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GS Paper-I • भौतिक भूगोल अध्याय 04 / 07 • Argon Complete Edition Prelims + 4 Mains Model Answers + 12 World Mapping + Quiz

4. ज्वालामुखी क्रिया और ज्वालामुखीय स्थलाकृतियाँ

Volcanism & Volcanic Landforms
🔥 मैग्मा: उत्पत्ति, रसायन व श्यानता 🌋 स्थलरूप: बहिर्वेधी + 7 अंतर्वेधी रूप 🗺️ मानचित्रण: स्रोत का मूल विश्व ज्वालामुखी मानचित्र ✍️ Mains: 4 पूर्ण मॉडल उत्तर

🧭 इस बार स्रोत सामग्री संक्षिप्त नहीं की गई है

इस अध्याय में Argon Complete Edition का पूरा Chapter 4 रखा गया है—विस्तृत व्याख्याएँ, सभी तालिकाएँ, 3 मूल हाई-रेज़ विज़ुअल्स, विश्व ज्वालामुखी मानचित्र, 12-स्थान Mapping Table, 6 Prelims Traps, 4 Mains Model Answers और solved MCQs सहित।

1. ज्वालामुखी क्रिया की मूल अवधारणा, मैग्मा उत्पत्ति, मैग्मा बनाम लावा तथा मैग्मा का रासायनिक वर्गीकरण

ज्वालामुखी क्रिया (Volcanism) एक व्यापक भूगर्भिक अंतर्जात प्रक्रम (Endogenic Process) है, जिसके अंतर्गत पृथ्वी के आंतरिक भाग (दुर्बलता मंडल/एस्थेनोस्फीयर व निचली क्रस्ट) से पिघले हुए शैल पदार्थ (मैग्मा), गैसें, जलवाष्प, राख और विखंडित पदार्थ ऊपर उठते हैं तथा भूपर्पटी की दरारों या निकास नलिका (Vent) के माध्यम से धरातल पर प्रकट होते हैं।

📌 मैग्मा बनाम लावा (Magma vs. Lava — मूल अंतर):

  • मैग्मा (Magma): भू-सतह के नीचे स्थित गलित व अर्ध-गलित शैल मिश्रण (Molten/Semi-molten Rock), जिसमें अत्यधिक दबाव के कारण घुली हुई गैसें (Dissolved Volatiles যেমন H₂O, CO₂, SO₂), खनिज क्रिस्टल और वाष्प समाहित रहते हैं।
  • लावा (Lava): जब मैग्मा विवर्तनिक संचलन या विस्फोट के द्वारा भू-पृष्ठ (Surface) पर बाहर निकल आता है और वायुमंडलीय दाब के संपर्क में आता है, तो इसमें घुली गैसें तेजी से वायुमंडल में विमुक्त हो जाती हैं; इस सतह पर प्रवाहित होने वाले तरल शैल पदार्थ को लावा कहते हैं।

🔬 मेंटल में मैग्मा उत्पत्ति के 3 प्रमुख भौतिक-रासायनिक प्रक्रम (Mechanisms of Magma Generation)

सामान्यतः पृथ्वी का मेंटल अत्यधिक उच्च लिथोस्टैटिक दाब (Lithostatic Pressure) के कारण ठोस अवस्था में रहता है। मेंटल शैलों (मुख्यतः पेरिडोटाइट) के पिघलने के लिए निम्नलिखित तीन में से किसी एक विवर्तनिक स्थिति का होना अनिवार्य है:

1. विदाबन गलन (Decompression Melting)

कहाँ: मध्य-महासागरीय कटकों (MOR) और मेंटल हॉटस्पॉट्स पर।
यांत्रिकी: जब संवहनीय धाराओं द्वारा गर्म एस्थेनोस्फीयर ऊपर उठता है, तो तापमान स्थिर रहने के बावजूद दाब में भारी गिरावट आती है। दाब घटने से पेरिडोटाइट का गलनांक (Melting Point) कम हो जाता है और यह बिना अतिरिक्त ताप के पिघलकर तरल बेसाल्टिक मैग्मा बनाता है।

2. फ्लक्स गलन / जल-योजित गलन (Flux Melting)

कहाँ: सबडक्शन ज़ोन (Benioff Zones) पर।
यांत्रिकी: जब नम महासागरीय प्लेट नीचे धँसती है, तो तलछटों में फँसा समुद्री जल और हाइड्रेटेड खनिज (सर्पेंटाइन) विमुक्त होकर ऊपर स्थित मेंटल वेज (Mantle Wedge) में प्रवेश करते हैं। जल एक 'फ्लक्स' की तरह कार्य करता है और मेंटल शैलों के गलनांक को 200°C–400°C घटा देता है, जिससे एंडिसिटिक मैग्मा उत्पन्न होता है।

3. तापीय चालन गलन (Thermal Melting / Crustal Anatexis)

कहाँ: महाद्वीपीय रिफ्टिंग और महाद्वीपीय चाप के आधार पर।
यांत्रिकी: जब गहरे मेंटल से अति-तप्त बेसाल्टिक मैग्मा (1200°C) ऊपर उठकर महाद्वीपीय क्रस्ट (ग्रेनाइटिक आधार) के नीचे जमा होता है, तो इसके सीधे ताप संपर्क से अपेक्षाकृत कम गलनांक (700°C) वाली महाद्वीपीय क्रस्ट पिघलकर उच्च-सिलिका युक्त रायोलाइटिक मैग्मा का निर्माण करती है।

📊 मैग्मा एवं लावा का रासायनिक वर्गीकरण (Chemical Classification Table)

मैग्मा का भौतिक स्वभाव, उसकी श्यानता (चिपचिपापन) और उद्गार की विस्फोटक प्रकृति मुख्यतः उसमें उपस्थित सिलिका (SiO₂) के प्रतिशत पर निर्भर करती है:

गुण / पैरामीटर फेलसिक / अम्लीय (Acidic) मध्यवर्ती (Intermediate) मैफिक / क्षारीय (Basic) अल्ट्रा-मैफिक (Ultramafic)
सिलिका (SiO₂) प्रतिशत > 65% (65%–75%+) 52% से 65% 45% से 52% < 45%
तापमान (Temperature) निम्न (650°C – 800°C) मध्यम (800°C – 1000°C) अति-उच्च (1000°C – 1200°C) > 1200°C
श्यानता (Viscosity / चिपचिपापन) अत्यधिक उच्च (गाढ़ा व चिपचिपा); आसानी से नहीं बहता मध्यम अत्यंत निम्न (तरल व पतला); जल की भाँति तेजी से फैलता है अत्यंत निम्न (अति-तरल)
गैस विमुक्ति व उद्गार स्वभाव गैसें फँस जाती हैं ➔ प्रचंड विस्फोटक (Explosive/Plinian) मध्यम विस्फोटक (Vulcanian) गैसें आसानी से निकल जाती हैं ➔ शांत दरारी प्रवाह (Effusive) शांत प्रवाह
रंग व घनत्व (Density) हल्का रंग, घनत्व 2.6 – 2.7 g/cm³ धूसर/मध्यम, घनत्व ~2.8 g/cm³ गहरा काला/भूरा, घनत्व 2.9 – 3.1 g/cm³ गहरा हरा, घनत्व > 3.3 g/cm³
प्रतिनिधि चट्टान (Rock Type) ग्रेनाइट (प्लूटोनिक) / रायोलाइट (ज्वालामुखीय) डायोराइट / एंडीसाइट (Andesite) गैब्रो (प्लूटोनिक) / बेसाल्ट (Basalt) पेरिडोटाइट / कोमाटाइट
निर्मित प्रमुख स्थलाकृतियाँ लावा गुंबद (Domes), काल्डेरा, राख शंकु, तीक्ष्ण प्लग मिश्रित/स्ट्रैटो शंकु (Composite Stratovolcanoes) विशाल शील्ड ज्वालामुखी, लावा पठार (Flood Basalts) प्राचीन भूगर्भिक परतें (आर्कियन ग्रीनस्टोन)
वैश्विक उदाहरण माउंट सेंट हेलेंस, माउंट पिनातुबो, क्राकाटोआ माउंट फ़्यूजी (जापान), माउंट मयोन (फिलीपींस), माउंट एटना मौना लोआ व किलाउआ (हवाई), दक्कन ट्रैप (भारत), आइसलैंड ऊपरी मेंटल (Asthenosphere) का स्रोत

2. ज्वालामुखी उद्गार के प्रकार, उद्गार सूचकांक (VEI) और उद्गार की यांत्रिकी (Mechanisms of Eruptions)

ज्वालामुखी उद्गार मुख्य रूप से दो भौतिक कारकों द्वारा नियंत्रित होते हैं: (1) लावा की श्यानता (Viscosity), और (2) लावा में विलीन गैसों (Volatiles) की मात्रा व विमुक्ति की दर। उद्गार को दो प्रमुख श्रेणियों में बाँटा जाता है:

1. केंद्रीय विस्फोटक उद्गार (Central Vent Eruptions):

जब मैग्मा एक संकीर्ण पाइप या निकास नली (Conduit) से अत्यधिक गैसीय दबाव के साथ बाहर निकलता है। यदि मैग्मा चिपचिपा (अम्लीय) हो, तो निकास मार्ग अवरुद्ध होने से दबाव विस्फोटक सीमा तक बढ़ जाता है और महाविनाशकारी विस्फोट होता है (उदा. विसुवियस, क्राकाटोआ, सेंट हेलेंस)।

2. दरारी शांत उद्गार (Fissure / Linear Eruptions):

जब विवर्तनिक तनाव (Tensional Stress) के कारण भूपर्पटी में कई किलोमीटर लंबी दरारें पड़ जाती हैं और अत्यधिक तरल क्षारीय बेसाल्टिक लावा बिना किसी बड़े विस्फोट के शांत भाव से बहकर दूर-दूर तक फैल जाता है। इससे विशाल लावा पठार बनते हैं (उदा. दक्कन ट्रैप भारत, कोलंबिया पठार USA, आइसलैंड की लाकी दरार)।

🌋 केंद्रीय ज्वालामुखी उद्गारों के 5 प्रमुख प्रकार (विस्फोटकता के बढ़ते क्रम में)

1. हवाईयन प्रकार (Hawaiian) शांत / VEI 0–1

तरल क्षारीय बेसाल्ट लावा, कम गैस दबाव। लावा फव्वारे (Lava Fountains) और अग्नि झीलें (Lava Lakes) बनती हैं। हवा में उड़ते लावा के धागों को 'पेल के बाल' (Pele's Hair) और 'पेल के आँसू' (Pele's Tears) कहते हैं। उदा. मौना लोआ, किलाउआ।

2. स्ट्रॉम्बोलीयन (Strombolian) मध्यम / VEI 1–2

लावा कुछ कम तरल होता है। निकास नली में गैस के बड़े बुलबुले फटने से रुक-रुक कर सिंडर, बम और प्रदीप्त अंगारों के नियमित हल्के विस्फोट होते रहते हैं। रात में निरंतर चमकने के कारण स्ट्रॉम्बोली को 'भूमध्य सागर का प्रकाश स्तंभ' कहा जाता है।

3. वल्कैनियन (Vulcanian) विस्फोटक / VEI 2–4

लावा अत्यधिक चिपचिपा और श्यान होता है, जो दो उद्गारों के बीच निकास मुख पर ठोस डाट (Plug) बनाकर जम जाता है। नीचे संचित अत्यधिक गैस दबाव के फटने से फूलगोभी के आकार (Cauliflower-shaped) का विशाल काला राख का बादल बनता है। उदा. वल्केनो द्वीप (इटली)।

4. पीलियन प्रकार (Pelean) महाविनाशक / VEI 4–5

अत्यधिक चिपचिपा रायोलिटिक लावा जो निकास मार्ग में कठोर गुंबद बना लेता है। उद्गार पार्श्व (Lateral Blast) से टूटता है और अत्यंत घातक, अति-तप्त गैस व राख का क्षैतिज तूफान (Nuée Ardente / Glowing Cloud) 300+ km/h की गति से ढालों पर दौड़ता है। उदा. 1902 में मार्टिनिक का माउंट पीली।

5. प्लिनीयन व अल्ट्रा-प्लिनीयन प्रकार (Plinian / Ultra-Plinian) सर्वोच्च विस्फोटक / VEI 5–8

पृथ्वी पर सबसे भयानक और ऊर्जावान ज्वालामुखी विस्फोट। संचित गैसों के महाविस्फोट से राख, प्यूमिस और सल्फेट एरोसोल का स्तंभ समताप मंडल (Stratosphere में 30 से 55 km की ऊँचाई) तक पहुँच जाता है। यह पूरे महाद्वीप के मौसम को प्रभावित करता है और काल्डेरा धँसाव पैदा करता है। उदा. 79 ई. माउंट विसुवियस (पोम्पेई विनाश), 1883 क्राकाटोआ, 1815 माउंट तंबोरा ('बिना ग्रीष्म का वर्ष' - Year Without a Summer), 1991 माउंट पिनातुबो।

📈 ज्वालामुखी विस्फोटकता सूचकांक (Volcanic Explosivity Index - VEI) प्रतिपादक: क्रिस न्यूहॉल व स्टीव सेल्फ (1982)

VEI भूकंप के रिक्टर पैमाने की भाँति एक लघुगणकीय पैमाना (Open-ended Logarithmic Scale, 0 से 8) है, जहाँ प्रत्येक पूर्णांक वृद्धि उत्सर्जित ज्वालामुखीय पदार्थ (Tephra Volume) में 10 गुना वृद्धि को प्रदर्शित करती है:

VEI 0–1 (Non-explosive)

उत्सर्जन < 10,000 m³
बादल < 1 km (हवाईयन)

VEI 2–3 (Severe)

उत्सर्जन 10 लाख m³
बादल 1–15 km (स्ट्रॉम्बोली)

VEI 5–6 (Colossal)

उत्सर्जन > 1 km³ से 10 km³
सेंट हेलेंस (1980), पिनातुबो (1991)

VEI 7–8 (Mega-Colossal / Super)

उत्सर्जन > 1000 km³
तंबोरा (1815 = VEI 7), टोबा (VEI 8)

3. बहिर्वेधी ज्वालामुखीय स्थलाकृतियाँ (Extrusive Volcanic Landforms: Shield, Composite, Caldera, Lava Plateau)

जब मैग्मा भूपर्पटी से बाहर निकलकर धरातल पर ठंडा होकर जम जाता है, तो निर्मित संरचनाओं को बहिर्वेधी स्थलाकृतियाँ (Extrusive Landforms) कहते हैं। इनका आकार मुख्यतः लावा की रासायनिक संरचना (सिलिका प्रतिशत) और उद्गार की आवृत्ति पर निर्भर करता है:

ज्वालामुखी उद्गार के प्रकार और शंकु संरचना (Types of Volcanoes: Shield vs Composite vs Caldera)
चित्र 4.2: ज्वालामुखियों के प्रमुख संरचनात्मक प्रकार — शील्ड ज्वालामुखी (मंद ढाल, तरल बेसाल्ट, उदा. मौना लोआ), मिश्रित स्ट्रैटो शंकु (एकांतर लावा व राख की परतें, खड़ी सममित ढाल, उदा. माउंट फ़्यूजी), तथा काल्डेरा धँसाव (मैग्मा चैंबर खाली होने से शीर्ष का विशाल धँसाव)।

1. शील्ड ज्वालामुखी (Shield Volcanoes)

संरचना व ढाल: ये पृथ्वी पर विशालतम ज्वालामुखी हैं। इनका निर्माण अत्यंत तरल, कम श्यानता वाले क्षारीय बेसाल्टिक लावा से होता है। लावा अत्यधिक पतला होने के कारण निकास नलिका से निकलकर दूर-दूर तक फैल जाता है, जिससे तीव्र शंकु के स्थान पर मंद ढाल (2° से 10°) वाला एक विशाल उत्तल गुंबद बनता है जो योद्धा की ढाल (Warrior's Shield) जैसा दिखाई देता है।
विस्फोटकता: ये सामान्यतः गैर-विस्फोटक होते हैं, जब तक कि निकास मार्ग में भूजल या समुद्री जल प्रवेश करके भाप विस्फोट (Phreatomagmatic Explosion) न उत्पन्न कर दे।
उदाहरण: हवाई द्वीप समूह के मौना लोआ (Mauna Loa) — समुद्र तल से आधार तक 9,170 मीटर ऊँचाई के साथ पृथ्वी का सबसे विशाल सक्रिय ज्वालामुखी, तथा किलाउआ (Kilauea)।

2. मिश्रित शंकु / स्ट्रैटो ज्वालामुखी (Composite / Stratovolcanoes)

संरचना व ढाल: इनका निर्माण अधिक श्यान, गाढ़े एंडिसिटिक व रायोलिटिक लावा तथा पायरोक्लास्टिक पदार्थों (राख, धूल, सिंडर, अंगारे) के एकांतर परतों (Alternating Strata) में जमा होने से होता है। इसी कारण इन्हें 'स्ट्रैटो-ज्वालामुखी' कहते हैं। इनकी ढालें शीर्ष पर खड़ी (30°–35°) और आधार पर चौड़ी होती हैं, जिससे एक अत्यंत सुंदर, सममित (Symmetrical) शंकु बनता है।
विस्फोटकता: अत्यधिक विस्फोटक; इनमें पार्श्व परजीवी शंकु (Parasitic Cones) भी विकसित हो जाते हैं।
उदाहरण: माउंट फ़्यूजी (जापान), माउंट मयोन (फिलीपींस — विश्व का सबसे सममित शंकु), माउंट सेंट हेलेंस व माउंट रेनियर (USA), माउंट कोटोपैक्सी (इक्वाडोर — विश्व का सबसे ऊँचा सक्रिय स्ट्रैटो शंकु, 5,897 m)।

3. काल्डेरा (Caldera — क्रेटर का महा-धँसाव रूप)

निर्माण प्रक्रम (UPSC Trap): यह सामान्य ज्वालामुखीय क्रेटर (Crater) का विशालकाय रूप है (व्यास सामान्यतः > 1 km से 50 km तक)। यह विस्फोट से पर्वत शिखर उड़ने से नहीं, बल्कि महाविस्फोट के दौरान नीचे स्थित मैग्मा चैंबर के अचानक पूरी तरह खाली हो जाने के कारण ज्वालामुखी पर्वत के अपने ही भार से मैग्मा चैंबर में नीचे धँस जाने (Catastrophic Collapse) से बनता है।
काल्डेरा झील: जब इस विशाल गर्त में वर्षा जल भर जाता है, तो काल्डेरा झील (Caldera Lake) बनती है।
उदाहरण: ओरेगन (USA) की क्रेटर लेक (वास्तव में काल्डेरा है, गहराई 594 m), इंडोनेशिया की टोबा काल्डेरा झील (Lake Toba) — 100 km लंबी व 30 km चौड़ी, तथा 1883 के विस्फोट से बना क्राकाटोआ काल्डेरा।

4. सिंडर / राख शंकु (Cinder Cones)

गैस युक्त विस्फोटों से उड़े विखंडित सिंडर, लापिली व राख के निकास मुख के चारों ओर जमा होने से बने छोटे, खड़े ढाल (30°–40°) वाले शंकु। आसानी से अपरदित हो जाते हैं। उदा. मेक्सिको का पारिकुटिन (Parícutin)।

5. लावा गुंबद (Lava Domes)

अत्यधिक सिलिका-युक्त चिपचिपा लावा (रायोलाइट/डेसाइट) जो निकास नली से बाहर आकर बह नहीं पाता और निकास मुख पर ही फूलकर तीव्र ढाल वाला गुंबद बना लेता है। उदा. माउंट सेंट हेलेंस के क्रेटर में सक्रिय गुंबद।

6. बाढ़ बेसाल्ट / लावा पठार (Flood Basalts)

शांत दरारी उद्गार से अत्यधिक तरल क्षारीय बेसाल्ट का लाखों वर्ग किलोमीटर में क्षैतिज परतों में जमाव। उदा. भारत का दक्कन ट्रैप (Deccan Traps), USA का कोलंबिया-स्नेक नदी पठार, रूस का साइबेरियन ट्रैप।

4. अंतर्वेधी ज्वालामुखीय स्थलाकृतियाँ (Intrusive / Plutonic Landforms: Batholith, Laccolith, Lopolith, Phacolith, Sill, Dyke)

ज्वालामुखी क्रिया के दौरान सारा मैग्मा धरातल पर नहीं पहुँच पाता। मैग्मा का एक बहुत बड़ा भाग भूपर्पटी के भीतर विभिन्न गहराइयों पर चट्टानों के जोड़ों, दरारों व संस्तर तलों में प्रवेश कर जाता है और वहीं धीरे-धीरे ठंडा होकर जम जाता है। भूपर्पटी के आंतरिक भागों में शीतल होकर ठोस बनने वाली इन चट्टानों को प्लूटोनिक आग्नेय चट्टानें (Plutonic Igneous Rocks) तथा इनसे निर्मित संरचनाओं को अंतर्वेधी स्थलाकृतियाँ (Intrusive Landforms) कहते हैं।

अंतर्वेधी और बहिर्वेधी ज्वालामुखीय स्थलाकृतियाँ (Intrusive and Extrusive Volcanic Landforms)
चित्र 4.1: अंतर्वेधी एवं बहिर्वेधी ज्वालामुखीय स्थलाकृतियों की भूगर्भिक काट — आधार में विशाल बैथोलिथ (Batholith), छत्रकनुमा लैकोलिथ (Laccolith), बेसिननुमा लोपोलिथ (Lopolith), वलन पर फैकोलिथ (Phacolith), क्षैतिज सिल (Sill), लंबवत डाइक (Dyke), तथा सतह पर काल्डेरा व शंकु।
भूगर्भिक प्रकार 1

अनुस्तरी अंतर्वेधन (Concordant Intrusions)

जब मैग्मा का अंतर्वेधन अवसादी चट्टानों के मूल संस्तरण तलों (Bedding Planes / Strata) के समानांतर होता है और यह चट्टानों की मूल संरचना को काटे बिना उनके बीच में समा जाता है।
उदाहरण: सिल (Sill), शीट (Sheet), लैकोलिथ (Laccolith), लोपोलिथ (Lopolith), और फैकोलिथ (Phacolith)।

भूगर्भिक प्रकार 2

विसंस्तरी अंतर्वेधन (Discordant Intrusions)

जब मैग्मा अवसादी या रूपांतरित चट्टानों के संस्तरण तलों को काटते हुए (Cross-cutting) लंबवत या किसी तीव्र कोण पर जमता है।
उदाहरण: बैथोलिथ (Batholith), डाइक (Dyke), और ज्वालामुखीय ग्रीवा / प्लग (Volcanic Neck / Pipe)।

📑 7 प्रमुख अंतर्वेधी स्थलाकृतियों का तुलनात्मक विवरण (UPSC High-Yield Table)

स्थलाकृति का नाम जमाव का ज्यामितीय आकार भूगर्भिक स्थिति व निर्माण यांत्रिकी चट्टान व वास्तविक उदाहरण
1. बैथोलिथ (Batholith) विशालकाय, अनियमित, बिना किसी ज्ञात तल वाला (Plutonic Root) मैग्मा चैंबर के अत्यधिक गहराई पर जमने से बना सैकड़ों किमी लंबा विशाल पिंड। अपरदन के बाद ही धरातल पर गुंबदाकार पर्वतों के रूप में अनावृत होता है। ग्रेनाइटिक चट्टान; भारत में रांची पठार का छोटानागपुर ग्रेनाइट-नीस, USA का सिएरा नेवादा व इदाहो बैथोलिथ।
2. लैकोलिथ (Laccolith) छत्रकनुमा / मशरूम के आकार का (Mushroom-shaped) उत्तल गुंबद एक संकरी ऊर्ध्वाधर नलिका से मैग्मा ऊपर आकर अवसादी परतों के बीच क्षैतिज रूप से फैलता है और ऊपर की चट्टानी परतों को गुंबद के रूप में ऊपर उठा देता है। सपाट आधार व उत्तल शीर्ष। USA के यूटा स्थित हेनरी पर्वत (Henry Mountains); कर्नाटक के पठार में ग्रेनाइटिक गुंबद (टॉर)।
3. लोपोलिथ (Lopolith) तश्तरी या कटोरे के आकार का (Saucer-shaped) अवतल जमाव जब मैग्मा किसी बेसिन या धँसते हुए भू-भाग के संस्तर में प्रवेश करता है, तो नीचे की ओर झुके अवतल कटोरे जैसी संरचना बनती है। दक्षिण अफ्रीका का बुशवेल्ड कॉम्प्लेक्स (Bushveld Igneous Complex) — विश्व का विशालतम प्लैटिनम व क्रोमियम भंडार; कनाडा का सडबरी बेसिन।
4. फैकोलिथ (Phacolith) लेंस के आकार का (Lens-shaped) विवर्तनिक जमाव वलित पर्वतों (Fold Mountains) के निर्माण के समय वलन की अपनति (Anticline) के शीर्ष तथा अभिनति (Syncline) की तली में मैग्मा का संचय होने से बनता है। यूनाइटेड किंगडम के वेल्स व कॉर्नवाल क्षेत्र के वलित क्षेत्र; हिमालय के प्राचीन कोर।
5. सिल एवं शीट (Sill & Sheet) क्षैतिज चादर (Horizontal Sheet) संस्तर के समानांतर अवसादी परतों के संस्तर तलों के समानांतर मैग्मा का विस्तृत क्षैतिज फैलाव। मोटी परत को 'सिल' और अत्यंत पतली परत को 'शीट' कहते हैं। ग्रेट व्हिन सिल (उत्तरी इंग्लैंड); दक्षिण अफ्रीका का कारू क्षेत्र; भारत में रानीगंज कोयला क्षेत्र में बेसाल्टिक सिल।
6. डाइक (Dyke / Dike) ऊर्ध्वाधर दीवारनुमा (Vertical Wall-like) संरचना जब मैग्मा चट्टानों की लंबवत दरारों या भ्रंशों को काटते हुए जमता है। कोमल चट्टानों के अपरदन के बाद डाइक धरातल पर एक लंबी प्राचीर/दीवार की तरह खड़ी दिखाई देती है। महाराष्ट्र के कोंकण व गुजरात के काठियावाड़ प्रायद्वीप में दक्कन ट्रैप की सैकड़ों डाइक (जो दरारी उद्गार के पोषक मार्ग थे)।
7. ज्वालामुखीय ग्रीवा / प्लग (Neck / Plug) बेलनाकार कठोर स्तंभ (Cylindrical Pipe) शांत हो चुके पुराने ज्वालामुखी की केंद्रीय निकास नली में जमे कठोर लावा का स्तंभ। शंकु के अपरदित हो जाने पर यह ऊँचे खंभे के रूप में शेष रहता है। USA के न्यू मैक्सिको का शिपराक (Shiprock) तथा व्योमिंग का डेविल्स टॉवर (Devils Tower)।

📐 UPSC Mains जीएस-1 उत्तर-लेखन रफ आरेख (Schematic Sketch 1): अंतर्वेधी आकृतियाँ

   [सतह: भू-पृष्ठ] =====/\=========/\========/\==================== [सतह]
                      /  \       (क्रेटर)    /                       /    \        ||       /    \  (लावा गुंबद)
                    /      \_______||______/      ===================/=======\=======||====/========\====================
(अवसादी संस्तर)   [ लैकोलिथ ]      ||   [ फैकोलिथ (अपनति शीर्ष पर) ]
                 (छत्रक गुंबद)     ||
======================||===========||=================================
             [ सिल (क्षैतिज चादर) ]||=========[ सिल ]
======================||===========||=================================
                      ||           ||
                      ||     [ डाइक (खड़ी दीवार) ]
                      ||           ||
             [ लोपोलिथ (तश्तरी) ]  ||
              \_______________/    ||
======================||===========||=================================
                      \          //
                       \        //
              +---------------------------+
              |      विशाल बैथोलिथ        |
              |    (BATHOLITH ROOT)       |  <--- गहराई पर मैग्मा चैंबर
              +---------------------------+
              

💡 मेंस टिप: 250 शब्दों के उत्तर में इस सरल ब्लॉक आरेख को बनाने से परीक्षक को आपकी स्पष्ट संकल्पनात्मक समझ प्रदर्शित होती है और 1.5–2 अतिरिक्त अंक मिलते हैं।

5. अंतरा-प्लेट ज्वालामुखी, मेंटल प्लूम और हॉटस्पॉट क्रियाविधि (Intraplate Volcanism, Mantle Plume & Hotspots — UPSC 2018 Mains GS-1 Focus)

प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत के अनुसार विश्व के 90% से अधिक ज्वालामुखी अभिसारी (Convergent) और अपसारी (Divergent) प्लेट सीमाओं पर स्थित हैं। किंतु कुछ सर्वाधिक सक्रिय ज्वालामुखी प्लेटों के किनारों से हजारों किलोमीटर दूर प्लेटों के आंतरिक भागों (Intraplate Regions) में पाए जाते हैं (जैसे हवाई द्वीप, येलोस्टोन, रीयूनियन)। इस अंतरा-प्लेट विसंगति को समझाने के लिए मेंटल प्लूम और हॉटस्पॉट सिद्धांत प्रतिपादित किया गया।

🔬 मेंटल प्लूम सिद्धांत (Mantle Plume Theory — J. Tuzo Wilson 1963 & W. Jason Morgan 1971)

UPSC Mains 2018 PYQ Core

मेंटल प्लूम सिद्धांत की मूलभूत भूगर्भिक यांत्रिकी निम्नलिखित 4 चरणों में कार्य करती है:

1. D'' परत और तापीय अस्थिरता (The D'' Layer Source)

मेंटल प्लूम का उद्गम ऊपरी मेंटल में नहीं, बल्कि पृथ्वी के लगभग 2,900 km की गहराई पर स्थित क्रोड-मेंटल सीमा (Core-Mantle Boundary - CMB) की अति-तप्त सीमावर्ती परत जिसे D'' (D-double prime) परत कहते हैं, से होता है। बाह्य तरल क्रोड से अत्यधिक ऊष्मा स्थानांतरण के कारण यहाँ एक अति-उष्ण, कम घनत्व वाला तापीय बुलबुला (Thermal Diapir) उत्पन्न होता है।

2. प्लूम का उर्ध्वगामी संवहन (Plume Ascent: Head & Tail)

यह तापीय प्लूम पूरे ठोस मेंटल को चीरते हुए संकरी नली (Plume Conduit / Tail ~100–200 km चौड़ी) के रूप में ऊपर उठता है। इसके शीर्ष पर मशरूम के आकार का विशाल, फुला हुआ प्लूम हेड (Plume Head, व्यास ~1,000 km) विकसित होता है।

3. क्रस्ट पर संघात व बाढ़ बेसाल्ट (Large Igneous Province - LIP)

जब प्लूम हेड लिथोस्फीयर के आधार से टकराता है, तो भारी मात्रा में विदाबन गलन (Decompression Melting) होती है। परिणामस्वरूप कुछ ही लाख वर्षों में लाखों घन किमी तरल बेसाल्ट बाहर निकलकर विशाल आग्नेय प्रांत (LIP) / बाढ़ बेसाल्ट पठार बना देता है (उदा. 65 Ma पूर्व दक्कन ट्रैप का निर्माण)।

4. स्थिर हॉटस्पॉट व कालानुक्रमिक द्वीप श्रृंखला (Hotspot Track)

प्लूम हेड के समाप्त होने के बाद पतली प्लूम टेल (Tail) लाखों वर्षों तक गहरे मेंटल में स्थिर (Stationary) बनी रहती है। जैसे-जैसे ऊपर स्थित विवर्तनिक प्लेट इसके ऊपर से आगे खिसकती है, सतह पर एक सीधी रेखा में कालानुक्रमिक ज्वालामुखी द्वीप श्रृंखला (Age-Progressive Seamount Chain) का निर्माण होता जाता है।

🗺️ मेंटल प्लूम व हॉटस्पॉट के दो सर्वप्रमुख वैश्विक मॉडल

A. हवाई-सम्राट समुद्री पर्वत श्रृंखला (Hawaiian-Emperor Chain)

महासागरीय प्लेट

प्रशांत प्लेट उत्तर-पश्चिम (NW) दिशा में लगभग 7–9 cm/वर्ष की गति से खिसक रही है, जबकि हवाई हॉटस्पॉट स्थिर है:
• श्रृंखला का सबसे नया व सक्रिय ज्वालामुखी किलाउआ व मौना लोआ दक्षिण-पूर्व (SE) छोर पर स्थित है। इसके ठीक दक्षिण में समुद्र के भीतर नया ज्वालामुखी द्वीप लोइही (Loihi) विकसित हो रहा है।
• उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने पर द्वीप पुराने होते जाते हैं: ओआहू (2.5–3.5 Ma) ➔ काउई (5 Ma) ➔ मिडवे द्वीप (28 Ma) ➔ सम्राट समुद्री पर्वत (>50 Ma)।
• श्रृंखला में 43-47 Ma पर लगभग 60° का तीव्र मोड़ प्रशांत प्लेट के संचलन की दिशा में आए ऐतिहासिक बदलाव को सिद्ध करता है।

B. येलोस्टोन हॉटस्पॉट ट्रैक (Yellowstone Hotspot Track)

महाद्वीपीय प्लेट

उत्तरी अमेरिकी प्लेट दक्षिण-पश्चिम (SW) दिशा में खिसक रही है:
• लगभग 16-17 मिलियन वर्ष पूर्व इस प्लूम ने कोलंबिया नदी बेसाल्ट पठार का निर्माण किया।
• तत्पश्चात यह स्नेक नदी घाटी (Snake River Plain) से होते हुए वर्तमान में व्योमिंग के येलोस्टोन नेशनल पार्क के नीचे स्थित है।
• महाद्वीपीय मोटी क्रस्ट होने के कारण यहाँ बेसाल्ट के स्थान पर अत्यधिक श्यान रायोलिटिक मैग्मा बनता है, जिसने 2.1 Ma, 1.3 Ma और 0.64 Ma पूर्व महाविनाशकारी सुपरवॉल्केनो काल्डेरा (Supervolcano Calderas) बनाए।

📐 UPSC Mains जीएस-1 उत्तर-लेखन रफ आरेख (Schematic Sketch 2): मेंटल प्लूम व हॉटस्पॉट ट्रैक

   प्लेट संचलन की दिशा ===>  [ प्रशांत प्लेट संचलन NW की ओर ]
====================================================================================
(प्राचीन मृत द्वीप)   (अपरदित द्वीप)   (प्रसुप्त द्वीप)     [सक्रिय ज्वालामुखी]
 [सम्राट पर्वत]          [मिडवे]          [काउई]             [मौना लोआ / किलाउआ]
     (50 Ma)             (28 Ma)          (5 Ma)                (वर्तमान: 0 Ma)
       ▲                   ▲                ▲                         ▲
       |                   |                |                         |
       +--------- पूर्व में निर्मित ज्वालामुखी द्वीप --------+        |
                                                                      |
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ समुद्र तल (Ocean Surface) ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ | ~~~~~~~~~~~~~~
======================================================================|=============
[ lithosphere / महासागरीय भूपर्पटी ]                                  |
----------------------------------------------------------------------|-------------
                                                                     / \
                                                                    /   \  (प्लूम हेड)
                                                                   (     )
                                                                      |
                                                                      |
                                                                      |  <-- प्लूम टेल
                                                                      |    (Plume Conduit)
                                                                      |    (स्थिर मेंटल नली)
                                                                      |
    [ D'' परत (D-Double Prime Layer) / क्रोड-मेंटल सीमा: 2900 km ]   |
======================================================================|=============
                     बाह्य तरल क्रोड (Outer Core - Fe-Ni)
              

6. ज्वालामुखी गैसें, पायरोक्लास्टिक प्रवाह, गीज़र और धुआँरे (Volcanic Ejecta, Pyroclastic Flows & Secondary Phenomena)

ज्वालामुखी उद्गार के समय निकास नली से तीन अवस्थाओं (गैस, ठोस विखंडित शैल तथा तरल) में पदार्थ बाहर निकलते हैं। इनके अतिरिक्त ज्वालामुखी के शांत होने के बाद भी कई शताब्दियों तक तापीय भू-आकृतियाँ सक्रिय रहती हैं:

गैसीय पदार्थ (Gases)

• जलवाष्प (H₂O): कुल गैसों का 60% से 90% भाग केवल जलवाष्प होता है।
• कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂): भारी गैस, घाटियों में घुटने से मृत्यु कारक।
• सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂): समताप मंडल में सल्फेट एरोसोल बनाकर सूर्य की किरणों को परावर्तित करती है, जिससे वैश्विक शीतलन (Global Cooling) होता है।
• अन्य विषैली गैसें: H₂S, HCl, HF, CO।

ठोस पदार्थ (Tephra / Pyroclasts)

• राख (Ash): < 2 mm आकार के महीन कांच व शैल कण।
• लापिली (Lapilli): 2 mm से 64 mm आकार (मटर या अखरोट जैसे)।
• ज्वालामुखीय बम (Bombs): > 64 mm; हवा में उड़ते समय घूर्णन से वायुगतिकीय (Aerodynamic Spindle) रूप प्राप्त करते हैं।
• प्यूमिस (Pumice): झाँवा पत्थर, गैस के बुलबुलों से भरा अत्यंत हल्का पत्थर जो पानी पर तैरता है।

तरल लावा रूप (Lava Flows)

हवाईयन शब्दावली के दो सर्वमान्य रूप:
• पाहोएहोए (Pahoehoe): चिकना, चमकदार, रस्सीनुमा (Ropy) सतह वाला अत्यधिक तरल बेसाल्टिक लावा।
• आ-आ (Aa): ठंडा व श्यान लावा जिसकी सतह खुरदरी, नुकीली, काँटेदार और कोणीय खंडों (Jaggered Clinkery Blocks) से भरी होती है, जिस पर नंगे पाँव चलना असंभव होता है।

⚠️ पायरोक्लास्टिक घनत्व तरंगें / ज्वलंत मेघ (Pyroclastic Density Currents / Nuée Ardente)

यह ज्वालामुखी विस्फोट की सबसे घातक और संहारक परिघटना है। यह अति-तप्त गैसों (>800°C), राख, प्यूमिस और विशाल शिलाखंडों का एक सघन निलंबन होता है, जो गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में ज्वालामुखी की ढालों पर 150 से 700 किलोमीटर प्रति घंटे की प्रचंड गति से नीचे गिरता है। इसके मार्ग में आने वाला कोई भी जीव या वनस्पति कुछ ही सेकंड में भस्म हो जाती है (उदा. 1902 में मार्टिनिक द्वीप के सेंट पियरे शहर के 30,000 नागरिकों की तत्क्षण मृत्यु)।

♨️ पश्च-ज्वालामुखीय परिघटनाएँ (Post-Volcanic Thermal Phenomena)

1. उष्णोत्स (Hot Springs)

शांत रूप से निरंतर निकलने वाला गर्म जल। औषधीय गंधक व खनिजों से युक्त। उदा. मणिकरण (हि.प्र.), सोहना (हरियाणा), तातापानी (छ.ग.)।

2. गीज़र (Geysers)

नियमित अंतराल पर अत्यधिक वाष्प दबाव के साथ खौलता जल व भाप फव्वारे के रूप में फेंकने वाले स्रोत। उदा. ओल्ड फेथफुल (येलोस्टोन USA), आइसलैंड का गेइसिर।

3. धुआँरे (Fumaroles)

ज्वालामुखी के शांत होने पर गैस व भाप उगलने वाले छिद्र। उदा. अलास्का की 'दस सहस्र धुआँरों की घाटी' (Valley of 10,000 Smokes)।

4. सोल्फतारा (Solfataras)

ऐसे धुआँरे जिनसे अत्यधिक मात्रा में गंधकयुक्त (सल्फर) गैसें निकलती हैं और निकास मुख पर पीले गंधक के क्रिस्टल जमा होते हैं। उदा. नेपल्स (इटली)।

7. भारत में ज्वालामुखी क्रिया और भूगर्भिक प्रभाव (Volcanism in Indian Context: Deccan Traps, Reunion Hotspot, Barren Island & Lonar Lake)

यद्यपि वर्तमान मुख्यभूमि भारत में कोई सक्रिय ज्वालामुखी नहीं है, किंतु भारत के भूगर्भिक इतिहास में ज्वालामुखी क्रिया ने प्रायद्वीपीय भारत के भौतिक स्वरूप, खनिज संपदा और कृषि अर्थव्यवस्था को सर्वाधिक गहराई से गढ़ा है:

🏛️ 1. दक्कन ट्रैप और रियूनियन हॉटस्पॉट का भूगर्भिक इतिहास (Deccan Traps: ~65–66 Ma)

काल व विवर्तनिक संदर्भ: क्रेटेशियस काल के अंत और तृतीयक (पैलियोजीन) काल के प्रारंभ (K-Pg boundary, लगभग 65 से 66 मिलियन वर्ष पूर्व) में जब भारतीय प्लेट गोंडवाना से टूटकर उत्तर की ओर 15 से 20 cm/वर्ष की अभूतपूर्व गति से बढ़ रही थी, तब यह दक्षिणी हिंद महासागर में स्थित रियूनियन हॉटस्पॉट (Reunion Hotspot) के ऊपर से गुजरी।

दरारी उद्गार व विस्तार: शांत दरारी उद्गार (Fissure Eruption) द्वारा थोलिटिक बेसाल्टिक लावा के सैकड़ों प्रवाह लगातार धरातल पर बिछते गए। इस उद्गार ने 15 लाख घन किलोमीटर से अधिक लावा उगला, जिसने तत्कालीन समय में 15 लाख वर्ग किमी और वर्तमान में अपरदन के पश्चात लगभग 5 लाख वर्ग किलोमीटर (महाराष्ट्र, गुजरात, म.प्र., कर्नाटक, गोवा) क्षेत्र को ढक रखा है। पश्चिमी घाट (महाबलेश्वर) में इसकी मोटाई 2,000 मीटर से अधिक है।

'ट्रैप' शब्दावली: स्वीडिश भाषा के शब्द 'Trappa' (सीढ़ी) से 'ट्रैप' शब्द लिया गया है। विभिन्न समयों पर जमे लावा प्रवाहों की कठोरता अलग-अलग होने के कारण अपरदन से सीढ़ीनुमा कगार (Step-like Terraces) और चपटे शिखर वाली मेसा व ब्यूटे स्थलाकृतियाँ बन गईं।

आर्थिक व कृषि महत्व: दक्कन बेसाल्ट के दीर्घकालिक उप-उष्णकटिबंधीय अपक्षय (Weathering) से टाइटेनियम व आयरन युक्त उपजाऊ काली कपास मृदा (Black Soil / Regur) का निर्माण हुआ, जिसमें नमी धारण करने की असाधारण क्षमता होती है। इसके अतिरिक्त दक्कन ट्रैप में बॉक्साइट (एल्युमिनियम अयस्क) और उत्कृष्ट भवन निर्माण पत्थर उपलब्ध हैं।

सक्रिय ज्वालामुखी

बैरन द्वीप (Barren Island)

• स्थिति: अंडमान सागर में पोर्ट ब्लेयर से 138 km उत्तर-पूर्व।
• महत्व: भारत और पूरे दक्षिण एशिया का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी (Only Active Volcano)।
• विवर्तनिक स्थिति: इंडो-बर्मी सबडक्शन आर्क। 1787 में प्रथम दर्ज उद्गार, 1991 में पुनर्जीवित, और 2017 से 2022 तक पुनः राख व लावा उद्गार।

प्रसुप्त ज्वालामुखी

नारकोंडम द्वीप (Narcondam)

• स्थिति: बैरन द्वीप से लगभग 140 km उत्तर-पूर्व में अंडमान सागर में स्थित।
• प्रकार: प्रसुप्त / शांत ज्वालामुखी (Dormant Volcano); एंडिसिटिक लावा गुंबद।
• पर्यावरण: यह द्वीप केवल संकटग्रस्त पक्षी 'नारकोंडम हॉर्नबिल' (Narcondam Hornbill) का एकमात्र प्राकृतिक आवास है।

विशिष्ट भू-आकृति

लोनार झील (Lonar Crater Lake)

• स्थिति: बुलढाणा जिला, महाराष्ट्र (दक्कन बेसाल्ट क्षेत्र)।
• सच्चाई (UPSC Trap): इसे पूर्व में ज्वालामुखीय काल्डेरा माना जाता था, किंतु आधुनिक अनुसंधानों ने सिद्ध किया है कि यह लगभग 50,000 वर्ष पूर्व उल्कापिंड संघात (Meteorite Impact Crater) द्वारा बेसाल्टिक चट्टान में बना गड्ढा है। खारे-क्षारीय जल की रामसर आर्द्रभूमि।

अन्य भारतीय ज्वालामुखीय साक्ष्य:
• राजमहल ट्रैप्स (Rajmahal Traps, झारखंड): प्रारंभिक क्रेटेशियस काल (~118 Ma) में कर्गुलेन हॉटस्पॉट (Kerguelen Hotspot) के प्रभाव से निर्मित प्राचीन बेसाल्टिक लावा प्रवाह।
• सेंट मैरी द्वीप (St. Mary's Islands, कर्नाटक): मालपे तट के निकट स्थित राष्ट्रीय भू-विरासत स्थल, जहाँ 88 Ma पूर्व मेडागास्कर के भारत से अलग होते समय अद्वितीय षट्कोणीय स्तंभाकार बेसाल्ट (Hexagonal Columnar Basalt) निर्मित हुए।

8. अध्याय 4 का संपूर्ण विश्व एवं भारत मानचित्रण: 12 प्रमुख ज्वालामुखी, पर्वत शिखर व हॉटस्पॉट

UPSC प्रिलिम्स परीक्षा में ज्वालामुखियों के स्थान, संबंधित देश/पर्वत श्रृंखला, और उनकी विवर्तनिक स्थिति पर नियमित मिलान और कथन-आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं। नीचे विश्व और भारत के 12 सबसे महत्वपूर्ण ज्वालामुखियों का मानचित्रण विश्लेषण प्रस्तुत है:

विश्व की प्रमुख ज्वालामुखी पेटियाँ और रिंग ऑफ फायर मानचित्र (Global Volcanic Belts & Pacific Ring of Fire World Map)
चित्र 4.3: विश्व की प्रमुख ज्वालामुखी पेटियाँ — परि-प्रशांत अग्नि वलय (Pacific Ring of Fire — 75% सक्रिय ज्वालामुखी), मध्य-अटलांटिक कटक अपसारी पेटी (Mid-Atlantic Ridge), मध्य-महाद्वीपीय / भूमध्यसागरीय पेटी (Alpine-Mediterranean Belt), तथा हवाई व रियूनियन हॉटस्पॉट।

🗺️ 12 प्रमुख वैश्विक एवं भारतीय ज्वालामुखियों की व्यापक मानचित्रण तालिका

क्र.सं. व ज्वालामुखी देश / भौगोलिक क्षेत्र विवर्तनिक पेटी / सीमा प्रकार व स्थिति UPSC परीक्षा दृष्टि से विशिष्ट तथ्य
1. मौना लोआ और किलाउआ हवाई द्वीप (USA), मध्य प्रशांत महासागर प्रशांत अंतरा-प्लेट हवाईयन हॉटस्पॉट सक्रिय शील्ड ज्वालामुखी मौना लोआ द्रव्यमान व आयतन की दृष्टि से पृथ्वी का सबसे बड़ा सक्रिय ज्वालामुखी है; किलाउआ विश्व के सर्वाधिक सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है।
2. माउंट ओजोस डेल सलाडो अर्जेंटीना–चिली सीमा (एंडीज़ पर्वतमाला) नाज़का प्लेट व द. अमेरिकी प्लेट अभिसरण (O-C) सक्रिय स्ट्रैटो शंकु विश्व का सबसे ऊँचा सक्रिय ज्वालामुखी (6,893 m)। इसके क्रेटर में 6,390 m पर स्थित झील विश्व की सर्वोच्च झील मानी जाती है।
3. माउंट कोटोपैक्सी (Cotopaxi) इक्वाडोर (एंडीज़ पर्वतमाला) नाज़का प्लेट व द. अमेरिकी प्लेट अभिसरण (O-C) सक्रिय मिश्रित शंकु विश्व के सर्वोच्च सक्रिय स्ट्रैटो ज्वालामुखियों में से एक (5,897 m); भूमध्य रेखा के निकट स्थित होने पर भी इसके शीर्ष पर स्थायी बर्फ पाई जाती है।
4. माउंट स्ट्रॉम्बोली (Stromboli) लिपारी द्वीप, सिसिली (इटली), भूमध्य सागर अफ्रीकी प्लेट व यूरेशियन प्लेट अभिसरण सक्रिय स्ट्रॉम्बोलीयन हजारों वर्षों से निरंतर प्रदीप्त गैस व सिंडर फेंकने के कारण इसे 'भूमध्य सागर का प्रकाश स्तंभ' (Lighthouse of the Mediterranean) कहते हैं।
5. माउंट विसुवियस और माउंट एटना नेपल्स की खाड़ी व सिसिली (इटली) भूमध्यसागरीय अल्पाइन पेटी सक्रिय प्लिनीयन / स्ट्रैटो विसुवियस ने 79 ई. में ऐतिहासिक रोमन नगर पोम्पेई और हरकुलेनियम को राख में दफन कर दिया था; माउंट एटना यूरोप का सबसे ऊँचा व सक्रिय ज्वालामुखी है (UNESCO धरोहर)।
6. क्राकाटोआ (Krakatoa) सुंडा जलडमरूमध्य (जावा व सुमात्रा के बीच, इंडोनेशिया) इंडो-ऑस्ट्रेलियाई व यूरेशियन सबडक्शन सक्रिय काल्डेरा / अनक क्राकाटोआ 1883 का महाविनाशकारी विस्फोट इतिहास की सबसे तेज आवाज (4,800 km दूर तक सुनी गई) माना जाता है; 2018 में इसके पार्श्व धँसाव से सुंडा सुनामी आई थी।
7. माउंट मेरापी और सेमेरू जावा द्वीप, इंडोनेशिया रिंग ऑफ फायर सबडक्शन ज़ोन अत्यधिक सक्रिय स्ट्रैटो शंकु इंडोनेशिया का सबसे सक्रिय ज्वालामुखी ('माउंटेन ऑफ फायर'); बार-बार तीव्र पायरोक्लास्टिक प्रवाह और लहार (Lahar - ज्वालामुखीय कीचड़ प्रवाह) उत्पन्न करता है।
8. माउंट किलिमंजारो तंजानिया (पूर्वी अफ्रीकी भ्रंश घाटी - EARS) अफ्रीकी महाद्वीपीय रिफ्टिंग (अपसारी सीमा) शांत / मृत (Extinct) अफ्रीका महाद्वीप का सर्वोच्च पर्वत शिखर (5,895 m)। इसके तीन ज्वालामुखीय शंकु हैं: कीबो, मावेन्ज़ी और शिरा। भूमध्य रेखा के निकट स्थायी हिमनद।
9. माउंट सेंट हेलेंस वाशिंगटन राज्य, USA (कैस्केड पर्वतमाला) जुआन डी फूका व उ. अमेरिकी प्लेट सबडक्शन सक्रिय स्ट्रैटो ज्वालामुखी 18 मई 1980 का ऐतिहासिक विस्फोट, जिसमें भूकंप से उत्तरी ढाल खिसक गई और पार्श्व विस्फोट (Lateral Blast) से 400 मीटर शिखर उड़ गया और विशाल गर्त बना।
10. माउंट पिनातुबो (Pinatubo) लुजोन द्वीप, फिलीपींस फिलीपीन सागर प्लेट व यूरेशियन सबडक्शन सक्रिय स्ट्रैटो ज्वालामुखी 15 जून 1991 का विस्फोट 20वीं सदी का दूसरा सबसे बड़ा विस्फोट था। 2 करोड़ टन SO₂ उत्सर्जन से 1991–93 में वैश्विक तापमान में 0.5°C की गिरावट दर्ज की गई।
11. बैरन द्वीप (Barren Island) अंडमान सागर, भारत इंडो-ऑस्ट्रेलियाई व बर्मा प्लेट सबडक्शन सक्रिय मिश्रित शंकु भारत और दक्षिण एशिया का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी। अंडमान निकोबार द्वीप समूह में पोर्ट ब्लेयर से 138 km दूर स्थित।
12. पिटन डे ला फोरनेज़ (Piton de la Fournaise) रियूनियन द्वीप, दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर रियूनियन मेंटल प्लूम हॉटस्पॉट सक्रिय बेसाल्टिक शील्ड उसी ऐतिहासिक मेंटल प्लूम का वर्तमान सक्रिय केंद्र, जिसके ऊपर से 65 Ma पूर्व गुजरने पर भारतीय प्रायद्वीप के दक्कन ट्रैप का निर्माण हुआ था।

9. परीक्षा की दृष्टि से विशेष बिंदु: 6 प्रिलिम्स स्टेटमेंट ट्रैप्स एवं 4 संपूर्ण मेंस मॉडल उत्तर (Mains GS-1)

⚠️ प्रिलिम्स स्टेटमेंट ट्रैप्स (6 High-Yield Prelims Traps — अध्याय 4)

ट्रैप 1: अम्लीय लावा की प्रवाह क्षमता

गलतफहमी: "अम्लीय लावा अधिक तापमान पर निकलता है और तेजी से दूर तक बहता है।"
✔ सही तथ्य: अम्लीय लावा में सिलिका (>65%) अधिक होने से यह अत्यधिक गाढ़ा और श्यान (Viscous) होता है, इसका तापमान कम (700°–800°C) होता है और यह निकास मार्ग के निकट ही जमकर गुंबद बनाता है; दूर तक केवल तरल क्षारीय बेसाल्ट लावा बहता है।

ट्रैप 2: शील्ड ज्वालामुखी की प्रकृति

गलतफहमी: "हवाईयन शील्ड ज्वालामुखी अत्यधिक विस्फोटक होते हैं।"
✔ सही तथ्य: शील्ड ज्वालामुखी गैर-विस्फोटक और शांत (Effusive) होते हैं क्योंकि बेसाल्ट लावा बहुत तरल होता है और गैसें आसानी से बाहर निकल जाती हैं। विस्फोट तभी होता है जब नलिका में जल प्रवेश कर जाए।

ट्रैप 3: बैथोलिथ बनाम लैकोलिथ

गलतफहमी: "लैकोलिथ मैग्मा चैंबर का आधार होता है।"
✔ सही तथ्य: मैग्मा चैंबर के जमने से बना विशाल अनियमित आधार बैथोलिथ है। लैकोलिथ छत्रकनुमा (Mushroom-shaped) उत्तल आकृति है जो ऊपर की संस्तरों को उभार देती है।

ट्रैप 4: हॉटस्पॉट की गतिशीलता

गलतफहमी: "हॉटस्पॉट विवर्तनिक प्लेटों के साथ-साथ गति करते हैं।"
✔ सही तथ्य: मेंटल प्लूम गहरे मेंटल (2,900 km CMB) में स्थिर (Fixed) रहते हैं; उनके ऊपर स्थित स्थलमंडलीय प्लेट गति करती है, जिससे कालानुक्रमिक ज्वालामुखीय श्रृंखला बनती है।

ट्रैप 5: हिमालय में ज्वालामुखी

गलतफहमी: "हिमालय अभिसारी सीमा पर है, इसलिए वहाँ सक्रिय ज्वालामुखी पाए जाते हैं।"
✔ सही तथ्य: हिमालय महाद्वीपीय-महाद्वीपीय (C-C) टक्कर से बना है। दोनों महाद्वीपीय प्लेटें हल्की (2.7 g/cm³) होने से मेंटल में गहराई तक सबडक्ट होकर नहीं पिघलतीं और क्रस्ट 70 km मोटी है, अतः हिमालय में सक्रिय ज्वालामुखी अनुपस्थित हैं।

ट्रैप 6: भारत का सक्रिय ज्वालामुखी

गलतफहमी: "नारकोंडम द्वीप भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है।"
✔ सही तथ्य: नारकोंडम एक प्रसुप्त (Dormant) ज्वालामुखी है, जबकि बैरन द्वीप (Barren Island) भारत और पूरे दक्षिण एशिया का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है।

📝 UPSC Mains GS-1 संपूर्ण 4 मॉडल उत्तर (Introduction - Body - Conclusion Format)

प्रश्न 1 (UPSC Mains 2018 PYQ): मेंटल प्लूम सिद्धांत क्या है? यह अंतरा-प्लेट ज्वालामुखी (Intraplate Volcanism) की व्याख्या करने में किस प्रकार सहायक है? (150 शब्द / 10 अंक) Mains GS-1 Model Answer

उत्तर दृष्टिकोण:
• प्रस्तावना (Intro, 30 शब्द): मेंटल प्लूम की परिभाषा (क्रोड-मेंटल सीमा से उठने वाला तापीय डायपिर) तथा जे. टुज़ो विल्सन व जेसन मॉर्गन का संदर्भ।
• मुख्य भाग (Body, 90 शब्द):
1. प्लूम की संरचना व उत्पत्ति: 2,900 km गहराई पर D'' परत से संकीर्ण नली के रूप में अति-तप्त मैग्मा का उर्ध्वगामी संवहन।
2. अंतरा-प्लेट ज्वालामुखी की यांत्रिकी: प्लेट सीमाओं से दूर प्लेटों के आंतरिक भागों में विदाबन गलन (Decompression melting) द्वारा ज्वालामुखी निर्माण।
3. हॉटस्पॉट ट्रैक: मेंटल प्लूम का गहरा स्थिर (Stationary) स्वभाव बनाम ऊपर गतिमान प्लेट। कालानुक्रमिक द्वीप श्रृंखला का निर्माण (उदा. हवाईयन-सम्राट श्रृंखला में किलाउआ से मिडवे तक आयु में वृद्धि)।
4. विशाल आग्नेय प्रांत (LIP): प्लूम हेड के क्रस्ट से टकराने पर दरारी बाढ़ बेसाल्ट का जन्म (उदा. 65 Ma पूर्व दक्कन ट्रैप)।
• निष्कर्ष (Conclusion, 30 शब्द): मेंटल प्लूम सिद्धांत प्लेट विवर्तनिकी की सीमाओं को पूरक बनाकर पृथ्वी के आंतरिक ताप संवहन और प्लेट संचलन की दिशा व दर को मापने का वैश्विक संदर्भ ढाँचा प्रदान करता है।

प्रश्न 2: शील्ड ज्वालामुखी और मिश्रित (स्ट्रैटो) ज्वालामुखी की भूगर्भिक विशेषताओं, लावा के स्वभाव और संबंधित आपदा जोखिमों की तुलना कीजिए। (150 शब्द / 10 अंक) Mains GS-1 Model Answer

उत्तर दृष्टिकोण:
• प्रस्तावना (Intro, 25 शब्द): शील्ड और स्ट्रैटो ज्वालामुखी बहिर्वेधी ज्वालामुखीय स्थलाकृतियों के दो प्रमुख रूप हैं, जिनका आकार मुख्यतः मैग्मा की सिलिका मात्रा और विलीन गैसों द्वारा निर्धारित होता है।
• मुख्य भाग (Body, 95 शब्द — बिंदुवार तुलना):
1. लावा संघटन: शील्ड में क्षारीय बेसाल्टिक लावा (सिलिका 45-52%, उच्च ताप 1100°C, निम्न श्यानता) होता है; जबकि स्ट्रैटो में एंडिसिटिक/रायोलाइटिक लावा (सिलिका 55-70%, निम्न ताप 800°C, अत्यधिक श्यान व गाढ़ा) होता है।
2. आकार व ढाल: शील्ड ज्वालामुखी मंद ढाल (2°–10°) वाले विस्तृत चपटे गुंबद होते हैं (उदा. मौना लोआ); स्ट्रैटो में लावा व पायरोक्लास्ट की एकांतर परतों से तीक्ष्ण, सममित खड़ी ढाल (30°–35°) बनती है (उदा. माउंट फ़्यूजी, कोटोपैक्सी)।
3. उद्गार शैली व आपदा जोखिम: शील्ड में शांत दरारी या फव्वारा उद्गार होता है, जिससे जान-माल का नुकसान सीमित रहता है; स्ट्रैटो में अत्यधिक संचित गैस दबाव से महाविनाशकारी विस्फोट, पायरोक्लास्टिक घनत्व तरंगें (Nuée Ardente), लहार (कीचड़ प्रवाह) और काल्डेरा धँसाव होते हैं।
• निष्कर्ष (Conclusion, 30 शब्द): जहाँ शील्ड ज्वालामुखी नए महासागरीय क्रस्ट व उपजाऊ बेसाल्टिक मृदा के निर्माण में सहायक हैं, वहीं स्ट्रैटो ज्वालामुखी घनी आबादी वाले सबडक्शन क्षेत्रों में पूर्व-चेतावनी तंत्र और आपदा प्रबंधन की सर्वोच्च सतर्कता की माँग करते हैं।

प्रश्न 3: दक्कन ट्रैप की उत्पत्ति में रियूनियन हॉटस्पॉट की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए तथा प्रायद्वीपीय भारत की कृषि और खनिज अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभावों की विवेचना कीजिए। (250 शब्द / 15 अंक) Mains GS-1 Model Answer

उत्तर दृष्टिकोण:
• प्रस्तावना (Intro, 40 शब्द): दक्कन ट्रैप क्रेटेशियस-पैलियोजीन सीमा (~65–66 Ma) पर निर्मित विश्व के विशालतम आग्नेय प्रांतों (LIP) में से एक है, जो भारतीय प्लेट के तीव्र उत्तरगामी प्रवाह के दौरान रियूनियन मेंटल प्लूम के संपर्क से उत्पन्न हुआ था।
• मुख्य भाग (Body, 150 शब्द):
1. रियूनियन हॉटस्पॉट की भूमिका: जब भारतीय उपमहाद्वीप रियूनियन प्लूम हेड के ऊपर से गुजरा, तो विदाबन गलन द्वारा दरारी शांत उद्गारों की एक श्रृंखला शुरू हुई। 15 लाख घन किमी बेसाल्टिक लावा ने 5 लाख वर्ग किमी में 2,000 मीटर तक मोटी सीढ़ीनुमा (Step-like 'Trappa') संरचना बनाई।
2. कृषि अर्थव्यवस्था पर प्रभाव:
- काली कपास मृदा (रेगुर): बेसाल्ट के दीर्घकालिक अपक्षय से आयरन, मैग्नीशियम और एल्युमिनियम सिलिकेट युक्त मृदा बनी। इसमें मोंटमोरिलोनाइट क्ले की प्रचुरता के कारण नमी धारण क्षमता असाधारण है, जिसने महाराष्ट्र, गुजरात व म.प्र. को भारत का 'कॉटन-सोयाबीन-गन्ना बाउल' बना दिया।
- शुष्क कृषि (Dryland Farming) में सूखा सहनशीलता प्रदान करती है।
3. खनिज व औद्योगिक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव:
- बॉक्साइट भंडार: बेसाल्टिक पठारों के लेटेराइटिक शीर्षों (महाबलेश्वर, कोल्हापुर) पर उच्च कोटि के एल्युमिनियम अयस्क संचित हैं।
- भवन निर्माण सामग्री: कठोर बेसाल्टिक शिलाएँ उत्कृष्ट गिट्टी और ऐतिहासिक स्थापत्य (अजंता-एलोरा की गुफाएँ) का आधार बनीं।
- सीमाएँ: बेसाल्टिक चादर ने नीचे दबी प्राचीन गोंडवाना कोयला परतों और हाइड्रोकार्बन बेसिनों को ढक दिया, जिससे गहरे अन्वेषण की लागत बढ़ गई।
• निष्कर्ष (Conclusion, 40 शब्द): दक्कन ट्रैप न केवल भारत के भू-आकृतिक स्वरूप का आधार है, बल्कि इसने प्रायद्वीपीय भारत की कृषि आजीविका, वस्त्र उद्योग और भू-विरासत को आकार देकर देश के आर्थिक भूगोल में निर्णायक योगदान दिया है।

प्रश्न 4: 'प्रशांत महासागरीय अग्नि वलय' (Pacific Ring of Fire) में ज्वालामुखियों के अत्यधिक संकेंद्रण के भू-विवर्तनिक कारणों की विवेचना कीजिए तथा बड़े ज्वालामुखीय उद्गारों के वैश्विक जलवायु पर प्रभावों ('ज्वालामुखीय शीतकाल' / Volcanic Winter) को स्पष्ट कीजिए। (250 शब्द / 15 अंक) Mains GS-1 Model Answer

उत्तर दृष्टिकोण:
• प्रस्तावना (Intro, 40 शब्द): परि-प्रशांत पेटी (Circum-Pacific Belt) या 'रिंग ऑफ फायर' 40,000 किमी लंबा घोड़े की नाल के आकार का विवर्तनिक क्षेत्र है, जहाँ विश्व के 75% सक्रिय ज्वालामुखी और 90% भूकंप संकेंद्रित हैं।
• मुख्य भाग (Body, 150 शब्द):
1. भू-विवर्तनिक संकेंद्रण के कारण:
- सक्रिय सबडक्शन ज़ोन (Subduction Zones): भारी महासागरीय प्लेटें (प्रशांत, नाज़का, कोकोस, जुआन डी फूका) हल्की महाद्वीपीय (उ. व द. अमेरिकी) और यूरेशियन प्लेटों के नीचे गहराई में क्षेपित हो रही हैं।
- फ्लक्स गलन (Flux Melting): सबडक्टिंग स्लैब से विमुक्त जल मेंटल वेज के गलनांक को कम करके अत्यधिक श्यान एंडिसिटिक मैग्मा उत्पन्न करता है, जिससे विस्फोटक स्ट्रैटो ज्वालामुखी (एंडीज़, कैस्केड्स, जापान, इंडोनेशिया) बनते हैं।
2. वैश्विक जलवायु पर प्रभाव ('ज्वालामुखीय शीतकाल' / Volcanic Winter):
- सल्फेट एरोसोल का निर्माण: बड़े प्लिनीयन उद्गारों (VEI 5+) से निकली SO₂ गैस समताप मंडल में जलवाष्प से क्रिया करके H₂SO₄ एरोसोल बनाती है। ये एरोसोल सौर विकिरण को अंतरिक्ष में परावर्तित (Albedo वृद्धि) कर देते हैं।
- तापमान में गिरावट: 1991 के माउंट पिनातुबो ने 2 करोड़ टन SO₂ उत्सर्जित की, जिससे 2 वर्षों तक वैश्विक तापमान 0.5°C घट गया।
- ऐतिहासिक मिसाल (1815 तंबोरा): 1816 को उत्तरी गोलार्ध में 'बिना ग्रीष्म का वर्ष' (Year Without a Summer) कहा गया, जिससे फसलें नष्ट हुईं और अकाल पड़ा।
• निष्कर्ष (Conclusion, 40 शब्द): इस प्रकार प्रशांत अग्नि वलय पृथ्वी की आंतरिक विवर्तनिक ऊर्जा का निकास द्वार होने के साथ-साथ अल्पकालिक वैश्विक जलवायु परिवर्तन और वायुमंडलीय संतुलन का भी एक शक्तिशाली भू-रासायनिक उत्प्रेरक है।

10. Argon Quick-Revision Cheatsheet एवं अध्याय 4 के उच्च-स्तरीय प्रिलिम्स प्रश्न (Solved Statement MCQs)

📌 फैक्ट कार्ड 1: मैग्मा व स्थलाकृतियाँ

• अम्लीय/फेलसिक (>65% SiO₂): गाढ़ा, चिपचिपा, विस्फोटक ➔ गुंबद, स्ट्रैटो शंकु, काल्डेरा।
• क्षारीय/मैफिक (45-52% SiO₂): तरल, पतला, शांत ➔ शील्ड ज्वालामुखी (मौना लोआ), लावा पठार।

📌 फैक्ट कार्ड 2: अंतर्वेधी आकृतियाँ

• अनुस्तरी (समानांतर): सिल (क्षैतिज चादर), लैकोलिथ (छत्रक गुंबद), लोपोलिथ (तश्तरी), फैकोलिथ (वलन)।
• विसंस्तरी (काटने वाली): बैथोलिथ (गहराई पर मूल पिंड), डाइक (खड़ी दीवार)।

📌 फैक्ट कार्ड 3: भारत व हॉटस्पॉट

• दक्कन ट्रैप: 65 Ma पूर्व रियूनियन हॉटस्पॉट द्वारा शांत दरारी उद्गार।
• बैरन द्वीप: भारत व दक्षिण एशिया का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी।
• लोनार झील: बेसाल्ट पर उल्कापिंड क्रेटर (काल्डेरा नहीं)।

🎯 3 उच्च-स्तरीय प्रिलिम्स अभ्यास प्रश्न (UPSC Standard Solved MCQs)

प्रश्न 1: ज्वालामुखी उद्गार और लावा के गुणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. क्षारीय (बेसाल्टिक) लावा में सिलिका की मात्रा कम होती है, जिसके कारण यह अत्यधिक तरल होता है और मंद ढाल वाले विस्तृत शील्ड ज्वालामुखियों का निर्माण करता है।
  2. अम्लीय (फेलसिक) लावा में उच्च श्यानता के कारण गैसें आसानी से विमुक्त नहीं हो पातीं, जिससे प्रचंड विस्फोटक उद्गार होते हैं।
  3. हवाई द्वीप समूह के ज्वालामुखी मुख्यतः अत्यधिक विस्फोटक वल्कैनियन प्रकार के उद्गार के उदाहरण हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 3
D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: A (केवल 1 और 2)
व्याख्या: कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि हवाई द्वीप के ज्वालामुखी तरल बेसाल्टिक लावा के कारण अत्यंत शांत हवाईयन प्रकार के गैर-विस्फोटक उद्गार करते हैं, न कि विस्फोटक वल्कैनियन प्रकार के।

प्रश्न 2: अंतर्वेधी ज्वालामुखीय स्थलाकृतियों (Plutonic Landforms) के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:

स्थलाकृति ज्यामितीय आकृति / भूगर्भिक लक्षण
1. लैकोलिथ (Laccolith) सपाट आधार वाला छत्रकनुमा / मशरूम के आकार का उत्तल गुंबद
2. लोपोलिथ (Lopolith) तश्तरी या कटोरे के आकार का अवतल जमाव
3. फैकोलिथ (Phacolith) वलित संरचनाओं की अपनति व अभिनति में लेंस के आकार का जमाव
4. डाइक (Dyke) अवसादी चट्टानों के संस्तर तलों के समानांतर क्षैतिज चादर

उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?

A) केवल एक युग्म
B) केवल दो युग्म
C) केवल तीन युग्म
D) सभी चारों युग्म
सही उत्तर: C (केवल तीन युग्म — युग्म 1, 2 और 3 सही हैं)
व्याख्या: युग्म 4 गलत है क्योंकि संस्तर तलों के समानांतर क्षैतिज चादर को सिल (Sill) कहते हैं। डाइक (Dyke) चट्टानी परतों को लंबवत या किसी तीव्र कोण पर काटने वाली खड़ी दीवारनुमा (Vertical wall-like) संरचना होती है।

प्रश्न 3: मेंटल प्लूम और भारत में ज्वालामुखी क्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. दक्कन ट्रैप का निर्माण क्रेटेशियस-पैलियोजीन सीमा (~65 Ma) पर भारतीय प्लेट के रियूनियन हॉटस्पॉट के ऊपर से गुजरने के कारण हुआ था।
  2. बैरन द्वीप भारत और दक्षिण एशिया का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है, जो इंडो-बर्मी सबडक्शन क्षेत्र में स्थित है।
  3. महाराष्ट्र की लोनार झील बेसाल्टिक लावा के काल्डेरा धँसाव से निर्मित एक विशिष्ट ज्वालामुखी झील है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 3
D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: A (केवल 1 और 2)
व्याख्या: कथन 1 और 2 पूर्णतः सही हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि लोनार झील काल्डेरा नहीं, बल्कि लगभग 50,000 वर्ष पूर्व उल्कापिंड के संघात (Meteorite Impact) से बेसाल्टिक चट्टान में बना गड्ढा है।