1. भूकंप की परिभाषा, मूल यांत्रिकी (प्रत्यास्थ प्रतिक्षेप सिद्धांत), अवकेंद्र बनाम अधिकेंद्र, और भूकंपीय तरंगें
भूकंप (Earthquake): पृथ्वी के स्थलमंडल (Lithosphere) के भीतर अचानक होने वाले विवर्तनिक प्रतिबल (Tectonic Stress) के विमोचन से उत्पन्न कंपन या दोलन को भूकंप कहते हैं। जब भूपर्पटी की शैलों में संचित ऊर्जा अचानक मुक्त होती है, तो यह सभी दिशाओं में भूकंपीय तरंगों (Seismic Waves) के रूप में संचरित होती है।
🔬 प्रत्यास्थ प्रतिक्षेप सिद्धांत (Elastic Rebound Theory — H.F. Reid, 1906):
1906 के सैन फ्रांसिस्को भूकंप के अध्ययन के बाद अमेरिकी भूवैज्ञानिक हैरी फील्डिंग रीड (H.F. Reid) ने प्रतिपादित किया कि चट्टानें प्रत्यास्थ (Elastic / रबर जैसी) होती हैं। विवर्तनिक बलों के कारण भ्रंश रेखा (Fault Line) के दोनों ओर चट्टानों में खिंचाव या दबाव से प्रतिबल (Stress) संचित होता रहता है। चट्टानें एक निश्चित सीमा (Elastic Limit) तक मुड़ती हैं, किंतु जब प्रतिबल उनकी घर्षण व संसंजक शक्ति (Frictional Strength) से अधिक हो जाता है, तो चट्टानें अचानक टूट जाती हैं (Brittle Failure) और झटके से अपनी मूल असंपीड़ित स्थिति में वापस लौटती हैं। इसी क्षण संचित स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) गतिज भूकंपीय ऊर्जा में रूपांतरित होकर चारों ओर विस्फोटित होती है।
उद्गम केंद्र / अवकेंद्र (Focus / Hypocenter)
भूगर्भ के भीतर वह वास्तविक बिंदु जहाँ विवर्तनिक भ्रंशन प्रारंभ होता है और जहाँ से भूकंपीय ऊर्जा सर्वप्रथम मुक्त होती है। अधिकांश विनाशकारी भूकंपों का अवकेंद्र 0 से 70 किमी (उथली गहराई) पर स्थित होता है।
अधिकेंद्र (Epicenter)
अवकेंद्र के ठीक लंबवत (Vertically 90° Above) धरातल का वह बिंदु जो अवकेंद्र के निकटतम होता है और जहाँ भूकंपीय तरंगें सबसे पहले पहुँचती हैं। सामान्यतः भूकंप का सर्वाधिक तीव्र झटका और प्रारंभिक विनाश अधिकेंद्र पर ही दर्ज किया जाता है।
🌊 भूकंपीय तरंगों की यांत्रिकी और कंपन दिशा (UPSC Prelims Core Comparison):
| तरंग प्रकार | तरंग प्रकृति व ध्वनि/प्रकाश समरूपता | कणों के कंपन की दिशा (Particle Motion) | गमन माध्यम व औसत वेग |
|---|---|---|---|
| प्राथमिक तरंगें (P-Waves / Primary) | अनुदैर्ध्य / संपीडन तरंगें (ध्वनि तरंगों के समान) | तरंग संचरण की दिशा के समानांतर (आगे-पीछे / Push-Pull) | ठोस, द्रव और गैस (तीनों में); वेग सर्वाधिक: 6–13 km/s |
| द्वितीयक तरंगें (S-Waves / Secondary) | अनुप्रस्थ / अपरूपण तरंगें (प्रकाश तरंगों के समान) | तरंग संचरण की दिशा के लंबवत (ऊपर-नीचे / Side-to-side) | केवल ठोस माध्यम (Only Solids); बाह्य क्रोड में लुप्त; वेग: 3.5–7 km/s |
| धरातलीय तरंगें (L & R: Love & Rayleigh) | जटिल धरातलीय विक्षोभ (दीर्घ तरंगें / Surface Waves) | Love: क्षैतिज आड़े-तिरछे; Rayleigh: दीर्घवृत्ताकार रोलिंग (Rolling motion) | केवल धरातलीय चट्टानों के साथ; वेग सबसे कम (~3 km/s) किंतु सर्वाधिक आयाम व विनाशकारी |