BPSC · बिहार विशेष · इतिहास
भाग 4: आधुनिक बिहार-II — राष्ट्रीय आंदोलन का विस्तार
राष्ट्रीय चेतना, पृथक बिहार आंदोलन, क्रांतिकारी राष्ट्रवाद, होमरूल, चंपारण सत्याग्रह, असहयोग आंदोलन, बिहार विद्यापीठ और स्वराज दल।
1912बिहार-उड़ीसा प्रांत
1917चंपारण सत्याग्रह
1921बिहार विद्यापीठ
इस भाग में क्या पढ़ना है?
1. राष्ट्रीय चेतना और पृथक बिहार आंदोलन
- 19वीं सदी के अंत तक बिहार में अलग प्रांतीय पहचान की माँग संगठित होने लगी।
- सच्चिदानंद सिन्हा और महेश नारायण पृथक बिहार आंदोलन के प्रमुख बौद्धिक-राजनीतिक नेता थे।
- महेश नारायण ने बिहार टाइम्स के माध्यम से प्रांतीय पहचान के प्रश्न को उठाया।
- 12 दिसंबर 1911 के दिल्ली दरबार में बिहार-उड़ीसा को बंगाल से अलग करने की घोषणा हुई।
- 22 मार्च 1912 को नए बिहार-उड़ीसा प्रांत के गठन की अधिसूचना हुई; इसी तिथि को बिहार दिवस मनाया जाता है।
2. कांग्रेस अधिवेशन और क्रांतिकारी राष्ट्रवाद
| घटना | वर्ष | मुख्य तथ्य |
|---|---|---|
| बांकीपुर कांग्रेस अधिवेशन | 1912 | अध्यक्ष आर. एन. माधोलकर; पटना में राष्ट्रीय राजनीति का महत्वपूर्ण आयोजन। |
| गया कांग्रेस अधिवेशन | 1922 | अध्यक्ष चित्तरंजन दास; परिषद प्रवेश के प्रश्न पर मतभेद और आगे स्वराज दल का गठन। |
| मुजफ्फरपुर बम कांड | 30 अप्रैल 1908 | खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी ने किंग्सफोर्ड को लक्ष्य बनाया; निशाना चूकने से केनेडी परिवार की दो महिलाओं की मृत्यु हुई। |
3. बिहार होमरूल लीग
- 16 दिसंबर 1916 को बांकीपुर में बिहार होमरूल लीग का गठन हुआ।
- अध्यक्ष: मौलाना मजहरुल हक।
- 1917 में मुजफ्फरपुर शाखा बनी; एनी बेसेंट के बिहार दौरों ने आंदोलन को प्रोत्साहन दिया।
4. चंपारण सत्याग्रह, 1917
- तीनकठिया: किसानों को भूमि के 3/20 भाग पर नील की खेती के लिए बाध्य करने वाली व्यवस्था।
- राजकुमार शुक्ल: गांधी को चंपारण लाने में केंद्रीय भूमिका; 1916 के लखनऊ कांग्रेस अधिवेशन में उनसे आग्रह किया।
- गांधी अप्रैल 1917 में पटना, मुजफ्फरपुर और फिर मोतिहारी पहुँचे तथा जिला छोड़ने के आदेश का पालन करने से इनकार किया।
- राजेंद्र प्रसाद, ब्रजकिशोर प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिन्हा, जे. बी. कृपलानी, मजहरुल हक और अन्य नेताओं ने सहयोग किया।
- चंपारण एग्रेरियन कमेटी: अध्यक्ष एफ. जी. स्लाई; गांधी सदस्य थे।
- समिति की सिफारिशों और 1918 के कानून से तीनकठिया व्यवस्था समाप्त हुई; किसानों को अवैध वसूली का 25% वापस दिलाने का समझौता हुआ।
5. खिलाफत, असहयोग और बिहार विद्यापीठ
- 1920 के असहयोग आंदोलन में बिहार से राजेंद्र प्रसाद, ब्रजकिशोर प्रसाद, मजहरुल हक सहित अनेक नेताओं ने वकालत और औपनिवेशिक संस्थाओं का बहिष्कार किया।
- सदाकत आश्रम: पटना में राष्ट्रीय आंदोलन का महत्वपूर्ण केंद्र; मजहरुल हक से गहरा संबंध।
- बिहार विद्यापीठ: 6 फरवरी 1921 को गांधी की उपस्थिति में स्थापित/उद्घाटित राष्ट्रीय शिक्षा संस्था; असहयोग आंदोलन के वैकल्पिक शिक्षा अभियान का हिस्सा।
- मजहरुल हक ने सदाकत आश्रम से द मदरलैंड नामक राष्ट्रवादी समाचार पत्र निकाला।
6. स्वराज दल और साइमन कमीशन विरोध
- गया कांग्रेस के बाद 1923 में बिहार में स्वराज दल की शाखा संगठित हुई; श्रीकृष्ण सिंह इसके प्रमुख नेताओं में थे।
- 12 दिसंबर 1928 को साइमन कमीशन के पटना आगमन पर काले झंडों और “साइमन गो बैक” नारों के साथ विरोध हुआ; अनुग्रह नारायण सिन्हा प्रमुख नेतृत्वकर्ताओं में थे।
7. BPSC के पिछले वर्षों के प्रश्न
- 69वीं BPSC (2023): चंपारण सत्याग्रह में गांधी की जान बचाने से जुड़ा नाम? उत्तर: बत्तख मियाँ।
- 68वीं BPSC (2023): गांधी को चंपारण बुलाने वाले किसान नेता? उत्तर: राजकुमार शुक्ल।
- 67वीं BPSC पुनर्परीक्षा (2022): 1912 बांकीपुर कांग्रेस अधिवेशन के अध्यक्ष? उत्तर: आर. एन. माधोलकर।
- 67वीं BPSC (2022): चंपारण एग्रेरियन कमेटी के अध्यक्ष? उत्तर: एफ. जी. स्लाई।
- 66वीं BPSC (2020): पृथक बिहार आंदोलन के प्रमुख नेता? उत्तर: सच्चिदानंद सिन्हा और महेश नारायण।
- 66वीं BPSC पुनर्परीक्षा (2020): बिहार होमरूल लीग के प्रथम अध्यक्ष? उत्तर: मौलाना मजहरुल हक।
- 65वीं BPSC (2019): गया कांग्रेस अधिवेशन 1922 के अध्यक्ष? उत्तर: चित्तरंजन दास।
- 64वीं BPSC (2018): बिहार में स्वराज दल के प्रमुख संस्थापक/नेता? उत्तर: नारायण प्रसाद और श्रीकृष्ण सिंह से जुड़ी बिहार शाखा।
- 63वीं BPSC (2017): चंपारण सत्याग्रह से असंबद्ध नाम? उत्तर: राम मनोहर लोहिया।
- 56वीं–59वीं BPSC (2015): मुजफ्फरपुर बम कांड कब हुआ? उत्तर: 30 अप्रैल 1908।
अद्यतन: 5 अक्टूबर 2026