भाग 1: कोशिका विज्ञान, कोशिकांग, कोशिका विभाजन एवं आनुवंशिकी
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पहले यह 6 सुधार याद रखें
- जीवाणुओं में श्वसन से जुड़ी इलेक्ट्रॉन-परिवहन क्रियाएँ प्लाज्मा झिल्ली पर होती हैं; “मेसोसोम” को आधुनिक कोशिका-विज्ञान में वास्तविक स्थायी अंगक नहीं माना जाता।
- अंतःप्रद्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum—ER) को “कोशिका का कंकाल” कहना ठीक नहीं है; वास्तविक संरचनात्मक ढाँचा कोशिकीय कंकाल (Cytoskeleton) है।
- जीवाणु सामान्यतः द्विखंडन (Binary Fission) से विभाजित होते हैं; इसे सीधे “असूत्री विभाजन” लिखना भ्रामक हो सकता है।
- जीन केवल प्रोटीन के लिए ही नहीं; कुछ जीन कार्यात्मक राइबोन्यूक्लिक अम्ल (RNA) भी बनाते हैं।
- मानव की कायिक कोशिकाओं में 46 गुणसूत्र होते हैं; युग्मकों में 23।
- डाउन सिंड्रोम के लिए पुराने अपमानजनक शब्दों का प्रयोग नहीं किया जाएगा; परीक्षा में भी आधुनिक, सम्मानजनक शब्दावली ही रखें।
इस भाग में क्या-क्या पढ़ना है?
1. कोशिका: जीवन की मूलभूत इकाई
कोशिका सभी सजीवों की संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई है। कोशिका के अध्ययन को कोशिका विज्ञान (Cytology) कहा जाता है।
महत्वपूर्ण खोजें
- रॉबर्ट हुक (1665): कॉर्क के पतले खंड में मृत कोशिकीय कक्ष देखे और “Cell” शब्द का प्रयोग किया। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक Micrographia थी।
- एंटोनी वॉन ल्यूवेनहॉक: सूक्ष्मदर्शी द्वारा जीवित सूक्ष्मजीवों और कोशिकाओं का अवलोकन किया।
- रॉबर्ट ब्राउन (1831): पादप कोशिका में केंद्रक (Nucleus) का वर्णन किया।
- जे. ई. पुरकिंजे (1839): “प्रोटोप्लाज्म” शब्द का प्रयोग किया।
- मैथियस श्लाइडेन और थियोडोर श्वान: कोशिका सिद्धांत के मूल प्रतिपादक।
- रुडोल्फ विरचो: “Omnis cellula e cellula” — नई कोशिका पूर्ववर्ती कोशिका से उत्पन्न होती है।
आकार संबंधी परीक्षा तथ्य
- बहुत छोटी स्वतंत्र जीवित कोशिकाओं में माइकोप्लाज्मा प्रमुख उदाहरण है।
- सबसे बड़ी एकल कोशिका का सामान्य उदाहरण शुतुरमुर्ग का अंडा है।
- मानव शरीर की सबसे लंबी कोशिका तंत्रिका कोशिका (Neuron) है।
- मानव शरीर की सबसे बड़ी कोशिका अंडाणु (Ovum) है।
प्रोकैरियोटिक बनाम यूकैरियोटिक कोशिका
| लक्षण | प्रोकैरियोटिक कोशिका | यूकैरियोटिक कोशिका |
|---|---|---|
| केंद्रक | सच्ची केंद्रक-झिल्ली नहीं; आनुवंशिक पदार्थ न्यूक्लियॉइड में | झिल्ली से घिरा स्पष्ट केंद्रक |
| झिल्लीयुक्त कोशिकांग | माइटोकॉन्ड्रिया, गॉल्जीकाय, ER आदि अनुपस्थित | कोशिका के प्रकार के अनुसार अनेक झिल्लीयुक्त कोशिकांग उपस्थित |
| राइबोसोम | 70S | कोशिकाद्रव्य में 80S; माइटोकॉन्ड्रिया और हरितलवक में 70S |
| श्वसन | प्लाज्मा झिल्ली से संबद्ध तंत्र | मुख्यतः माइटोकॉन्ड्रिया |
| कोशिका भित्ति | अधिकांश जीवाणुओं में पेप्टिडोग्लाइकैन; माइकोप्लाज्मा में नहीं | पादपों में सेल्यूलोज, कवकों में काइटिन; जंतुओं में अनुपस्थित |
| उदाहरण | जीवाणु, सायनोबैक्टीरिया, माइकोप्लाज्मा | प्रोटिस्ट, कवक, पादप और जंतु |
2. कोशिका संरचना एवं प्रमुख कोशिकांग
कोशिका भित्ति एवं प्लाज्मा झिल्ली
- कोशिका भित्ति: पादपों, कवकों और अधिकांश जीवाणुओं में सुरक्षा और यांत्रिक आधार देती है। पादप कोशिका भित्ति में सेल्यूलोज, हेमीसेल्यूलोज और पेक्टिन प्रमुख होते हैं।
- मध्य पटलिका (Middle Lamella): समीपवर्ती पादप कोशिकाओं के बीच पेक्टेट-समृद्ध परत।
- प्लाज्मा झिल्ली: चयनात्मक पारगम्य झिल्ली; मुख्यतः फॉस्फोलिपिड द्विपरत और प्रोटीन से बनी होती है। सिंगर और निकोलसन (1972) ने द्रव-मोज़ेक मॉडल (Fluid Mosaic Model) प्रस्तावित किया।
कोशिकांग सारणी
| कोशिकांग | मुख्य संरचना | मुख्य कार्य / परीक्षा तथ्य |
|---|---|---|
| माइटोकॉन्ड्रिया | दोहरी झिल्ली; भीतरी झिल्ली की तहें क्रिस्टी; मैट्रिक्स भीतर | क्रेब्स चक्र मुख्यतः मैट्रिक्स में; इलेक्ट्रॉन परिवहन शृंखला और ऑक्सीडेटिव फॉस्फोराइलेशन भीतरी झिल्ली पर। अपना DNA और 70S राइबोसोम होने से अर्ध-स्वायत्त। मानव में माइटोकॉन्ड्रियल DNA सामान्यतः मातृवंश से मिलता है। |
| राइबोसोम | rRNA + प्रोटीन; झिल्ली रहित | प्रोटीन संश्लेषण का स्थल। प्रोकैरियोट में 70S; यूकैरियोटिक कोशिकाद्रव्य में 80S। |
| लाइसोसोम | एकल झिल्ली; अम्लीय हाइड्रोलाइटिक एंजाइम | अंतःकोशिकीय पाचन, पुरानी संरचनाओं का विघटन और पुनर्चक्रण। “Suicidal bag” ऐतिहासिक परीक्षा-उपनाम है, पर वास्तविक कार्य इससे व्यापक है। |
| गॉल्जीकाय | चपटी सिस्टर्नी | प्रोटीन/लिपिड का संशोधन, पैकेजिंग और स्राव; लाइसोसोम निर्माण में भूमिका; शुक्राणु के एक्रोसोम से संबंध। |
| खुरदरी अंतःप्रद्रव्यी जालिका (Rough ER—RER) | सतह पर राइबोसोम | स्रावी और झिल्ली-प्रोटीनों का संश्लेषण। |
| चिकनी अंतःप्रद्रव्यी जालिका (Smooth ER—SER) | राइबोसोम रहित | लिपिड/स्टेरॉयड संश्लेषण; यकृत में कई पदार्थों का विषहरण। |
| हरितलवक | दोहरी झिल्ली; थाइलेकॉइड/ग्रेना और स्ट्रोमा | प्रकाश संश्लेषण; अपना DNA और 70S राइबोसोम। |
| तारककेंद्र/सेंट्रिओल | सूक्ष्मनलिकीय संरचना | जंतु कोशिकाओं में सूक्ष्मनलिकाओं के संगठन और विभाजन-धुरी में भूमिका। उच्च पादपों में सामान्यतः सेंट्रिओल अनुपस्थित। |
| रिक्तिका | टोनोप्लास्ट से घिरी | पादप कोशिका में जल, विलेय पदार्थ और तुर्गर बनाए रखने में महत्वपूर्ण। |
| केंद्रक | दोहरी केंद्रक झिल्ली, क्रोमैटिन, केंद्रिका | आनुवंशिक सूचना का प्रमुख भंडार; केंद्रिका में rRNA निर्माण और राइबोसोमीय उपइकाइयों का संयोजन। |
पादप एवं जंतु कोशिका का मुख्य अंतर
| विशेषता | पादप कोशिका | जंतु कोशिका |
|---|---|---|
| कोशिका भित्ति | उपस्थित | अनुपस्थित |
| लवक/हरितलवक | प्रकाश-संश्लेषी ऊतकों में उपस्थित | अनुपस्थित |
| रिक्तिका | अक्सर बड़ी केंद्रीय रिक्तिका | छोटी रिक्तिकाएँ/वेसिकल |
| सेंट्रिओल | उच्च पादपों में सामान्यतः अनुपस्थित | अधिकांश जंतु कोशिकाओं में उपस्थित |
| संचित कार्बोहाइड्रेट | मुख्यतः मंड (Starch) | मुख्यतः ग्लाइकोजन |
3. कोशिका चक्र एवं कोशिका विभाजन
कोशिका चक्र को व्यापक रूप से अंतरावस्था (Interphase) और M-अवस्था (M Phase) में बाँटा जाता है।
अंतरावस्था
- G₁: कोशिकीय वृद्धि, RNA और प्रोटीन संश्लेषण।
- S: डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल (Deoxyribonucleic Acid—DNA) की प्रतिकृति।
- G₂: विभाजन के लिए आवश्यक प्रोटीनों और संरचनाओं की तैयारी।
- G₀: कोशिका चक्र से बाहर विश्राम/विशेषीकृत अवस्था; कई परिपक्व न्यूरॉन इसका उदाहरण हैं।
समसूत्री विभाजन बनाम अर्धसूत्री विभाजन
| आधार | समसूत्री विभाजन (Mitosis) | अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) |
|---|---|---|
| मुख्य भूमिका | वृद्धि, ऊतक मरम्मत, अलैंगिक वृद्धि के कई रूप | यौन जनन हेतु अगुणित कोशिकाओं का निर्माण |
| विभाजनों की संख्या | 1 | 2 |
| सामान्य परिणाम | एक जनक से 2 आनुवंशिक रूप से बहुत समान पुत्री कोशिकाएँ | एक द्विगुणित कोशिका से सामान्यतः 4 अगुणित उत्पाद; मादा जनन में साइटोकाइनेसिस असमान हो सकती है |
| गुणसूत्र संख्या | समान बनी रहती है | आधी हो जाती है |
| क्रॉसिंग ओवर | सामान्यतः नहीं | प्रोफेज-I के पैकीटीन चरण में |
समसूत्री विभाजन की अवस्थाएँ
- प्रोफेज: गुणसूत्र संघनित होते हैं और धुरी-तंत्र बनना शुरू होता है।
- मेटाफेज: गुणसूत्र मध्यवर्ती प्लेट पर व्यवस्थित; गुणसूत्र आकारिकी के अध्ययन के लिए उपयोगी चरण।
- एनाफेज: बहन क्रोमैटिड अलग होकर विपरीत ध्रुवों की ओर जाते हैं।
- टेलोफेज: नई केंद्रक झिल्लियाँ बनती हैं; इसके बाद साइटोकाइनेसिस।
अर्धसूत्री विभाजन-I की प्रोफेज-I
- लेप्टोटीन: गुणसूत्र स्पष्ट होने लगते हैं।
- जाइगोटीन: समजात गुणसूत्रों का युग्मन (Synapsis)।
- पैकीटीन: क्रॉसिंग ओवर और आनुवंशिक पुनर्संयोजन।
- डिप्लोटीन: कियाज़्माटा स्पष्ट दिखाई देते हैं।
- डायकाइनेसिस: गुणसूत्र और अधिक संघनित; केंद्रक आवरण का विघटन।
महत्वपूर्ण ट्रैप
जीवाणुओं में द्विखंडन (Binary Fission) होता है। इसे यूकैरियोटिक समसूत्री/अर्धसूत्री विभाजन से अलग समझें।
4. आनुवंशिकी की आधारशिला
ग्रेगर जॉन मेंडल
मेंडल ने उद्यान मटर (Pisum sativum) के सात जोड़ी विपरीत लक्षणों का अध्ययन किया और वंशागति के मूल सिद्धांत स्थापित किए।
- प्रभाविता का नियम: विषमयुग्मजी अवस्था में प्रभावी एलील का लक्षण प्रकट हो सकता है।
- पृथक्करण का नियम: युग्मक निर्माण के समय एलील अलग हो जाते हैं। एक आदर्श मोनोहाइब्रिड क्रॉस में F₂ फीनोटाइप अनुपात 3:1 और जीनोटाइप अनुपात 1:2:1 हो सकता है।
- स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम: अलग-अलग जीनों के एलील स्वतंत्र रूप से बँट सकते हैं; परंतु निकट स्थित सहलग्न जीन इस सरल नियम से विचलित हो सकते हैं।
अन्य महत्वपूर्ण बिंदु
- ह्यूगो डी व्रीज: उत्परिवर्तन सिद्धांत से संबंधित।
- विल्हेम जोहान्सन (1909): “Gene” शब्द का प्रचलन।
- जीन: आनुवंशिक सूचना की कार्यात्मक इकाई; अधिकांश जीन प्रोटीन या प्रोटीन-खंड से संबंधित सूचना देते हैं, जबकि कुछ जीन कार्यात्मक RNA बनाते हैं।
- बीडल और टैटम: “एक जीन–एक एंजाइम” ऐतिहासिक परिकल्पना; बाद में इसे अधिक सटीक “एक जीन–एक पॉलीपेप्टाइड” अवधारणा की दिशा में विकसित किया गया।
5. न्यूक्लिक अम्ल: DNA और RNA
| विशेषता | DNA | RNA |
|---|---|---|
| पूरा नाम | डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल (Deoxyribonucleic Acid—DNA) | राइबोन्यूक्लिक अम्ल (Ribonucleic Acid—RNA) |
| शर्करा | डीऑक्सीराइबोज | राइबोज |
| क्षारक | A, G, C, T | A, G, C, U |
| सामान्य संरचना | द्विकुंडली | अधिकांश कोशिकीय RNA एकल-रज्जुक |
| मुख्य भूमिका | आनुवंशिक सूचना का दीर्घकालिक भंडारण | जीन अभिव्यक्ति, प्रोटीन संश्लेषण तथा अनेक नियामक/उत्प्रेरक भूमिकाएँ |
वॉटसन और क्रिक (1953) ने DNA की द्विकुंडली संरचना का मॉडल प्रस्तुत किया। इस उपलब्धि में रोज़लिंड फ्रैंकलिन और मॉरिस विल्किन्स के एक्स-रे विवर्तन डेटा का महत्वपूर्ण योगदान था। DNA में A–T के बीच 2 और G–C के बीच 3 हाइड्रोजन बंध होते हैं।
प्रमुख RNA प्रकार: संदेशवाहक RNA (Messenger RNA—mRNA), स्थानांतरण RNA (Transfer RNA—tRNA) और राइबोसोमीय RNA (Ribosomal RNA—rRNA)।
6. मानव गुणसूत्र, लिंग निर्धारण एवं आनुवंशिक विकार
- मानव की सामान्य कायिक कोशिका में 46 गुणसूत्र = 23 जोड़े होते हैं।
- 22 जोड़े कायिक गुणसूत्र (Autosomes) और 1 जोड़ा लैंगिक गुणसूत्र होता है।
- सामान्य युग्मकों में 23 गुणसूत्र होते हैं।
- XX/XY प्रणाली में अंडाणु X देता है, जबकि शुक्राणु X या Y दे सकता है; इसलिए संतति का XX या XY संयोजन शुक्राणु के गुणसूत्र से निर्धारित होता है।
| स्थिति | आधार | मुख्य परीक्षा तथ्य |
|---|---|---|
| डाउन सिंड्रोम | अधिकांश मामलों में गुणसूत्र 21 की त्रिसूत्रता | विशिष्ट शारीरिक विशेषताएँ और विकास/सीखने की गति में अंतर हो सकता है; पुराने अपमानजनक शब्दों का प्रयोग न करें। |
| टर्नर सिंड्रोम | प्रायः 45,X या संबंधित मोज़ेक रूप | छोटा कद, अंडाशयी विकास में कमी और प्रजनन संबंधी कठिनाइयाँ हो सकती हैं। |
| क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम | प्रायः 47,XXY | पुरुषों में हाइपोगोनैडिज़्म, बांझपन और कभी-कभी गाइनेकोमैस्टिया। |
| लाल-हरा वर्णांधता | अक्सर X-सहलग्न अप्रभावी | पुरुषों में अधिक सामान्य, पर महिलाएँ भी प्रभावित हो सकती हैं यदि आवश्यक आनुवंशिक संयोजन उपस्थित हो। |
| हीमोफीलिया A/B | क्रमशः फैक्टर VIII या IX की कमी; सामान्यतः X-सहलग्न | रक्तस्राव की प्रवृत्ति बढ़ती है। |
| सिकल सेल रोग | बीटा-ग्लोबिन जीन में बिंदु उत्परिवर्तन; ऑटोसोमल अप्रभावी | हीमोग्लोबिन S बनता है; कम ऑक्सीजन दशाओं में लाल रक्त कोशिकाएँ हंसिया-आकार ग्रहण कर सकती हैं। |
7. अभ्यास प्रश्न — PYQ नहीं
1. माइटोकॉन्ड्रिया और हरितलवक दोनों में अपना DNA और 70S राइबोसोम पाए जाते हैं।
2. लाइसोसोम का निर्माण सीधे खुरदरी अंतःप्रद्रव्यी जालिका द्वारा होता है।
3. S-अवस्था में DNA की प्रतिकृति होती है।
उत्तर: केवल 1 और 3। लाइसोसोमीय एंजाइमों के संश्लेषण में RER की भूमिका होती है, पर उनका संशोधन/छँटाई/पैकेजिंग गॉल्जीकाय के माध्यम से होती है।
उत्तर: डाउन—त्रिसूत्रता 21; टर्नर—45,X; क्लाइनफेल्टर—47,XXY; हीमोफीलिया—X-सहलग्न रक्तस्रावी विकार।
8. सत्यापित BPSC PYQ स्थिति
मूल PDF में 2015–2024 के कई प्रश्न BPSC PYQ के रूप में दिए गए हैं, लेकिन इस वेबसाइट पर उन्हें अभी PYQ के रूप में प्रकाशित नहीं किया गया है, क्योंकि प्रत्येक प्रश्न को बिहार लोक सेवा आयोग की आधिकारिक प्रश्न-पुस्तिका और उत्तर-कुंजी से अलग-अलग सत्यापित करना आवश्यक है। सत्यापन के बाद केवल वास्तविक प्रश्न ही जोड़े जाएंगे।
आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए “जीव विज्ञान भाग 1” नोट्स। तथ्य-संशोधन/अद्यतन के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT), राष्ट्रीय मानव जीनोम अनुसंधान संस्थान (NHGRI), रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) और प्रकाशित सूक्ष्मजीवविज्ञान अनुसंधान का संदर्भ लिया गया। अंतिम संपादकीय अद्यतन: 5 अक्टूबर 2026।