भाग 3: मानव शरीर क्रिया विज्ञान — पाचन, परिसंचरण, श्वसन, उत्सर्जन, तंत्रिका एवं अंतःस्रावी तंत्र
यह पृष्ठ आपकी दी हुई “जीव विज्ञान भाग 3” सामग्री को आधार बनाकर तैयार किया गया है। मूल विषय-विन्यास को सुरक्षित रखते हुए जिन बिंदुओं में वैज्ञानिक अद्यतन आवश्यक था, उन्हें अलग से “सत्यापन/सुधार” के रूप में स्पष्ट किया गया है।
मूल नोट्स से किए गए प्रमुख वैज्ञानिक सुधार
- अग्न्याशय: मूल नोट्स में “मानव शरीर की दूसरी सबसे बड़ी ग्रंथि” लिखा था। यह मानक वैज्ञानिक तथ्य नहीं है। अग्न्याशय को मिश्रित ग्रंथि समझें; यकृत शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है।
- यकृत और हेपेरिन: मूल नोट्स में यकृत द्वारा हेपेरिन निर्माण लिखा था। आधुनिक स्रोतों के अनुसार हेपेरिन मुख्यतः मास्ट कोशिकाओं में बनता है; यकृत कई महत्वपूर्ण प्लाज्मा प्रोटीन और जमावट कारक बनाता है।
- ऊँट/लामा की RBC: मूल नोट्स में इन्हें केंद्रकयुक्त बताया गया था। परिपक्व ऊँटवंशी लाल रक्त कोशिकाएँ भी केंद्रकविहीन होती हैं; उनकी विशेषता उनका दीर्घवृत्ताकार आकार है।
- Rh असंगति: “पहला बच्चा हमेशा सामान्य, दूसरा प्रभावित” अत्यधिक सरलीकरण है। संवेदनशीलता कब विकसित होगी यह परिस्थितियों पर निर्भर करता है; Rh इम्यूनोग्लोबुलिन गर्भावस्था में और Rh-धनात्मक शिशु के जन्म के बाद निर्धारित समय पर दिया जा सकता है।
- ATP उत्पादन: “36 या 38 ATP” पुराना पाठ्य सरलीकरण है। आधुनिक जैवरसायन में यूकैरियोटिक कोशिका में एक ग्लूकोज से सामान्यतः लगभग 30–32 ATP का अनुमान अधिक स्वीकार्य है।
- गुर्दे की पथरी: सभी पथरी केवल कैल्शियम ऑक्सालेट नहीं होती; यह सबसे सामान्य प्रकारों में है, पर कैल्शियम फॉस्फेट, यूरिक अम्ल, स्ट्रुवाइट और सिस्टीन पथरी भी होती हैं।
- ऑक्सीटोसिन और ADH: ये हाइपोथैलेमस में संश्लेषित होते हैं और पश्च पीयूष से संग्रहीत/मुक्त होते हैं।
- इंसुलिन और जस्ता: जस्ता इंसुलिन के भंडारण में हेक्सामर को स्थिर करने में महत्वपूर्ण है; “इंसुलिन अणु में जस्ता धातु होती है” कहना अत्यधिक सरलीकृत है।
इस भाग की अध्ययन-सूची
1. मानव पाचन तंत्र एवं एंजाइम
मानव पाचन तंत्र में आहार नाल और उससे संबद्ध पाचक ग्रंथियाँ शामिल हैं। भोजन का यांत्रिक तथा रासायनिक विघटन कर पोषक अणुओं को अवशोषण योग्य बनाया जाता है।
मुखगुहा एवं दाँत
- मानव दंत व्यवस्था द्विबारदंती (Diphyodont), गर्तदंती (Thecodont) और विषमदंती (Heterodont) है।
- वयस्क दंत सूत्र: 2-1-2-3 / 2-1-2-3; कुल सामान्यतः 32 दाँत।
- दाँत का इनेमल कैल्शियम-समृद्ध हाइड्रॉक्सीएपेटाइट वाला अत्यंत कठोर ऊतक है।
- तीन प्रमुख लार ग्रंथियाँ: पैरोटिड, सबमैंडिबुलर और सबलिंगुअल।
- लार एमाइलेज स्टार्च का पाचन प्रारंभ करता है; लाइसोजाइम में रोगाणुरोधी क्रिया होती है।
आमाशय
- पैराइटल कोशिकाएँ हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) का स्राव करती हैं।
- मुख्य कोशिकाएँ पेप्सिनोजन छोड़ती हैं, जो अम्लीय वातावरण में पेप्सिन में सक्रिय होता है।
- पेप्सिन प्रोटीन पाचन में भाग लेता है।
- म्यूकस और बाइकार्बोनेट की सुरक्षात्मक परत आमाशय की उपकला को अम्ल से बचाती है।
- शिशुओं में दूध-प्रोटीन के पाचन से संबंधित एंजाइमीय व्यवस्थाएँ वयस्कों से भिन्न हो सकती हैं; “रेनिन” को मनुष्यों में सार्वभौमिक प्रमुख जठर एंजाइम की तरह याद न करें।
यकृत, पित्ताशय और अग्न्याशय
| अंग | मुख्य कार्य | परीक्षा तथ्य |
|---|---|---|
| यकृत | पित्त निर्माण, कार्बोहाइड्रेट/लिपिड/प्रोटीन उपापचय, विषहरण, यूरिया निर्माण, कई प्लाज्मा प्रोटीनों का निर्माण | मानव शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि; पित्त में पाचक एंजाइम नहीं होते। |
| पित्ताशय | पित्त का भंडारण और सघनीकरण | वसा के पायसीकरण में पित्त लवण सहायक। |
| अग्न्याशय | बहिःस्रावी भाग पाचक एंजाइम/बाइकार्बोनेट; अंतःस्रावी भाग हार्मोन | मिश्रित ग्रंथि। ट्रिप्सिनोजेन, काइमोट्रिप्सिनोजेन, एमाइलेज और लाइपेस प्रमुख पाचक उत्पाद। |
छोटी और बड़ी आंत
- छोटी आंत: ग्रहणी, जेजुनम और इलियम; अधिकांश पाचन और पोषक अवशोषण यहीं होता है।
- विलाई और माइक्रोविलाई अवशोषण सतह बढ़ाते हैं।
- बड़ी आंत मुख्यतः जल और इलेक्ट्रोलाइट अवशोषण तथा मल-निर्माण में भूमिका निभाती है।
- अपेंडिक्स को केवल “बेकार अवशेषी अंग” समझना अधूरा है; इसमें लसीकाजन्य ऊतक होते हैं, यद्यपि जीवन के लिए अनिवार्य अंग नहीं है।
2. रक्त एवं परिसंचरण तंत्र
रक्त का संघटन
रक्त एक तरल संयोजी ऊतक है। इसका pH लगभग 7.35–7.45 रहता है। कुल रक्त आयतन व्यक्ति के आकार, आयु और लिंग पर निर्भर करता है।
| घटक | मुख्य तथ्य | मुख्य कार्य |
|---|---|---|
| प्लाज्मा | मुख्यतः जल; एल्ब्यूमिन, ग्लोब्युलिन, फाइब्रिनोजेन आदि प्रोटीन | पोषक पदार्थ, हार्मोन, अपशिष्ट और प्रोटीनों का परिवहन |
| लाल रक्त कोशिका (RBC) | मानव में परिपक्व अवस्था में केंद्रकविहीन; उभयावतल; औसत जीवनकाल लगभग 120 दिन | हीमोग्लोबिन द्वारा O₂ का परिवहन; CO₂ परिवहन में भी सहायता |
| श्वेत रक्त कोशिका (WBC) | केंद्रकयुक्त; विभिन्न प्रकारों का जीवनकाल बहुत अलग हो सकता है | प्रतिरक्षा एवं रोगजनक से रक्षा |
| प्लेटलेट | मेगाकारियोसाइट से बने कोशिकीय खंड; केंद्रकविहीन | रक्तस्राव रोकने और थक्का बनने में महत्वपूर्ण |
सीरम: थक्का बनने के बाद बचा द्रव; इसमें फाइब्रिनोजेन सहित कई जमावट कारक प्लाज्मा की तुलना में घटे/अनुपस्थित होते हैं।
रक्त समूह
- ABO प्रणाली लाल रक्त कोशिका की सतह पर A और B प्रतिजनों से संबंधित है।
- लाल रक्त कोशिका आधान के संदर्भ में O Rh-ऋणात्मक को आपातकालीन “सार्वभौमिक RBC दाता” के रूप में याद किया जाता है।
- लाल रक्त कोशिका आधान के संदर्भ में AB Rh-धनात्मक व्यक्ति व्यापक RBC स्वीकार्यता रखता है।
- पूर्ण रक्त, प्लाज्मा और अन्य रक्त-उत्पादों की अनुकूलता अलग नियमों पर निर्भर करती है; “सार्वभौमिक दाता/ग्राही” को हमेशा संदर्भ सहित पढ़ें।
Rh असंगति
यदि RhD-ऋणात्मक गर्भवती व्यक्ति RhD-धनात्मक भ्रूण की लाल रक्त कोशिकाओं के संपर्क में आकर एंटी-D प्रतिरक्षी बना ले, तो भविष्य की गर्भावस्था में भ्रूण/नवजात का हीमोलिटिक रोग हो सकता है। यह आवश्यक नहीं कि पहला गर्भ हमेशा अप्रभावित और दूसरा ही प्रभावित हो। उचित Rh इम्यूनोग्लोबुलिन से संवेदनशीलता का जोखिम काफी घटाया जा सकता है।
हृदय और रक्तदाब
- हृदय के 4 कक्ष: दायाँ अलिंद, दायाँ निलय, बायाँ अलिंद, बायाँ निलय।
- दाएँ ओर त्रिकपर्दी कपाट और बाएँ ओर द्विकपर्दी/माइट्रल कपाट।
- सिनोएट्रियल नोड (SA Node) सामान्य हृदय का प्राकृतिक पेसमेकर है।
- 120/80 mmHg को पाठ्यपुस्तकीय सामान्य संदर्भ मान के रूप में पढ़ाया जाता है; वास्तविक रक्तदाब व्यक्ति और चिकित्सकीय मानदंड के अनुसार बदलता है।
- रक्तदाब मापने का यंत्र: स्फिग्मोमैनोमीटर।
3. मानव श्वसन एवं गैस परिवहन
- फेफड़े प्लूरा से आवृत रहते हैं।
- गैस-विनिमय की मुख्य सूक्ष्म संरचनाएँ एल्विओलाई (Alveoli) हैं।
- ऑक्सीजन का अधिकांश भाग हीमोग्लोबिन से जुड़कर ऑक्सीहीमोग्लोबिन के रूप में परिवाहित होता है।
- कार्बन डाइऑक्साइड का अधिकांश भाग रक्त में बाइकार्बोनेट आयन के रूप में परिवाहित होता है; कुछ भाग कार्बामिनो-यौगिक और घुले रूप में।
कोशिकीय श्वसन
| चरण | स्थान | मुख्य परिणाम |
|---|---|---|
| ग्लाइकोलाइसिस | कोशिकाद्रव्य | ग्लूकोज से पाइरुवेट; शुद्ध 2 ATP और NADH |
| पाइरुवेट ऑक्सीकरण | माइटोकॉन्ड्रियल मैट्रिक्स | एसीटिल-CoA निर्माण |
| क्रेब्स/साइट्रिक अम्ल चक्र | माइटोकॉन्ड्रियल मैट्रिक्स | NADH, FADH₂, CO₂ और थोड़ी प्रत्यक्ष ATP/GTP |
| ऑक्सीडेटिव फॉस्फोराइलेशन | भीतरी माइटोकॉन्ड्रियल झिल्ली | अधिकांश ATP निर्माण |
यूकैरियोटिक कोशिका में एक ग्लूकोज के पूर्ण ऑक्सीकरण से सामान्यतः लगभग 30–32 ATP का आधुनिक अनुमान उपयोगी है; वास्तविक संख्या जैविक परिस्थितियों पर निर्भर कर सकती है।
4. उत्सर्जन तंत्र — वृक्क एवं नेफ्रॉन
- मनुष्य प्रमुख नाइट्रोजनी अपशिष्ट के रूप में यूरिया निकालता है, इसलिए यूरियोटेलिक है।
- वृक्क की संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई नेफ्रॉन है। प्रत्येक वृक्क में लगभग 10 लाख के आसपास नेफ्रॉन हो सकते हैं।
- नेफ्रॉन के प्रमुख भाग: ग्लोमेरुलस + बोमन संपुट, निकटस्थ कुंडलित नलिका, हेनले लूप, दूरस्थ कुंडलित नलिका और संग्रह नलिका।
मूत्र निर्माण के तीन मूल चरण
- ग्लोमेरुलर निस्यंदन: रक्त प्लाज्मा का दाब-चालित निस्यंदन।
- चयनात्मक पुनरवशोषण: उपयोगी जल, ग्लूकोज, आयन आदि का रक्त में वापस जाना।
- नलिकीय स्राव: कुछ आयन/अपशिष्ट नलिका में सक्रिय रूप से छोड़े जाते हैं।
मूत्र सामान्यतः जल-प्रधान होता है और उसमें यूरिया, क्रिएटिनिन, यूरिक अम्ल तथा इलेक्ट्रोलाइट होते हैं। इसका pH आहार और शरीर की अम्ल-क्षार स्थिति के अनुसार बदल सकता है।
वृक्क पथरी
कैल्शियम-आधारित पथरियाँ सबसे सामान्य हैं, जिनमें कैल्शियम ऑक्सालेट प्रमुख प्रकार है। अन्य प्रकार: कैल्शियम फॉस्फेट, यूरिक अम्ल, स्ट्रुवाइट और सिस्टीन।
हीमोडायलिसिस
गंभीर वृक्क-विफलता में डायलिसिस रक्त से अपशिष्ट, अतिरिक्त लवण और जल हटाने में सहायता कर सकता है। इसे “कृत्रिम वृक्क” के रूप में परीक्षा में समझाया जाता है, यद्यपि यह वृक्क के सभी हार्मोनल कार्यों की पूरी नकल नहीं करता।
5. तंत्रिका तंत्र एवं मानव मस्तिष्क
न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र की मूल संकेत-प्रेषक कोशिका है। अधिकांश परिपक्व न्यूरॉन सामान्य परिस्थितियों में विभाजित नहीं होते। दो कोशिकाओं के बीच कार्यात्मक संधि को सिनैप्स कहते हैं। एसिटाइलकोलीन, डोपामाइन, ग्लूटामेट, गाबा आदि प्रमुख न्यूरोट्रांसमीटरों के उदाहरण हैं।
मस्तिष्क के प्रमुख भाग
| भाग | प्रमुख भूमिका |
|---|---|
| सेरेब्रुम (प्रमस्तिष्क) | चेतना, संवेदना का उच्च प्रसंस्करण, स्मृति, भाषा, योजना और स्वैच्छिक गति। |
| थैलेमस | अधिकांश संवेदी सूचनाओं का प्रमुख रिले केंद्र; मोटर और चेतना नेटवर्क में भी भूमिका। |
| हाइपोथैलेमस | तापमान, भूख, प्यास, जल-संतुलन, स्वायत्त तंत्र और अंतःस्रावी नियंत्रण; पीयूष ग्रंथि से घनिष्ठ संबंध। |
| मध्य-मस्तिष्क | दृश्य/श्रवण प्रतिवर्त सहित कई मोटर और संवेदी मार्गों में भूमिका। |
| सेरिबैलम (अनुमस्तिष्क) | संतुलन, मुद्रा, गति-सटीकता और मोटर समन्वय। |
| मेडुला ऑब्लोंगेटा | श्वसन, हृदय-वाहिकीय नियंत्रण तथा निगलना, खाँसी, उल्टी जैसे अनेक महत्त्वपूर्ण प्रतिवर्त। |
मस्तिष्क तीन मेनिन्जियल झिल्लियों—ड्यूरा मेटर, अरैक्नॉइड और पिया मेटर—से घिरा है। मेनिन्जाइटिस इन झिल्लियों की सूजन है, जिसका कारण संक्रमण सहित कई स्थितियाँ हो सकती हैं।
मेरुरज्जु: अनेक प्रतिवर्त क्रियाओं का महत्वपूर्ण केंद्र; इससे 31 जोड़ी स्पाइनल नसें निकलती हैं।
6. अंतःस्रावी ग्रंथियाँ एवं हार्मोन
| ग्रंथि/अंग | प्रमुख हार्मोन | मुख्य कार्य एवं परीक्षा तथ्य |
|---|---|---|
| अग्र पीयूष | वृद्धि हार्मोन (GH), थायरॉइड उद्दीपक हार्मोन (TSH), एड्रेनोकोर्टिकोट्रोपिक हार्मोन (ACTH), प्रोलैक्टिन, FSH, LH | अनेक अंतःस्रावी ग्रंथियों और वृद्धि/प्रजनन का नियंत्रण। GH की बाल्यावस्था में अधिकता से gigantism और कमी से growth hormone deficiency हो सकती है। |
| पश्च पीयूष | ऑक्सीटोसिन और एंटीडाययूरेटिक हार्मोन (ADH/वैसोप्रेसिन) का संग्रह और विमोचन | दोनों हार्मोन हाइपोथैलेमस में बनते हैं। ऑक्सीटोसिन गर्भाशय संकुचन और दूध निष्कासन में; ADH वृक्क में जल पुनरवशोषण बढ़ाता है। |
| थायरॉइड | T₄, T₃, कैल्सीटोनिन | उपापचय और विकास में भूमिका। आयोडीन की कमी से गलगंड हो सकता है। जन्मजात थायरॉइड हार्मोन की कमी को आधुनिक रूप से congenital hypothyroidism कहा जाता है। |
| पैराथायरॉइड | पैराथायरॉइड हार्मोन (PTH) | रक्त कैल्शियम विनियमन; वृक्क, अस्थि और सक्रिय विटामिन D मार्ग पर प्रभाव। |
| अधिवृक्क मज्जा | एड्रेनालिन/एपिनेफ्रिन, नॉरएड्रेनालिन | “Fight or Flight” प्रतिक्रिया। |
| अधिवृक्क प्रांतस्था | कॉर्टिसोल, एल्डोस्टेरोन आदि | तनाव, ग्लूकोज उपापचय, लवण-जल संतुलन। |
| अग्न्याशयी द्वीपिकाएँ | β-कोशिका: इंसुलिन; α-कोशिका: ग्लूकागन; δ-कोशिका: सोमैटोस्टैटिन | इंसुलिन रक्त-ग्लूकोज घटाने और भंडारण बढ़ाने में; ग्लूकागन उपवास में रक्त-ग्लूकोज बढ़ाने में। जस्ता β-कोशिका ग्रैन्यूल में इंसुलिन के भंडारण-रूप को स्थिर करता है। |
| वृषण | टेस्टोस्टेरोन | पुरुष जनन कार्य और द्वितीयक लैंगिक लक्षण। |
| अंडाशय | एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन | मासिक चक्र, प्रजनन और गर्भावस्था के समर्थन में भूमिका। |
| पीनियल ग्रंथि | मेलाटोनिन | प्रकाश-अंधकार चक्र और सर्कैडियन लय से संबंधित। |
7. अभ्यास प्रश्न — PYQ नहीं
1. पित्त रस में ट्रिप्सिन पाया जाता है।
2. O Rh-ऋणात्मक रक्त को लाल रक्त कोशिका आधान के संदर्भ में सार्वभौमिक दाता कहा जाता है।
3. हाइपोथैलेमस तापमान, भूख और प्यास के नियमन में महत्वपूर्ण है।
उत्तर: केवल 2 और 3। ट्रिप्सिन अग्न्याशयी एंजाइम तंत्र से संबंधित है; पित्त में पाचक एंजाइम नहीं होते।
उत्तर: चारों सुमेलन सही हैं।
उत्तर: लगभग 30–32 ATP।
8. सत्यापित BPSC PYQ स्थिति
मूल PDF में 2011–2023 के कई प्रश्न BPSC PYQ के रूप में दिए गए हैं। उन्हें इस पृष्ठ पर अभी वास्तविक PYQ के रूप में प्रकाशित नहीं किया गया है, क्योंकि प्रत्येक प्रश्न को बिहार लोक सेवा आयोग की आधिकारिक प्रश्न-पुस्तिका/उत्तर-कुंजी से सत्यापित करना आवश्यक है। सत्यापन के बाद ही वास्तविक PYQ जोड़े जाएंगे।
मूल आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध “जीव विज्ञान भाग 3” नोट्स। सत्यापन/अद्यतन: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) मानव शरीर क्रिया विज्ञान पाठ्य-संरचना, राष्ट्रीय जैव-चिकित्सीय साहित्य और आधिकारिक चिकित्सा स्रोतों से चयनित तथ्य-सुधार। अंतिम संपादकीय अद्यतन: 5 अक्टूबर 2026।