1. प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और मूल अवधारणा (Historical Evolution & Core Postulates)
1961 में हैरी हेस के सागर नितल प्रसरण सिद्धांत और 1963 में विनी-मैथ्यूज के पुराचुंबकीय सर्वेक्षणों के बाद भूवैज्ञानिकों को यह स्पष्ट हो गया कि केवल महाद्वीप या केवल महासागरीय तली अलग-अलग गति नहीं करते, बल्कि पृथ्वी का संपूर्ण बाहरी कठोर आवरण (स्थलमंडल) विशाल भू-खंडों के रूप में गतिशील है।
(A) प्रमुख वैज्ञानिक और उनका योगदान (1965–1968)
- जे. टुज़ो विल्सन (J. Tuzo Wilson — 1965): कनाडा के भूभौतिकीविद् टुज़ो विल्सन ने सबसे पहले 'प्लेट' (Plate) शब्द का प्रयोग किया। उन्होंने रूपांतरित भ्रंशों (Transform Faults) की खोज की और बताया कि महासागरीय बेसिन एक चक्रीय क्रम (Wilson Cycle) में खुलते और बंद होते हैं।
- डैन मैकेंज़ी और रॉबर्ट पार्कर (McKenzie & Parker — 1967): इन्होंने 'यूलर के ज्यामितीय प्रमेय' (Euler's Theorem) के आधार पर गोलाकार पृथ्वी पर कठोर प्लेटों के घूर्णन और संचलन का गणितीय मॉडल (Paving Stone Theory) प्रस्तुत किया।
- डब्ल्यू. जे. मॉर्गन (W.J. Morgan — 1968) और ज़ेवियर ले पिचोन (Xavier Le Pichon — 1968): इन्होंने संपूर्ण पृथ्वी के स्थलमंडल को प्रमुख और गौण विवर्तनिक प्लेटों में विभाजित कर प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत को वर्तमान स्वरूप प्रदान किया।
(B) विवर्तनिक प्लेट की संरचना: स्थलमंडल बनाम दुर्बलतामंडल
- विवर्तनिक प्लेट (Lithospheric Plate): पृथ्वी की सबसे ऊपरी ठोस भूपर्पटी (Crust) और ऊपरी मेंटल के सबसे ऊपरी ठोस व दृढ़ भाग (Uppermost Solid Mantle) को संयुक्त रूप से स्थलमंडल (Lithosphere) कहते हैं। यही ठोस स्थलमंडल अनेक स्वतंत्र टुकड़ों में विभाजित है जिन्हें विवर्तनिक प्लेटें कहते हैं।
- मोटाई में भिन्नता: महासागरीय क्षेत्रों में स्थलमंडलीय प्लेट की मोटाई 5 km से 100 km (कटक के पास सबसे पतली, गर्त के पास मोटी) होती है, जबकि महाद्वीपीय क्षेत्रों में इसकी मोटाई 100 km से 200 km तक होती है।
- दुर्बलतामंडल (Asthenosphere) की भूमिका: स्थलमंडल के ठीक नीचे ऊपरी मेंटल में 80–100 km से 400 km की गहराई तक अर्ध-गलित, लचीला और प्लास्टिक गुणों वाला दुर्बलतामंडल (Low Velocity Zone) स्थित है। अपेक्षाकृत कम घनत्व और दृढ़ता के कारण सभी कठोर स्थलमंडलीय प्लेटें इसी दुर्बलतामंडल के ऊपर क्षैतिज रूप से तैरती (Float) और खिसकती हैं।
📊 तुलनात्मक विश्लेषण: महाद्वीपीय विस्थापन बनाम सागर नितल प्रसरण बनाम प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत
| तुलना का आधार | महाद्वीपीय विस्थापन (Wegener, 1912) | सागर नितल प्रसरण (Harry Hess, 1961) | प्लेट विवर्तनिकी (McKenzie, Morgan, 1967–68) |
|---|---|---|---|
| 1. गतिशील इकाई (Moving Unit) | केवल महाद्वीपीय भू-भाग (SIAL) गति करते हैं। | केवल महासागरीय नितल (Oceanic Crust / SIMA) कटक से दोनों ओर फैलता है। | संपूर्ण स्थलमंडलीय प्लेट (Lithosphere = Crust + Uppermost Solid Mantle) गति करती है। |
| 2. महासागरीय तली की भूमिका | महासागरीय तली (SIMA) को निष्क्रिय और स्थिर माना गया जिसे SIAL चीरकर चलता है। | महासागरीय तली को गतिशील कन्वेयर बेल्ट माना गया जो MOR पर बनती व गर्त में नष्ट होती है। | एक ही प्लेट में महाद्वीपीय और महासागरीय दोनों क्रस्ट शामिल हो सकते हैं जो एक साथ चलते हैं। |
| 3. चालक बल (Driving Forces) | ध्रुवीय पलायन बल (Pole-fleeing force) और सूर्य-चंद्रमा का ज्वारीय बल (अवैज्ञानिक)। | आर्थर होम्स की मेंटल संवहन धाराएँ (Mantle Convection Currents)। | मेंटल संवहन धाराएँ + स्लैब खिंचाव (Slab Pull) + कटक धक्का (Ridge Push) + मेंटल प्लूम। |
| 4. पर्वत निर्माण की व्याख्या | विरोधाभासी (SIMA के घर्षण से रॉकीज़ व एंडीज़ का मुड़ना बताया)। | मुख्यतः महासागरीय कटक और गर्त पर केंद्रित रहा; महाद्वीपीय पर्वतों पर कम फोकस। | अभिसारी प्लेट किनारों (O–C और C–C टक्कर) से सभी वलित पर्वतों की पूर्ण वैज्ञानिक व्याख्या। |
2. विश्व की 7 प्रमुख प्लेटें (Major Plates) और 12 महत्वपूर्ण गौण प्लेटें (Minor Plates)
किसी प्लेट को 'महाद्वीपीय प्लेट' या 'महासागरीय प्लेट' इस आधार पर कहा जाता है कि उसका अधिकांश भाग महाद्वीप से ढका है या महासागर से। NASA और NCERT के अनुसार पृथ्वी के स्थलमंडल को 7 प्रमुख (Major) और 20 से अधिक गौण (Minor) प्लेटों में बाँटा गया है:
(A) विश्व की 7 प्रमुख विवर्तनिक प्लेटें (7 Major Tectonic Plates — विस्तृत तालिका)
| प्रमुख प्लेट का नाम | प्रकृति (Nature) | भौगोलिक विस्तार एवं प्रमुख सीमाएँ (Extent & Boundaries) |
|---|---|---|
| 1. प्रशांत प्लेट (Pacific Plate) | पूर्णतः महासागरीय | विश्व की सबसे बड़ी विवर्तनिक प्लेट (~10.3 करोड़ वर्ग km) और 7 प्रमुख प्लेटों में एकमात्र पूर्णतः महासागरीय प्लेट। यह उत्तर-पश्चिम दिशा में (~7–10 cm/वर्ष) खिसक रही है और इसके चारों ओर सबडक्शन ज़ोन होने से 'प्रशांत महासागरीय अग्नि वलय' (Ring of Fire) बनता है। |
| 2. उत्तरी अमेरिकी प्लेट (North American Plate) | महाद्वीपीय + महासागरीय | इसमें उत्तरी अमेरिका महाद्वीप, ग्रीनलैंड, क्यूबा, बहामास, पूर्वी साइबेरिया का कुछ भाग और मध्य-अटलांटिक कटक के पश्चिम का उत्तरी अटलांटिक महासागरीय नितल शामिल है। पश्चिम में यह प्रशांत व जुआन डी फूका प्लेट से मिलती है। |
| 3. दक्षिणी अमेरिकी प्लेट (South American Plate) | महाद्वीपीय + महासागरीय | दक्षिण अमेरिका महाद्वीप तथा मध्य-अटलांटिक कटक तक का पश्चिमी दक्षिणी अटलांटिक नितल। पश्चिम में नाज़्का प्लेट इसके नीचे सबडक्ट होती है जिससे एंडीज़ पर्वत और पेरू-चिली गर्त बने हैं। |
| 4. यूरेशियन प्लेट (Eurasian Plate) | महाद्वीपीय + महासागरीय | यूरोप और एशिया महाद्वीप (भारतीय उपमहाद्वीप, अरब प्रायद्वीप और पूर्वी साइबेरिया को छोड़कर) तथा पूर्वी उत्तरी अटलांटिक नितल। यह दक्षिण में अफ्रीकी, अरेबियन और भारतीय प्लेटों से टकराती है (अल्पाइन-हिमालयी पर्वत पेटी)। |
| 5. अफ्रीकी प्लेट (African Plate) | महाद्वीपीय + महासागरीय | संपूर्ण अफ्रीका महाद्वीप + पूर्वी दक्षिणी अटलांटिक + पश्चिमी हिंद महासागर (कार्ल्सबर्ग कटक तक)। वर्तमान में यह पूर्वी अफ्रीकी भ्रंश घाटी के सहारे दो उप-प्लेटों—नूबियन प्लेट (पश्चिम) और सोमाली प्लेट (पूर्व) में टूट रही है। |
| 6. इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेट (Indo-Australian Plate) | महाद्वीपीय + महासागरीय | प्रायद्वीपीय भारत, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, तस्मानिया तथा हिंद महासागर का अधिकांश नितल। आधुनिक भूभौतिकीय अध्ययन इसे दो उप-प्लेटों (भारतीय प्लेट और ऑस्ट्रेलियन प्लेट) में विभाजित मानते हैं। |
| 7. अंटार्कटिक प्लेट (Antarctic Plate) | महाद्वीपीय + महासागरीय | अंटार्कटिका महाद्वीप और उसके चारों ओर फैला दक्षिणी महासागरीय नितल। इसकी विशेष बात यह है कि यह लगभग चारों ओर से अपसारी मध्य-महासागरीय कटकों (Circum-Antarctic Ridges) से घिरी हुई है। |
(B) विश्व की 12 प्रमुख गौण / लघु प्लेटें (12 Important Minor Plates — UPSC Prelims Matching Special)
UPSC प्रिलिम्स में अक्सर गौण प्लेटों की सटीक भौगोलिक अवस्थिति (कौन-सी प्लेट किन दो प्रमुख प्लेटों के बीच है) पर युग्म मिलान के प्रश्न पूछे जाते हैं:
| गौण प्लेट (Minor Plate) | सटीक अवस्थिति (Exact Geographical Location — NCERT) | संबंधित स्थलाकृतियाँ / भूगर्भिक महत्व |
|---|---|---|
| 1. नाज़्का प्लेट (Nazca Plate) | दक्षिण अमेरिका और प्रशांत प्लेट के बीच (पूर्वी प्रशांत महासागर) | दक्षिण अमेरिकी प्लेट के नीचे धँसकर एंडीज़ पर्वत और पेरू-चिली (अटाकामा) गर्त का निर्माण करती है। |
| 2. कोकोस प्लेट (Cocos Plate) | मध्य अमेरिका (Central America) और प्रशांत प्लेट के बीच | कैरेबियन व उत्तरी अमेरिकी प्लेट के नीचे धँसकर मध्य अमेरिका के ज्वालामुखी और मिड-अमेरिका गर्त बनाती है। |
| 3. जुआन डी फूका प्लेट (Juan de Fuca Plate) | उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी तट (कनाडा के वैंकूवर से USA के ओरेगन-वाशिंगटन) और प्रशांत प्लेट के बीच | प्राचीन 'फरालोन प्लेट' (Farallon Plate) का अवशेष; इसके सबडक्शन से उत्तरी अमेरिका की कास्केड ज्वालामुखी पर्वत श्रेणी (माउंट रेनियर, माउंट सेंट हेलेंस, माउंट शास्ता) बनी है। |
| 4. फिलीपीन प्लेट (Philippine Sea Plate) | एशियाई महाद्वीप और प्रशांत प्लेट के बीच (पश्चिमी प्रशांत महासागर) | पूर्णतः महासागरीय गौण प्लेट; इसके पूर्व में प्रशांत प्लेट के धँसने से विश्व का सबसे गहरा गर्त मारियाना गर्त (10,994 m) बना है। |
| 5. अरेबियन प्लेट (Arabian Plate) | मुख्यतः अरब प्रायद्वीप का भू-भाग (लाल सागर, अदन की खाड़ी और फारस की खाड़ी के मध्य) | अफ्रीकी प्लेट से अलग होकर उत्तर-पूर्व में यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है, जिससे ईरान में ज़ाग्रोस पर्वत (Zagros Mountains) बने हैं। |
| 6. कैरोलिन प्लेट (Caroline Plate) | न्यू गिनी के उत्तर में फिलीपीन और इंडियन प्लेट के बीच | पश्चिमी प्रशांत महासागर में माइक्रोनेशिया/पलाऊ के पास स्थित लघु महासागरीय प्लेट। |
| 7. फ्यूजी प्लेट (Fuji Plate) | ऑस्ट्रेलिया के उत्तर-पूर्व में (दक्षिण-पश्चिमी प्रशांत महासागर) | फिजी, टोंगा और वानुआतू द्वीप समूह के पास अत्यधिक जटिल सूक्ष्म-प्लेट क्षेत्र। |
| 8. कैरेबियन प्लेट (Caribbean Plate) | उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका और मध्य अमेरिका के मध्य (कैरेबियन सागर) | इसकी उत्तरी-पूर्वी सीमा पर अटलांटिक का सबसे गहरा प्यूर्टो रिको गर्त और लेसर एंटिलीज़ ज्वालामुखी द्वीप चाप स्थित हैं। |
| 9. स्कोशिया प्लेट (Scotia Plate) | दक्षिणी अटलांटिक में दक्षिण अमेरिका के दक्षिणी सिरे और अंटार्कटिका के बीच | इसके पूर्वी किनारे पर दक्षिण सैंडविच गर्त (South Sandwich Trench) और द्वीप चाप स्थित हैं। |
| 10. बर्मा माइक्रोप्लेट (Burma Plate) | बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के बीच (भारतीय प्लेट के ठीक पूर्व में) | अंडमान-निकोबार द्वीप समूह (बैरन व नारकोंडम ज्वालामुखी सहित) और उत्तरी सुमात्रा इसी बर्मा माइक्रोप्लेट पर स्थित हैं, जिसके नीचे भारतीय प्लेट सबडक्ट हो रही है। |
| 11. सुंडा प्लेट (Sunda Plate) | दक्षिण-पूर्व एशिया (दक्षिण चीन सागर, बोर्नियो, जावा, सुमात्रा, मलय प्रायद्वीप) | इसके दक्षिण में इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेट के धँसने से सुंडा/जावा गर्त और इंडोनेशियाई ज्वालामुखी चाप बने हैं। |
| 12. अनातोलियन प्लेट (Anatolian Plate) | एशिया माइनर / तुर्की (Turkey) का भू-भाग | दक्षिण से अरेबियन प्लेट के धक्के के कारण यह यूरेशियन प्लेट के सापेक्ष पश्चिम की ओर खिसक रही है (उत्तरी और पूर्वी अनातोलियन रूपांतरित भ्रंश — फरवरी 2023 के विनाशकारी तुर्की-सीरिया भूकंप का मुख्य कारण)। |
3. प्लेट किनारों के 3 प्रकार (Divergent, Convergent, Transform) एवं अभिसरण के 3 उप-प्रकार (O–C, O–O, C–C)
विवर्तनिक रूप से प्लेटों के आंतरिक भाग (Plate Interiors / Shields) प्रायः शांत और स्थिर होते हैं, जबकि समस्त विवर्तनिक घटनाएँ—भूकंप, ज्वालामुखी, पर्वत निर्माण (Orogeny), भ्रंशन और गर्त निर्माण—प्लेटों के किनारों (Plate Boundaries / Margins) पर ही घटित होती हैं। सापेक्षिक गति के आधार पर प्लेट किनारे 3 प्रकार के होते हैं:
(A) अपसारी या रचनात्मक प्लेट किनारा (Divergent / Constructive Boundary)
जब दो प्लेटें तनाव बल (Tensional Force) के कारण एक-दूसरे से विपरीत दिशाओं में दूर हटती हैं (Move apart), तो उनके बीच बनने वाली भ्रंश दरार से दुर्बलतामंडल (Asthenosphere) का तरल बेसाल्टिक मैग्मा ऊपर आकर ठंडा होता है और नवीन महासागरीय भूपर्पटी का निर्माण (New Crust Formation) करता है। इसीलिए इसे रचनात्मक किनारा (Constructive Margin) कहते हैं। जिस स्थान से प्लेटें अलग होती हैं उसे प्रसारी स्थान (Spreading Site) कहते हैं। यह दो रूपों में दिखता है:
- 1. महासागरीय अपसरण (Mid-Oceanic Ridges - MOR): जब दो महासागरीय प्लेटें दूर हटती हैं, तो जलमग्न पर्वत कटक बनते हैं—जैसे मध्य-अटलांटिक कटक (Mid-Atlantic Ridge) जहाँ अमेरिकी प्लेटें यूरेशियन व अफ्रीकी प्लेटों से ~2.5 cm/वर्ष की दर से दूर जा रही हैं। यहाँ शांत दरारी ज्वालामुखी उद्गार (Fissure Basaltic Eruption), उथले उद्गम केंद्र वाले भूकंप (Shallow Focus Earthquakes: <70 km) और तली पर गर्म खनिज जल के स्रोत (Hydrothermal Vents / Black Smokers) पाए जाते हैं।
- 2. महाद्वीपीय अपसरण (Continental Rifting): जब किसी महाद्वीपीय प्लेट के नीचे आरोही संवहन धारा या मेंटल प्लूम टकराता है, तो महाद्वीप गुंबदाकार उठकर बीच से फट जाता है और भ्रंश घाटी (Rift Valley) बनती है—जैसे महान पूर्वी अफ्रीकी भ्रंश घाटी (East African Rift Valley) और बैकाल रिफ्ट (रूस)। आगे चलकर यही रिफ्ट चौड़ी होकर लाल सागर (Red Sea) जैसे संकरे सागर में और अंततः पूर्ण महासागर में बदल जाती है।
(B) अभिसारी या विनाशात्मक प्लेट किनारा (Convergent / Destructive Boundary)
जब दो प्लेटें संपीडन बल (Compressional Force) के कारण आमने-सामने एक-दूसरे की ओर आकर टकराती हैं, तो अधिक घनत्व (भारी) वाली प्लेट कम घनत्व (हल्की) वाली प्लेट के नीचे मुड़कर मेंटल (Asthenosphere) में धँस जाती है। जिस क्षेत्र में प्लेट नीचे धँसती है उसे प्रविष्टन या सबडक्शन क्षेत्र (Subduction Zone / Wadati-Benioff Zone) कहते हैं। चूँकि यहाँ पुरानी भूपर्पटी पिघलकर नष्ट होती है, इसलिए इसे विनाशात्मक किनारा (Destructive Margin) कहते हैं। टकराने वाली प्लेटों की प्रकृति के आधार पर इसके 3 उप-प्रकार हैं:
महासागरीय – महाद्वीपीय टक्कर
- वैज्ञानिक तंत्र: भारी बेसाल्टिक महासागरीय प्लेट (घनत्व 3.0 g/cm³) हल्की और मोटी ग्रेनाइटिक महाद्वीपीय प्लेट (घनत्व 2.7 g/cm³) के नीचे ~45° के कोण पर धँसती है।
- महासागरीय गर्त व वलित पर्वत: मुड़ने के स्थान पर गहरा महासागरीय गर्त (Trench) बनता है तथा महाद्वीपीय किनारे के अवसाद खुरचकर (Accretionary Wedge) व संपीडित होकर तटीय वलित पर्वत (Cordilleran Fold Mountains) बनाते हैं।
- ज्वालामुखी चाप (Continental Volcanic Arc): 100–150 km की गहराई पर धँसती प्लेट के जल व चट्टानों के आंशिक गलन (Flux Melting) से गाढ़ा अम्लीय/एन्डेसाइटिक (Andesitic) मैग्मा ऊपर उठकर वलित पर्वतों की चोटी पर विस्फोटक ज्वालामुखी बनाता है।
- प्रमुख उदाहरण: (1) नाज़्का प्लेट + द. अमेरिकी प्लेट → एंडीज़ पर्वत (ओजोस डेल सलाडो, कोटोपैक्सी ज्वालामुखी) व पेरू-चिली गर्त; (2) जुआन डी फूका प्लेट + उ. अमेरिकी प्लेट → कास्केड व रॉकीज़ पर्वत।
महासागरीय – महासागरीय टक्कर
- वैज्ञानिक तंत्र: जब दो महासागरीय प्लेटें टकराती हैं, तो वह प्लेट जो अधिक पुरानी, ठंडी और अधिक सघन (Older, Colder & Denser) होती है, अपेक्षाकृत नई व गर्म महासागरीय प्लेट के नीचे सबडक्ट हो जाती है।
- गहरे गर्त व द्वीप चाप (Island Arcs): सबडक्शन के मुहाने पर विश्व के सबसे गहरे महासागरीय गर्त (Deepest Trenches) बनते हैं। नीचे धँसती प्लेट के पिघलने से मैग्मा समुद्र तल को फोड़कर ऊपर उठता है और धनुषाकार रूप में ज्वालामुखीय द्वीपों की श्रृंखला बनाता है जिसे द्वीप चाप (Volcanic Island Arc) कहते हैं।
- प्रमुख उदाहरण: (1) प्रशांत + फिलीपीन प्लेट → मारियाना गर्त व फिलीपीन द्वीप समूह; (2) प्रशांत + यूरेशियन/ओखोत्स्क → जापान द्वीप चाप व कूरिल द्वीप; (3) प्रशांत + उत्तरी अमेरिकी → अल्यूशियन द्वीप चाप; (4) भारतीय + बर्मा/सुंडा प्लेट → अंडमान-निकोबार व इंडोनेशियाई द्वीप समूह (Sunda Arc)।
महाद्वीपीय – महाद्वीपीय टक्कर
- वैज्ञानिक तंत्र: जब बीच का महासागर (जैसे टेथिस सागर) पूरी तरह सबडक्ट होकर समाप्त हो जाता है और दो महाद्वीपीय भू-भाग आपस में टकराते हैं। चूँकि दोनों महाद्वीपीय प्लेटें हल्की ग्रेनाइटिक चट्टानों (2.7 g/cm³) से बनी और अत्यधिक प्लवनशील (Buoyant) होती हैं, इसलिए कोई भी प्लेट मेंटल में गहराई तक नहीं डूब पाती।
- भूपर्पटी का दोगुना होना और सर्वोच्च वलित पर्वत: एक प्लेट का अग्रभाग दूसरी के नीचे क्षैतिज रूप से धँसता है (Underthrusting), जिससे क्रस्ट की मोटाई सामान्य 35 km से बढ़कर 65–75 km (तिब्बत व हिमालय के नीचे) हो जाती है और भू-अभिनति के अवसाद मुड़कर विश्व के सर्वोच्च वलित पर्वत बनाते हैं।
- ज्वालामुखी अनुपस्थित किंतु तीव्र भूकंप: गहरा महासागरीय सबडक्शन रुक जाने से ताज़ा मैग्मा नहीं बनता, इसलिए यहाँ सक्रिय ज्वालामुखी नहीं पाए जाते, किंतु थ्रस्ट भ्रंशों के खिसकने से भीषण भूकंप आते हैं।
- प्रमुख उदाहरण: हिमालय (भारतीय + यूरेशियन), आल्प्स (अफ्रीकी + यूरेशियन), ज़ाग्रोस (अरेबियन + यूरेशियन), यूराल व अपलेशियन (प्राचीन C–C टक्कर)।
(C) रूपांतरित या संरक्षी प्लेट किनारा (Transform / Conservative / Shear Boundary)
जहाँ दो प्लेटें न तो एक-दूसरे से दूर जाती हैं और न ही आपस में टकराती हैं, बल्कि एक उर्ध्वाधर भ्रंश तल (Strike-Slip Fault) के सहारे एक-दूसरे के बगल से क्षैतिज रूप में रगड़ते हुए विपरीत दिशा में खिसकती हैं (Slide past horizontally)। चूँकि यहाँ न तो नई भूपर्पटी का निर्माण होता है और न ही पुरानी भूपर्पटी का विनाश, इसलिए इसे संरक्षी किनारा (Conservative Margin) कहते हैं।
- मध्य-महासागरीय कटकों पर रूपांतरित भ्रंश: अधिकांश रूपांतरित भ्रंश महासागरों के भीतर मध्य-महासागरीय कटकों (MOR) को समकोण पर काटते हुए उन्हें खंडित (Offset) करते हैं, क्योंकि गोलाकार पृथ्वी पर कटक के अलग-अलग हिस्से अलग-अलग कोणीय गति से फैलते हैं।
- स्थलीय रूपांतरित भ्रंशों के विश्व प्रसिद्ध उदाहरण:
- सैन एंड्रियास भ्रंश (San Andreas Fault — कैलिफोर्निया, USA): प्रशांत प्लेट (उत्तर-पश्चिम की ओर) और उत्तरी अमेरिकी प्लेट (दक्षिण-पूर्व की ओर) के बीच ~1,200 km लंबा भ्रंश (1906 का सैन फ्रांसिस्को भूकंप यहीं आया था)।
- उत्तरी अनातोलियन भ्रंश (North Anatolian Fault — तुर्की): यूरेशियन और अनातोलियन प्लेट के बीच।
- अल्पाइन भ्रंश (Alpine Fault — दक्षिणी द्वीप, न्यूज़ीलैंड): प्रशांत और इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेट के बीच।
- मृत सागर रूपांतरित भ्रंश (Dead Sea Transform — इज़राइल-जॉर्डन-सीरिया): अफ्रीकी और अरेबियन प्लेट के बीच।
- चमन भ्रंश (Chaman Fault — पाकिस्तान-अफगानिस्तान): भारतीय और यूरेशियन प्लेट की पश्चिमी घर्षण सीमा।
| प्लेट सीमा का प्रकार | प्रभावी बल व क्रस्ट पर प्रभाव | भूकंप की प्रकृति | ज्वालामुखी क्रिया | प्रमुख स्थलाकृतियाँ व उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| 1. अपसारी (Divergent) | तनाव बल (Tension) | नई क्रस्ट का निर्माण | उथले भूकंप (<70 km), कम-से-मध्यम परिमाण | शांत बेसाल्टिक दरारी उद्गार (Mafic Lava) | मध्य-अटलांटिक कटक, पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट घाटी, लाल सागर |
| 2A. अभिसारी (O – C) | संपीडन बल | महासागरीय क्रस्ट का विनाश | उथले, मध्यम व गहरे (700 km तक — बेनिऑफ ज़ोन) | अत्यंत विस्फोटक एन्डेसाइटिक ज्वालामुखी शंकु | पेरू-चिली गर्त, एंडीज़ पर्वत, रॉकीज़ व कास्केड |
| 2B. अभिसारी (O – O) | संपीडन बल | पुरानी महासागरीय क्रस्ट का विनाश | उथले से लेकर गहरे पातालीय भूकंप (700 km तक) | तीव्र जलमग्न व द्वीपीय ज्वालामुखी (Island Arcs) | मारियाना गर्त, जापान, फिलीपींस, इंडोनेशिया, अंडमान द्वीप चाप |
| 2C. अभिसारी (C – C) | संपीडन बल | क्रस्ट मुड़कर दोगुनी मोटी (70 km) | अत्यंत विनाशकारी उथले व मध्यम भूकंप (<300 km) | सक्रिय ज्वालामुखी अनुपस्थित (No Subduction Magma) | हिमालय पर्वत, तिब्बत पठार, आल्प्स, ज़ाग्रोस |
| 3. रूपांतरित (Transform) | अपरूपण/घर्षण (Shear) | क्रस्ट संरक्षित | तीव्र और विनाशकारी उथले भूकंप (<50 km) | ज्वालामुखी अनुपस्थित | सैन एंड्रियास भ्रंश (USA), अल्पाइन भ्रंश (NZ), अनातोलियन भ्रंश |
4. प्लेट संचलन की दरें और प्लेटों को गति देने वाले 4 प्रमुख चालक बल (Rates & Driving Forces: Slab Pull & Ridge Push)
(A) प्लेट संचलन की दरों का निर्धारण कैसे होता है? (NCERT High-Yield Facts)
मध्य-महासागरीय कटकों के समानांतर फैली सामान्य और उत्क्रमित चुंबकीय क्षेत्र की पट्टियों (Paleomagnetic Stripes) तथा रेडियोमेट्रिक आयु के आधार पर वैज्ञानिकों ने विभिन्न प्लेटों की गति का सटीक निर्धारण किया है। सभी प्लेटों की गति एक-समान नहीं है:
- सबसे धीमी गति (Slowest Rate): उत्तरी ध्रुव के पास स्थित आर्कटिक कटक (Arctic Ridge / Gakkel Ridge) की प्रसरण दर विश्व में सबसे कम (< 2.5 cm प्रति वर्ष) है।
- मध्यम गति (Moderate Rate): मध्य-अटलांटिक कटक की औसत दर लगभग 2.5 से 4 cm प्रति वर्ष है, तथा भारतीय प्लेट की उत्तर-पूर्व की ओर वर्तमान गति लगभग 5 cm प्रति वर्ष है।
- सबसे तेज़ गति (Fastest Rate): दक्षिण-पूर्वी प्रशांत महासागर में चिली से ~3,400 km पश्चिम में ईस्टर द्वीप के पास स्थित पूर्वी प्रशांत उभार (East Pacific Rise) की प्रसरण दर विश्व में सर्वाधिक (> 15 cm प्रति वर्ष) है।
(B) प्लेटों को गति देने वाले 4 प्रमुख बल (4 Driving Forces of Plate Tectonics)
प्रारंभ में केवल मेंटल संवहन धाराओं को ही प्लेट गति का कारण माना जाता था, किंतु आधुनिक भूभौतिकी के अनुसार निम्नलिखित 4 बल मिलकर प्लेटों को चलाते हैं:
मेंटल संवहन धाराएँ (Mantle Convection)
पृथ्वी के भीतर ताप की उत्पत्ति के दो मुख्य स्रोत हैं: (1) रेडियोधर्मी तत्वों (U, Th, K) का क्षय, और (2) पृथ्वी के निर्माण के समय से बची अवशिष्ट या प्रारंभिक ऊष्मा (Residual / Primordial Heat)। आर्थर होम्स (1930) व हैरी हेस के अनुसार, गर्म पदार्थ ऊपर उठता है, क्षैतिज रूप से फैलकर प्लेट को खींचता है (Basal Drag), और ठंडा होकर नीचे डूब जाता है।
स्लैब खिंचाव बल (Slab Pull)
जब पुरानी महासागरीय प्लेट कटक से दूर जाती है, तो वह ठंडी और अत्यंत सघन (भारी) हो जाती है। सबडक्शन ज़ोन (गर्त) में जब यह भारी किनारा दुर्बलतामंडल में नीचे डूबता है, तो इसका विशाल भार पीछे जुड़ी पूरी प्लेट को खाई की ओर खींचता है (जैसे मेज के किनारे से लटकती भारी चेन पूरी चेन को खींच लेती है)। आधुनिक वैज्ञानिकों के अनुसार Slab Pull प्लेट गति का 70% से अधिक बल प्रदान करता है!
कटक धक्का बल (Ridge Push)
मध्य-महासागरीय कटक (MOR) गर्म मैग्मा के उभार के कारण आस-पास के गहरे समुद्री मैदानों (Abyssal Plains) से 2 से 3 km अधिक ऊँचे उठे होते हैं। कटक के शिखर पर बनने वाली नई क्रस्ट गुरुत्वाकर्षण बल के कारण कटक के दोनों ढालों से नीचे की ओर फिसलती है और प्लेट को बाहर की ओर धक्का देती है।
मेंटल प्लूम और हॉटस्पॉट (Mantle Plumes)
क्रोड-मेंटल सीमा (D'' परत, 2,900 km) से उठने वाले संकरे और अत्यधिक गर्म मैग्मा स्तंभ जब किसी महाद्वीपीय प्लेट के नीचे टकराते हैं, तो वे गुंबदाकार उभार और त्रि-भुजीय दरार (Triple Junction Rifting) पैदा कर महाद्वीपों को तोड़ने का प्रारंभिक कार्य करते हैं।
5. विल्सन चक्र (Wilson Cycle — महासागरों के खुलने व बंद होने के 6 चरण) और त्रिक संधि (Afar Triple Junction)
कनाडा के भूवैज्ञानिक जे. टुज़ो विल्सन (1966) ने स्पष्ट किया कि पृथ्वी के इतिहास में महाद्वीपों का जुड़ना (Supercontinent) और टूटना तथा महासागरीय बेसिनों का जन्म, विस्तार और विनाश एक चक्रीय प्रक्रिया है, जो लगभग 40 से 50 करोड़ वर्षों में पूरी होती है। इसे विल्सन चक्र (Wilson Cycle) कहते हैं (जैसे पैंजिया से पहले ~110 करोड़ वर्ष पूर्व रोडिनिया / Rodinia नामक सुपरकॉन्टिनेंट था)।
| विल्सन चक्र की अवस्था (Stage) | भूगर्भिक प्रक्रिया (Geological Process) | विश्व का वर्तमान जीवंत उदाहरण (Modern Example) |
|---|---|---|
| 1. भ्रूणीय अवस्था (Embryonic Stage) | महाद्वीपीय प्लेट के नीचे गर्म प्लूम से गुंबदन (Upwarping), तनाव बल से महाद्वीप का फटना और भ्रंश घाटी (Continental Rift Valley) का बनना। | पूर्वी अफ्रीकी भ्रंश घाटी (East African Rift Valley) एवं बैकाल रिफ्ट घाटी (रूस)। |
| 2. तरुण / युवा अवस्था (Juvenile Stage) | भ्रंश घाटी का और अधिक चौड़ा व गहरा होना, नई बेसाल्टिक महासागरीय क्रस्ट का बनना और समुद्र का जल प्रवेश कर संकरा रैखिक सागर (Narrow Linear Sea) बनना। | लाल सागर (Red Sea) और अदन की खाड़ी (Gulf of Aden) (अफ्रीका और अरब प्रायद्वीप के बीच)। |
| 3. प्रौढ़ अवस्था (Mature Stage) | मध्य-महासागरीय कटक (MOR) के सहारे निरंतर सागर नितल प्रसरण से दोनों ओर निष्क्रिय महाद्वीपीय किनारों (Passive Margins) वाला एक विशाल महासागर बनना। | अटलांटिक महासागर (Atlantic Ocean) और आर्कटिक महासागर। |
| 4. ह्रासमान / संकुचन अवस्था (Declining Stage) | महासागरीय क्रस्ट के अत्यधिक पुरानी व भारी होने से किनारों पर सबडक्शन ज़ोन (Trenches, Island Arcs, Cordilleras) बनना; नई क्रस्ट बनने से अधिक तेज़ी से पुरानी क्रस्ट का नष्ट होना। | प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) — जो चारों ओर सबडक्शन के कारण धीरे-धीरे सिकुड़ रहा है। |
| 5. अंतिम अवस्था (Terminal Stage) | महासागरीय बेसिन का लगभग बंद हो जाना, महाद्वीपों का करीब आना और संकीर्ण अवशिष्ट समुद्री बेसिन के साथ तटीय पर्वतों का उठना। | भूमध्य सागर (Mediterranean Sea), काला सागर, कैस्पियन सागर और फारस की खाड़ी (टेथिस के अवशेष)। |
| 6. अवशेष / सीवन अवस्था (Suturing / Relict Stage) | बीच के महासागर का पूर्णतः विलोपन, दो महाद्वीपीय भू-भागों (C–C) की सीधी टक्कर, सीवन रेखा (Suture Zone) और सर्वोच्च मोड़दार वलित पर्वतों का निर्माण। | हिमालय और तिब्बत का पठार (भारतीय व यूरेशियन प्लेट के बीच Indus-Tsangpo Suture Zone)। |
💡 त्रिक संधि (Triple Junction) और अफ़ार त्रिकोण (Afar Triangle — इथियोपिया/जिबूती/इरिट्रिया):
जब किसी महाद्वीपीय गुंबद के नीचे मेंटल प्लूम उठता है, तो वह महाद्वीप को 120° के कोण पर तीन अपसारी भुजाओं (Three Rift Arms — R-R-R Triple Junction) में फाड़ता है। प्रायः इनमें से दो भुजाएँ फैलकर महासागर बना लेती हैं और तीसरी भुजा निष्क्रिय होकर असफल रिफ्ट (Failed Rift / Aulacogen) रह जाती है (जैसे नाइजर नदी घाटी या भारत की खंभात-नर्मदा रिफ्ट)। विश्व का सबसे प्रसिद्ध सक्रिय उदाहरण हॉर्न ऑफ अफ्रीका में स्थित अफ़ार त्रिकोण (Afar Triangle) है, जहाँ 3 अपसारी रिफ्ट भुजाएँ मिलती हैं: (1) लाल सागर रिफ्ट, (2) अदन की खाड़ी रिफ्ट, और (3) पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट घाटी—जो तीन प्लेटों (अरेबियन, नूबियन और सोमाली प्लेट) को एक-दूसरे से अलग कर रही हैं।
6. पर्वत निर्माण (Orogeny): कोबर का भूसन्नति सिद्धांत, पर्वत निर्माण के 4 युग और पर्वतों का वर्गीकरण
(A) पर्वत निर्माणकारी (Orogenetic) बनाम महाद्वीप निर्माणकारी (Epeirogenetic) बल
- पर्वत निर्माणकारी संचलन (Orogeny — ग्रीक: Oros = पर्वत, Genesis = उत्पत्ति): ये क्षैतिज या स्पर्शरेखीय बल (Horizontal / Tangential Forces) होते हैं जो भूपर्पटी की चट्टानों में संपीडन (Compression → वलन/Folding) या तनाव (Tension → भ्रंशन/Faulting) पैदा कर वलित और ब्लॉक पर्वतों का निर्माण करते हैं।
- महाद्वीप निर्माणकारी संचलन (Epeirogeny): ये पृथ्वी की त्रिज्या के अनुदिश कार्य करने वाले ऊर्ध्वाधर बल (Vertical / Radial Forces) होते हैं जो विशाल महाद्वीपीय भागों या तटीय पठारों का बिना तीव्र वलन के उत्थान (Emergence/Uplift) या अवतलन/निमज्जन (Submergence/Subsidence) करते हैं।
(B) कोबर का भू-अभिनति / भूसन्नति सिद्धांत (Kober's Geosynclinal Theory)
जर्मन भूवैज्ञानिक लियोपोल्ड वॉन कोबर (Kober) ने बताया कि जहाँ आज हिमालय और आल्प्स जैसे वलित पर्वत खड़े हैं, वहाँ पहले भू-अभिनति या भूसन्नति (Geosyncline — लंबा, संकरा और उथला जलीय गर्त जैसे टेथिस सागर) था। इसके मुख्य अंग हैं:
- अग्रदेश (Foreland / Kratogen): भूसन्नति के दोनों ओर स्थित कठोर व दृढ़ भू-खंड (जैसे उत्तर में यूरेशियन और दक्षिण में भारतीय अग्रदेश)।
- रैंडकेटेन (Randketten / Marginal Ranges): जब दोनों अग्रदेश आपस में दबते हैं, तो भूसन्नति के दोनों किनारों के अवसाद मुड़कर दो समानांतर पर्वत श्रेणियाँ बनाते हैं (जैसे दक्षिण में हिमालय और उत्तर में कुनलुन पर्वत)।
- मध्यपिंड (Median Mass / Zwischengebirge): दोनों सीमांत पर्वतों के बीच का कम मुड़ा हुआ ऊँचा पठारी भाग — जैसे हिमालय और कुनलुन के बीच तिब्बत का पठार, एल्बुर्ज़ व ज़ाग्रोस के बीच ईरान का पठार, और आल्प्स व डिनारिक आल्प्स के बीच हंगरी का मैदान।
(C) पृथ्वी के इतिहास में पर्वत निर्माण के 4 प्रमुख भूगर्भिक युग (4 Eras of Orogeny — Prelims Chronology)
| पर्वत निर्माण युग (Orogenic Era) | भूगर्भिक काल एवं समय | विश्व एवं भारत के प्रमुख पर्वत उदाहरण |
|---|---|---|
| 1. प्री-कैम्ब्रियन / चरणियन / लॉरेंशियन युग (Pre-Cambrian Orogeny) | आर्कियन एवं प्रोटेरोजोइक महाकल्प (> 60 करोड़ से 250 करोड़ वर्ष पूर्व) | अरावली पर्वत (भारत — विश्व के प्राचीनतम वलित पर्वतों में से एक, सर्वोच्च शिखर: गुरु शिखर 1,722 m), धारवाड़ व छोटानागपुर की प्राचीन श्रेणियाँ, लॉरेंशियन पर्वत (कनाडा), फेनो-स्कैंडिनेविया व एलगोमन पर्वत। (अब अपरदन से अवशिष्ट पर्वत बन चुके हैं)। |
| 2. कैलेडोनियन युग (Caledonian Orogeny) | पैलियोजोइक महाकल्प का सिल्यूरियन और डेवोनियन काल (~44 से 36 करोड़ वर्ष पूर्व) | स्कॉटलैंड (जहाँ के 'Caledonia' नाम पर इस युग का नाम पड़ा), आयरलैंड और स्कैंडिनेविया के पर्वत (नॉर्वे-स्वीडन), उत्तरी अपलेशियन, ब्राज़ीलियाई उच्चभूमि। |
| 3. हर्सिनियन या वैरिस्कन युग (Hercynian / Variscan Orogeny) | पैलियोजोइक महाकल्प का कार्बोनिफेरस और पर्मियन काल (~30 से 24 करोड़ वर्ष पूर्व) | यूराल पर्वत (रूस), अपलेशियन पर्वत (USA), वॉस्जेस (फ्रांस) व ब्लैक फॉरेस्ट (जर्मनी), हर्ज़ पर्वत, पेनाइन (ब्रिटेन), टिएन शान, अल्ताई व नान शान (मध्य एशिया/चीन), और ग्रेट डिवाइडिंग रेंज (ऑस्ट्रेलिया)। |
| 4. अल्पाइन युग (Alpine / Tertiary Orogeny) | सेनोजोइक महाकल्प का टर्शियरी काल (इओसीन से प्लायोसीन: ~6.5 करोड़ वर्ष पूर्व से वर्तमान) | विश्व के सभी नवीन, ऊँचे और तीक्ष्ण मोड़दार पर्वत: हिमालय, काराकोरम, कुनलुन, पामीर, हिंदूकुश, सुलेमान, अराकान योमा (एशिया); आल्प्स, पिरेनीज़, कार्पेथियन, बाल्कन, काकेशस (यूरोप); रॉकीज़ (उ. अमेरिका); एंडीज़ (द. अमेरिका); एटलस (अफ्रीका); दक्षिणी आल्प्स (न्यूज़ीलैंड)। |
अभिसारी सीमाओं पर अवसादी चट्टानों में संपीडन व वलन से निर्मित; धनुषाकार आकृति, अपनति-अभिनति और समुद्री जीवाश्मों की उपस्थिति (हिमालय, एंडीज़, रॉकीज़, आल्प्स)।
भ्रंश तलों के सहारे बीच के भाग के ऊपर उठने या किनारों के धँसने से निर्मित सपाट शिखर व खड़े ढाल वाले पर्वत (वॉस्जेस, ब्लैक फॉरेस्ट, सिएरा नेवादा, सतपुड़ा, सॉल्ट रेंज)।
लावा, राख व पायरोक्लास्टिक पदार्थों के निकास नली के चारों ओर संचित होने से बने शंक्वाकार पर्वत (माउंट फ्यूजी, कोटोपैक्सी, किलिमंजारो, मौना लोआ, एटना)।
प्राचीन वलित पर्वतों या पठारों के करोड़ों वर्षों तक नदी, पवन व हिमनद द्वारा अपरदन के बाद बचे कठोर अवशेष (भारत में अरावली, नीलगिरि, पारसनाथ, राजमहल; USA में अपलेशियन)।
7. भारतीय प्लेट का संचलन, हिमालय के उत्थान के 3 चरण और हिमालयी भ्रंश तंत्र (ITSZ, MCT, MBT, HFT)
(A) भारतीय प्लेट की उत्तर की ओर यात्रा (India's Northward Journey)
- भारतीय प्लेट की सीमाएँ (NCERT): उत्तर में हिमालय (C–C अभिसरण), पूर्व में म्यांमार के राखिन योमा पर्वत से सुमात्रा-जावा गर्त तक, पश्चिम में पाकिस्तान की किरथर और सुलेमान श्रेणियों से मकरान तट व लाल सागर भ्रंश तक, तथा दक्षिण में कार्ल्सबर्ग व मध्य-भारतीय कटक।
- 20 करोड़ से 7.1 करोड़ वर्ष पूर्व: प्रायद्वीपीय भारत गोंडवानालैंड का अंग था और दक्षिणी गोलार्ध में 50° दक्षिणी अक्षांश पर स्थित था। भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट के बीच विशाल टेथिस सागर (Tethys Sea) था। लगभग 14 करोड़ वर्ष पूर्व भारत अफ्रीका व अंटार्कटिका से अलग होकर तेज़ी से (15–20 cm/वर्ष की दर से) उत्तर की ओर बढ़ा।
- ~6.0 से 6.5 करोड़ वर्ष पूर्व (क्रिटेशियस-टर्शियरी सीमा): जब भारतीय प्लेट हिंद महासागर में रियूनियन हॉटस्पॉट (Reunion Mantle Plume) के ऊपर से गुजरी, तो बेसाल्टिक लावा के विशाल दरारी उद्गार (Flood Basalt) से दक्कन ट्रैप (Deccan Traps) का निर्माण हुआ।
- ~4 से 5 करोड़ वर्ष पूर्व (इओसीन काल): भारतीय महाद्वीपीय क्रस्ट यूरेशियन प्लेट से टकराई, जिससे भारतीय प्लेट की गति घटकर ~5 cm/वर्ष रह गई और टेथिस सागर के अवसादों में तीव्र वलन से हिमालय का उत्थान प्रारंभ हुआ।
(B) हिमालय के उत्थान के 3 चरण (3 Phases of Himalayan Uplift)
- प्रथम चरण — वृहद हिमालय का उत्थान (इओसीन से ओलिगोसीन काल, ~45–30 MYA): भारतीय और यूरेशियन प्लेट की प्रथम भीषण टक्कर से टेथिस के अवसाद और ग्रेनाइटिक क्रस्ट उठकर महान हिमालय या हिमाद्रि (Greater Himalaya, औसत ऊँचाई 6,000 m) बने। (इससे पूर्व टेथिस महासागरीय क्रस्ट के सबडक्शन से काराकोरम व लद्दाख ट्रांस-हिमालय बन चुके थे)।
- द्वितीय चरण — लघु हिमालय का उत्थान (मध्य मायोसीन काल, ~25–14 MYA): निरंतर संपीडन से मुख्य केंद्रीय भ्रंश (MCT) के दक्षिण में लघु या मध्य हिमालय (Lesser Himalaya — पीर पंजाल, धौलाधार, मसूरी, महाभारत श्रेणी) का उत्थान हुआ और इसके दक्षिण में एक लंबा 'शिवालिक अग्रगर्त' (Foredeep Basin) बना।
- तृतीय चरण — शिवालिक श्रेणी का उत्थान (प्लायोसीन से प्लीस्टोसीन काल, ~7–1.5 MYA से वर्तमान): हिमालय से निकलने वाली नदियों ने अग्रगर्त में जो जलोढ़ व बोल्डर-कांग्लोमरेट अवसाद जमा किए थे, वे अंतिम चरण के संपीडन में मुड़कर शिवालिक या बाह्य हिमालय (Outer Himalaya) बन गए। शिवालिक के दक्षिण में बने नवीनतम अग्रगर्त (Indo-Gangetic Foredeep) में जलोढ़ भरने से भारत का उत्तरी विशाल मैदान बना।
(C) उत्तर से दक्षिण हिमालय की संरचनात्मक पेटियाँ और 4 प्रमुख भ्रंश/सीवन क्षेत्र (UPSC Prelims Favourite Sequence!)
| क्र.सं. (उत्तर से दक्षिण) | प्रमुख भ्रंश / सीवन रेखा (Fault / Suture Zone) | किन दो भू-आकृतिक इकाइयों को अलग करती है? |
|---|---|---|
| 1. सबसे उत्तर में | ITSZ — सिंधु-सांगपो सीवन क्षेत्र (Indus-Tsangpo Suture Zone) | तिब्बत का पठार / ट्रांस-हिमालय (काराकोरम-लद्दाख) को वृहद हिमालय (तेथियन हिमालय) से अलग करता है। यहीं दोनों प्लेटों का वास्तविक जुड़ाव (Suture) हुआ है। |
| 2. मध्य-उत्तर में | MCT — मुख्य केंद्रीय भ्रंश (Main Central Thrust) | वृहद हिमालय (Greater Himalaya / हिमाद्रि) को लघु हिमालय (Lesser / Middle Himalaya) से अलग करता है। |
| 3. मध्य-दक्षिण में | MBT — मुख्य सीमांत भ्रंश (Main Boundary Thrust) | लघु हिमालय (Lesser Himalaya) को शिवालिक श्रेणी (Outer Himalaya) से अलग करता है। |
| 4. सबसे दक्षिण में | HFT / MFT — हिमालय अग्र भ्रंश (Himalayan Frontal Thrust) | शिवालिक श्रेणी (पर्वतपदीय क्षेत्र) को भारत के उत्तरी विशाल मैदान (Indo-Gangetic Plains) से अलग करता है। |
✏️ मेंस उत्तर लेखन स्केच 3.1: हिमालय की उत्तर-दक्षिण भूगर्भिक काट व 4 भ्रंश
[दक्षिण / South] [उत्तर / North]
उत्तरी मैदान शिवालिक लघु हिमालय वृहद हिमालय ट्रांस-हिमालय / तिब्बत
(Foredeep) (Outer) (Lesser) (Greater) (Eurasian Plate)
/\ /\/\ /\/\/\ ____________
_____________/ \______/ \_____/ \______/ ▲ ▲ ▲ ▲
HFT MBT MCT ITSZ
\ \ \ ────────────┴──────────┴──────────┴─────────────┴───────────►
[भारतीय प्लेट (Indian Plate) का उत्तर-पूर्व की ओर क्षैतिज धँसाव]
* क्रस्ट की मोटाई: 65–75 km (दोगुनी) | सक्रिय ज्वालामुखी: शून्य | भूकंप: तीव्र (Zone V)
✏️ मेंस उत्तर लेखन स्केच 3.2: हिमालय के अक्षसंघीय मोड़ (Syntaxial Bends)
[पश्चिमी अक्षसंघीय मोड़] [पूर्वी अक्षसंघीय मोड़]
नंगा पर्वत (Nanga Parbat) नामचा बरवा (Namcha Barwa)
(सिंधु गॉर्ज / गिलगित) (दिहांग / ब्रह्मपुत्र गॉर्ज)
/^\ /^ / \ <-- 2,400 km धनुषाकार चाप --> / / \_________________________________/ / ▲ ▲ सुलेमान व (अरावली-दिल्ली कटक (शिलांग-कार्बी आंगलोंग अराकान योमा
किरथर श्रेणी का उत्तर की ओर दबाव) पठार के सींग का दबाव) (म्यांमार) व
(पाकिस्तान) अंडमान द्वीप
8. अध्याय 3 का संपूर्ण विश्व मानचित्रण: विश्व की 12 प्रमुख पर्वत श्रृंखलाएँ, सर्वोच्च शिखर व प्लेट संधियाँ
| पर्वत श्रृंखला और युग | महाद्वीप / देश व सर्वोच्च शिखर | प्लेट विवर्तनिक संबंध व UPSC मैपिंग विशेष तथ्य |
|---|---|---|
| 1. हिमालय (नवीन वलित — अल्पाइन युग) | एशिया: भारत, नेपाल, भूटान, चीन, पाकिस्तान (माउंट एवरेस्ट — 8,848.86 m, विश्व में सर्वोच्च) | भारतीय व यूरेशियन प्लेट की C–C टक्कर; लंबाई ~2,400 km; पश्चिम में नंगा पर्वत और पूर्व में नामचा बरवा पर तीक्ष्ण अक्षसंघीय मोड़ (Syntaxial Bends)। |
| 2. एंडीज़ पर्वत (Andes — नवीन वलित, अल्पाइन) | दक्षिण अमेरिका के 7 देश: वेनेजुएला, कोलंबिया, इक्वाडोर, पेरू, बोलीविया, चिली, अर्जेंटीना (माउंट एकांकागुआ — 6,961 m) | विश्व की सबसे लंबी स्थलीय पर्वत श्रृंखला (~7,000 km); नाज़्का प्लेट के दक्षिण अमेरिकी प्लेट के नीचे सबडक्शन (O–C टक्कर) से निर्मित; विश्व का सर्वोच्च सक्रिय ज्वालामुखी ओजोस डेल सलाडो और टिटिकाका झील / बोलीविया पठार यहीं हैं। |
| 3. रॉकीज़ और कास्केड पर्वत (Rockies & Cascades — अल्पाइन) | उत्तरी अमेरिका: कनाडा व USA (रॉकीज़ का सर्वोच्च शिखर: माउंट अल्बर्ट — 4,401 m; उ. अमेरिका का सर्वोच्च शिखर: माउंट डेनाली/मैकिनले — 6,190 m, अलास्का रेंज) | प्रशांत, फरालोन और जुआन डी फूका प्लेट के उत्तरी अमेरिकी प्लेट के साथ अभिसरण (O–C) से निर्मित। रॉकीज़ और कोस्ट रेंज के बीच कोलंबिया और कोलोराडो अंतरापर्वतीय पठार स्थित हैं। |
| 4. आल्प्स पर्वत (Alps — नवीन वलित, अल्पाइन) | यूरोप: फ्रांस, स्विट्ज़रलैंड, इटली, ऑस्ट्रिया, जर्मनी, स्लोवेनिया (मॉन्ट ब्लैंक / Mont Blanc — 4,808 m) | अफ्रीकी और यूरेशियन प्लेट की टक्कर से निर्मित; राइन, रोन, पो और डेन्यूब की सहायक नदियों का उद्गम; हॉर्न शिखर मैटरहॉर्न (Matterhorn) यहीं है। |
| 5. काकेशस पर्वत (Caucasus — अल्पाइन) | काला सागर और कैस्पियन सागर के मध्य: रूस, जॉर्जिया, अज़रबैजान, आर्मेनिया (माउंट एल्ब्रुस — 5,642 m) | माउंट एल्ब्रुस पूरे यूरोप महाद्वीप का सबसे ऊँचा पर्वत शिखर है; अरेबियन और यूरेशियन प्लेट के अभिसरण क्षेत्र में स्थित। |
| 6. एटलस पर्वत (Atlas — नवीन वलित, अल्पाइन) | उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका (मघरेब क्षेत्र): मोरक्को, अल्जीरिया और ट्यूनीशिया (सर्वोच्च शिखर: माउंट टुबकल — 4,167 m, मोरक्को) | अफ्रीका महाद्वीप का एकमात्र नवीन अल्पाइन वलित पर्वत; अफ्रीकी और यूरेशियन प्लेट के अभिसरण से निर्मित। |
| 7. ज़ाग्रोस और एल्बुर्ज़ पर्वत (Zagros & Elburz — अल्पाइन) | ईरान (एल्बुर्ज़ में सर्वोच्च शिखर: माउंट दमावंद — 5,610 m) | अरेबियन प्लेट के यूरेशियन प्लेट से टकराने (C–C टक्कर) से निर्मित; दोनों के बीच अंतरापर्वतीय ईरान का पठार (Median Mass) स्थित है। |
| 8. अराकान योमा / रखाइन पर्वत (Arakan Yoma — अल्पाइन) | पश्चिमी म्यांमार (सर्वोच्च शिखर: माउंट विक्टोरिया / नात मा ताउंग) | भारतीय और बर्मा प्लेट की टक्कर से बना पूर्वी हिमालय का दक्षिणी विस्तार, जो बंगाल की खाड़ी में डूबकर अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के रूप में उभरता है। |
| 9. दक्षिणी आल्प्स (Southern Alps — अल्पाइन) | दक्षिणी द्वीप, न्यूज़ीलैंड (सर्वोच्च शिखर: माउंट कुक / आओराकी — 3,724 m) | प्रशांत प्लेट और इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेट की तिर्यक टक्कर व अल्पाइन भ्रंश (Oblique Convergence) से निर्मित। |
| 10. यूराल पर्वत (Urals — प्राचीन वलित, हर्सिनियन युग) | रूस और कज़ाकिस्तान (सर्वोच्च शिखर: माउंट नरोदनाया — 1,895 m) | आर्कटिक महासागर से कैस्पियन के उत्तर तक ~2,500 km लंबा; यूरोप और एशिया की पारंपरिक भौगोलिक सीमा; लौह अयस्क, कोयला व प्लैटिनम से समृद्ध। |
| 11. अपलेशियन पर्वत (Appalachians — कैलेडोनियन व हर्सिनियन) | पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) व कनाडा (सर्वोच्च शिखर: माउंट मिशेल — 2,037 m) | प्राचीन वलित पर्वत जो अब अपरदन से कम ऊँचा रह गया है; एन्थ्रेसाइट व बिटुमिनस कोयले के विशाल भंडारों के लिए प्रसिद्ध। |
| 12. ग्रेट डिवाइडिंग रेंज (Great Dividing Range — हर्सिनियन) | पूर्वी ऑस्ट्रेलिया: क्वींसलैंड से विक्टोरिया तक (सर्वोच्च शिखर: माउंट कोसियुस्को — 2,228 m, ऑस्ट्रेलियन आल्प्स) | ऑस्ट्रेलिया की सबसे लंबी पर्वत श्रृंखला जहाँ से मरे और डार्लिंग नदियाँ निकलती हैं। |
9. परीक्षा की दृष्टि से विशेष बिंदु: 6 प्रिलिम्स स्टेटमेंट ट्रैप्स एवं 4 संपूर्ण मेंस मॉडल उत्तर (Mains GS-1)
⚠️ प्रिलिम्स स्टेटमेंट ट्रैप्स (6 High-Yield Prelims Traps — अध्याय 3)
ट्रैप 1: हिमालय में ज्वालामुखी का अभाव
गलतफहमी: "हिमालय अभिसारी प्लेट सीमा पर बना है, इसलिए एंडीज़ की तरह हिमालय में भी सक्रिय ज्वालामुखी पाए जाते हैं।"
✔ सही तथ्य: हिमालय में सक्रिय ज्वालामुखी नहीं हैं क्योंकि यह C–C (महाद्वीपीय-महाद्वीपीय) टक्कर से बना है जहाँ महासागरीय क्रस्ट का गहरा सबडक्शन बंद हो चुका है और क्रस्ट 70 km मोटी है।
ट्रैप 2: अंडमान-निकोबार में ज्वालामुखी क्यों?
सवाल: "यदि हिमालय में ज्वालामुखी नहीं हैं, तो अंडमान के बैरन द्वीप में सक्रिय ज्वालामुखी क्यों है?"
✔ सही तथ्य: क्योंकि अंडमान सागर में भारतीय प्लेट का महासागरीय भाग (Oceanic Lithosphere) बर्मा माइक्रोप्लेट के नीचे सबडक्ट हो रहा है (O–O अभिसरण), जिससे बेनिऑफ ज़ोन में मैग्मा बनता है।
ट्रैप 3: भ्रंशों का उत्तर-से-दक्षिण क्रम
कन्फ्यूजन: प्रिलिम्स में MBT और MCT का क्रम उलट दिया जाता है।
✔ सही अनुक्रम (उत्तर से दक्षिण): ITSZ (तिब्बत–वृहद) → MCT (वृहद–लघु) → MBT (लघु–शिवालिक) → HFT (शिवालिक–मैदान)। ट्रिक: "I-C-B-F" (Central पहले, Boundary बाद में)।
ट्रैप 4: पश्चिमी बनाम पूर्वी हिमालय
गलतफहमी: "हिमालय की चौड़ाई पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ती है।"
✔ सही तथ्य: हिमालय पश्चिम (कश्मीर में ~400 km) में अधिक चौड़ा है और पूर्व (अरुणाचल में ~150 km) में अधिक संकरा और खड़ा (Steep) है, क्योंकि पूर्वी भाग में अभिसरण बल अधिक तीव्र था (इसीलिए एवरेस्ट व कंचनजंगा जैसी सर्वोच्च चोटियाँ मध्य-पूर्वी भाग में हैं)।
ट्रैप 5: सबसे बड़ी और पूर्णतः महासागरीय प्लेट
गलतफहमी: "यूरेशियन और इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेटें पूर्णतः महाद्वीपीय प्लेटें हैं।"
✔ सही तथ्य: कोई भी प्रमुख प्लेट पूर्णतः महाद्वीपीय नहीं है (सभी में महासागरीय क्रस्ट का हिस्सा जुड़ा है)। केवल प्रशांत प्लेट (Pacific Plate) ही एकमात्र ऐसी प्रमुख प्लेट है जो लगभग पूर्णतः महासागरीय है।
ट्रैप 6: सैन एंड्रियास और अनातोलियन भ्रंश
गलतफहमी: "सैन एंड्रियास भ्रंश पर ज्वालामुखी पर्वत बनते हैं।"
✔ सही तथ्य: सैन एंड्रियास (USA) और अनातोलियन (तुर्की) रूपांतरित/संरक्षी (Transform) भ्रंश हैं; यहाँ केवल उथले और तीव्र भूकंप आते हैं, ज्वालामुखी या वलित पर्वत नहीं बनते।
प्रश्न 1: "वलित पर्वत विश्व के महाद्वीपों के किनारों पर ही क्यों पाए जाते हैं? वलित पर्वतों के वैश्विक वितरण और भूकंप व ज्वालामुखी के साथ उनके संबंध को उजागर कीजिए।" (Why are the world's fold mountain systems located along the margins of continents? Bring out the association between the global distribution of fold mountains and the earthquakes and volcanoes.)
भूमिका (Introduction - 30 शब्द): विश्व की प्रमुख नवीन वलित पर्वत श्रृंखलाएँ—जैसे उत्तर व दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी किनारे पर रॉकीज़ व एंडीज़ तथा यूरेशिया के दक्षिणी किनारे पर आल्प्स व हिमालय—महाद्वीपों के आंतरिक भागों के बजाय उनके सीमांतों (Margins) पर स्थित हैं। इसका मूल कारण अभिसारी प्लेट विवर्तनिकी (Convergent Plate Tectonics) है।
मुख्य भाग (Body - 185 शब्द):
- वलित पर्वतों के महाद्वीपीय किनारों पर स्थित होने के वैज्ञानिक कारण:
- अवसादों का संचयन (Geosynclinal Wedges): नदियों द्वारा अपरदित भारी अवसाद महाद्वीपीय मग्नतटों और सीमांतों (Continental Margins / Geosynclines) पर जमा होते हैं।
- महासागरीय–महाद्वीपीय (O–C) अभिसरण: जब भारी महासागरीय प्लेट (3.0 g/cm³) हल्की महाद्वीपीय प्लेट (2.7 g/cm³) से टकराती है, तो महासागरीय प्लेट मेंटल में सबडक्ट हो जाती है और महाद्वीपीय किनारे के अवसाद संपीडित होकर तटीय वलित पर्वत बनाते हैं (जैसे नाज़्का व द. अमेरिकी प्लेट की टक्कर से एंडीज़ तथा प्रशांत/फरालोन व उ. अमेरिकी प्लेट से रॉकीज़)।
- महाद्वीपीय–महाद्वीपीय (C–C) अभिसरण: जब दो महाद्वीपों के बीच का महासागर (टेथिस) समाप्त होकर दोनों के किनारे टकराते हैं, तो सीमांत अवसाद उठकर सर्वोच्च पर्वत बनाते हैं (जैसे हिमालय और आल्प्स), जो बाद में दोनों महाद्वीपों के जुड़ने (Suturing) से महाद्वीप के भीतर दिखाई देने लगते हैं (जैसे प्राचीन यूराल पर्वत)।
- वलित पर्वतों, भूकंप और ज्वालामुखी का सह-संबंध (Spatial Association):
- परि-प्रशांत पेटी (Circum-Pacific Belt / Ring of Fire): एंडीज़, रॉकीज़, कास्केड और द्वीपीय चापों (जापान, फिलीपींस) में O–C तथा O–O सबडक्शन सक्रिय है। यहाँ धँसती प्लेट के 100–200 km की गहराई पर पिघलने से विस्फोटक एन्डेसाइटिक ज्वालामुखी (विश्व के ~75% ज्वालामुखी) और वादाती-बेनिऑफ ज़ोन में घर्षण से गहरे व तीव्र भूकंप (विश्व के ~68% भूकंप) दोनों एक साथ मिलते हैं।
- मध्य-महाद्वीपीय / अल्पाइन-हिमालयी पेटी: आल्प्स से हिमालय तक C–C टक्कर के कारण क्रस्ट दोगुनी मोटी (70 km) हो गई है और महासागरीय सबडक्शन रुक गया है। परिणामस्वरूप हिमालय में सक्रिय ज्वालामुखी अनुपस्थित हैं, किंतु सक्रिय थ्रस्ट भ्रंशों (MCT, MBT, HFT) के कारण उच्च तीव्रता के भूकंप (विश्व के ~21% भूकंप) आते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion - 25 शब्द): स्पष्ट है कि वलित पर्वत, भूकंप और ज्वालामुखी तीनों ही अभिसारी प्लेट किनारों पर संपीडन बल और सबडक्शन ऊर्जा के सह-उत्पाद (Co-products) हैं, जिनका वैश्विक वितरण प्लेट सीमाओं का ही अनुसरण करता है।
प्रश्न 2: "चर्चा कीजिए कि भूपर्पटीय द्रव्यमानों (Crustal Masses) के विवर्तनिक संचलनों के कारण ग्रह के महाद्वीपों और महासागरीय बेसिनों के आकार और आकृति में किस प्रकार परिवर्तन होते हैं।" (Discuss how the changes in shape and sizes of continents and ocean basins of the planet take place due to tectonic movements of the crustal masses.)
भूमिका (Introduction - 30 शब्द): पृथ्वी के महाद्वीप और महासागरीय बेसिन स्थायी आकृतियाँ नहीं हैं। दुर्बलतामंडल (Asthenosphere) के ऊपर तैरती स्थलमंडलीय प्लेटों के अपसारी, अभिसारी और रूपांतरित संचलनों तथा विल्सन चक्र (Wilson Cycle) के माध्यम से इनका आकार और स्वरूप निरंतर बदलता रहता है।
मुख्य भाग (Body - 185 शब्द):
- अपसारी संचलन से महाद्वीपों का विखंडन और नए महासागरीय बेसिनों का जन्म व विस्तार:
- भ्रूणीय व तरुण अवस्था: महाद्वीपीय क्रस्ट के नीचे तनाव बल से भ्रंश घाटी बनती है जो महाद्वीप को चीरती है—जैसे पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट घाटी अफ्रीका को नूबियन और सोमाली प्लेट में बाँट रही है। आगे चलकर इसमें समुद्री जल भरने से लाल सागर (Red Sea) जैसा नया रैखिक महासागर बनता है।
- प्रौढ़ विस्तार: मध्य-महासागरीय कटक (Mid-Atlantic Ridge) पर सागर नितल प्रसरण से अटलांटिक और हिंद महासागर का क्षेत्रफल निरंतर बढ़ रहा है।
- अभिसारी संचलन से महासागरों का संकुचन और महाद्वीपों का संलयन व आकार परिवर्तन:
- महासागरीय बेसिनों का सिकुड़ना (Declining & Terminal Stage): प्रशांत महासागर के चारों ओर सक्रिय सबडक्शन गर्तों (मारियाना, टोंगा, पेरू-चिली) में पुरानी क्रस्ट के नष्ट होने से प्रशांत महासागर का आकार प्रतिवर्ष छोटा हो रहा है। इसी प्रकार अफ्रीकी प्लेट के उत्तर की ओर खिसकने से प्राचीन टेथिस सागर सिकुड़कर मात्र भूमध्य सागर के रूप में बचा है।
- महाद्वीपीय एकीकरण और अभिवृद्धि (Continental Accretion & Collision): भारतीय और अरेबियन प्लेटों के यूरेशिया से जुड़ने से एशिया महाद्वीप का आकार और आकृति बदल गई तथा हिमालय, तिब्बत व ज़ाग्रोस का उत्थान हुआ। इसी प्रकार O–O और O–C अभिसरण से बने द्वीप चाप और टेरेन (Terranes) महाद्वीपीय किनारों से जुड़कर महाद्वीपों का क्षेत्रफल बढ़ाते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion - 25 शब्द): इस प्रकार कटक पर सृजन और गर्त में विनाश का यह विवर्तनिक संतुलन पृथ्वी के कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल को स्थिर रखते हुए भी पैंजिया से वर्तमान और भविष्य के 'पैंजिया अल्टिमा' तक महाद्वीपों व महासागरों का निरंतर पुनर्निर्माण करता है।
प्रश्न 3: "हिमालय पर्वत की उत्पत्ति के प्लेट विवर्तनिक मॉडल की व्याख्या कीजिए तथा बताइए कि हिमालय क्षेत्र आज भी भूकंप और भूस्खलन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील क्यों है?"
संपूर्ण मॉडल उत्तर सार:
1. उत्पत्ति मॉडल: ~200 MYA गोंडवानालैंड से अलग होकर भारतीय प्लेट उत्तर की ओर खिसकी, ~65 MYA रियूनियन हॉटस्पॉट से दक्कन ट्रैप बना, और ~45–50 MYA यूरेशियन प्लेट से C–C टक्कर हुई। टेथिस सागर के अवसाद तीन चरणों में मुड़कर वृहद हिमालय (ओलिगोसीन), लघु हिमालय (मायोसीन) और शिवालिक (प्लायो-प्लीस्टोसीन) बने।
2. वर्तमान भूगर्भिक अस्थिरता और भूकंप-प्रवणता (Seismic Zone IV & V) के कारण:
• निरंतर अभिसरण: भारतीय प्लेट आज भी ~5 cm/वर्ष की दर से यूरेशिया के नीचे (Underthrusting) धक्का दे रही है, जिससे हिमालय प्रतिवर्ष ~5–10 mm ऊपर उठ रहा है।
• सक्रिय थ्रस्ट भ्रंश (ITSZ, MCT, MBT, HFT): इन भ्रंश तलों में संचित विवर्तनिक तनाव (Strain Energy) जब अचानक मुक्त होता है, तो भुज/कश्मीर (2005), नेपाल (2015) जैसे भीषण भूकंप आते हैं।
• असंगठित अवसाद व तीव्र ढाल: युवा वलित पर्वत होने से ढाल अत्यंत तीव्र हैं और शिवालिक/लघु हिमालय असंगठित अवसादी व कायांतरित चट्टानों से बने हैं, जहाँ मानसूनी वर्षा व अवैज्ञानिक निर्माण (जैसे जोशीमठ) से भूस्खलन होते हैं।
प्रश्न 4: "मेंटल प्लूम (Mantle Plume) को परिभाषित कीजिए और प्लेट विवर्तनिकी में इसकी भूमिका को स्पष्ट कीजिए।"
संपूर्ण मॉडल उत्तर सार:
1. परिभाषा: मेंटल प्लूम (1971 में डब्ल्यू. जे. मॉर्गन द्वारा प्रस्तावित) पृथ्वी के भीतर क्रोड-मेंटल सीमा (D'' परत, ~2,900 km की गहराई) से उठने वाला अत्यधिक गर्म मैग्मा और चट्टानों का एक संकरा, मशरूम के आकार के शीर्ष (Plume Head) वाला ऊर्ध्वाधर तापीय स्तंभ (Thermal Diapir) है।
2. प्लेट विवर्तनिकी में भूमिका:
• अंतरा-प्लेट ज्वालामुखी (Intraplate / Hotspot Volcanism): प्लेट किनारों से दूर प्लेट के बीचों-बीच ज्वालामुखी श्रृंखला बनाता है। प्लूम स्थिर रहता है और प्लेट खिसकती है—जैसे प्रशांत प्लेट पर हवाई द्वीप-सम्राट समुद्री पर्वत श्रृंखला और उ. अमेरिकी प्लेट पर येलोस्टोन सुपरवॉल्केनो।
• महाद्वीपीय विखंडन (Continental Rifting): प्लूम का विशाल शीर्ष स्थलमंडल के नीचे गुंबदन और त्रिक संधि (Triple Junction — जैसे अफ़ार प्लूम द्वारा लाल सागर व पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट) बनाकर सुपरकॉन्टिनेंट को तोड़ता है।
• वृहद आग्नेय प्रांत (Flood Basalts): भारतीय प्लेट जब रियूनियन प्लूम के ऊपर से गुजरी तो दक्कन ट्रैप और चागोस-लक्षद्वीप कटक का निर्माण हुआ।
10. Argon Quick-Revision Cheatsheet एवं अध्याय 3 के उच्च-स्तरीय प्रिलिम्स प्रश्न (Solved PYQ & Statements)
📌 फैक्ट कार्ड 1: शब्दावली व वर्ष
• 'Plate' शब्द व Transform Fault: जे. टुज़ो विल्सन (1965)
• प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत: मैकेंज़ी, पार्कर व मॉर्गन (1967–68)
• भूसन्नति (Geosyncline) सिद्धांत: कोबर (Kober)
📌 फैक्ट कार्ड 2: गति के रिकॉर्ड
• सबसे बड़ी व पूर्णतः महासागरीय प्लेट: प्रशांत प्लेट
• सबसे तेज़ प्रसरण दर: पूर्वी प्रशांत उभार (>15 cm/yr)
• सबसे धीमी प्रसरण दर: आर्कटिक कटक (<2.5 cm/yr)
📌 फैक्ट कार्ड 3: पर्वत सर्वोच्च शिखर
• एंडीज़: एकांकागुआ (6,961 m)
• रॉकीज़: माउंट अल्बर्ट (4,401 m)
• आल्प्स: मॉन्ट ब्लैंक (4,808 m) | काकेशस: एल्ब्रुस (5,642 m)
🎯 अध्याय 3: हल सहित प्रिलिम्स कथन-आधारित प्रश्न (Statement-Based Prelims Questions)
प्रश्न 3.1: निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए (गौण प्लेट — अवस्थिति):
1. नाज़्का प्लेट : दक्षिण अमेरिका और प्रशांत प्लेट के बीच
2. कोकोस प्लेट : मध्य अमेरिका और प्रशांत प्लेट के बीच
3. कैरोलिन प्लेट : न्यू गिनी के उत्तर में फिलीपीन और इंडियन प्लेट के बीच
4. जुआन डी फूका प्लेट : दक्षिण-पूर्वी एशिया और ऑस्ट्रेलिया के बीच
उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
✔ सही उत्तर: केवल तीन युग्म (1, 2 और 3 सही हैं)।
व्याख्या: युग्म 4 गलत है क्योंकि जुआन डी फूका प्लेट उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी तट (कनाडा-USA) और प्रशांत प्लेट के बीच स्थित है, जिसके सबडक्शन से कास्केड पर्वत श्रेणी बनी है।
प्रश्न 3.2: तिब्बत के पठार से चलकर भारत के गंगा के मैदान की ओर आते समय निम्नलिखित भूगर्भिक भ्रंशों/सीवन क्षेत्रों का सही अनुक्रम (उत्तर से दक्षिण) क्या होगा?
(a) MCT → MBT → ITSZ → HFT (b) ITSZ → MCT → MBT → HFT (c) ITSZ → MBT → MCT → HFT (d) HFT → MBT → MCT → ITSZ
✔ सही उत्तर: (b) ITSZ → MCT → MBT → HFT
व्याख्या: उत्तर से दक्षिण सही क्रम है: सिंधु-सांगपो सीवन क्षेत्र (ITSZ) → मुख्य केंद्रीय भ्रंश (MCT) → मुख्य सीमांत भ्रंश (MBT) → हिमालय अग्र भ्रंश (HFT)।
प्रश्न 3.3: निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन-I: एंडीज़ पर्वत श्रृंखला में ओजोस डेल सलाडो और कोटोपैक्सी जैसे अनेक सक्रिय ज्वालामुखी पाए जाते हैं, जबकि हिमालय पर्वत श्रृंखला में सक्रिय ज्वालामुखी अनुपस्थित हैं।
कथन-II: एंडीज़ का निर्माण महासागरीय-महाद्वीपीय (O–C) अभिसरण से हुआ है जहाँ धँसती महासागरीय प्लेट के आंशिक गलन से मैग्मा बनता है, जबकि हिमालय का निर्माण महाद्वीपीय-महाद्वीपीय (C–C) टक्कर से हुआ है जहाँ गहरा महासागरीय सबडक्शन बंद हो चुका है।
✔ सही उत्तर: कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं, तथा कथन-II, कथन-I की सही व्याख्या करता है।