदर्श मॉडल है।
वास्तविक प्लूम—
- झुक सकते हैं,
- विभाजित हो सकते हैं,
- आसपास के मैंटल प्रवाह से विकृत हो सकते हैं,
- समय के साथ कमजोर–मजबूत हो सकते हैं।
प्लूम कहाँ से शुरू होते हैं?
परंपरागत गहरे प्लूम मॉडल में स्रोत—
- क्रोड–मैंटल सीमा,
- विशाल निम्न-कतरनी-वेग प्रदेशों के किनारे
के आसपास माना जाता है।
लेकिन सभी उष्ण बिंदुओं के लिए इतना गहरा स्रोत सिद्ध नहीं है।
कुछ ज्वालामुखिता ऊपरी मैंटल की उथली प्रक्रियाओं से भी समझाई जा सकती है।
प्रमाण
भूकंपीय टोमोग्राफी
धीमे भूकंपीय वेग वाले गर्म क्षेत्रों को गहरे मैंटल तक खोजने का प्रयास।
भू-रसायन
हीलियम, नियोन, आर्गन और अन्य समस्थानिक गहरे पृथ्वी स्रोतों का संकेत दे सकते हैं।
आयु-क्रम वाली ज्वालामुखीय शृंखला
हवाई जैसे क्षेत्र प्लेट के नीचे दीर्घकालीन स्रोत का संकेत देते हैं।
विशाल आग्नेय प्रांत
बहुत कम भूवैज्ञानिक समय में विशाल लावा मात्रा गहरी ऊष्मीय असामान्यता का संकेत हो सकती है।
विशाल निम्न-कतरनी-वेग प्रदेश
निचले मैंटल में अफ्रीका और प्रशांत के नीचे दो विशाल क्षेत्र हैं जहाँ कतरनी तरंगों का वेग कम है।
इन्हें विशाल निम्न-कतरनी-वेग प्रदेश (Large Low-Shear-Velocity Provinces) कहा जाता है।
कई गहरे प्लूम इनके किनारों या ऊपर से जुड़े पाए जाते हैं।
2026 — वैश्विक समुद्री पर्वत अध्ययन
जून 2026 के Nature Geoscience अध्ययन ने पाया कि समुद्री पर्वत ज्वालामुखिता उन महासागरीय प्लेटों पर अधिक रही जो इन विशाल गहरे मैंटल संरचनाओं के ऊपर से गुजरी थीं।
प्रशांत गहरे प्रदेश के ऊपर प्रभाव अधिक स्पष्ट मिला।
इससे गहरे मैंटल संरचना और अंतःप्लेट ज्वालामुखिता के बीच सांख्यिकीय संबंध मजबूत हुआ।
2026 — हवाई
2026 के हवाई अध्ययन ने सुझाव दिया कि गहरे मैंटल के अधिक श्यान प्राचीन पदार्थ प्लूम को द्विपक्षीय रूप से विषम बना सकते हैं।
इससे हवाई की लोआ और केआ दोहरी ज्वालामुखीय पट्टियों की व्याख्या संभव हुई।
2026 — आइसलैंड
आइसलैंड प्लूम का प्रभाव भूवैज्ञानिक समय में कमजोर और फिर मजबूत हुआ।
यह स्थिर-शक्ति वाले प्लूम की सरल धारणा को चुनौती देता है।
2026 — रीयूनियन प्लूम और मध्य भारतीय कटक
जुलाई 2026 के Earth and Planetary Science Letters अध्ययन ने मध्य भारतीय कटक के लगभग 20° दक्षिण क्षेत्र के बेसाल्टिक काँच में हीलियम–नियोन–आर्गन–जेनॉन संकेतों से रीयूनियन प्लूम प्रभाव की पहचान की।
परीक्षा-योग्य मूल्यवर्धन
प्लूम का प्रभाव केवल सीधे उष्ण बिंदु के नीचे नहीं; आसपास के मध्य-महासागरीय कटक तक भी भू-रासायनिक संकेत पहुँचा सकता है।
भारत और दक्कन
दक्कन ज्वालामुखिता को प्रमुख रूप से रीयूनियन प्लूम के प्रारंभिक विशाल प्रकरण से जोड़ा जाता है।
2025–26 के भारतीय भूभौतिकीय अध्ययनों में पश्चिमी भारतीय शील्ड के नीचे पुराने प्लूम–स्थलमंडल संपर्क के अवशिष्ट संकेतों का अध्ययन किया गया।
प्लूम सिद्धांत की सीमाएँ
हर अंतःप्लेट ज्वालामुखी गहरे प्लूम से नहीं जुड़ता।
कुछ क्षेत्रों में—
- स्थलमंडलीय विस्तार,
- उथला मैंटल संवहन,
- किनारी प्रवाह,
- पुरानी कमजोरियाँ
भी पिघलाव करा सकती हैं।
इसलिए “हर हॉटस्पॉट = गहरा प्लूम” गलत सरलीकरण है।
सत्यापित संघ लोक सेवा आयोग प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न
प्रत्यक्ष प्रश्न स्पष्ट रूप से सत्यापित नहीं मिला।
सत्यापित संघ लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा प्रश्न
सामान्य अध्ययन-I, 2018
मैंटल प्लूम की परिभाषा दीजिए और प्लेट विवर्तनिकी में इसकी भूमिका स्पष्ट कीजिए।
यह इस सूक्ष्म विषय का प्रत्यक्ष प्रश्न है।
सत्यापित बिहार लोक सेवा आयोग प्रारंभिक परीक्षा PYQ
प्रत्यक्ष सत्यापित प्रश्न नहीं मिला।
सत्यापित बिहार लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा PYQ
प्रत्यक्ष सत्यापित प्रश्न नहीं मिला।
प्रारंभिक परीक्षा के अंतिम तथ्य
प्लूम = गर्म उर्ध्वगामी मैंटल पदार्थ।
आदर्श भाग—सिर और पूँछ।
हवाई, आइसलैंड, रीयूनियन प्रमुख उदाहरण।
दक्कन → रीयूनियन प्लूम से प्रमुख रूप से संबद्ध।
सभी उष्ण बिंदुओं के लिए गहरे प्लूम का प्रमाण समान नहीं।
निष्कर्ष
मैंटल उष्ण स्तंभ पृथ्वी के गहरे और सतही भागों को जोड़ने वाली संभावित ऊष्मीय–रासायनिक संरचनाएँ हैं। 2026 के भू-रासायनिक, टोमोग्राफिक और ज्वालामुखीय अध्ययन इन्हें स्थिर सरल स्तंभों की बजाय समय के साथ बदलती और गहरे मैंटल विषमताओं से प्रभावित प्रणालियों के रूप में दिखाते हैं।