बिहार लोक सेवा आयोग (Bihar Public Service Commission—BPSC) · सामान्य विज्ञान · जीव विज्ञान

भाग 4: मानव पोषण, मानव रोग एवं प्रतिरक्षा, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी

यह भाग आपकी दी हुई मूल सामग्री पर आधारित है। विटामिन, रोग, पारिस्थितिकी और प्रदूषण के मूल विषय उसी क्रम में रखे गए हैं; आधुनिक चिकित्सा/पर्यावरण विज्ञान से सत्यापित सुधार अलग से जोड़े गए हैं ताकि पुराने सामान्य-ज्ञान कथन परीक्षा में भ्रम न पैदा करें।

सबसे स्कोरिंगविटामिन और कमी रोग
उच्च प्राथमिकतारोग–कारक–वाहक
पर्यावरण खंडप्रदूषण, ओजोन और जैव-आवर्धन

मूल नोट्स से किए गए प्रमुख तथ्य-सुधार

  • विटामिन E: मनुष्यों में इसकी कमी का मानक प्रभाव मुख्यतः तंत्रिका और मांसपेशीय विकारों से जुड़ा है; “बांझपन” को सामान्य मानव-कमी लक्षण की तरह याद न करें।
  • विटामिन B₆: “सपने याद रखने” वाला कथन मानक BPSC/जीवविज्ञान तथ्य नहीं है, इसलिए हटाया गया है।
  • विटामिन B₁₂: इसकी कमी से मेगालोब्लास्टिक एनीमिया और तंत्रिका संबंधी विकार हो सकते हैं। “पर्निशियस एनीमिया” स्वयं विटामिन B₁₂ के अवशोषण में बाधा पैदा करने वाली एक विशिष्ट अवस्था है।
  • टाइफाइड: विडाल परीक्षण को निर्णायक निदान मानना उचित नहीं है; रक्त-संवर्धन (Blood Culture) प्रमुख निदान विधि है।
  • मानव प्रतिरक्षी-अल्पता विषाणु (Human Immunodeficiency Virus—HIV): “एलिसा के बाद वेस्टर्न ब्लॉट ही पुष्टि परीक्षण” अब आधुनिक सार्वभौमिक नियम नहीं है; वर्तमान परीक्षण एल्गोरिदम क्रमिक प्रतिरक्षी/प्रतिजन परीक्षणों पर आधारित होते हैं।
  • पोलियो: साल्क का निष्क्रिय पोलियो टीका (Inactivated Poliovirus Vaccine—IPV) इंजेक्शन द्वारा दिया जाता है, अंतःशिरा नहीं। साबिन का टीका मौखिक जीवित-क्षीणित टीका (Oral Poliovirus Vaccine—OPV) है।
  • खाज/स्केबीज: यह कवक रोग नहीं है; यह Sarcoptes scabiei नामक खुजली-माइट से होने वाला परजीवी संक्रमण है।
  • डेंगू: Aedes aegypti प्रमुख वाहक है; “टाइगर मच्छर” नाम मुख्यतः Aedes albopictus से जुड़ा है। प्लेटलेट कम हो सकते हैं, लेकिन केवल प्लेटलेट संख्या से रोग की गंभीरता तय नहीं होती।
  • ओजोन छिद्र: 1985 का प्रसिद्ध प्रकाशन जोसेफ फार्मन, ब्रायन गार्डिनर और जोनाथन शैंकलिन की टीम का था; केवल एक वैज्ञानिक का नाम देना अधूरा है।
  • ब्लैकफुट रोग: आर्सेनिक से संबंध सही है, लेकिन इसका शास्त्रीय स्थानिक उदाहरण दक्षिण-पश्चिम ताइवान है। बिहार और पश्चिम बंगाल में प्रमुख सार्वजनिक-स्वास्थ्य समस्या भूजल आर्सेनिक और दीर्घकालिक आर्सेनिकोसिस है।

इस भाग की अध्ययन-सूची

1. मानव पोषण — कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा

कार्बोहाइड्रेट

  • 1 ग्राम कार्बोहाइड्रेट से लगभग 4 किलोकैलोरी ऊर्जा मिलती है।
  • मोनोसैकेराइड: ग्लूकोज, फ्रुक्टोज, गैलेक्टोज।
  • डाइसैकेराइड: सुक्रोज = ग्लूकोज + फ्रुक्टोज; लैक्टोज = ग्लूकोज + गैलेक्टोज; माल्टोज = ग्लूकोज + ग्लूकोज।
  • पॉलीसैकेराइड: स्टार्च—पौधों में ऊर्जा-संचय; ग्लाइकोजन—मनुष्य/पशु में ऊर्जा-संचय; सेल्यूलोज—पादप कोशिका भित्ति का प्रमुख घटक। मानव में सेल्यूलोज पचाने वाला एंजाइम नहीं होता।

प्रोटीन एवं कुपोषण

  • प्रोटीन अमीनो अम्लों से बने होते हैं और वृद्धि, एंजाइम, हार्मोन, प्रतिरक्षा तथा ऊतक-मरम्मत में महत्वपूर्ण हैं।
  • क्वाशिओरकोर: प्रोटीन-ऊर्जा कुपोषण का सूजनयुक्त रूप; पैरों/शरीर में शोफ, वृद्धि में रुकावट, त्वचा/बाल परिवर्तन हो सकते हैं। इसे केवल “शुद्ध प्रोटीन की कमी” तक सीमित समझना वैज्ञानिक रूप से अत्यधिक सरल है।
  • मरास्मस: गंभीर ऊर्जा-अल्पता से अत्यधिक क्षीणता और वसा/मांसपेशी हानि।

वसा

  • 1 ग्राम वसा से लगभग 9 किलोकैलोरी ऊर्जा मिलती है।
  • वसा ऊर्जा-संचय, कोशिका झिल्ली, वसा-घुलनशील विटामिनों के अवशोषण और हार्मोन-निर्माण में महत्वपूर्ण है।
  • संतृप्त वसा का अधिक सेवन रक्त में निम्न-घनत्व लिपोप्रोटीन (Low-Density Lipoprotein—LDL) को बढ़ा सकता है; कुल आहार-पैटर्न और उसके स्थान पर लिए गए पोषक तत्व भी महत्वपूर्ण हैं।
  • वनस्पति तेलों का आंशिक हाइड्रोजनीकरण औद्योगिक ट्रांस-वसा उत्पन्न कर सकता है; इसलिए “हाइड्रोजनीकरण = केवल लाभकारी ठोस वसा” जैसी सरल व्याख्या अधूरी है।

2. विटामिन — BPSC के लिए उच्च-प्राथमिकता सारणी

विटामिनप्रमुख भूमिका/स्रोतकमी का प्रमुख प्रभाव
A — रेटिनॉइड/प्रोविटामिन A कैरोटिनॉइडयकृत, दूध/अंडा; गाजर, पपीता, आम जैसे पौधों में बीटा-कैरोटीनरतौंधी, जीरोफ्थैल्मिया; प्रतिरक्षा और उपकला स्वास्थ्य प्रभावित
D — कैल्सिफेरॉलत्वचा में पराबैंगनी-B से संश्लेषण; वसायुक्त मछली, समृद्ध खाद्यबच्चों में रिकेट्स, वयस्कों में ऑस्टियोमलेशिया। सक्रिय रूप कैल्सिट्रिऑल हार्मोन की तरह कार्य करता है।
E — टोकोफेरॉलवनस्पति तेल, बीज, मेवेदुर्लभ गंभीर कमी में तंत्रिका/मांसपेशीय विकार, गतिभंग और कुछ स्थितियों में हीमोलाइटिक एनीमिया
Kहरी पत्तेदार सब्जियाँ; आंतों के कुछ जीवाणु मेनाक्विनोन बनाते हैंजमावट कारकों की सक्रियता प्रभावित; रक्तस्राव का जोखिम
B₁ — थायमिनसाबुत अनाज, दालें, बीज, मांसबेरी-बेरी; पॉलिश चावल-प्रधान असंतुलित आहार जोखिम बढ़ा सकता है
B₂ — राइबोफ्लेविनदूध, अंडा, मांस, समृद्ध अनाजहोठों के कोनों का फटना, ग्लोसाइटिस
B₃ — नियासिनमांस, मछली, मूंगफली, साबुत अनाजपेलाग्रा: डर्मेटाइटिस, डायरिया, डिमेंशिया; अनुपचारित गंभीर अवस्था में मृत्यु
B₆ — पाइरिडॉक्सिनमांस, साबुत अनाज, केला आदिडर्मेटाइटिस, एनीमिया, न्यूरोलॉजिकल लक्षण संभव
B₉ — फोलेटहरी पत्तेदार सब्जियाँ, फलियाँमेगालोब्लास्टिक एनीमिया; गर्भावस्था में कमी से भ्रूणीय न्यूरल-ट्यूब दोष का जोखिम
B₁₂ — कोबालामिनविश्वसनीय प्राकृतिक स्रोत मुख्यतः पशु-आधारित खाद्य; समृद्ध/फोर्टिफाइड खाद्य भी स्रोतमेगालोब्लास्टिक एनीमिया और तंत्रिका क्षति; अणु में कोबाल्ट (Co) होता है
C — एस्कॉर्बिक अम्लआँवला, अमरूद, खट्टे फल, कई ताजे फल-सब्जियाँस्कर्वी; कोलेजन निर्माण और घाव भरने में भूमिका; ताप/ऑक्सीकरण से आसानी से नष्ट हो सकता है

3. प्रमुख जीवाणुजनित मानव रोग

रोगकारकपरीक्षा-उपयोगी तथ्य
हैजाVibrio choleraeतीव्र जलयुक्त दस्त और निर्जलीकरण; मौखिक पुनर्जलीकरण लवण (Oral Rehydration Salts—ORS) जीवनरक्षक उपचार का आधार।
टाइफाइडSalmonella Typhiरक्त-संवर्धन मुख्य नैदानिक विधि; विडाल परीक्षण में झूठे सकारात्मक परिणाम अधिक हो सकते हैं, इसलिए इसे निर्णायक न मानें।
क्षयरोगMycobacterium tuberculosisमुख्यतः फेफड़े, पर अन्य अंग भी प्रभावित हो सकते हैं; बैसिलस कैलमेट-गुएरिन (Bacillus Calmette–Guérin—BCG) टीका गंभीर बाल्यावस्था TB से सुरक्षा में उपयोगी।
टिटनेसClostridium tetaniन्यूरोटॉक्सिन से पेशीय अकड़न/लॉकजॉ; डिप्थीरिया-टिटनेस-पर्टुसिस युक्त टीके रोकथाम में। घाव-पश्चात प्रबंधन टीकाकरण स्थिति पर निर्भर।
डिप्थीरियाCorynebacterium diphtheriaeश्वसन पथ; टॉक्सिन-जनित रोग, टीकाकरण से रोकथाम।
काली खाँसीBordetella pertussisतीव्र खाँसी; पर्टुसिस-युक्त टीके रोकथाम में।
प्लेगYersinia pestisब्यूबोनिक रूप में सूजी लसीका ग्रंथियाँ; संक्रमित पिस्सू महत्वपूर्ण वाहक। “Pasteurella pestis” पुराना नाम है।
कुष्ठ/हैनसेन रोगMycobacterium lepraeत्वचा और परिधीय तंत्रिकाएँ; बहु-औषधि चिकित्सा (Multidrug Therapy—MDT) से उपचार।

4. प्रमुख विषाणुजनित रोग

अर्जित प्रतिरक्षा न्यूनता संलक्षण (Acquired Immunodeficiency Syndrome—AIDS)

  • कारक: मानव प्रतिरक्षी-अल्पता विषाणु (Human Immunodeficiency Virus—HIV), एक रेट्रोवायरस।
  • मुख्य लक्ष्य: CD4⁺ T-लिम्फोसाइट्स।
  • रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज एंजाइम द्वारा RNA से DNA प्रतिलिपि बनाता है।
  • आधुनिक परीक्षण क्रमिक प्रतिरक्षी/प्रतिजन अथवा तीव्र नैदानिक परीक्षणों के एल्गोरिदम पर आधारित होते हैं; वेस्टर्न ब्लॉट को अनिवार्य पुष्टि परीक्षण मानना पुराना है।
  • विश्व एड्स दिवस: 1 दिसंबर।

पोलियो

  • पोलियोवायरस एक RNA वायरस है; मोटर न्यूरॉन क्षति से दुर्लभ मामलों में पक्षाघात हो सकता है।
  • जोनास साल्क: निष्क्रिय पोलियो टीका (IPV), 1955 में उपयोग हेतु लाइसेंस; इंजेक्शन द्वारा दिया जाता है।
  • अल्बर्ट साबिन: जीवित-क्षीणित मौखिक पोलियो टीका (OPV) विकसित करने में प्रमुख भूमिका।

अन्य महत्वपूर्ण विषाणु रोग

रोगकारक/वाहकमुख्य तथ्य
चेचकVariola virusएडवर्ड जेनर के टीकाकरण कार्य से ऐतिहासिक संबंध; विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 1980 में वैश्विक उन्मूलन घोषित किया।
रेबीजRabies virus; संक्रमित स्तनधारी की लार“Hydrophobia” वास्तविक मनोवैज्ञानिक जल-भय नहीं; निगलने पर दर्दनाक ग्रसनी ऐंठन के कारण पानी पीना कठिन होता है।
डेंगूDengue virus; मुख्यतः Aedes aegyptiदिन में काटने वाला मच्छर; प्लेटलेट कम हो सकते हैं, पर चेतावनी संकेतों में प्लाज्मा रिसाव, रक्तस्राव और अंग-प्रभाव भी महत्वपूर्ण।
हेपेटाइटिस AHAV, RNA वायरसमुख्यतः मल-मुख मार्ग।
हेपेटाइटिस BHBV, आंशिक द्वि-रज्जुकीय DNA वायरसरक्त, यौन संपर्क और माता-से-शिशु संचरण; टीका उपलब्ध।
हेपेटाइटिस CHCV, RNA वायरसमुख्यतः रक्त-जनित; दीर्घकालिक यकृत रोग का जोखिम।

5. प्रोटोजोआ, कृमि, कवक एवं अन्य परजीवी रोग

रोगकारकवाहक/तथ्य
मलेरियाPlasmodium; गंभीर मलेरिया में P. falciparum विशेष महत्वपूर्णसंक्रमित मादा Anopheles मच्छर; आर्टेमिसिनिन-आधारित संयोजन आधुनिक उपचार में महत्वपूर्ण।
कालाजारLeishmania donovaniफ्लेबोटोमाइन बालू-मक्खी; प्लीहा/यकृत/अस्थिमज्जा प्रभावित हो सकते हैं।
अमीबायसिसEntamoeba histolyticaमल-मुख संचरण; आंत्र रोग।
निद्रा रोगTrypanosoma brucei समूहसी-सी मक्खी।
फाइलेरिया/हाथीपाँवWuchereria bancrofti सहित फाइलेरियल कृमिमच्छर वाहक; भारत में Culex quinquefasciatus महत्वपूर्ण वाहक।
दाद/रिंगवर्मडर्माटोफाइट कवक: Trichophyton, Microsporum, Epidermophytonत्वचा/बाल/नाखून का कवकीय संक्रमण।
एथलीट फुटटिनिया पेडिस; डर्माटोफाइट कवकपैर की त्वचा का कवकीय संक्रमण।
खाज/स्केबीजSarcoptes scabiei माइटकवक रोग नहीं; त्वचा में परजीवी माइट का संक्रमण।

6. पारिस्थितिकी एवं पारिस्थितिक तंत्र

  • पारिस्थितिकी (Ecology): “Ökologie” शब्द अर्न्स्ट हेकेल ने 1866 में प्रस्तुत किया।
  • पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem): ए. जी. टैंसले ने 1935 में शब्द प्रस्तावित किया।
  • लिंडमैन का 10% नियम: पाठ्यपुस्तकीय औसत के रूप में एक पोषण स्तर की ऊर्जा का छोटा भाग अगले स्तर तक जाता है; “10%” एक उपयोगी सामान्यीकरण है, कठोर सार्वभौमिक स्थिरांक नहीं।
  • ऊर्जा पिरामिड: सदैव सीधा क्योंकि प्रत्येक पोषण स्तर पर उपयोगी ऊर्जा घटती है।
  • जैवभार पिरामिड: स्थलीय तंत्र में सामान्यतः सीधा, जबकि अनेक जलीय तंत्रों में उल्टा हो सकता है क्योंकि फाइटोप्लवक की खड़ी फसल कम पर उत्पादकता तेज होती है।
  • जैव-आवर्धन: कुछ स्थायी प्रदूषकों की सांद्रता ऊँचे पोषण स्तरों पर बढ़ना; DDT और मिथाइलमरकरी प्रसिद्ध उदाहरण हैं।

7. प्रदूषण एवं प्रमुख पर्यावरणीय परिघटनाएँ

अम्लीय वर्षा

सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOₓ) वायुमंडल में ऑक्सीकरण होकर सल्फ्यूरिक और नाइट्रिक अम्ल बनाते हैं। सामान्य वर्षा का pH लगभग 5.6 होता है; इससे पर्याप्त कम pH वाली वर्षा को अम्लीय वर्षा कहा जाता है। यह जलीय पारितंत्र, मृदा, वनस्पति और चूना-पत्थर/संगमरमर जैसी संरचनाओं को प्रभावित कर सकती है।

प्रकाश-रासायनिक धुंध

सूर्यप्रकाश की उपस्थिति में NOₓ + वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (Volatile Organic Compounds—VOCs) प्रतिक्रियाएँ कर सतही ओजोन और पेरॉक्सीएसीटिल नाइट्रेट (Peroxyacetyl Nitrate—PAN) जैसे द्वितीयक प्रदूषक बनाते हैं। ओजोन यहाँ अभिकारक नहीं, प्रमुख उत्पाद है।

ओजोन परत एवं क्षरण

  • समतापमंडलीय ओजोन सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी-B विकिरण का बड़ा भाग अवशोषित करती है।
  • कुल स्तंभीय ओजोन को डॉबसन इकाई (Dobson Unit—DU) में व्यक्त किया जाता है।
  • क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC), हैलोन और कुछ अन्य क्लोरीन/ब्रोमीन यौगिक ओजोन क्षरण से जुड़े हैं।
  • अंटार्कटिक ओजोन क्षय के प्रसिद्ध 1985 प्रकाशन के लेखक जोसेफ फार्मन, ब्रायन गार्डिनर और जोनाथन शैंकलिन थे।
  • मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (1987) ओजोन-क्षयकारी पदार्थों को नियंत्रित करने वाला ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय समझौता है।

हरितगृह प्रभाव

ग्रीनहाउस गैसें पृथ्वी से निकलने वाले अवरक्त विकिरण को अवशोषित/पुनःउत्सर्जित कर निचले वायुमंडल को गर्म रखती हैं। जलवाष्प प्राकृतिक हरितगृह प्रभाव का महत्वपूर्ण घटक है, जबकि कार्बन डाइऑक्साइड मानव-जनित दीर्घकालिक उष्मीकरण का प्रमुख चालक है। “सभी ग्रीनहाउस गैसों का एक सार्वभौमिक घटता क्रम” नहीं दिया जाना चाहिए, क्योंकि क्रम इस बात पर निर्भर करता है कि हम सांद्रता, विकिरणीय प्रभाव, आयु या वैश्विक तापन क्षमता में से क्या तुलना कर रहे हैं।

प्रदूषक और प्रसिद्ध स्वास्थ्य प्रभाव

प्रदूषकसंबद्ध प्रभावपरीक्षा तथ्य
मिथाइलमरकरीमिनामाता रोगजापान के मिनामाता में औद्योगिक प्रदूषण से दूषित समुद्री भोजन; गंभीर तंत्रिका विषाक्तता।
कैडमियमइटाई-इटाई रोगजापान का शास्त्रीय उदाहरण; अस्थि और वृक्क क्षति से संबंध।
नाइट्रेटशिशु मिथेमोग्लोबिनेमिया/“ब्लू बेबी सिंड्रोम”नाइट्रेट-प्रदूषित पेयजल जोखिम; रक्त की ऑक्सीजन-वहन क्षमता घट सकती है।
आर्सेनिकदीर्घकालिक आर्सेनिकोसिस, त्वचा परिवर्तन, कैंसर और वाहिकीय प्रभावभारत में पश्चिम बंगाल, बिहार सहित कई क्षेत्रों में भूजल संदूषण महत्वपूर्ण; “ब्लैकफुट” का शास्त्रीय स्थानिक उदाहरण ताइवान।
अतिरिक्त फ्लोराइडदंत एवं अस्थि फ्लोरोसिसदाँतों पर धब्बे/मॉटलिंग और दीर्घकाल में अस्थि परिवर्तन।

लाइकेन

लाइकेन कवक और प्रकाश-संश्लेषी साथी—शैवाल अथवा सायनोबैक्टीरिया—का सहजीवी संघ है। अनेक लाइकेन सल्फर डाइऑक्साइड सहित वायु प्रदूषण के प्रति संवेदनशील होते हैं, इसलिए इन्हें जैव-सूचक के रूप में उपयोग किया जाता है।

8. अभ्यास प्रश्न — PYQ नहीं

प्रश्न 1. निम्न कथनों पर विचार कीजिए:
1. विटामिन B₁₂ में कोबाल्ट पाया जाता है।
2. स्केबीज एक कवक रोग है।
3. विटामिन E की कमी को सामान्यतः मानव बांझपन का मानक कारण माना जाता है।

उत्तर: केवल 1। स्केबीज माइट से होता है और विटामिन E कमी का मानक मानव-लक्षण तंत्रिका/मांसपेशीय विकार है।
प्रश्न 2. सही सुमेलन चुनिए: पारा—मिनामाता; कैडमियम—इटाई-इटाई; नाइट्रेट—शिशु मिथेमोग्लोबिनेमिया; आर्सेनिक—आर्सेनिकोसिस।

उत्तर: चारों सुमेलन सही हैं।
प्रश्न 3. प्रकाश-रासायनिक धुंध में सतही ओजोन किस प्रकार बनता है?

उत्तर: सूर्यप्रकाश में NOₓ और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों की प्रकाश-रासायनिक प्रतिक्रियाओं से द्वितीयक प्रदूषक के रूप में।

9. सत्यापित BPSC PYQ स्थिति

मूल PDF में 2015–2024 तथा कुछ पुराने BPSC प्रश्न PYQ के रूप में दिए गए हैं। इस पृष्ठ पर उन्हें अभी वास्तविक PYQ के रूप में प्रकाशित नहीं किया गया है। प्रत्येक प्रश्न को बिहार लोक सेवा आयोग की आधिकारिक प्रश्न-पुस्तिका/उत्तर-कुंजी से सत्यापित करने के बाद ही अलग “वास्तविक PYQ” खंड में जोड़ा जाएगा।

मूल आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध “जीव विज्ञान भाग 4” नोट्स। बाहरी सत्यापन: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), संयुक्त राज्य रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC), राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान–आहार अनुपूरक कार्यालय (NIH-ODS), तथा राष्ट्रीय महासागरीय एवं वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) के मानक स्रोतों से चयनित तथ्य-सुधार। अंतिम संपादकीय अद्यतन: 5 अक्टूबर 2026।