1.5.5.1 हॉटस्पॉट ज्वालामुखिता
प्लेट की सामान्य सीमा से दूर किसी अपेक्षाकृत स्थानीय उष्ण क्षेत्र में बार-बार मैग्मा ऊपर आने से होने वाली ज्वालामुखीय गतिविधि को उष्ण बिंदु ज्वालामुखिता (Hotspot Volcanism) कहा जाता है।
यह ज्वालामुखिता कई बार मैंटल के गहरे गर्म स्तंभ से जुड़ी होती है, लेकिन सभी उष्ण बिंदुओं की उत्पत्ति एक जैसी नहीं मानी जाती।
मुख्य विशेषताएँ
उष्ण बिंदु ज्वालामुखिता—
- प्लेट के आंतरिक भाग में हो सकती है,
- लंबे समय तक सक्रिय रह सकती है,
- ज्वालामुखीय द्वीप या समुद्री पर्वत शृंखला बना सकती है,
- प्लेट गति का अभिलेख दे सकती है।
महासागरीय उष्ण बिंदु
महासागरीय स्थलमंडल के नीचे गर्म पदार्थ ऊपर आए तो दाबमुक्त पिघलाव से बेसाल्टिक मैग्मा बन सकता है।
इससे ढालाकार ज्वालामुखी विकसित होते हैं।
हवाई
विश्व का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण।
हवाई के सक्रिय ज्वालामुखी प्रशांत प्लेट के भीतर स्थित हैं।
किलाउएआ और मौना लोआ बेसाल्टिक ढाल ज्वालामुखियों के प्रमुख उदाहरण हैं।
ढाल ज्वालामुखी
कम श्यान बेसाल्टिक लावा दूर तक फैल सकता है।
इससे चौड़ा और कम ढाल वाला ढाल ज्वालामुखी (Shield Volcano) बनता है।
हवाई इसका आदर्श उदाहरण है।
महाद्वीपीय उष्ण बिंदु
उष्ण बिंदु महाद्वीपीय स्थलमंडल के नीचे भी हो सकता है।
महाद्वीपीय पर्पटी मोटी और रासायनिक रूप से विविध होने के कारण मैग्मा विकास जटिल हो सकता है।
येलोस्टोन
उत्तर अमेरिकी प्लेट के भीतर प्रसिद्ध उदाहरण।
यह विशाल कैल्डेरा ज्वालामुखिता से जुड़ा है।
यहाँ अत्यधिक सिलिका-समृद्ध विस्फोट भी हुए हैं।
हॉटस्पॉट ट्रैक
यदि प्लेट उष्ण बिंदु के ऊपर से चलती रहे तो क्रमिक ज्वालामुखियों की आयु बढ़ती जाती है।
युवा सक्रिय ज्वालामुखी वर्तमान उष्ण बिंदु के निकट।
पुराने निष्क्रिय ज्वालामुखी प्लेट गति की दिशा में दूर।
हवाई–सम्राट मोड़
हवाई–सम्राट शृंखला में लगभग 47 मिलियन वर्ष पहले के क्रम का स्पष्ट मोड़ है।
पहले इसे प्रशांत प्लेट गति की दिशा में अचानक परिवर्तन का संकेत माना गया।
आधुनिक शोध बताता है कि उष्ण बिंदु स्वयं भी कुछ हद तक गतिशील रहा हो सकता है।
इसलिए मोड़ में प्लेट गति और प्लूम गति दोनों का योगदान संभव है।
2026 — हवाई की दोहरी ज्वालामुखीय पट्टियाँ
जून 2026 के Nature Communications अध्ययन ने हवाई के पिछले लगभग 5–7 मिलियन वर्ष के ज्वालामुखियों में दो समानांतर प्रवृत्तियों—लोआ और केआ—की व्याख्या के लिए गहरे मैंटल के रासायनिक रूप से अलग, अधिक श्यान पदार्थ के प्लूम संरचना पर प्रभाव का मॉडल प्रस्तुत किया।
मुख्य संदेश—
उष्ण बिंदु का प्लूम एक साधारण सममित गोल स्तंभ होना आवश्यक नहीं।
गहरे मैंटल की संरचनात्मक विषमता सतह पर दोहरी ज्वालामुखीय पट्टियाँ बना सकती है।
2026 — आइसलैंड
मई 2026 के अध्ययन ने महासागरीय ड्रिलिंग से प्राप्त बेसाल्टों के आधार पर दिखाया कि आइसलैंड प्लूम का प्रभाव भूवैज्ञानिक समय में स्थिर नहीं रहा।
लगभग 55 मिलियन वर्ष पहले महाद्वीपीय विखंडन के बाद इसका प्रभाव घटा, लगभग 38 मिलियन वर्ष पहले तेजी से कमजोर हुआ और बाद में पुनः मजबूत हुआ।
परीक्षा-योग्य संदेश
प्लूम ज्वालामुखिता की तीव्रता भूवैज्ञानिक समय में बदल सकती है।
रीयूनियन और भारत
रीयूनियन उष्ण बिंदु भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
दक्कन बाढ़-बेसाल्ट का निर्माण लगभग 66 मिलियन वर्ष पहले भारत के रीयूनियन प्लूम क्षेत्र के ऊपर होने से जोड़ा जाता है।
भारत के उत्तर की ओर बढ़ने के बाद हिंद महासागर में क्रमिक ज्वालामुखीय अभिलेख विकसित हुए।
उष्ण बिंदु ज्वालामुखिता और विशाल आग्नेय प्रांत
प्लूम-सिर की विशाल प्रारंभिक ज्वालामुखिता बाढ़-बेसाल्ट बना सकती है।
उदाहरण—
- दक्कन,
- साइबेरियन ट्रैप जैसी प्रणालियाँ।
लेकिन सभी विशाल आग्नेय प्रांतों की उत्पत्ति पर समान प्लूम मॉडल लागू करना विवादरहित नहीं है।
प्लेट सीमाओं से अंतर
हवाई — प्लेट आंतरिक।
आइसलैंड — प्लेट सीमा + प्लूम।
येलोस्टोन — महाद्वीपीय प्लेट आंतरिक।
इसलिए उष्ण बिंदु केवल “प्लेट से दूर ज्वालामुखी” की संकीर्ण परिभाषा में सीमित नहीं है।
सत्यापित संघ लोक सेवा आयोग प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न
प्रत्यक्ष उष्ण बिंदु ज्वालामुखिता प्रश्न स्पष्ट रूप से सत्यापित नहीं मिला।
सत्यापित संघ लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा प्रश्न
सामान्य अध्ययन-I, 2018
मैंटल प्लूम और प्लेट विवर्तनिकी पर प्रत्यक्ष प्रश्न उष्ण बिंदु ज्वालामुखिता से सीधे संबंधित है।
सत्यापित बिहार लोक सेवा आयोग प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न
प्रत्यक्ष सत्यापित प्रश्न नहीं मिला।
सत्यापित बिहार लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा प्रश्न
प्रत्यक्ष सत्यापित प्रश्न नहीं मिला।
प्रारंभिक परीक्षा के अंतिम तथ्य
हवाई = बेसाल्टिक उष्ण बिंदु।
येलोस्टोन = महाद्वीपीय उष्ण बिंदु।
आइसलैंड = कटक + प्लूम।
रीयूनियन = दक्कन से ऐतिहासिक संबंध।
उष्ण बिंदु पूर्णतः स्थिर नहीं।
हवाई में लोआ–केआ दोहरी पट्टियाँ हैं।
निष्कर्ष
उष्ण बिंदु ज्वालामुखिता प्लेट सीमाओं से बाहर की गहरी पृथ्वी गतिशीलता का महत्वपूर्ण संकेत है। हवाई, आइसलैंड और रीयूनियन के आधुनिक अध्ययन दिखाते हैं कि प्लूम समय और स्थान दोनों में बदल सकते हैं और उनकी आंतरिक संरचना अपेक्षा से कहीं अधिक जटिल हो सकती है।