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नौसैनिक स्वदेशीकरण • समुद्री सुरक्षा • GS-III

आईएनएस समर्थक: स्वदेशी बहु-उद्देश्यीय पोत, कारवार और नौसैनिक आत्मनिर्भरता

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INS Samarthak की क्षमताएँ, L&T कट्टुपल्ली, Project Seabird, सहायक नौसैनिक पोतों की भूमिका और 2047 तक आत्मनिर्भर नौसेना के लक्ष्य का विश्लेषण।

16 अक्टूबर 2026

पाठ्यक्रम से संबंध

  • प्रारंभिक: INS Samarthak, Multi-Purpose Vessel, कारवार नौसैनिक अड्डा और Project Seabird।
  • मुख्य GS-III: रक्षा स्वदेशीकरण, Make in India, नौसेना की परिचालन तत्परता, तटीय सुरक्षा और निजी शिपयार्ड।

चर्चा में क्यों?

भारतीय नौसेना ने कर्नाटक के कारवार नौसैनिक अड्डे पर अपने पहले स्वदेशी बहु-उद्देश्यीय पोत आईएनएस समर्थक (INS Samarthak) का औपचारिक कमीशनिंग किया। पोत का निर्माण Larsen & Toubro के कट्टुपल्ली शिपयार्ड ने किया है और इसे निजी क्षेत्र की रक्षा-जहाज निर्माण क्षमता के महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा गया है।

प्रारंभिक परीक्षा के मुख्य तथ्य

  • लंबाई: लगभग 107 मीटर।
  • विस्थापन: 3,750 टन से अधिक।
  • गति: 15 नॉट से अधिक।
  • स्वदेशी सामग्री: 75% से अधिक स्वदेशी घटक और प्रणालियाँ।

मुख्य परिचालन भूमिकाएँ

  • Target Towing—तोपखाना और मिसाइल फायरिंग अभ्यास के लिए लक्ष्य खींचना।
  • Mine Countermeasure उपकरणों की तैनाती।
  • परीक्षणों के दौरान दागे गए टॉरपीडो की पुनर्प्राप्ति।
  • कम-तीव्रता वाले समुद्री अभियान और Search & Rescue।
Project Seabird: कारवार नौसैनिक अड्डे को पश्चिमी तट पर बड़े, गहरे और सामरिक रूप से सुरक्षित नौसैनिक आधार के रूप में विकसित किया गया है।

स्थैतिक एवं सामरिक पृष्ठभूमि

भारत में युद्धपोत निर्माण लंबे समय तक सार्वजनिक क्षेत्र के शिपयार्डों—जैसे Mazagon Dock, Garden Reach और Goa Shipyard—पर केंद्रित रहा। L&T जैसे निजी शिपयार्ड समयबद्ध डिलीवरी, प्रतिस्पर्धा और लागत दक्षता बढ़ा सकते हैं।

Swavlamban रोडमैप: अध्ययन सामग्री के अनुसार भारतीय नौसेना ने 2047 तक पूरी तरह आत्मनिर्भर नौसेना बनने का लक्ष्य रखा है, जिसमें जहाज, हथियार और सेंसर अधिकतम घरेलू क्षमता से उपलब्ध हों।

मुख्य परीक्षा हेतु विश्लेषण

रणनीतिक लाभ

सहायक पोत लक्ष्य अभ्यास, प्रशिक्षण, रिकवरी और रसद जैसे कार्य सँभालते हैं, जिससे डिस्ट्रॉयर और फ्रिगेट जैसे प्रमुख लड़ाकू पोत वास्तविक परिचालन कार्यों के लिए अधिक उपलब्ध रहते हैं। यह हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेना की स्थायी उपस्थिति मजबूत करता है।

मुख्य चुनौतियाँ

विशेष नौसैनिक स्टील, गैस टर्बाइन इंजन और उन्नत सोनार जैसी तकनीकों में विदेशी निर्भरता तथा भारत के वाणिज्यिक शिपबिल्डिंग इकोसिस्टम का अपेक्षाकृत छोटा आकार प्रमुख चुनौतियाँ हैं।

आगे की राह

निजी क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक रक्षा खरीद पाइपलाइन सुनिश्चित करना और घरेलू मरीन प्रोपल्शन इंजनों तथा सेंसरों के अनुसंधान-विकास को गति देना।

विगत वर्षों के सटीक प्रश्न

मुख्य परीक्षा 2022 — सामान्य अध्ययन-III, प्रश्न 10

भारत में समुद्री सुरक्षा चुनौतियाँ क्या हैं? समुद्री सुरक्षा में सुधार के लिए की गई संगठनात्मक, तकनीकी और प्रक्रियात्मक पहलों की विवेचना कीजिए।

10 अंक · 150 शब्द

प्रश्न के साथ पूरा आदर्श उत्तर पढ़ें →

इस विषय में केवल सत्यापित वास्तविक प्रश्न रखा गया है; नौसेना परियोजनाओं पर कोई काल्पनिक प्रारंभिक प्रश्न नहीं जोड़ा गया है।

अभ्यास प्रश्न

प्रारंभिक प्रश्न

INS Samarthak के संदर्भ में: (1) यह निजी शिपयार्ड L&T कट्टुपल्ली द्वारा निर्मित स्वदेशी बहु-उद्देश्यीय पोत है। (2) यह परमाणु ऊर्जा चालित विमानवाहक पोत है। (3) कारवार नौसैनिक अड्डा Project Seabird के अंतर्गत विकसित हुआ है।

सही उत्तर: केवल 1 और 3। कथन 2 गलत है; यह सहायक बहु-उद्देश्यीय पोत है, विमानवाहक पोत नहीं।

मुख्य परीक्षा अभ्यास

“नीले पानी की नौसेना की ताकत केवल विमानवाहकों और विध्वंसकों से नहीं, बल्कि मजबूत सहायक बेड़े और स्वदेशी रक्षा विनिर्माण आधार से आंकी जाती है।” भारत के नौसैनिक स्वदेशीकरण प्रयासों के संदर्भ में मूल्यांकन कीजिए।

15 अंक · 250 शब्द

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आधार सामग्री

यह लेख 16 अक्टूबर 2026 की उपयोगकर्ता-प्रदत्त दैनिक समसामयिकी अध्ययन सामग्री के आधार पर व्यवस्थित किया गया है। मूल तथ्य, प्रश्न और विश्लेषण उसी सामग्री के अनुरूप रखे गए हैं।