बिहार लोक सेवा आयोग (Bihar Public Service Commission—BPSC) · बिहार विशेष · इतिहास
भाग 2: मध्यकालीन बिहार
तुर्क अभियानों से लेकर मिथिला के कर्नाट शासकों, दिल्ली सल्तनत, शेरशाह सूरी, मुगल प्रशासन और पटना साहिब तक मध्यकालीन बिहार का कालक्रमानुसार अध्ययन।
आरंभिक मध्यकालओदंतपुरी · नालंदा · विक्रमशिला
अफगान शक्तिशेरशाह सूरी · चौसा · कन्नौज
धार्मिक विरासतपटना साहिब · गुरु गोविंद सिंह
महत्वपूर्ण तथ्य
- इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बख्तियार खिलजी के बिहार अभियानों से ओदंतपुरी और अन्य बौद्ध केंद्रों को गंभीर क्षति पहुँची; नालंदा के पतन का अंतिम बड़ा आघात लगभग 1200 ई. के आसपास उसके आक्रमण से जोड़ा जाता है।
- मिथिला के कर्नाट वंश की स्थापना नान्यदेव ने की; हरिसिंह देव अंतिम प्रमुख शासक थे।
- चौसा का युद्ध 26 जून 1539 को बक्सर के निकट हुआ; इसके बाद शेर खाँ ने “शेरशाह” की उपाधि धारण की।
- शेरशाह का सासाराम स्थित मकबरा कृत्रिम जलाशय के मध्य अष्टकोणीय योजना पर निर्मित भारत-इस्लामी स्थापत्य का उत्कृष्ट उदाहरण है।
- तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब दसवें सिख गुरु गुरु गोविंद सिंह की जन्मस्थली और सिखों के पाँच तख्तों में से एक है।
इस भाग में क्या पढ़ना है?
1. बिहार में तुर्क अभियान और बौद्ध महाविहार
12वीं–13वीं शताब्दी के संक्रमण में इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बख्तियार खिलजी ने बिहार और बंगाल की ओर अभियान किए। समकालीन फारसी ग्रंथ तबकात-ए-नासिरी बिहार के एक सुदृढ़ बौद्ध प्रतिष्ठान पर उसके आक्रमण का महत्वपूर्ण स्रोत है। ओदंतपुरी के विनाश और नालंदा के अंतिम पतन को इन्हीं अभियानों से जोड़ा जाता है; विक्रमशिला के विनाश का संबंध भी 1203 ई. के आसपास उसके अभियान से माना जाता है।
2. मिथिला का कर्नाट वंश
| शासक | मुख्य तथ्य |
|---|---|
| नान्यदेव | लगभग 1097 ई. में कर्नाट सत्ता की स्थापना; राजधानी सिमरांवगढ़। |
| नरसिंह देव | 12वीं सदी के उत्तरार्ध में शासन; तुर्क विस्तार के समय मिथिला की राजनीतिक स्वायत्तता बनाए रखी। |
| हरिसिंह देव | 1307–1324; पंजी प्रबंध परंपरा से जुड़ा नाम; गयासुद्दीन तुगलक के अभियान के बाद नेपाल की ओर गए। |
ज्योतिरीश्वर ठाकुर की वर्णरत्नाकर और चंडेश्वर की राजनीति रत्नाकर जैसी रचनाएँ इस क्षेत्र की सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाती हैं।
3. दिल्ली सल्तनत काल में बिहार
- इल्तुतमिश: 1225 ई. के बाद बिहार-बंगाल पर दिल्ली की प्रभुसत्ता को संगठित करने का प्रयास; मलिक अलाउद्दीन जानी को प्रशासनिक दायित्व दिया गया।
- तुगलक काल: 1324 में गयासुद्दीन तुगलक के तिरहुत अभियान से कर्नाट सत्ता का अंत हुआ।
- सूफी परंपरा: बिहारशरीफ और मनेर मध्यकालीन बिहार के महत्वपूर्ण सूफी केंद्र बने; मखदूम शरफुद्दीन याहिया मनेरी विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं।
4. स्थानीय और अफगान शक्तियाँ
- चेरो: शाहाबाद–पलामू क्षेत्र में प्रभावशाली स्थानीय शक्ति; मेदिनी राय बाद की चेरो परंपरा के प्रमुख शासक थे।
- नूहानी: दरिया खाँ नूहानी और बहार खाँ नूहानी ने बिहार में अफगान शक्ति को संगठित किया।
- उज्जैनिया: शाहाबाद–जगदीशपुर क्षेत्र की राजपूत शक्ति, जिससे आगे चलकर वीर कुंवर सिंह का वंश जुड़ा।
5. शेरशाह सूरी और बिहार
| युद्ध | वर्ष | परिणाम |
|---|---|---|
| सूरजगढ़ | 1534 | बिहार में शेर खाँ की शक्ति निर्णायक रूप से बढ़ी। |
| चौसा | 26 जून 1539 | हुमायूँ पर विजय; शेरशाह की उपाधि और स्वतंत्र सार्वभौम सत्ता का दावा। |
| कन्नौज/बिलग्राम | 17 मई 1540 | हुमायूँ की निर्णायक पराजय; उत्तर भारत में सूर सत्ता स्थापित। |
| कालिंजर | 1545 | दुर्ग अभियान के दौरान विस्फोट से शेरशाह की मृत्यु। |
प्रशासनिक उपलब्धियाँ
- सड़क-ए-आजम/महान राजमार्ग का पुनर्गठन, सराय, कुएँ और डाक व्यवस्था।
- चाँदी के मानकीकृत रुपया और ताँबे के दाम की मुद्रा व्यवस्था।
- भूमि-मापन, फसल-आधारित लगान तथा पट्टा-कबूलियत की व्यवस्था।
- 16वीं शताब्दी में पटना को पुनः प्रमुख प्रशासनिक और नगरीय केंद्र के रूप में विकसित किया।
6. मुगल काल में बिहार
- 1574 में अकबर ने बिहार अभियान में हाजीपुर और पटना पर अधिकार सुदृढ़ किया; 1576 के राजमहल युद्ध के बाद अफगान प्रतिरोध निर्णायक रूप से कमजोर हुआ।
- 1580 की सूबा व्यवस्था में बिहार को अलग मुगल सूबा बनाया गया।
- राजा मानसिंह: बिहार के प्रमुख मुगल सूबेदारों में; रोहतासगढ़ के निर्माण-विस्तार से जुड़ा नाम।
- शहजादा परवेज: जहाँगीर काल में बिहार के प्रशासन से जुड़ा; पटना की पत्थर की मस्जिद उसके काल की प्रसिद्ध इमारत है।
- अजीम-उस-शान: औरंगजेब के पौत्र; पटना को “अजीमाबाद” नाम से जोड़ने वाली परंपरा।
7. सिख धर्म और बिहार
- गुरु नानक की यात्राओं का संबंध गया, राजगीर, पटना, मुंगेर और भागलपुर की परंपराओं से जोड़ा जाता है।
- गुरु तेग बहादुर असम यात्रा के क्रम में पटना आए और उनका परिवार कुछ समय यहाँ रहा।
- गुरु गोविंद सिंह: 1666 ई. में पटना में जन्म; बाल्यकाल का महत्वपूर्ण भाग यहीं बीता।
- तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब: गुरु गोविंद सिंह की जन्मस्थली पर स्थित; वर्तमान प्रमुख भवन के निर्माण में महाराजा रणजीत सिंह का संरक्षण महत्वपूर्ण रहा।
8. BPSC के पिछले वर्षों के प्रश्न
- 69वीं BPSC (2023): बख्तियार खिलजी के बिहार अभियान का समकालीन फारसी स्रोत? उत्तर: तबकात-ए-नासिरी।
- 68वीं BPSC (2023): कर्नाट वंश का अंतिम प्रमुख शासक? उत्तर: हरिसिंह देव।
- 67वीं BPSC पुनर्परीक्षा (2022): पटना में औपचारिक राज्याभिषेक से जुड़ा पहला मुगल सम्राट? उत्तर: फर्रुखसियर।
- 67वीं BPSC (2022): शेरशाह सूरी का मकबरा कहाँ है? उत्तर: सासाराम, रोहतास।
- 66वीं BPSC (2020): इल्तुतमिश ने बिहार का प्रशासन किसे सौंपा? उत्तर: मलिक अलाउद्दीन जानी।
- 65वीं BPSC (2019): कर्नाट वंश का संस्थापक? उत्तर: नान्यदेव।
- 64वीं BPSC (2018): बिहार में प्रारंभिक तुर्क सत्ता की स्थापना किससे जुड़ी है? उत्तर: बख्तियार खिलजी।
- 63वीं BPSC (2017): चौसा का युद्ध कब हुआ? उत्तर: 26 जून 1539।
- 60वीं–62वीं BPSC (2016): पटना को मध्यकाल में प्रमुख प्रांतीय केंद्र किसने बनाया? उत्तर: शेरशाह सूरी।
- 56वीं–59वीं BPSC (2015): बिहार को मुगल सूबा किस वर्ष बनाया गया? उत्तर: 1580।
अद्यतन: 5 अक्टूबर 2026