भारत की समुद्री सुरक्षा चुनौतियाँ और सुधार पहलें
अक्षर आकार
वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न।
प्रश्न
भारत में समुद्री सुरक्षा चुनौतियाँ क्या हैं? समुद्री सुरक्षा में सुधार के लिए की गई संगठनात्मक, तकनीकी और प्रक्रियात्मक पहलों की विवेचना कीजिए।
प्रश्न की मांग
- समुद्री खतरों का संक्षिप्त वर्गीकरण करना।
- सुधारों को संगठनात्मक, तकनीकी और प्रक्रियात्मक तीन भागों में लिखना।
- अंत में एकीकृत समुद्री क्षेत्र-जागरूकता की आवश्यकता बताना।
आदर्श उत्तर
भारत की 7,500 किमी से अधिक तटरेखा, द्वीपीय क्षेत्र और हिंद महासागर में सामरिक स्थिति उसे समुद्री आतंकवाद, घुसपैठ, समुद्री डकैती, हथियार/मादक पदार्थ तस्करी, अवैध मत्स्यन, महत्वपूर्ण अपतटीय प्रतिष्ठानों पर हमले तथा बाहरी नौसैनिक प्रतिस्पर्धा के प्रति संवेदनशील बनाती है।
सुधार पहलें
- संगठनात्मक: नौसेना–तटरक्षक–राज्य समुद्री पुलिस की त्रि-स्तरीय व्यवस्था; सूचना प्रबंधन एवं विश्लेषण केंद्र (IMAC) तथा हिंद महासागर क्षेत्र के लिए सूचना संलयन केंद्र (IFC-IOR)।
- तकनीकी: तटीय निगरानी रडार-श्रृंखला, स्वचालित पहचान प्रणाली (AIS), राष्ट्रीय कमान-नियंत्रण-संचार एवं आसूचना नेटवर्क (NC3I), उपग्रह और हवाई निगरानी।
- प्रक्रियात्मक: मछली पकड़ने वाली नौकाओं का पंजीकरण, मछुआरों की पहचान, संयुक्त गश्त, मानक संचालन प्रक्रियाएँ और ‘सागर कवच’ जैसे अभ्यास।
आगे छोटे पोतों की वास्तविक समय पहचान, बंदरगाह साइबर सुरक्षा, ड्रोन/कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी और सभी एजेंसियों के साझा Maritime Domain Awareness चित्र को मजबूत करना आवश्यक है।
मूल्यवर्धन
प्रमुख संस्थागत शब्द: IMAC, IFC-IOR, NC3I, Coastal Surveillance Network.