भाग 2: पादप कार्यिकी, संवहनी ऊतक, प्रकाश संश्लेषण, पादप हार्मोन, पुष्प-फल एवं पादप रोग
मूल नोट्स का क्रम और परीक्षा-केंद्रित ढाँचा सुरक्षित रखा गया है। जहाँ सामग्री में पुरानी, अत्यधिक सरल या वैज्ञानिक रूप से गलत जानकारी मिली, वहाँ उसे स्पष्ट रूप से सुधारकर प्रस्तुत किया गया है।
पहले ये महत्वपूर्ण सुधार याद रखें
- पोटोमीटर सीधे “वाष्पोत्सर्जन” नहीं मापता; यह मुख्यतः जल-ग्रहण की दर मापता है, जिससे वाष्पोत्सर्जन का अनुमान लगाया जाता है।
- हरे प्रकाश में प्रकाश संश्लेषण शून्य नहीं होता; क्रिया-वर्णक्रम में लाल और नीला प्रकाश अधिक प्रभावी हैं, पर हरा प्रकाश भी उपयोग हो सकता है।
- “अंधकार अभिक्रिया” शब्द भ्रामक हो सकता है; कैल्विन चक्र को प्रकाश-स्वतंत्र अभिक्रिया कहना अधिक उचित है, क्योंकि यह प्रकाश में भी चलता है और ATP/NADPH पर निर्भर है।
- गेहूँ के सभी रतुआ रोग एक ही Puccinia graminis से नहीं होते: तना/काला रतुआ, पत्ती/भूरा रतुआ और धारी/पीला रतुआ अलग रोगजनकों से होते हैं।
- अरहर का उकठा रोग मुख्यतः Fusarium udum से जुड़ा है, न कि सामान्य रूप से Fusarium oxysporum लिखना उचित है।
- काजू में “काजू सेब” और वास्तविक “काजू नट” के खाद्य भाग अलग हैं; दोनों को एक ही पंक्ति में मिलाना गलत है।
इस भाग में क्या पढ़ना है?
1. पादप ऊतक एवं संवहनी तंत्र
विभज्योतक ऊतक
- शीर्षस्थ विभज्योतक (Apical Meristem): जड़ और तने के शीर्ष पर; प्राथमिक लंबाई वृद्धि।
- अंतर्वेशी विभज्योतक (Intercalary Meristem): घास जैसे पौधों में पर्व/पत्ती के आधार के पास; पुनर्वृद्धि में सहायक।
- पार्श्व विभज्योतक (Lateral Meristem): संवहनी कैम्बियम और कॉर्क कैम्बियम; द्वितीयक मोटाई वृद्धि।
सरल स्थायी ऊतक
- मृदूतक (Parenchyma): जीवित, पतली भित्ति; संचय, प्रकाश संश्लेषण और घाव-भराव जैसे कार्य। क्लोरोफिलयुक्त मृदूतक को क्लोरेन्काइमा और बड़े वायु-स्थान वाले जलीय मृदूतक को एरेन्काइमा कहा जाता है।
- स्थूलकोण ऊतक (Collenchyma): जीवित कोशिकाएँ; असमान मोटी प्राथमिक भित्ति; लचीलापन और यांत्रिक आधार।
- दृढ़ोतक (Sclerenchyma): सामान्यतः परिपक्व अवस्था में मृत; लिग्निनयुक्त मोटी भित्ति; यांत्रिक मजबूती। नारियल के रेशे में स्क्लेरेंकाइमा तंतु और नाशपाती के दानेदारपन में स्क्लेराइड पाए जाते हैं।
जाइलम बनाम फ्लोएम
| आधार | जाइलम (Xylem) | फ्लोएम (Phloem) |
|---|---|---|
| मुख्य घटक | वाहिनिका, वाहिका, जाइलम तंतु, जाइलम मृदूतक | चालनी नलिका, सहकोशिका, फ्लोएम मृदूतक, फ्लोएम तंतु |
| जीवित/मृत | जाइलम मृदूतक जीवित; प्रमुख जल-वाहक तत्व परिपक्व अवस्था में मृत | फ्लोएम तंतु मृत; चालनी नलिका जीवित पर परिपक्व अवस्था में केंद्रकविहीन |
| मुख्य परिवहन | जल और खनिज | मुख्यतः सुक्रोज तथा अन्य कार्बनिक पदार्थ |
| दिशा | सामान्यतः जड़ से वायवीय भाग की ओर ऊपर | स्रोत से कुंड तक; अलग-अलग नलिकाओं में दिशा अलग हो सकती है |
| प्रमुख तंत्र | वाष्पोत्सर्जन कर्षण, संसंजन-तनाव; कुछ परिस्थितियों में मूलदाब सहायक | दाब-प्रवाह परिकल्पना (Pressure Flow Hypothesis) |
डेंड्रोक्रोनोलॉजी: स्पष्ट वार्षिक वृद्धि-वृत्त बनाने वाले वृक्षों में वृद्धि-वृत्तों के विश्लेषण से आयु और अतीत की पर्यावरणीय स्थितियों का अध्ययन किया जा सकता है। सभी उष्णकटिबंधीय वृक्षों में स्पष्ट वार्षिक वलय बनना आवश्यक नहीं है।
2. प्रकाश संश्लेषण
हरे पौधे प्रकाश ऊर्जा का उपयोग करके कार्बन डाइऑक्साइड और जल से कार्बोहाइड्रेट बनाते हैं। इस प्रक्रिया में मुक्त होने वाली ऑक्सीजन का स्रोत जल है।
सरलीकृत समीकरण: 6CO₂ + 12H₂O + प्रकाश ऊर्जा → C₆H₁₂O₆ + 6O₂ + 6H₂O
प्रकाश अभिक्रिया
- हरितलवक की थाइलेकॉइड झिल्ली पर होती है।
- प्रकाश-तंत्र II (Photosystem II—PS II) और प्रकाश-तंत्र I (Photosystem I—PS I) भाग लेते हैं।
- जल का प्रकाश-विघटन PS II से जुड़ा है; O₂ मुक्त होती है।
- एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट (Adenosine Triphosphate—ATP) और निकोटिनामाइड एडेनिन डाइन्यूक्लियोटाइड फॉस्फेट का अपचयित रूप (NADPH) बनते हैं।
कार्बन स्थिरीकरण / कैल्विन चक्र
- हरितलवक के स्ट्रोमा में होता है।
- राइबुलोज-1,5-बिसफॉस्फेट कार्बॉक्सिलेज/ऑक्सीजनेज (RuBisCO) CO₂ को राइबुलोज बिसफॉस्फेट (RuBP) से जोड़ता है।
- यह चक्र प्रकाश से सीधे फोटॉन नहीं लेता, पर प्रकाश अभिक्रिया से बने ATP और NADPH पर निर्भर करता है।
प्रकाश-वर्णक्रम
क्लोरोफिल लाल और नीले क्षेत्रों में अधिक प्रभावी ढंग से प्रकाश अवशोषित करता है, इसलिए प्रकाश संश्लेषण की क्रिया-वर्णक्रम में इन क्षेत्रों में उच्च गतिविधि मिलती है। हरा प्रकाश पूर्णतः निष्प्रभावी नहीं है; पत्ती उसका एक भाग परावर्तित करती है, लेकिन कुछ हरा प्रकाश गहरे ऊतकों तक पहुँचकर प्रकाश संश्लेषण में योगदान देता है।
BPSC के लिए अतिरिक्त: C₃ और C₄
| आधार | C₃ पौधे | C₄ पौधे |
|---|---|---|
| प्रथम स्थिर उत्पाद | 3-कार्बन यौगिक 3-PGA | 4-कार्बन ऑक्सालोएसेटेट/मैलिक अम्ल मार्ग |
| प्रारंभिक CO₂ स्थिरीकरण | RuBisCO | PEP कार्बॉक्सिलेज |
| फोटोश्वसन | तुलनात्मक रूप से अधिक | बहुत कम |
| उदाहरण | गेहूँ, धान | मक्का, गन्ना |
3. वाष्पोत्सर्जन एवं बिंदुस्राव
वाष्पोत्सर्जन
पौधे के वायवीय भागों से जल का वाष्प के रूप में निकलना वाष्पोत्सर्जन है। अधिकांश जल रंध्रों द्वारा निकलता है। रक्षक कोशिकाओं का तुर्गर और K⁺ सहित आयनिक परिवहन रंध्र खुलने-बंद होने में महत्वपूर्ण है।
- यह पत्ती को ठंडा करने, खनिज परिवहन और जाइलम में ऊपर की ओर जल-प्रवाह बनाए रखने में योगदान देता है।
- गैनॉन्ग का पोटोमीटर पौधे द्वारा जल-ग्रहण की दर का अनुमान देता है; प्रयोगात्मक परिस्थितियों में इससे वाष्पोत्सर्जन का अप्रत्यक्ष अनुमान लगाया जाता है।
बिंदुस्राव (Guttation)
जड़-दाब अधिक होने और वाष्पोत्सर्जन कम होने की स्थितियों में जलरंध्रों (Hydathodes) से तरल जल बूंदों के रूप में बाहर आ सकता है। इसे ओस से अलग समझें: ओस बाहरी जलवाष्प के संघनन से बनती है, जबकि बिंदुस्राव पौधे के भीतर से निकले द्रव से।
4. प्रमुख पादप हार्मोन
| हार्मोन | मुख्य कार्य | परीक्षा तथ्य |
|---|---|---|
| ऑक्सिन (Auxin) | कोशिका दीर्घीकरण, शीर्ष प्रभुत्व, अनुवर्तन, जड़ निर्माण | 2,4-D एक कृत्रिम ऑक्सिन है और चयनात्मक खरपतवारनाशी के रूप में उपयोग होता है; ऑक्सिन द्वारा कुछ पौधों में अनिषेकफलन प्रेरित किया जा सकता है। |
| जिबरेलिन (Gibberellin) | तना दीर्घीकरण, बोल्टिंग, बीज सुप्तावस्था तोड़ना, अंकुरण | बकाने रोग के अध्ययन ने जिबरेलिन अनुसंधान को जन्म दिया; जौ आदि में α-अमाइलेज सक्रियता से संबंध। |
| साइटोकाइनिन (Cytokinin) | कोशिका विभाजन, पार्श्व कलिका वृद्धि, पत्ती की जरावस्था में विलंब | ऊतक संवर्धन में ऑक्सिन-साइटोकाइनिन अनुपात महत्वपूर्ण। |
| एथिलीन (Ethylene) | फल पकना, जरावस्था, विलगन, अनेक तनाव प्रतिक्रियाएँ | प्राकृतिक गैसीय पादप हार्मोन; क्लाइमेक्टेरिक फलों में पकने से जुड़ी श्वसन वृद्धि। इसे केवल “वृद्धि रोधक” कहना अधूरा है। |
| एब्सिसिक अम्ल (Abscisic Acid—ABA) | सूखा तनाव में रंध्र बंद करना, बीज सुप्तावस्था, वृद्धि-नियमन | इसे “तनाव हार्मोन” कहा जाता है; विलगन के नाम से जुड़ा होने के बावजूद पत्तियों/फलों के विलगन में एथिलीन की प्रमुख भूमिका होती है। |
5. पुष्प संरचना, परागण एवं दोहरा निषेचन
पुष्प के चार चक्र
- बाह्यदलपुंज (Calyx): सामान्यतः सुरक्षा।
- दलपुंज (Corolla): प्रायः रंगीन; परागणकों को आकर्षित करने में सहायक।
- पुमंग (Androecium): पुंकेसर; परागकोश में परागकण बनते हैं।
- जायांग (Gynoecium): अंडप/स्त्रीकेसर; वर्तिकाग्र, वर्तिका और अंडाशय।
परागण
- कीट द्वारा — एंटोमोफिली
- वायु द्वारा — एनीमोफिली; जैसे मक्का और घास
- जल द्वारा — हाइड्रोफिली
- पक्षी द्वारा — ओर्निथोफिली
- चमगादड़ द्वारा — काइरोप्टेरोफिली
दोहरा निषेचन
आवृतबीजियों का विशिष्ट लक्षण है। एक नर युग्मक + अंड कोशिका → 2n युग्मनज; दूसरा नर युग्मक + दो ध्रुवीय नाभिक/द्वितीयक केंद्रक → सामान्यतः 3n प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक। यही दो घटनाएँ मिलकर दोहरा निषेचन कहलाती हैं।
6. फल एवं पौधों के खाद्य भाग
सत्य फल मुख्यतः अंडाशय से बनता है। आभासी/असत्य फल में अंडाशय के अतिरिक्त पुष्प के अन्य भाग भी फल-सदृश संरचना में योगदान देते हैं। अनिषेकफल बिना निषेचन के विकसित फल होता है; केला इसका प्रसिद्ध उदाहरण है।
| पौधा/उत्पाद | खाया जाने वाला प्रमुख भाग | विशेष टिप्पणी |
|---|---|---|
| सेब, नाशपाती | मुख्यतः पुष्पासन/हाइपैंथियम का मांसल भाग | आभासी फल; वास्तविक अंडाशयी भाग “कोर” क्षेत्र बनाता है। |
| आम | मध्यफलभित्ति (Mesocarp) | अष्ठिल फल (Drupe) |
| नारियल | ठोस और द्रव भ्रूणपोष | रेशेदार मध्यफलभित्ति बाहर होती है। |
| लीची | मांसल एरिल (Aril) | बीज के चारों ओर विकसित खाद्य आवरण। |
| काजू नट | मुख्यतः बीजपत्र (Cotyledons) | वास्तविक काजू नट अलग; “काजू सेब” फूला हुआ पुष्पवृंत/पेडिसेल क्षेत्र है। |
| टमाटर, अंगूर, अमरूद | फलभित्ति/गूदा तथा संबंधित ऊतक | बेरी वर्ग के सामान्य उदाहरण। |
| आलू | भूमिगत तना-कंद | “आँखें” कक्षीय कलियाँ हैं। |
| अदरक, हल्दी | प्रकंद (Rhizome) | भूमिगत रूपांतरित तना। |
| प्याज, लहसुन | मांसल शल्कपत्र | बल्ब संरचना। |
| गाजर, मूली, चुकंदर | संचयी मूसला-जड़ | मुख्य जड़ का मोटा होना। |
| शकरकंद | कंदिल/संचयी जड़ | आलू की तरह तना नहीं; रूपांतरित जड़। |
| केसर | वर्तिकाग्र और वर्तिका का भाग | सूखे लाल वर्तिकाग्र प्रमुख मसाला भाग। |
| लौंग | सूखी अपरिपक्व पुष्प कली | प्रमुख मसाला तथ्य। |
7. प्रमुख पादप रोग एवं पोषण संबंधी विकार
कवकीय एवं कवक-सदृश रोग
| रोग | कारक | सुधारित परीक्षा तथ्य |
|---|---|---|
| गन्ने का लाल सड़न | Colletotrichum falcatum | महत्वपूर्ण कवकीय रोग। |
| आलू का पछेती झुलसा | Phytophthora infestans | यह वास्तविक कवक नहीं, ऊमाइसीट है; 1840 के दशक के आयरिश आलू अकाल से प्रसिद्ध। |
| गेहूँ का तना/काला रतुआ | Puccinia graminis f. sp. tritici | तना रतुआ। |
| गेहूँ का पत्ती/भूरा रतुआ | Puccinia triticina | पत्ती रतुआ। |
| गेहूँ का धारी/पीला रतुआ | Puccinia striiformis f. sp. tritici | पीली धारियाँ प्रमुख लक्षण। |
| गेहूँ का श्लथ कंड | Ustilago tritici | Ustilago nuda मुख्यतः जौ के loose smut से जुड़ा नाम है। |
| बाजरे का ग्रीन ईयर/डाउनी मिल्ड्यू | Sclerospora graminicola | ऊमाइसीट रोगजनक। |
| अरहर का उकठा | Fusarium udum | अरहर का प्रमुख म्लानि रोग। |
जीवाणु एवं विषाणु रोग
| रोग | कारक/वाहक |
|---|---|
| साइट्रस कैंकर | Xanthomonas citri subsp. citri |
| धान का जीवाणु पत्ती झुलसा | Xanthomonas oryzae pv. oryzae |
| तंबाकू मोज़ेक | Tobacco mosaic virus (TMV) |
| भिंडी पीला शिरा मोज़ेक | बेगोमोवायरस समूह; सफेद मक्खी द्वारा संचरण |
| पपीता लीफ कर्ल | बेगोमोवायरस समूह; कई क्षेत्रों में सफेद मक्खी से संचरण |
सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी एवं शारीरिक विकार
| विकार | फसल | कारण |
|---|---|---|
| खैरा रोग | धान | जस्ता (Zn) की कमी |
| मार्श स्पॉट | मटर | मैंगनीज (Mn) की कमी |
| व्हिपटेल | फूलगोभी | मोलिब्डेनम (Mo) की कमी |
| ब्राउन हार्ट/आंतरिक ऊतक-विगलन | चुकंदर/शलजम जैसे मूल फसलें | बोरॉन (B) की कमी |
| साइट्रस में डाइबैक/एक्ज़ैन्थीमा | नींबू वर्ग | ताँबा (Cu) की कमी से जुड़ी स्थिति |
| लिटिल लीफ | कई पौधों में | अक्सर जस्ता (Zn) की कमी से जुड़ा; इसे साइट्रस डाइबैक के साथ एक ही कारण में न मिलाएँ |
| ब्लैक हार्ट | भंडारित आलू | कम ऑक्सीजन/खराब वातन से संबंधित शारीरिक विकार |
8. अभ्यास प्रश्न — PYQ नहीं
1. कैल्विन चक्र हरितलवक के स्ट्रोमा में होता है।
2. पोटोमीटर सीधे वाष्पोत्सर्जन की मात्रा मापता है।
3. एब्सिसिक अम्ल सूखा तनाव में रंध्र बंद करने में सहायता करता है।
उत्तर: केवल 1 और 3। पोटोमीटर मुख्यतः जल-ग्रहण की दर मापता है।
उत्तर: चारों सुमेलन सही हैं।
उत्तर: Puccinia striiformis f. sp. tritici।
9. सत्यापित BPSC PYQ स्थिति
मूल PDF में 2011–2023 के कई प्रश्न BPSC PYQ के रूप में दिए गए हैं, लेकिन इस पृष्ठ पर अभी उन्हें PYQ के रूप में प्रकाशित नहीं किया गया है। हर प्रश्न को बिहार लोक सेवा आयोग की आधिकारिक प्रश्न-पुस्तिका/उत्तर-कुंजी से सत्यापित करने के बाद ही “वास्तविक PYQ” खंड में जोड़ा जाएगा।
मूल सामग्री: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध कराया गया “जीव विज्ञान भाग 2” नोट्स-पत्र। बाहरी सत्यापन/अद्यतन: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की पादप शरीर-क्रिया सामग्री तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के रोग-संबंधी स्रोतों के आधार पर वैज्ञानिक सुधार जोड़े गए। अंतिम संपादकीय अद्यतन: 5 अक्टूबर 2026।