दुशांबे में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक और भारत की रक्षा कूटनीति
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शासनाध्यक्ष परिषद की 25वीं बैठक; इंद्र, ऑस्ट्राहिंद, अखंड प्रहार-II और लोकायन अभियान का परीक्षा-उपयोगी अध्ययन।
चर्चा में क्यों?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 19–20 अक्टूबर 2026 की दुशांबे यात्रा में शंघाई सहयोग संगठन की शासनाध्यक्ष परिषद की 25वीं बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। 20 अक्टूबर के संबोधन में उन्होंने आतंकवाद के पूरे तंत्र को समाप्त करने और आर्थिक सहयोग के लिए विश्वास व स्थिरता पर जोर दिया।
इसी अवधि में रूस के साथ इंद्र नौसैनिक अभ्यास, ऑस्ट्रेलिया के साथ ऑस्ट्राहिंद तथा ओमान में नौसेना के पाल प्रशिक्षण पोत सुदर्शिनी की यात्रा चर्चा में हैं। इनके अध्ययन में बैठक, सैन्य अभ्यास और बंदरगाह यात्रा को उनके अलग उद्देश्यों के साथ समझना जरूरी है।
शंघाई सहयोग संगठन: संस्था और भारत का पक्ष
| पहलू | मुख्य तथ्य |
|---|---|
| स्थापना | 15 जून 2001, शंघाई। |
| संस्थापक | चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान। |
| सदस्यता | भारत और पाकिस्तान 2017 में; ईरान 2023 में; बेलारूस 2024 में पूर्ण सदस्य बना। कुल 10 पूर्ण सदस्य। |
| राष्ट्राध्यक्ष परिषद | संगठन की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली परिषद। |
| शासनाध्यक्ष परिषद | आर्थिक, व्यापारिक और बजट संबंधी सहयोग का प्रमुख मंच। |
| सचिवालय | बीजिंग, चीन। |
| क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना | कार्यकारी समिति ताशकंद, उज्बेकिस्तान में। |
दुशांबे बैठक में आर्थिक सहयोग, निवेश, संपर्क, नवाचार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर चर्चा हुई। भारत ने बहुपक्षीय व्यापार तथा आर्थिक सहयोग की 2026–2030 कार्ययोजना का समर्थन किया। आतंकवाद पर दोहरे मानदंडों का विरोध और सभी देशों की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान भारतीय पक्ष के मुख्य आधार रहे।
भारत की दृष्टि में संपर्क परियोजनाएँ उपयोगी हैं, लेकिन वे संबंधित देशों की संप्रभुता के अनुरूप होनी चाहिए। इससे चीन की बेल्ट एंड रोड पहल और पाकिस्तान अधिकृत भारतीय क्षेत्र से गुजरने वाली परियोजनाओं पर भारत की आपत्ति का संदर्भ समझ में आता है। भारत में सभ्यता संवाद जैसे मंच सांस्कृतिक संबंधों को भी विस्तार देते हैं।
प्रमुख सैन्य अभ्यास और नौसैनिक यात्रा
| अभ्यास/अभियान | कौन और कहाँ? | परीक्षा के लिए अंतर |
|---|---|---|
| इंद्र-2026 | भारत–रूस; व्लादिवोस्तोक में नौसैनिक चरण, 13–18 अक्टूबर। | आईएनएस सह्याद्री की भागीदारी; समुद्री सहयोग और पारस्परिक संचालन क्षमता। |
| ऑस्ट्राहिंद-2026 | भारत–ऑस्ट्रेलिया; तिरुवनंतपुरम, 19 अक्टूबर–1 नवंबर। | पाँचवाँ संस्करण; लगभग 120-120 सैन्यकर्मी; तटीय व द्वीपीय परिवेश में संयुक्त प्रशिक्षण। |
| अखंड प्रहार-II | भारतीय थलसेना; जैसलमेर, राजस्थान का मरुस्थलीय क्षेत्र। | देश के भीतर तैयारी और नई युद्धक प्रौद्योगिकी का परीक्षण; इसे द्विपक्षीय विदेशी अभ्यास न समझें। |
| लोकायन-2026 | आईएनएस सुदर्शिनी; सलालाह, ओमान, 14–17 अक्टूबर की यात्रा। | तीन-मस्तूल वाला पाल प्रशिक्षण पोत; नौकायन प्रशिक्षण और समुद्री संपर्क। |
ऑस्ट्राहिंद में भारतीय दल गढ़वाल राइफल्स और ऑस्ट्रेलियाई दल 13वीं ब्रिगेड से है। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय VII के अंतर्गत उप-पारंपरिक अभियानों के लिए समन्वय इसका प्रमुख प्रशिक्षण संदर्भ है।
इंद्र नाम नौसैनिक और थलसेना सहयोग, दोनों के संदर्भ में मिलता है। एक शाखा के संस्करण क्रमांक को दूसरी शाखा पर अपने आप लागू नहीं करना चाहिए। लोकायन एक लंबा समुद्री प्रशिक्षण अभियान है; किसी एक बंदरगाह पर पहुँचना पूरे अभियान की शुरुआत या समाप्ति नहीं है।
मानचित्र में क्या देखें?
- दुशांबे: ताजिकिस्तान की राजधानी; ताजिकिस्तान की सीमा अफगानिस्तान से लगती है।
- अफगानिस्तान के उत्तरी पड़ोसी: तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान और ताजिकिस्तान। किर्गिस्तान की अफगानिस्तान से सीधी सीमा नहीं लगती।
- व्लादिवोस्तोक: रूस के सुदूर पूर्व में जापान सागर के किनारे महत्वपूर्ण बंदरगाह।
- सलालाह: दक्षिणी ओमान के धोफार क्षेत्र में अरब सागर के तट पर।
- तिरुवनंतपुरम और जैसलमेर: क्रमशः केरल का तटीय तथा राजस्थान का मरुस्थलीय सैन्य प्रशिक्षण परिवेश।
एनसीईआरटी से संबंध
कक्षा 12, समकालीन विश्व राजनीति—समकालीन दक्षिण एशिया तथा अंतरराष्ट्रीय संगठन; कक्षा 11, भारत: भौतिक पर्यावरण—भारत की अवस्थिति।
स्थिर आधार • सीधे पढ़ें
रणनीतिक स्वायत्तता का अर्थ अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार निर्णय लेना है। भारत रूस, मध्य एशिया और हिंद-प्रशांत साझेदारों के साथ अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग कर सकता है। प्रत्येक संबंध का मूल्यांकन उसके ठोस परिणाम और सीमाओं से होना चाहिए।
संपर्क की बाधा: भारत को मध्य एशिया तक सीधे स्थल मार्ग की राजनीतिक कठिनाई है। चाबहार और अंतरराष्ट्रीय उत्तर–दक्षिण परिवहन गलियारा वैकल्पिक संपर्क की पृष्ठभूमि देते हैं। संपर्क में अवसंरचना के साथ सीमा शुल्क, सुरक्षा, वित्त और भरोसेमंद परिवहन व्यवस्था भी आवश्यक होती है।
एससीओ और क्वाड: एससीओ यूरेशियाई बहुपक्षीय संगठन है; क्वाड भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का सहयोग मंच है। ऑस्ट्राहिंद भारत–ऑस्ट्रेलिया का द्विपक्षीय अभ्यास है; उसमें भाग लेने से वह अपने आप क्वाड का सैन्य अभ्यास नहीं बन जाता।
मुख्य परीक्षा: सहयोग और अंतर्विरोध
भारत के लिए महत्त्व: मध्य एशिया के साथ संपर्क, ऊर्जा और बाजार; आतंकवाद तथा मादक पदार्थों की चुनौती पर संवाद; अफगानिस्तान की स्थिरता; संस्कृति, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता का सहयोग।
सीमाएँ: भारत–पाकिस्तान और भारत–चीन मतभेद, चीन–रूस का प्रभाव, संपर्क परियोजनाओं का विवाद तथा सदस्य देशों की अलग प्राथमिकताएँ साझा निर्णयों का प्रभाव सीमित कर सकती हैं। बैठक की घोषणाओं को उनके वास्तविक क्रियान्वयन से परखना चाहिए।
आगे की राह: भारत मध्य एशियाई देशों के साथ द्विपक्षीय संबंध मजबूत करे, संप्रभुता-आधारित संपर्क बढ़ाए और आतंकवाद पर सुसंगत रुख बनाए रखे। रक्षा अभ्यासों के साथ आर्थिक परियोजनाओं, भाषा-सांस्कृतिक संपर्क और संस्थागत सहयोग के परिणाम भी महत्वपूर्ण हैं।
विगत वर्ष के वास्तविक प्रश्न
UPSC 2022 • प्रारंभिक परीक्षा • सामान्य अध्ययन-I
प्रश्न 27 • प्रश्नपुस्तिका A
निम्नलिखित देशों पर विचार कीजिए:
मूल अंग्रेज़ी प्रश्न
Consider the following countries:
- Azerbaijan
- Kyrgyzstan
- Tajikistan
- Turkmenistan
- Uzbekistan
Which of the above have borders with Afghanistan?
- (a) 1, 2 and 5 only
- (b) 1, 2, 3 and 4 only
- (c) 3, 4 and 5 only
- (d) 1, 2, 3, 4 and 5
- अज़रबैजान
- किर्गिज़स्तान
- ताजिकिस्तान
- तुर्कमेनिस्तान
- उज्बेकिस्तान
उपर्युक्त में से किनकी सीमाएँ अफगानिस्तान के साथ लगती हैं?
- (a) केवल 1, 2 और 5
- (b) केवल 1, 2, 3 और 4
- (c) केवल 3, 4 और 5
- (d) 1, 2, 3, 4 और 5
सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या
सही उत्तर: (c) केवल 3, 4 और 5
अफगानिस्तान की उत्तरी सीमा ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान से लगती है। अज़रबैजान काकेशस क्षेत्र में है और अफगानिस्तान से उसकी सीमा नहीं है। किर्गिज़स्तान और अफगानिस्तान के बीच ताजिकिस्तान का क्षेत्र आता है। इसलिए सूची में 3, 4 और 5 सही हैं। अफगानिस्तान के अन्य पड़ोसी ईरान, पाकिस्तान और चीन हैं; वाखान गलियारे के कारण चीन से इसका छोटा सीमा-संपर्क महत्वपूर्ण है।
UPSC 2021 • मुख्य परीक्षा • सामान्य अध्ययन-II
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के लक्ष्यों और उद्देश्यों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। भारत के लिए इसका क्या महत्त्व है?
आदर्श उत्तर पढ़ें • 250 शब्द →
मूल अंग्रेज़ी प्रश्न
Critically examine the aims and objectives of SCO. What importance does it hold for India?
15 अंक • 250 शब्द
प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास
शंघाई सहयोग संगठन और सैन्य अभ्यासों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- बेलारूस सहित संगठन के 10 पूर्ण सदस्य हैं।
- क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना की कार्यकारी समिति दुशांबे में है।
- ऑस्ट्राहिंद-2026 का पाँचवाँ संस्करण तिरुवनंतपुरम में आयोजित है।
उपर्युक्त में से सही विकल्प चुनिए।
- (a) केवल 1 और 2
- (b) केवल 1 और 3
- (c) केवल 2 और 3
- (d) 1, 2 और 3
सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या
सही उत्तर: (b) केवल 1 और 3
कथन 1 और 3 सही हैं। बेलारूस 2024 में दसवाँ पूर्ण सदस्य बना। ऑस्ट्राहिंद का पाँचवाँ संस्करण 19 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक तिरुवनंतपुरम में है। कथन 2 गलत है: आतंकवाद-रोधी संरचना की कार्यकारी समिति ताशकंद में है; सचिवालय बीजिंग में है।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
यूरेशियाई सहयोग और हिंद-प्रशांत साझेदारियों के बीच भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का मूल्यांकन कीजिए। दुशांबे बैठक तथा हालिया सैन्य अभ्यासों से उदाहरण दीजिए।
15 अंक • 250 शब्द