LIVEUPSC CSE 2027 & BPSC • नोट्स • समसामयिकी • PYQ • Tests
GS Paper-I • भौतिक भूगोल अध्याय 06 / 07 • Argon Complete Edition Prelims + Mains + Mapping + Solved MCQs

6. चट्टानें और अंतर्जात भू-संचलन: वलन व भ्रंशन

Rocks, Folding & Faulting — Complete Argon Edition
🪨 शैल: खनिज, आग्नेय, अवसादी, कायांतरित 🔄 शैल चक्र: Rock Cycle + Plate Tectonics ⛰️ संरचना: Folding, Nappe, Faulting 🗺️ मानचित्रण: विश्व + भारत के 12 प्रमुख स्थल

🧭 अध्याय एक नज़र में

खनिजों और शैल-विज्ञान से शुरू होकर शैल चक्र, तीन प्रमुख शैल प्रकार, अंतर्जात बल, वलन-नैपे, भ्रंशन, हॉर्स्ट-ग्रैबेन और विश्व-भारत मानचित्रण तक पूरा अध्याय क्रमबद्ध रूप से पढ़ें। मूल स्रोत के तीनों चित्र इसी पेज में जस के तस सुरक्षित हैं।

1. खनिज, शैल की परिभाषा, प्रमुख शैल-निर्माता खनिज और मोह का कठोरता पैमाना (Minerals, Rocks & Mohs Scale)

खनिज (Minerals): खनिज प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले अकार्बनिक ठोस पदार्थ (Naturally occurring inorganic solids) हैं, जिनकी एक निश्चित आंतरिक क्रिस्टलीय संरचना (Crystalline Structure) तथा विशिष्ट रासायनिक संघटन (Chemical Composition) होता है।

चट्टान या शैल (Rocks): भूपर्पटी का निर्माण करने वाले एक या एक से अधिक खनिजों के प्राकृतिक समुच्चय (Aggregate of Minerals) को चट्टान कहते हैं। चट्टानों का कोई निश्चित रासायनिक संघटन नहीं होता (जैसे ग्रेनाइट मुख्यतः फेल्डस्पार, क्वार्ट्ज और माइका का मिश्रण है)।

💎 भूपर्पटी के 6 प्रमुख शैल-निर्माता खनिज समूह (Rock-forming Mineral Groups — NCERT):

1. फेल्डस्पार (Feldspar)

भूपर्पटी का लगभग आधा (50%) भाग बनाता है। सिलिकॉन, ऑक्सीजन, एल्युमिनियम, सोडियम, पोटैशियम व कैल्शियम से निर्मित। कांच और चीनी मिट्टी उद्योग में उपयोगी।

2. क्वार्ट्ज (Quartz)

भूपर्पटी का दूसरा सबसे प्रचुर खनिज (~12%)। शुद्ध सिलिका (SiO₂); कठोर, जल में अघुलनशील तथा ग्रेनाइट व बालू का मुख्य घटक। रडार व घड़ियों में प्रयुक्त।

3. पाइरॉक्सीन (Pyroxene)

क्रस्ट का ~10% भाग; कैल्शियम, एल्युमिनियम, मैग्नीशियम व आयरन सिलिकेट। गहरे हरे/काले रंग का; बेसाल्टिक लावा व उल्कापिंडों में प्रमुख।

4. एम्फीबोल (Amphibole)

क्रस्ट का ~7% भाग; हॉर्नब्लेंड इसका प्रमुख खनिज है। एस्बेस्टस उद्योग में प्रयुक्त।

5. अभ्रक / माइका (Mica)

क्रस्ट का ~4% भाग; पोटैशियम, एल्युमिनियम, मैग्नीशियम सिलिकेट। परतों (Sheets) में सरलता से अलग होता है। उत्कृष्ट विद्युत कुचालक।

6. ओलिविन (Olivine)

मैग्नीशियम व आयरन सिलिकेट; हरे रंग का क्रिस्टल। ऊपरी मेंटल (पेरिडोटाइट) और बेसाल्ट शैलों में प्रचुरता।

मोह का आपेक्षिक कठोरता पैमाना (Mohs Hardness Scale 1-10) एवं भूपर्पटी में चट्टानों का अनुपात
चित्र 6.1: (बाएँ) मोह का 10-स्तरीय आपेक्षिक कठोरता पैमाना (टैल्क 1 से हीरा 10) एवं दैनिक परीक्षण वस्तुएँ (नाखून 2.5, तांबे का सिक्का 3.5, कांच/चाकू 5.5, स्टील फाइल 6.5); (दाएँ) क्रस्ट में चट्टानों का आयतन अनुपात (आग्नेय व कायांतरित 95% बनाम अवसादी 5%) तथा प्रमुख शैल कायांतरण प्रक्रम।

💎 मोह का कठोरता पैमाना (Mohs Scale of Hardness — जर्मन खनिजविद् फ्रेडरिक मोह, 1812):

यह खनिजों के एक-दूसरे को खरोंचने (Scratch Resistance) की क्षमता पर आधारित 1 से 10 तक का आपेक्षिक पैमाना है:

1. टैल्क < 2. जिप्सम < 3. कैल्साइट < 4. फ्लोराइट < 5. एपेटाइट < 6. ऑर्थोक्लेस < 7. क्वार्ट्ज < 8. टोपाज़ < 9. कोरन्डम < 10. हीरा

*प्रिलिम्स टिप: मानव नाखून (कठोरता 2.5) टैल्क और जिप्सम को खरोंच सकता है; तांबे का सिक्का (3.5) कैल्साइट को; चाकू की ब्लेड या कांच (5.5) एपेटाइट तक को; तथा स्टील फाइल (6.5) फेल्डस्पार को खरोंच सकती है। क्वार्ट्ज (7) कांच पर आसानी से खरोंच डाल देता है। हीरा (10) पृथ्वी का सबसे कठोर ज्ञात प्राकृतिक खनिज है।

2. शैल चक्र (The Rock Cycle): चट्टानों का गतिशील रूपांतरण और भू-रासायनिक चक्र

चट्टानें अपने मूल रूप में हमेशा के लिए स्थिर नहीं रहतीं, बल्कि वे एक निरंतर चक्रीय प्रक्रम के माध्यम से परिवर्तित होती रहती हैं। इस सतत भूगर्भिक प्रक्रम को शैल चक्र (The Rock Cycle — सर्वप्रथम जेम्स हटन, 1788) कहते हैं:

शैल चक्र (Rock Cycle), वलन के प्रकार (Folds) तथा ब्लॉक पर्वत व रिफ्ट घाटी (Horst & Graben)
चित्र 6.2: (1) शैल चक्र (Rock Cycle) का भू-रासायनिक प्रवाह, (2) संपीडन से उत्पन्न वलन के विभिन्न प्रकार (अपनति, अभिनति, समनत व परिवलित वलन), तथा (3) तनाव बल से निर्मित ब्लॉक पर्वत (Horst) एवं भ्रंश घाटी (Graben)।

🔄 शैल चक्र के 5 मुख्य चरण एवं शॉर्टकट मार्ग (Cyclic Stages & Shortcuts):

  1. आग्नेय शैलों का निर्माण (प्राथमिक चरण): मैग्मा या लावा के शीतल होकर जमने से प्राथमिक आग्नेय चट्टानें (ग्रेनाइट, बेसाल्ट) बनती हैं।
  2. अपरदन व अवसादीकरण: आग्नेय चट्टानें धरातल पर आने पर अपक्षय (Weathering) व अपरदन (Erosion) से छोटे कणों में टूटती हैं। नदियाँ और पवन इन्हें जल-बेसिनों में जमा करती हैं, जहाँ शिलीभवन (Lithification) द्वारा अवसादी चट्टानें बनती हैं।
  3. कायांतरण (Metamorphism): जब आग्नेय या अवसादी चट्टानें विवर्तनिक संचलन से अत्यधिक गहराई पर ताप, दाब या संपीड़न के संपर्क में आती हैं, तो बिना पूरी तरह पिघले उनका पुन:क्रिस्टलीकरण (Recrystallization) होता है और वे कायांतरित चट्टानें बन जाती हैं।
  4. पुनः गलन (Melting) व मैग्मा निर्माण: कायांतरित चट्टानें जब सबडक्शन ज़ोन में बहुत गहराई पर पहुँचती हैं, तो अत्यधिक ताप से पिघलकर पुनः मैग्मा बन जाती हैं, जो ठंडा होकर फिर आग्नेय चट्टान बनाता है।
  5. शैल चक्र के शॉर्टकट (Direct Pathways): यह चक्र केवल एक ही दिशा में नहीं चलता—(A) आग्नेय चट्टानें बिना अवसादी बने सीधे ताप-दाब से कायांतरित चट्टान (उदा. ग्रेनाइट ➔ नीस) बन सकती हैं; (B) कायांतरित चट्टानें भी धरातल पर अनावृत होकर अपक्षय द्वारा अवसादी चट्टान बन सकती हैं; (C) अवसादी चट्टानें अत्यधिक गहराई पर सीधे पिघलकर मैग्मा बन सकती हैं।

3. आग्नेय चट्टानें (Igneous Rocks — प्राथमिक / मूल शैलें): उत्पत्ति, संरचना एवं वर्गीकरण

आग्नेय चट्टानें (लैटिन 'Ignis' = अग्नि): पृथ्वी की उत्पत्ति के बाद सर्वप्रथम मैग्मा और लावा के ठंडे होकर जमने से इन्हीं चट्टानों का निर्माण हुआ, इसलिए इन्हें प्राथमिक चट्टानें (Primary Rocks) या जनक शैलें (Parent Rocks) कहा जाता है। संपूर्ण भूपर्पटी के कुल आयतन का लगभग 90% से 95% भाग आग्नेय और उनसे बनी कायांतरित चट्टानों से बना है।

📌 आग्नेय चट्टानों की 4 मुख्य विशिष्टताएँ (UPSC Prelims Checklist):

  • क्रिस्टलीय या रवेदार (Crystalline): मैग्मा के ठंडा होने की दर पर क्रिस्टल का आकार निर्भर करता है—धीमी गति से ठंडा होने पर बड़े रवे (Coarse-grained) और तेजी से ठंडा होने पर अत्यंत बारीक रवे या कांच जैसी संरचना (Glassy) बनती है।
  • जीवाश्म-विहीन (Devoid of Fossils): अत्यधिक उच्च तापमान (700°C–1200°C) के कारण इनमें किसी भी प्रकार के जीव-जंतुओं या वनस्पतियों के जीवाश्म नहीं पाए जाते।
  • परत-विहीन (Non-stratified): इनमें अवसादी चट्टानों की भाँति संस्तर या परतें (Strata/Layers) नहीं पाई जातीं।
  • धात्विक खनिजों की प्रचुरता: लोहा, तांबा, सीसा, जस्ता, सोना, चांदी, प्लैटिनम, निकल और मैग्नीज जैसे महत्वपूर्ण धात्विक खनिज मुख्यतः आग्नेय शैलों में शिराओं (Veins) के रूप में मिलते हैं।

📊 आग्नेय चट्टानों का दोहरा वर्गीकरण (स्थान व रासायनिक संरचना के आधार पर)

वर्गीकरण का आधार उप-प्रकार ठंडा होने की दर व रवे (Texture) प्रमुख उदाहरण व भूगर्भिक अवस्थिति
A. उत्पत्ति स्थल / गहराई के आधार पर 1. पातालीय / प्लूटोनिक (Plutonic) अत्यधिक गहराई पर बहुत धीमी गति से ठंडा होना ➔ बड़े दानेदार रवे (Phaneritic Texture) ग्रेनाइट (Granite), गैब्रो (Gabbro), पेरिडोटाइट; बैथोलिथ रूप में पाए जाते हैं।
2. अधिवितलीय / हाइपाबिसल (Hypabyssal) मध्यम गहराई पर दरारों में मध्यम गति से ठंडा होना ➔ मिश्रित रवे डोलेराइट (Dolerite), पेग्माटाइट; डाइक व सिल में मिलते हैं।
3. बहिर्वेधी / ज्वालामुखीय (Extrusive / Volcanic) धरातल पर वायु के संपर्क में तेजी से ठंडा होना ➔ अति-महीन रवे या कांच जैसी संरचना (Aphanitic / Glassy) बेसाल्ट (Basalt) — दक्कन ट्रैप; ऑब्सीडियन (प्राकृतिक काला कांच); प्यूमिस (झाँवा पत्थर, जल पर तैरता है)।
B. सिलिका (SiO₂) प्रतिशत के आधार पर 1. अम्लीय / फेलसिक (Acidic / Felsic) सिलिका > 65%; हल्का रंग, कम घनत्व (2.6–2.7); गाढ़ा व चिपचिपा ग्रेनाइट (महाद्वीपीय क्रस्ट का आधार); रायोलाइट (ज्वालामुखीय रूप)।
2. मध्यवर्ती (Intermediate) सिलिका 52% से 65%; मध्यम रंग व घनत्व (~2.8) डायोराइट (प्लूटोनिक); एंडीसाइट (Andesite) — सबडक्शन ज़ोन पर।
3. क्षारीय / मैफिक (Basic / Mafic) सिलिका 45% से 52%; Fe-Mg की प्रधानता; गहरा रंग, भारी (घनत्व 3.0); अत्यंत तरल बेसाल्ट (महासागरीय क्रस्ट व दक्कन ट्रैप); गैब्रो (प्लूटोनिक)।
4. अल्ट्रा-मैफिक (Ultramafic) सिलिका < 45%; Fe-Mg अत्यधिक; अत्यंत भारी (घनत्व > 3.3) पेरिडोटाइट (ऊपरी मेंटल/एस्थेनोस्फीयर का मूल घटक); कोमाटाइट।

4. अवसादी चट्टानें (Sedimentary Rocks — परतदार शैलें): शिलीभवन (Lithification), वर्गीकरण एवं आर्थिक महत्व

अवसादी चट्टानें (लैटिन 'Sedimentum' = नीचे बैठना): जल, वायु और हिमनदों द्वारा पूर्व-निर्मित चट्टानों के अपरदित मलबे (अवसादों) के झीलों, समुद्रों और नदी घाटियों में क्षैतिज परतों में जमा होने तथा दबाव व सीमेंटेशन द्वारा ठोस रूप धारण करने से बनती हैं।

📌 अवसादी चट्टानों के 3 अद्वितीय लक्षण (UPSC Must-Know Facts):

  • संस्तरणीय / परतदार (Stratified): विभिन्न अवधियों के निक्षेप स्पष्ट परतों या संस्तरण तलों (Bedding Planes) के रूप में दिखाई देते हैं।
  • जीवाश्म-युक्त (Contain Fossils): केवल अवसादी चट्टानों में ही प्राचीन पेड़-पौधों, पत्तियों और जीव-कंकालों के जीवाश्म सुरक्षित रहते हैं। इसलिए भूगर्भिक इतिहास और पुरा-पर्यावरण की पुनर्रचना केवल इन्हीं से संभव है।
  • पृष्ठीय विस्तार बनाम आयतन अनुपात: यह पूरी क्रस्ट के कुल आयतन का मात्र 5% भाग बनाती हैं, किंतु धरातल (Land Surface) के लगभग 75% क्षेत्रफल को एक पतले आवरण की तरह ढकती हैं।

🔬 शिलीभवन (Lithification) एवं अवसादी चट्टानों का 3-स्तरीय वर्गीकरण:

शिलीभवन (Lithification): ढीले और असंगठित अवसादों (जैसे बालू, कीचड़, कंकड़) का ऊपरी भार के दबाव (Compaction) और खनिजों के घोल (सिलिका, कैल्साइट, आयरन ऑक्साइड) द्वारा सीमेंट की तरह जुड़ने (Cementation) से कठोर शैल में परिवर्तित होने की प्रक्रिया को शिलीभवन कहते हैं।

प्रकार 1: यांत्रिक / भौतिक

यांत्रिक रूप से निर्मित (Clastic Rocks)

पूर्ववर्ती चट्टानों के भौतिक विखंडन और कणों के जमाव से निर्मित। कणों के आकार के आधार पर:
• कांग्लोमरेट (Conglomerate): जल द्वारा गोल घिसे कंकड़ों (Pebbles) का जुड़ाव।
• ब्रेशिया (Breccia): नुकीले व कोणीय टुकड़ों का जुड़ाव।
• बालुकाश्म (Sandstone): बालू के कणों (क्वार्ट्ज) का संचयन।
• शेल व क्ले (Shale & Mudstone): महीन मिट्टी व गाद की परतदार चट्टान।
• लोएस (Loess): पवन द्वारा मरुस्थलों से उड़ाकर लाई गई बारीक पीली गाद (चीन का लोएस पठार)।

प्रकार 2: कार्बनिक / जैविक

जैविक रूप से निर्मित (Organically Formed)

जीव-जंतुओं के कंकालों या वनस्पतियों के घने संचय व कार्बनीकरण से निर्मित:
• चूना पत्थर (Limestone): समुद्री जीवों (मूंगा/प्रवाल, मोलस्क) के कैल्शियम कार्बोनेट युक्त खोलों का निक्षेप।
• चाक (Chalk): सूक्ष्म समुद्री जीवों (Foraminifera) के खोलों से निर्मित कोमल सफेद शैल।
• कोयला (Coal): घने दलदली वनों के दबने से निर्मित (पीट ➔ लिग्नाइट ➔ बिटुमिनस ➔ एन्थ्रेसाइट)।
• डायटोमाइट / चर्ट: सिलिका-युक्त सूक्ष्म जीवों के अवशेष।

प्रकार 3: रासायनिक

रासायनिक रूप से निर्मित (Chemical Evaporites)

झीलों या उथले सागरों के जल के वाष्पीकरण (Evaporation) के बाद घुले हुए लवणों के अवक्षेपण (Precipitation) से निर्मित:
• शैल नमक / हैलाइट (Rock Salt - NaCl): जल सूखने से जमा साधारण नमक।
• जिप्सम (Gypsum - CaSO₄·2H₂O): वाष्पीकरण से बनी सल्फेट चट्टान।
• पोटाश (Potash) व बोरेक्स।
• स्टैलेक्टाइट व स्टैलेग्माइट: भूमिगत चूना पत्थर गुफाओं में जल टपकने से बने रासायनिक निक्षेप।

⛽ अवसादी चट्टानों का असाधारण आर्थिक महत्व:

विश्व के लगभग समस्त जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस) केवल अवसादी चट्टानों में ही पाए जाते हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस सरंध्र बालुकाश्म (Porous Sandstone/Limestone) के 'जलाशय शैलों' (Reservoir Rocks) में संचित रहते हैं, जिन्हें ऊपर से अपारगम्य 'शेल' (Cap Rock) की परत ढक कर रखती है (उदा. बॉम्बे हाई, असम का डिगबोई, कृष्णा-गोदावरी बेसिन)। इसके अतिरिक्त विश्व के विशालतम भूमिगत जलभृत (Aquifers) तथा लोहा (बाढ़ अवसाद), फॉस्फेट और पोटाश उर्वरक अवसादी बेसिनों से ही प्राप्त होते हैं।

5. कायांतरित / रूपांतरित चट्टानें (Metamorphic Rocks): कारक, प्रकार, पत्रण (Foliation) एवं प्रमुख रूपांतरण तालिका

कायांतरित चट्टानें (ग्रीक 'Meta' = परिवर्तन, 'Morphe' = रूप): जब पूर्व-निर्मित आग्नेय या अवसादी चट्टानें उच्च तापमान (Temperature), अत्यधिक दबाव (Pressure) तथा रासायनिक रूप से सक्रिय गर्म जलीय घोलों (Hydrothermal Fluids) के प्रभाव में आकर बिना पूरी तरह पिघले (Without Complete Melting / Solid-state Transformation) अपने मूल खनिजों के संघटन और बनावट को बदलकर एक नई चट्टान में रूपांतरित हो जाती हैं, तो उन्हें कायांतरित चट्टानें कहते हैं।

A. कायांतरण के 4 प्रमुख प्रकार:

  • 1. तापीय या संपर्क कायांतरण (Thermal / Contact Metamorphism): जब मैग्मा भूपर्पटी में प्रवेश करता है, तो उसके प्रचंड ताप (Baking Effect) से संपर्क में आने वाली आस-पास की चट्टानें बदल जाती हैं। उदा. चूना पत्थर संपर्क ताप से संगमरमर बनता है।
  • 2. गतिक कायांतरण (Dynamic / Cataclastic): जब विवर्तनिक भ्रंश तलों पर भारी दबाव और यांत्रिक घर्षण के कारण चट्टानें बिना अत्यधिक ताप के पिसकर चूर्णित व पुनर्गठित हो जाती हैं।
  • 3. प्रादेशिक कायांतरण (Regional Metamorphism): पर्वत निर्माण (Orogeny) के समय विशाल विवर्तनिक संपीडन और गहरे भूमिगत ताप के संयुक्त प्रभाव से हजारों वर्ग किलोमीटर के भू-भाग की चट्टानें कायांतरित हो जाती हैं। उदा. शेल ➔ स्लेट ➔ शिस्ट।
  • 4. हाइड्रोथर्मल कायांतरण (Hydrothermal): मैग्मा से निकले अति-तप्त खनिज युक्त जल द्वारा रासायनिक तत्वों के आदान-प्रदान से होने वाला रूपांतरण।

B. कायांतरित शैलों की विशिष्ट बनावट (Fabric & Textures):

  • पत्रण / फोलिएशन (Foliation): अत्यधिक दिशात्मक दबाव (Differential Stress) के कारण खनिजों (विशेषकर माइका और क्लोराइट) का दबाव की दिशा के लंबवत समानांतर परतों या पतली पट्टियों में संरेखित हो जाना। ऐसी चट्टानें परतों के सहारे आसानी से टूट जाती हैं (उदा. स्लेट, शिस्ट)।
  • बैंडिंग (Banding): कायांतरण के दौरान हल्के रंग के सिलिकेट खनिजों (क्वार्ट्ज, फेल्डस्पार) और गहरे रंग के मैफिक खनिजों की एकान्तर मोटी पट्टियों (Alternating Dark & Light Bands) में पृथक्करण। ऐसी शैल को नीस (Gneiss) कहते हैं।
  • अपत्रित चट्टानें (Non-foliated Rocks): जब मूल चट्टान केवल एक ही खनिज से बनी हो और उसमें दिशात्मक पत्रण विकसित न हो (उदा. शुद्ध बालुकाश्म से बना क्वार्ट्जाइट और शुद्ध चूना पत्थर से बना संगमरमर)।

📑 प्रमुख चट्टानों के कायांतरण की मास्टर तालिका (UPSC Matching Special)

मूल चट्टान (Parent / Protolith) मूल चट्टान का प्रकार कायांतरित चट्टान (Metamorphic Rock) कायांतरण की विशेषता / प्रक्रम
ग्रेनाइट (Granite) अम्लीय आग्नेय (Plutonic) नीस (Gneiss) क्वार्ट्ज, फेल्डस्पार और माइका का मोटी पट्टियों में पृथक्करण (Banding)
क्ले एवं शेल (Clay & Shale) अवसादी (यांत्रिक बारीक कण) स्लेट ➔ फिलाइट ➔ शिस्ट (Schist) कायांतरण की तीव्रता बढ़ने के साथ कणों का आकार बढ़ता है; अत्यधिक पत्रित
बालुकाश्म (Sandstone) अवसादी (यांत्रिक क्वार्ट्ज) क्वार्ट्जाइट (Quartzite) क्वार्ट्ज के दाने आपस में संकलित होकर अत्यधिक कठोर व अपक्षय-प्रतिरोधी बनते हैं
चूना पत्थर (Limestone) अवसादी (जैविक/रासायनिक) संगमरमर (Marble) कैल्साइट के दानों का पुन:क्रिस्टलीकरण; अपत्रित, कोमल तथा नक्काशी योग्य
कोयला (Coal) अवसादी (कार्बनिक पादप) एन्थ्रेसाइट ➔ ग्रेफाइट ➔ हीरा अत्यधिक गहराई और ताप-दाब से वाष्पशील तत्व उड़ जाते हैं, शुद्ध कार्बन बचता है
बेसाल्ट (Basalt) क्षारीय आग्नेय (बहिर्वेधी) एम्फीबोलाइट / ग्रीनशिस्ट मैफिक खनिजों का कायांतरण होकर हॉर्नब्लेंड व क्लोराइट में परिवर्तन

6. अंतर्जात बल और भू-संचलन का वर्गीकरण: पटल विरूपणी बल बनाम आकस्मिक संचलन (Diastrophism vs Catastrophism)

धरातल पर दिखने वाले सभी उच्चावच (पर्वत, पठार, मैदान, भ्रंश) पृथ्वी के भीतर से कार्य करने वाले अंतर्जात बलों (Endogenic Forces) और बाहर से कार्य करने वाले बहिर्जात बलों (Exogenic Forces) के बीच चलने वाले निरंतर द्वंद्व का परिणाम हैं। अंतर्जात बल भूपर्पटी में विषमताएँ और उच्चावच उत्पन्न करते हैं, जिन्हें बहिर्जात प्रक्रम (अपरदन) समतल करने का प्रयास करते हैं।

🌳 अंतर्जात भू-संचलनों का संपूर्ण वर्गीकरण वृक्ष (Classification of Endogenic Movements):

1. पटल विरूपणी संचलन (Diastrophic Movements)

ये अत्यंत मंद गति वाले दीर्घकालिक बल (Slow & Gradual Forces) होते हैं, जिनका प्रभाव हजारों या लाखों वर्षों बाद दिखाई देता है। इन्हें दो वर्गों में बाँटते हैं:

  • महादेशजनक संचलन (Epeirogenetic Movements): लंबवत/ऊर्ध्वाधर बल (Vertical Forces)। (A) उत्थान (Uplift/Emergence): महाद्वीपों या तटों का ऊपर उठना (उदा. काठियावाड़ तट का उत्थान); (B) अवतलन (Subsidence/Submergence): भूमि या तट का नीचे धँसना (उदा. द्वारका नगरी का निमज्जन)।
  • पर्वत निर्माणकारी संचलन (Orogenetic Movements): क्षैतिज या स्पर्शरेखीय बल (Horizontal Forces)। (A) संपीडन बल (Compression): आमने-सामने दबाव से शैलों का मुड़ना ➔ वलन (Folding) व वलन पर्वत; (B) तनाव बल (Tension): विपरीत दिशा में खिंचाव से शैलों का चटकना ➔ भ्रंशन (Faulting), दरारें, ब्लॉक पर्वत व रिफ्ट घाटी।
2. आकस्मिक संचलन (Catastrophic Movements)

ये अत्यंत तीव्र और अचानक घटित होने वाले बल (Sudden & Violent Forces) होते हैं, जो कुछ ही सेकंड या मिनटों में धरातल पर भारी तबाही और व्यापक भू-आकृतिक परिवर्तन ला देते हैं:

  • भूकंप (Earthquakes): विवर्तनिक तनाव के अचानक विमोचन से पृथ्वी का काँपना।
  • ज्वालामुखी उद्गार (Volcanic Eruptions): मैग्मा का अचानक धरातल पर प्रस्फुटन।
  • सुनामी (Tsunamis): महासागरीय नितल पर भ्रंशन से उत्पन्न प्रलयंकारी समुद्री तरंगें।

7. संपीड़न बल और वलन की यांत्रिकी: वलन के अंग, 8 प्रमुख प्रकार एवं ग्रीवाखंड / नैपे (Nappe / Thrust Sheet)

वलन (Folding): जब क्षैतिज संपीडन बलों (Compressional Forces) के कारण भूपर्पटी की अवसादी या रूपांतरित चट्टानों की परतें लहरनुमा रूप में मुड़ जाती हैं, तो इस मुड़ाव को वलन कहते हैं।

📐 वलन के मुख्य ज्यामितीय अंग (Anatomy of a Fold):

  • अपनति (Anticline): वलन का ऊपर की ओर उठा हुआ मेहराबनुमा भाग। इसके कोर में सबसे पुरानी चट्टानें होती हैं।
  • अभिनति (Syncline): वलन का नीचे की ओर झुका हुआ द्रोणीनुमा/गर्तनुमा भाग। इसके केंद्र में नवीनतम चट्टानें होती हैं।
  • वलन की भुजाएँ (Limbs): अपनति और अभिनति के दोनों ओर ढालू चट्टानी तल।
  • अक्षीय तल (Axial Plane): वह काल्पनिक समतल जो वलन को दो बराबर या असममित भागों में विभाजित करता है।
  • नमन (Dip): संस्तर तल का क्षैतिज तल के साथ बनने वाला अधिकतम झुकाव कोण (Angle of Inclination)।
  • नतिलंब (Strike): संस्तर तल और क्षैतिज तल के प्रतिच्छेदन की दिशा (Direction of line), जो नमन की दिशा के सदैव समकोण (90°) पर होती है।

🌀 वलन के 8 प्रमुख प्रकार (Types of Folds — NCERT High-Yield):

1. सममित वलन (Symmetrical Fold)

दोनों भुजाओं का झुकाव कोण समान और अक्षीय तल पूर्णतः ऊर्ध्वाधर होता है। दोनों ओर से समान संपीडन बल से निर्मित।

2. असममित वलन (Asymmetrical Fold)

दोनों भुजाओं का ढाल असमान होता है—एक भुजा मंद ढाल वाली और दूसरी खड़ी ढाल वाली। एक ओर से अधिक बल।

3. एकनत वलन (Monoclinal Fold)

एक भुजा मंद ढाल वाली और दूसरी भुजा लगभग ऊर्ध्वाधर (90° पर खड़ी) होती है। सोपानी ढाल बनाता है।

4. समनत वलन (Isoclinal Fold)

अत्यधिक संपीडन से दोनों भुजाएँ एक ही दिशा में झुककर परस्पर समानांतर हो जाती हैं।

5. परिवलित वलन (Recumbent Fold)

प्रचंड संपीडन के कारण वलन का अक्षीय तल झुककर पूर्णतः क्षैतिज (Horizontal) हो जाता है; एक भुजा दूसरी पर सोई हुई प्रतीत होती है।

6. अधिवलन (Overturned Fold)

एक भुजा इतनी अधिक झुक जाती है कि वह उल्टी हो जाती है और दोनों भुजाएँ एक ही दिशा में असमान कोण पर झुकती हैं।

7. खुला व बंद वलन (Open & Closed)

खुला वलन: दोनों भुजाओं के बीच कोण 90° से 180° (मंद मोड़); बंद वलन: कोण 90° से कम (तीक्ष्ण संकीर्ण मोड़)।

8. पंखा वलन (Fan Fold)

एक विशाल वृहद वलन जिसके भीतर अनेक छोटी-छोटी अपनतियाँ व अभिनतियाँ पंखे के समान फैली होती हैं (समनतिक / समभिनतिक)।

🏔️ ग्रीवाखंड या नैपे की उत्पत्ति (Genesis of Nappe / Thrust Sheet — Alpine-Himalayan Phenomenon):

यांत्रिकी: जब किसी परिवलित वलन (Recumbent Fold) पर संपीडन बल अपनी चरम सीमा को पार कर जाता है, तो वलन की निचली भुजा अत्यधिक खिंचाव के कारण टूट जाती है। इस टूटन तल को उत्क्रम भ्रंश या थ्रस्ट भ्रंश (Thrust Fault) कहते हैं। संपीडन बल जारी रहने पर वलन का ऊपरी खंड (Hanging Wall Sheet) टूटकर अपने मूल स्थान से दसियों या सैकड़ों किलोमीटर दूर अन्य विषम चट्टानों के ऊपर सरक कर चढ़ जाता है। इस विस्थापित शिलाखंड को ग्रीवाखंड या नैपे (Nappe) कहते हैं।

हिमालयी उदाहरण: हिमालय में कड़ा संपीडन होने से कई विशाल नैपे पाए जाते हैं—जैसे गढ़वाल हिमालय में 'गढ़वाल नैपे' तथा शिमला में 'जुतुघ नैपे', जहाँ पुरानी क्रिस्टलीय चट्टानें नवीन अवसादी चट्टानों के ऊपर बैठी हुई मिलती हैं।

8. तनाव बल, भ्रंशन (Faulting) की यांत्रिकी, भ्रंश के प्रकार तथा हॉर्स्ट (ब्लॉक पर्वत) एवं ग्रेबेन (रिफ्ट घाटी)

भ्रंशन (Faulting): जब तनाव (Tension), संपीडन या अपरूपण बलों के कारण भूपर्पटी की चट्टानों में एक दरार या भ्रंश तल (Fault Plane) के सहारे दोनों ओर के भू-खंडों का सापेक्षिक विस्थापन (Relative Displacement) हो जाता है, तो इस विखंडन को भ्रंश कहते हैं।

📐 भ्रंश के मुख्य ज्यामितीय घटक (Geometry of a Fault):

  • भ्रंश तल (Fault Plane): वह समतल जिसके सहारे चट्टानों का फिसलन या विस्थापन होता है।
  • ऊर्ध्वपाती भित्ति / हैंगिंग वॉल (Hanging Wall): झुके हुए भ्रंश तल के ऊपर स्थित चट्टानी ब्लॉक (यदि आप भ्रंश तल पर खड़े हों तो यह आपके सिर के ऊपर होगा)।
  • अधःपाती भित्ति / फुटवॉल (Foot Wall): झुके हुए भ्रंश तल के नीचे स्थित चट्टानी ब्लॉक (जिस पर आपके पैर टिकेंगे)।
  • उत्क्षेप (Throw): भ्रंश के दोनों ब्लॉकों के बीच का ऊर्ध्वाधर विस्थापन (Vertical Displacement)।
  • विक्षेप (Heave): दोनों ब्लॉकों के बीच का क्षैतिज विस्थापन (Horizontal Displacement)।
  • भ्रंश कगार (Fault Scarp): विस्थापन के कारण सतह पर बनने वाला खड़ा कगार या ढाल।

🔬 भ्रंशन के 3 मुख्य प्रतिबल क्षेत्र (Anderson's Theory of Faulting — ई. एम. एंडरसन, 1905):

भूभौतिकीविद् एंडरसन के अनुसार, पृथ्वी के ऊपरी क्रस्ट में भ्रंशों की उत्पत्ति मुख्य रूप से तीन परस्पर लंबवत मुख्य प्रतिबलों (Principal Stresses: अधिकतम $\sigma_1$, मध्यम $\sigma_2$ तथा न्यूनतम $\sigma_3$) के अनुपात द्वारा नियंत्रित होती है:

  • तनाव क्षेत्र (Extensional Regime): जब अधिकतम प्रतिबल ऊर्ध्वाधर ($\sigma_v = \sigma_1$) होता है और क्षैतिज दिशा में खिंचाव होता है, तो लगभग 60° के कोण पर सामान्य भ्रंश (Normal Faults) बनते हैं (उदा. पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट, राइन बेसिन)।
  • संपीडन क्षेत्र (Compressional Regime): जब अधिकतम प्रतिबल क्षैतिज ($\sigma_h = \sigma_1$) और ऊर्ध्वाधर प्रतिबल न्यूनतम ($\sigma_v = \sigma_3$) होता है, तो लगभग 30° के मंद कोण पर व्युत्क्रम या थ्रस्ट भ्रंश (Thrust Faults) बनते हैं (उदा. हिमालयी थ्रस्ट तंत्र: MCT, MBT)।
  • अपरूपण क्षेत्र (Strike-Slip Regime): जब दोनों क्षैतिज प्रतिबल क्रमशः अधिकतम और न्यूनतम होते हैं तथा ऊर्ध्वाधर प्रतिबल मध्यम ($\sigma_v = \sigma_2$) होता है, तो लगभग 90° के ऊर्ध्वाधर तल पर नतिलंब सर्पी भ्रंश (Strike-Slip Faults) बनते हैं (उदा. सैन एंड्रियास भ्रंश)।
भ्रंशों के प्रकार व यांत्रिकी: सामान्य, उत्क्रम, हॉर्स्ट एवं ग्रेबेन तथा विश्व के प्रमुख ब्लॉक पर्वत व रिफ्ट प्रणालियाँ
चित्र 6.3: (बाएँ) भ्रंशों के प्रमुख प्रकार — तनाव बल से सामान्य भ्रंश (Hanging wall down), संपीडन से उत्क्रम/थ्रस्ट भ्रंश (Hanging wall up), तथा समानांतर भ्रंशों के बीच हॉर्स्ट (ब्लॉक पर्वत) एवं धँसी हुई रिफ्ट घाटी (Graben); (दाएँ) विश्व एवं भारत के प्रमुख भ्रंशोत्थ पर्वत व रिफ्ट प्रणालियों का भौगोलिक महत्व स्कोर।

📊 भ्रंश के 5 प्रमुख प्रकार (Types of Faults — UPSC Comparison Table)

भ्रंश प्रकार प्रभावी विवर्तनिक बल हैंगिंग वॉल की गति (Relative Motion) क्रस्ट पर प्रभाव एवं प्रमुख उदाहरण
1. सामान्य भ्रंश (Normal Fault) तनाव बल (Tensional Stress) — खिंचाव हैंगिंग वॉल फुटवॉल के सापेक्ष नीचे खिसकती है (Downwards) क्रस्ट का विस्तार (Extension); राइन रिफ्ट घाटी, पूर्वी अफ्रीकी भ्रंश घाटी, ग्रेट बेसिन (USA)।
2. व्युत्क्रम / उत्क्रम भ्रंश (Reverse Fault) संपीडन बल (Compressional Stress) — दबाव हैंगिंग वॉल फुटवॉल के सापेक्ष ऊपर चढ़ जाती है (Upwards) क्रस्ट का संकुचन व संक्षेपण; हिमालय के MCT, MBT, HFT (जब कोण <45° हो तो इसे थ्रस्ट भ्रंश कहते हैं)।
3. नतिलंब सर्पी भ्रंश (Strike-Slip / Tear Fault) अपरूपण / कर्तन बल (Shear Stress) दोनों ब्लॉक ऊर्ध्वाधर तल के सहारे क्षैतिज रूप से फिसलते हैं क्रस्ट न घटती है न बढ़ती है; सैन एंड्रियास भ्रंश (कैलिफोर्निया), उत्तरी अनातोलियन भ्रंश (तुर्की)।
4. सोपानी भ्रंश (Step Fault) व्यापक क्षेत्रीय तनाव बल अनेक समानांतर भ्रंशों के सहारे सभी ब्लॉक एक ही दिशा में सीढ़ीनुमा धँसते हैं सीढ़ीदार ढालू कगार; राइन घाटी के पार्श्व, कोलोराडो पठार।
5. हिंज या घूर्णन भ्रंश (Hinge Fault) घूर्णन विवर्तनिक बल एक सिरे पर ब्लॉक जुड़ा रहता है और दूसरे सिरे पर विस्थापन अधिकतम होता है कैंची के ब्लेड जैसी गति; अंतरीप क्षेत्रों में।

🧱 हॉर्स्ट (ब्लॉक पर्वत) बनाम ग्रेबेन (रिफ्ट घाटी) — विस्तृत यांत्रिकी

हॉर्स्ट या ब्लॉक पर्वत (Horst / Block Mountain):

जब दो समानांतर भ्रंशों के बीच का भू-भाग या तो विवर्तनिक उत्थान द्वारा ऊपर उठ जाए, अथवा दोनों किनारे के भू-भाग नीचे धँस जाएँ और बीच का भाग यथावत खड़ा रहे, तो इसे हॉर्स्ट या ब्लॉक पर्वत कहते हैं। इनके शिखर सपाट मेज जैसे और किनारे खड़े कगार (Scarp) होते हैं।
विश्व व भारत के उदाहरण: फ्रांस का वॉस्जेस पर्वत, जर्मनी का ब्लैक फॉरेस्ट, USA का सिएरा नेवादा, पाकिस्तान की साल्ट रेंज, तथा भारत में विंध्याचल और सतपुड़ा पर्वत।

ग्रेबेन या भ्रंश घाटी (Graben / Rift Valley):

जब तनाव बलों के कारण दो समानांतर सामान्य भ्रंशों के बीच का मध्यवर्ती चट्टानी ब्लॉक नीचे की ओर धँस जाता है, तो बनने वाली संकरी, लंबी और खड़े कगारों वाली द्रोणी को ग्रेबेन या रिफ्ट घाटी कहते हैं।
विश्व व भारत के उदाहरण: जर्मनी की राइन भ्रंश घाटी (वॉस्जेस व ब्लैक फॉरेस्ट के मध्य), पूर्वी अफ्रीकी भ्रंश घाटी (6,000 km), मृत सागर (विश्व का निम्नतम जल बेसिन), तथा भारत में नर्मदा, तापी और दामोदर की भ्रंश घाटियाँ।

📐 UPSC Mains जीएस-1 उत्तर-लेखन रफ आरेख (Schematic Sketch 6.2): हॉर्स्ट, ग्रेबेन व भ्रंश प्रकार

           [ सामान्य भ्रंश: तनाव ]                     [ थ्रस्ट भ्रंश: संपीडन ]
          ┌────────┐                                    ┌────────┐
          │फुटवॉल  │\                                   │हैंगिंग │          │        │ \ हैंगिंग वॉल (नीचे धँसी)          │वॉल (ऊपर) \ फुटवॉल
          └────────┘  \┌────────┐                       └────────┘  \┌────────┐
        ◄─── तनाव ──►  │        │                     ───► संपीडन ◄──│        │
                       └────────┘                                    └────────┘

                 [ हॉर्स्ट एवं ग्रेबेन (ब्लॉक पर्वत व रिफ्ट घाटी) तंत्र ]
           हॉर्स्ट (HORST)           ग्रेबेन (GRABEN)          हॉर्स्ट (HORST)
          ┌──────────────┐         (धँसी रिफ्ट घाटी)         ┌──────────────┐
          │वॉस्जेस पर्वत │\        ┌──────────────┐         /│ब्लॉक फॉरेस्ट │
          │ (फ्रांस)     │ \ भ्रंश │  राइन घाटी   │  भ्रंश / │  (जर्मनी)    │
          │ विंध्य श्रेणी│  \  तल  │(नर्मदा-तापी) │   तल  /  │ सतपुड़ा श्रेणी│
          └──────────────┘   \     │              │      /   └──────────────┘
         (खड़े कगार ढाल)      \____│______________│_____/    (खड़े कगार ढाल)
              

9. अध्याय 6 का संपूर्ण विश्व एवं भारत मानचित्रण: 12 प्रमुख ब्लॉक पर्वत, भ्रंश घाटियाँ व अवशिष्ट शैल क्षेत्र

UPSC प्रिलिम्स और मेंस में भ्रंशोत्थ पर्वतों, रिफ्ट घाटियों और प्राचीन शैल संरचनाओं की अवस्थिति पर सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं। नीचे 12 सबसे महत्वपूर्ण भू-आकृतिक स्थलों का विश्लेषणात्मक मानचित्रण प्रस्तुत है:

क्र.सं. व भू-आकृतिक स्थल देश / भौगोलिक क्षेत्र संरचनात्मक प्रकार (Geomorphic Type) UPSC परीक्षा दृष्टि से विशिष्ट भूगर्भिक तथ्य
1. वॉस्जेस पर्वत (Vosges) उत्तर-पूर्वी फ्रांस (राइन नदी के पश्चिम में) हॉर्स्ट / ब्लॉक पर्वत (हर्सिनियन युग) राइन रिफ्ट घाटी का पश्चिमी कगार; प्राचीन ग्रेनाइटिक व बलुआ पत्थर की सपाट मेज जैसी चोटियाँ (Ballons)।
2. ब्लैक फॉरेस्ट (Black Forest / Schwarzwald) दक्षिण-पश्चिमी जर्मनी (राइन नदी के पूर्व में) हॉर्स्ट / ब्लॉक पर्वत राइन भ्रंश घाटी का पूर्वी कगार; डेन्यूब नदी का उद्गम यहीं से होता है। वॉस्जेस और ब्लैक फॉरेस्ट दोनों जुड़वां हॉर्स्ट हैं।
3. राइन भ्रंश घाटी (Rhine Graben) जर्मनी व फ्रांस की सीमा (बेसल से मेंज तक ~300 km) ग्रेबेन / क्लासिक रिफ्ट घाटी विश्व में रिफ्ट घाटी (Graben) का पाठ्यपुस्तकीय उदाहरण; ओलिगोसीन काल के तनाव बल से वॉस्जेस व ब्लैक फॉरेस्ट के बीच धँसी घाटी।
4. सिएरा नेवादा पर्वत (Sierra Nevada) कैलिफोर्निया, संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) झुका हुआ विशाल ब्लॉक पर्वत (Tilted Block) विश्व का सबसे बड़ा झुका हुआ ब्लॉक पर्वत (~650 km लंबा); इसका पूर्वी ढाल भ्रंश कगार के सहारे खड़ा है और पश्चिमी ढाल मंद है। माउंट व्हिटनी (4,421 m) सर्वोच्च शिखर।
5. ग्रेट बेसिन (Basin and Range Province) नेवादा व यूटा (पश्चिमी USA) हॉर्स्ट-ग्रेबेन की एकांतर श्रृंखला क्रस्ट के व्यापक तनावपूर्ण फैलाव से सैकड़ों समानांतर ब्लॉक पर्वत (Ranges) और धँसी हुई घाटियाँ (Basins / Grabens) बनी हैं। अंतर्देशीय जल अपवाह।
6. मृत सागर रिफ्ट (Dead Sea Transform / Graben) इज़राइल, वेस्ट बैंक व जॉर्डन की सीमा पुल-अपार्ट बेसिन / गहरा रिफ्ट गर्त पृथ्वी के धरातल पर स्थित सबसे गहरा स्थल (समुद्र तल से 430 मीटर नीचे); अत्यधिक वाष्पीकरण से जल में 34% लवणता।
7. बैकाल रिफ्ट घाटी (Lake Baikal Rift Zone) दक्षिणी साइबेरिया, रूस सक्रिय महाद्वीपीय रिफ्ट बेसिन विश्व की सबसे गहरी (1,642 m) और प्राचीनतम ताजे जल की झील; अमूर प्लेट और यूरेशियन प्लेट के अपसरण से निर्मित।
8. साल्ट रेंज (Salt Range) पंजाब प्रांत, पाकिस्तान (सिंधु और झेलम के मध्य) भ्रंशोत्थ पर्वत / थ्रस्ट ब्लॉक सेंधा नमक (खेवड़ा खदान) और जिप्सम के विशाल अवसादी भंडार; भारतीय प्लेट के हिमालय की ओर धँसने से बना अग्र-भ्रंश कगार।
9. अरावली पर्वतमाला (Aravalli Range) गुजरात, राजस्थान, हरियाणा से दिल्ली (भारत) प्री-कैम्ब्रियन अवशिष्ट वलित पर्वत विश्व की प्राचीनतम वलित पर्वत प्रणालियों में से एक (~2.5 अरब वर्ष पुरानी); अब घिसकर अवशिष्ट पर्वत बन चुकी है। सर्वोच्च शिखर: गुरु शिखर (1,722 m, माउंट आबू)।
10. विंध्य और सतपुड़ा श्रेणियाँ (Vindhya & Satpura) मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात (भारत) प्रायद्वीपीय भारत के ब्लॉक पर्वत (Horst) विंध्य उत्तर में और सतपुड़ा दक्षिण में दो ब्लॉक पर्वत हैं, जिनके बीच धँसी भ्रंश घाटी में नर्मदा नदी पश्चिम की ओर बहती है। सतपुड़ा का सर्वोच्च शिखर: धूपगढ़ (1,350 m, पंचमढ़ी)।
11. नर्मदा और तापी भ्रंश घाटियाँ (Narmada-Tapti Rifts) मध्य भारत (अमरकंटक/बैतूल से खंभात की खाड़ी तक) प्राचीन भ्रंश घाटी (Graben / Failed Rift) प्रायद्वीपीय भारत का सामान्य ढाल पूर्व की ओर होने के बावजूद नर्मदा और तापी भ्रंश घाटी की सीधी ढाल के कारण पश्चिम दिशा में बहती हैं और डेल्टा के स्थान पर ज्वारनदमुख (Estuary) बनाती हैं।
12. बुशवेल्ड आग्नेय कॉम्प्लेक्स (Bushveld Complex) ट्रांसवाल, दक्षिण अफ्रीका विशाल अंतर्वेधी लोपोलिथ (Lopolith) विश्व का सबसे बड़ा तश्तरीनुमा लोपोलिथ (~66,000 वर्ग km); विश्व के 75% प्लैटिनम, 80% क्रोमियम और भारी वैनेडियम का स्रोत।

10. परीक्षा की दृष्टि से विशेष बिंदु: 6 प्रिलिम्स ट्रैप्स, 4 संपूर्ण मेंस मॉडल उत्तर एवं क्विक रिवीजन फ्लैशकार्ड्स + 3 Solved MCQs

⚠️ प्रिलिम्स स्टेटमेंट ट्रैप्स (6 High-Yield Prelims Traps — अध्याय 6)

ट्रैप 1: क्वार्ट्जाइट और संगमरमर का मूल

कन्फ्यूजन: "क्वार्ट्जाइट चूना पत्थर से बनता है और संगमरमर बालुकाश्म से।"
✔ सही तथ्य: बालुकाश्म (Sandstone) के कायांतरण से क्वार्ट्जाइट बनता है; जबकि चूना पत्थर (Limestone) के कायांतरण से संगमरमर (Marble) बनता है।

ट्रैप 2: सामान्य बनाम व्युत्क्रम भ्रंश में गति

गलतफहमी: "सामान्य भ्रंश संपीडन से बनता है और हैंगिंग वॉल ऊपर चढ़ती है।"
✔ सही तथ्य: सामान्य भ्रंश तनाव (खिंचाव) से बनता है और हैंगिंग वॉल नीचे खिसकती है। व्युत्क्रम भ्रंश संपीडन से बनता है और हैंगिंग वॉल ऊपर चढ़ती है।

ट्रैप 3: आग्नेय चट्टानों में जीवाश्म

गलतफहमी: "ग्रेनाइट और बेसाल्ट में प्राचीन पौधों के जीवाश्म पाए जाते हैं।"
✔ सही तथ्य: आग्नेय चट्टानें 1000°C+ ताप पर मैग्मा के जमने से बनती हैं, अतः इनमें जीवाश्म शून्य (No fossils) होते हैं। जीवाश्म केवल अवसादी चट्टानों में मिलते हैं।

ट्रैप 4: नर्मदा और तापी का पश्चिम प्रवाह

गलतफहमी: "नर्मदा और तापी प्रायद्वीपीय भारत के सामान्य ढाल का अनुसरण करती हैं।"
✔ सही तथ्य: प्रायद्वीप का ढाल पूर्व की ओर है (गोदावरी, कृष्णा, कावेरी पूर्व बहती हैं)। नर्मदा-तापी विंध्य-सतपुड़ा के बीच बनी कठोर भ्रंश घाटी (Rift Valley) के पश्चिमी ढाल के कारण बाध्य होकर पश्चिम बहती हैं।

ट्रैप 5: अरावली का वर्तमान प्रकार

कन्फ्यूजन: "अरावली एक ब्लॉक पर्वत या ज्वालामुखी पर्वत है।"
✔ सही तथ्य: अरावली मूलतः प्री-कैम्ब्रियन काल का वलित पर्वत (Fold Mountain) था, जो करोड़ों वर्षों के अपरदन के बाद वर्तमान में अवशिष्ट पर्वत (Relict/Residual Mountain) बन चुका है।

ट्रैप 6: नमन (Dip) और नतिलंब (Strike)

कन्फ्यूजन: "नमन और नतिलंब एक ही दिशा में होते हैं।"
✔ सही तथ्य: नमन (Dip) संस्तर का अधिकतम झुकाव कोण है और नतिलंब (Strike) क्षैतिज रेखा की दिशा है। नतिलंब सदैव नमन की दिशा के समकोण (90°) पर होता है।

📝 UPSC Mains GS-1 संपूर्ण 4 मॉडल उत्तर (Introduction - Body - Conclusion Format)

प्रश्न 1: वलन और भ्रंशन की भू-आकृतिक प्रक्रियाओं में क्या अंतर है? भ्रंश घाटियों (Rift Valleys) की उत्पत्ति की यांत्रिकी और उनके आर्थिक महत्व का विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द / 15 अंक) Mains GS-1 Model Answer

उत्तर दृष्टिकोण:
• प्रस्तावना (Intro, 35 शब्द): वलन और भ्रंशन दोनों अंतर्जात पर्वत निर्माणकारी (Orogenetic) संचलन के परिणाम हैं, जो भूपर्पटी पर विभिन्न प्रकार के द्वितीयक उच्चावचों का निर्माण करते हैं।
• मुख्य भाग (Body, 175 शब्द):
1. वलन बनाम भ्रंशन में मूल अंतर:
- प्रभावी बल: वलन संपीडन बल (Compression) द्वारा शैलों के लचीले मुड़ाव से बनता है, जबकि भ्रंशन मुख्य रूप से तनाव बल (Tension) या तीव्र संपीडन द्वारा शैलों के भंगुर विखंडन व विस्थापन से उत्पन्न होता है।
- निर्मित स्थलाकृतियाँ: वलन से वलित पर्वत (अपनति व अभिनति — हिमालय, एंडीज़) बनते हैं; भ्रंशन से ब्लॉक पर्वत (हॉर्स्ट) और रिफ्ट घाटियाँ (ग्रेबेन) बनती हैं।
2. भ्रंश घाटियों (Rift Valleys) की उत्पत्ति की यांत्रिकी:
- जब विवर्तनिक तनाव बल के कारण दो समानांतर सामान्य भ्रंश (Normal Faults) विकसित होते हैं, तो दोनों ओर के किनारे स्थिर रहते हैं और मध्यवर्ती भू-खंड गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में नीचे धँस जाता है (ग्रेबेन निर्माण)।
- उदा. यूरोप में राइन भ्रंश घाटी (वॉस्जेस व ब्लैक फॉरेस्ट के मध्य), 6,000 km लंबी पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट प्रणाली (EARS), तथा भारत में विंध्य व सतपुड़ा के मध्य नर्मदा-तापी रिफ्ट।
3. भ्रंश घाटियों का आर्थिक महत्व:
- खनिज व जीवाश्म ईंधन संचयन: रिफ्ट घाटियों के धँसने से प्राचीन काल में घने वन दलदलों में दबे, जिससे भारत की दामोदर घाटी और जर्मनी के सार बेसिन में गोंडवाना कोयले के विशाल भंडार बने।
- जल संसाधन व नेविगेशन: राइन और नर्मदा जैसी नदियाँ रिफ्ट घाटियों में बहकर जलविद्युत और अंतर्देशीय जलमार्ग प्रदान करती हैं।
- पर्यटन व मीठे जल की झीलें: पूर्वी अफ्रीका में तांगानिका व न्यासा तथा रूस में बैकाल झील मीठे जल व जैव विविधता के प्रमुख केंद्र हैं।
• निष्कर्ष (Conclusion, 40 शब्द): इस प्रकार वलन और भ्रंशन पृथ्वी के गतिशील संतुलन के परिचायक हैं, जहाँ रिफ्ट प्रणालियाँ न केवल नए महासागरों के जन्म का अग्रदूत हैं, बल्कि खनिज और ऊर्जा सुरक्षा का भी मुख्य आधार हैं।

प्रश्न 2: शैल चक्र (The Rock Cycle) की संकल्पना को स्पष्ट करते हुए व्याख्या कीजिए कि किस प्रकार आग्नेय, अवसादी और कायांतरित चट्टानें एक-दूसरे में परिवर्तित होती रहती हैं। (150 शब्द / 10 अंक) Mains GS-1 Model Answer

उत्तर दृष्टिकोण:
• प्रस्तावना (Intro, 25 शब्द): 1788 में जेम्स हटन द्वारा प्रतिपादित शैल चक्र भूपर्पटीय पदार्थों के चक्रीय पुनर्चक्रण का गतिशील भू-रासायनिक मॉडल है, जो सिद्ध करता है कि चट्टानें नश्वर और निरंतर परिवर्तनशील हैं।
• मुख्य भाग (Body, 95 शब्द):
1. प्राथमिक से द्वितीयक रूपांतरण: मैग्मा के शीतलन से प्राथमिक आग्नेय चट्टानें (ग्रेनाइट/बेसाल्ट) बनती हैं। बहिर्जात अनाच्छादन (Weathering & Erosion) से इनके टुकड़े नदियों द्वारा बेसिनों में जमा होते हैं और शिलीभवन (Lithification) द्वारा अवसादी चट्टानें (बालुकाश्म/शेल) बनती हैं।
2. कायांतरण प्रक्रम: विवर्तनिक हलचलों से अवसादी या आग्नेय चट्टानें जब भूगर्भ में अत्यधिक ताप-दाब के संपर्क में आती हैं, तो बिना पिघले उनका पुन:क्रिस्टलीकरण होकर कायांतरित चट्टानें बनती हैं (उदा. चूना पत्थर ➔ संगमरमर, ग्रेनाइट ➔ नीस)।
3. पुनः गलन व शॉर्टकट: सबडक्शन ज़ोन में कायांतरित चट्टानें अत्यधिक गहराई पर पिघलकर पुनः मैग्मा बन जाती हैं। इसके अतिरिक्त शैल चक्र में 'शॉर्टकट' भी होते हैं—आग्नेय चट्टानें सीधे कायांतरित बन सकती हैं, और कायांतरित चट्टानें पुनः अपरदित होकर अवसादी बन सकती हैं।
• निष्कर्ष (Conclusion, 30 शब्द): शैल चक्र अंतर्जात और बहिर्जात बलों के परस्पर संतुलन का प्रतीक है, जो पृथ्वी की सतह पर तत्वों के सतत पुनर्चक्रण और भू-रासायनिक स्थिरता को बनाए रखता है।

प्रश्न 3: भारत के प्रायद्वीपीय भाग में विंध्य और सतपुड़ा ब्लॉक पर्वतों तथा नर्मदा-तापी भ्रंश घाटियों के निर्माण की भूगर्भिक यांत्रिकी की विवेचना कीजिए। ये नदियाँ डेल्टा क्यों नहीं बनाती हैं? (250 शब्द / 15 अंक) Mains GS-1 Model Answer

उत्तर दृष्टिकोण:
• प्रस्तावना (Intro, 35 शब्द): प्रायद्वीपीय भारत एक प्राचीन स्थिर भू-खंड (Craton) है। इसके मध्य भाग में विंध्याचल और सतपुड़ा पर्वत तथा नर्मदा और तापी नदियाँ भारत की भू-आकृतिक संरचना में एक अद्वितीय अपवाद प्रस्तुत करती हैं।
• मुख्य भाग (Body, 175 शब्द):
1. भूगर्भिक निर्माण यांत्रिकी (SONATA Zone):
- मध्य भारत में नर्मदा-सोन-तापी (SONATA lineament) एक प्राचीन प्री-कैम्ब्रियन भ्रंश क्षेत्र है।
- भारतीय प्लेट के उत्तर की ओर प्रवाह और यूरेशियन प्लेट से टक्कर तथा दक्कन ट्रैप उद्गार के दौरान उत्पन्न भीषण तनाव बलों (Tensional Stress) से यह भ्रंश रेखा पुनः सक्रिय हो गई।
- समानांतर सामान्य भ्रंशों के सहारे मध्यवर्ती ब्लॉक नीचे धँस गए जिससे नर्मदा और तापी भ्रंश घाटियाँ (Rift Valleys / Grabens) बनीं, तथा किनारों पर खड़े अवशिष्ट भू-खंड विंध्य (उत्तर में) और सतपुड़ा (दक्षिण में) ब्लॉक पर्वत (Horsts) के रूप में उभरे।
2. पश्चिम प्रवाह का कारण: प्रायद्वीपीय पठार का सामान्य ढाल पश्चिम से पूर्व की ओर है (जिससे गोदावरी, कृष्णा बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं)। किंतु नर्मदा और तापी भ्रंश घाटी के खड़े संकीर्ण कगारों में फँसी होने के कारण पठार के सामान्य ढाल का अनुसरण न करके भ्रंश घाटी के पश्चिमी ढाल के सहारे खंभात की खाड़ी (अरब सागर) में गिरती हैं।
3. डेल्टा न बनाकर ज्वारनदमुख (Estuary) बनाने के कारण:
- कठोर चट्टानी तल: नदियाँ कठोर बेसाल्टिक व विंध्यन शैलों की संकीर्ण भ्रंश घाटी में बहती हैं, जिससे पार्श्व अपरदन कम होता है और गाद/तलछट (Sediment Load) की मात्रा अत्यंत कम रहती है।
- तीव्र ढाल व जलवेग: घाटी में जल का प्रवाह तीव्र होता है जो मुहाने पर मलबे को जमा नहीं होने देता।
- खंभात की खाड़ी में तीव्र ज्वारीय तरंगें: अरब सागर के उच्च ज्वार-भाटा (Tidal range) नदियों के मुहाने पर आने वाले थोड़े-बहुत मलबे को बहाकर गहरे समुद्र में ले जाते हैं, जिससे खुले मुहाने (Estuaries) बनते हैं।
• निष्कर्ष (Conclusion, 40 शब्द): विंध्य-सतपुड़ा और नर्मदा-तापी प्रणाली भारत में अंतर्जात भ्रंशन का सबसे उत्कृष्ट प्रमाण है, जिसने उत्तर और दक्षिण भारत के बीच सांस्कृतिक-भौगोलिक विभाजक के साथ-साथ अद्वितीय जल निकासी तंत्र का निर्माण किया है।

प्रश्न 4: ग्रीवाखंड (Nappe / Thrust Sheet) क्या है? हिमालयी पर्वत तंत्र में इसकी उपस्थिति और पर्वतीय संरचनाओं पर इसके प्रभाव को स्पष्ट कीजिए। (150 शब्द / 10 अंक) Mains GS-1 Model Answer

उत्तर दृष्टिकोण:
• प्रस्तावना (Intro, 25 शब्द): ग्रीवाखंड या नैपे (Nappe) तीव्र विवर्तनिक संपीडन के कारण अत्यधिक मुड़े और टूटे हुए वलनों के विशाल विस्थापित खंड (Thrust Sheets) होते हैं, जो अपने मूल स्थान से मीलों दूर क्षेपित हो जाते हैं।
• मुख्य भाग (Body, 95 शब्द):
1. उत्पत्ति प्रक्रम: जब किसी परिवलित वलन (Recumbent Fold) पर संपीडन बल अपनी प्रत्यास्थ सीमा को पार कर जाता है, तो वलन की निचली भुजा थ्रस्ट भ्रंश (Thrust Fault) के सहारे टूट जाती है। ऊपरी भुजा फिसलन तल के सहारे सरक कर कई दसियों किलोमीटर दूर विदेशी चट्टानों (Autochthonous basement) के ऊपर चढ़ जाती है।
2. हिमालयी पर्वत तंत्र में उपस्थिति: भारतीय और यूरेशियन प्लेट की महाद्वीपीय टक्कर (C-C Collision) विश्व में नैपे निर्माण का सबसे सक्रिय केंद्र है। मुख्य केंद्रीय भ्रंश (MCT) और मुख्य सीमांत भ्रंश (MBT) के सहारे कश्मीर, गढ़वाल और हिमाचल में विशाल नैपे (उदा. गढ़वाल नैपे, जुतुघ नैपे, चंबा नैपे) पाए जाते हैं।
3. पर्वतीय संरचनाओं पर प्रभाव: इसके कारण विपरीत स्तर विन्यास (Inverted Stratigraphy) उत्पन्न होता है—अर्थात प्राचीन पूर्व-कैम्ब्रियन कायांतरित चट्टानें (ग्रेनाइट/नीस) नवीन टर्शियरी अवसादी चट्टानों के ऊपर स्थित मिलती हैं। इसके अपरदन से 'क्लिपे' (Klippe - पृथक नैपे अवशेष) और 'टेक्टोनिक विन्डो' (Fenster) जैसी जटिल संरचनाएँ बनती हैं।
• निष्कर्ष (Conclusion, 30 शब्द): हिमालय में नैपे की सर्वव्यापक उपस्थिति यह प्रमाणित करती है कि हिमालय केवल सरल वलन का परिणाम नहीं है, बल्कि यह विश्व की सर्वाधिक जटिल और सक्रिय थ्रस्ट-शीट विवर्तनिक प्रणाली है।

📌 फैक्ट कार्ड 1: मोह पैमाना व कठोरता

• पैमाना: 1. टैल्क ➔ 2. जिप्सम ➔ 3. कैल्साइट ... 7. क्वार्ट्ज ... 10. हीरा
• परीक्षण: नाखून (2.5), तांबा सिक्का (3.5), चाकू/कांच (5.5), स्टील फाइल (6.5)।

📌 फैक्ट कार्ड 2: वलन व भ्रंश अंग

• वलन: अपनति (उभार), अभिनति (गर्त), नतिलंब सदैव नमन के 90° पर।
• भ्रंश: सामान्य (तनाव ➔ हैंगिंग नीचे), उत्क्रम (संपीडन ➔ हैंगिंग ऊपर)।

📌 फैक्ट कार्ड 3: ब्लॉक पर्वत व रिफ्ट

• हॉर्स्ट: वॉस्जेस (फ्रांस), ब्लैक फॉरेस्ट (जर्मनी), विंध्य व सतपुड़ा।
• ग्रेबेन: राइन रिफ्ट, मृत सागर (-430m), नर्मदा व तापी घाटी।

🎯 3 उच्च-स्तरीय प्रिलिम्स अभ्यास प्रश्न (UPSC Standard Solved MCQs)

प्रश्न 1: चट्टानों के वर्गीकरण और उनकी विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. आग्नेय चट्टानें क्रिस्टलीय और परतविहीन होती हैं तथा इनमें किसी भी प्रकार के जीवाश्म नहीं पाए जाते।
  2. अवसादी चट्टानें संपूर्ण भूपर्पटी के कुल आयतन का लगभग 75% भाग बनाती हैं, जबकि आग्नेय चट्टानें केवल 5% भाग बनाती हैं।
  3. क्वार्ट्जाइट का निर्माण चूना पत्थर के कायांतरण से होता है, जबकि संगमरमर का निर्माण बालुकाश्म से होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1
B) केवल 1 और 2
C) केवल 2 और 3
D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: A (केवल 1)
व्याख्या: कथन 1 सही है। कथन 2 गलत है क्योंकि अवसादी चट्टानें क्रस्ट के आयतन का मात्र 5% बनाती हैं (धरातल के 75% क्षेत्रफल को ढकती हैं), जबकि आग्नेय व कायांतरित चट्टानें 95% आयतन बनाती हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि बालुकाश्म से क्वार्ट्जाइट बनता है और चूना पत्थर से संगमरमर।

प्रश्न 2: भू-आकृतिक भ्रंशों और स्थलाकृतियों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:

स्थलाकृति प्रकार / विवर्तनिक लक्षण
1. वॉस्जेस और ब्लैक फॉरेस्ट राइन भ्रंश घाटी के दोनों ओर स्थित हॉर्स्ट (ब्लॉक पर्वत)
2. मृत सागर (Dead Sea) समुद्र तल से नीचे स्थित धँसी हुई रिफ्ट घाटी (Graben)
3. विंध्य और सतपुड़ा श्रेणी नवीन अल्पाइन वलित पर्वत श्रृंखलाएँ
4. सैन एंड्रियास भ्रंश क्षैतिज गति वाला नतिलंब सर्पी / रूपांतरित भ्रंश

उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?

A) केवल एक युग्म
B) केवल दो युग्म
C) केवल तीन युग्म
D) सभी चारों युग्म
सही उत्तर: C (केवल तीन युग्म — युग्म 1, 2 और 4 सही हैं)
व्याख्या: युग्म 3 गलत है क्योंकि विंध्य और सतपुड़ा नवीन वलित पर्वत नहीं हैं, बल्कि ये प्रायद्वीपीय भारत के प्राचीन ब्लॉक पर्वत (Horst) हैं, जिनके बीच नर्मदा-तापी रिफ्ट घाटी स्थित है।

प्रश्न 3: वलन और भ्रंशन की यांत्रिकी के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. समनत वलन (Isoclinal fold) में दोनों भुजाएँ समानांतर होती हैं और एक ही दिशा में समान कोण पर झुकती हैं।
  2. सामान्य भ्रंश (Normal fault) में तनाव बल के कारण हैंगिंग वॉल फुटवॉल के सापेक्ष नीचे की ओर खिसकती है।
  3. ग्रीवाखंड (Nappe) का निर्माण किसी खुले वलन (Open fold) के अपरदन से होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A) केवल 1 और 2
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 3
D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: A (केवल 1 और 2)
व्याख्या: कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि ग्रीवाखंड (Nappe) खुले वलन से नहीं, बल्कि अत्यधिक संपीडन द्वारा परिवलित वलन (Recumbent Fold) के टूटने (Thrust Faulting) और एक विशाल शिलाखंड के कई किलोमीटर दूर सरक जाने से बनता है।