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मुख्य परीक्षा अभ्यास • सामान्य अध्ययन-III

नीले पानी की नौसेना, सहायक बेड़ा और स्वदेशी रक्षा विनिर्माण

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समुद्री शक्ति, लॉजिस्टिक सहनशीलता और रक्षा-औद्योगिक आत्मनिर्भरता पर केंद्रित प्रश्न।

15 अंकशब्द-सीमा: 250 शब्दमाध्यम: हिंदी

प्रश्न

“नीले पानी की नौसेना की ताकत केवल विमानवाहकों और विध्वंसकों से नहीं, बल्कि मजबूत सहायक बेड़े और स्वदेशी रक्षा विनिर्माण आधार से आंकी जाती है।” भारत के नौसैनिक स्वदेशीकरण प्रयासों के संदर्भ में मूल्यांकन कीजिए।

प्रश्न की मांग

  • नीले पानी की नौसेना में सहायक पोतों की रणनीतिक भूमिका स्पष्ट करना।
  • आईएनएस समर्थक को व्यापक नौसैनिक स्वदेशीकरण से जोड़ना।
  • आयात निर्भरता और औद्योगिक बाधाओं के साथ संतुलित मूल्यांकन करना।

आदर्श उत्तर

नीले पानी की नौसेना का अर्थ केवल शक्तिशाली युद्धपोत नहीं, बल्कि अपने तट से दूर लंबे समय तक निगरानी, युद्ध, परीक्षण, मानवीय सहायता और उपस्थिति बनाए रखने की क्षमता है। इसलिए उसकी वास्तविक शक्ति combat fleet + support fleet + domestic industrial base के संयोजन से बनती है।

सहायक बेड़े का रणनीतिक महत्व

  • पुनःपूर्ति, टोइंग, लक्ष्य-तैनाती, परीक्षण, बचाव और मानवीय सहायता जैसे कार्य लड़ाकू पोतों की परिचालन उपलब्धता बढ़ाते हैं।
  • मानवरहित एवं स्वायत्त प्रणालियों के “मदर-शिप” के रूप में सहायक पोत भविष्य की समुद्री युद्धकला के परीक्षण-मंच बन सकते हैं।
  • आपदा या संघर्ष में मरम्मत, चिकित्सा और बचाव क्षमता नौसेना की समुद्री सहनशीलता बढ़ाती है।

स्वदेशीकरण में आईएनएस समर्थक का महत्व

एल एंड टी के कट्टुपल्ली शिपयार्ड में निर्मित समर्थक में 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री है। इसका निर्माण निजी शिपयार्ड की भागीदारी, स्वदेशी सेंसर-इलेक्ट्रॉनिक्स के एकीकरण और परीक्षण-प्लेटफॉर्म क्षमता को मजबूत करता है। इससे विदेशी आपूर्ति-श्रृंखला पर निर्भरता घटती, जीवन-चक्र रखरखाव देश में रहता और एमएसएमई सहित नौसैनिक औद्योगिक पारिस्थितिकी विकसित होती है।

अभी शेष अंतराल

उन्नत समुद्री प्रणोदन, कुछ सेंसर/हथियार, विशेष सामग्री, निरंतर आदेश-पुस्तिका तथा डिजाइन से रखरखाव तक निजी क्षेत्र की दीर्घकालिक भागीदारी अभी चुनौती हैं। केवल “स्वदेशी प्रतिशत” बढ़ाना पर्याप्त नहीं; महत्वपूर्ण उप-प्रणालियों की तकनीकी संप्रभुता आवश्यक है।

आगे की राह: दीर्घकालिक जहाज-निर्माण योजना, स्वदेशी गैस-टर्बाइन/मरीन इंजन, मानकीकृत प्लेटफॉर्म, सार्वजनिक-निजी सह-विकास और निर्यातयोग्य डिजाइन पर बल देना चाहिए। तभी आत्मनिर्भरता निर्माण से डिजाइन और जीवन-चक्र नियंत्रण तक पहुँचेगी।

मूल्यवर्धन

समर्थक: भारतीय नौसेना के बहु-उद्देश्यीय पोतों की शृंखला का प्रथम पोत; समुद्री निगरानी, परीक्षण, मानवरहित प्रणालियाँ, HADR और सीमित अस्पताल-पोत भूमिका में सक्षम।

रणनीतिक सूत्र: Platform indigenisation → subsystem indigenisation → design sovereignty.