बिहार लोक सेवा आयोग (Bihar Public Service Commission—BPSC) · बिहार विशेष · इतिहास
भाग 1: प्राचीन बिहार — प्रागैतिहासिक काल से पाल वंश तक
पुरातात्त्विक साक्ष्यों से लेकर महाजनपद, मगध के उत्कर्ष, बौद्ध-जैन परंपराओं, मौर्य, गुप्त और पाल काल तक प्राचीन बिहार का समग्र अध्ययन।
पुरातत्वचिरांद · चेचर · पैसरा · ताराडीह
मगधहर्यंक · शिशुनाग · नंद · मौर्य
ज्ञान परंपरानालंदा · विक्रमशिला · ओदंतपुरी
महत्वपूर्ण तथ्य
- चिरांद (सारण) बिहार के प्रमुख नवपाषाण–ताम्रपाषाण पुरास्थलों में है; यहाँ हड्डी और सींग के औजार, मृद्भांड और कृषि-जीवन के साक्ष्य मिले हैं।
- 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व में वर्तमान बिहार क्षेत्र से तीन प्रमुख महाजनपद जुड़े थे—मगध, अंग और वज्जि।
- वैशाली का वज्जि–लिच्छवि गणसंघ प्राचीन भारत के सबसे प्रारंभिक ज्ञात गणतंत्रीय/गणसंघीय राजनीतिक प्रयोगों में गिना जाता है।
- बोधगया में बुद्ध को बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ; राजगृह और वैशाली क्रमशः प्रथम और द्वितीय बौद्ध संगीति से जुड़े प्रमुख बिहार स्थल हैं।
- मौर्यकालीन बराबर–नागार्जुनी गुफाएँ भारत की प्राचीनतम जीवित शैल-कट गुफा परंपराओं में हैं; इनका संबंध आजीवक संप्रदाय से है।
- नालंदा महाविहार का संस्थागत उत्कर्ष गुप्त काल से हुआ और पाल काल में नालंदा, विक्रमशिला तथा ओदंतपुरी पूर्वी भारत के प्रमुख बौद्ध शिक्षा-केंद्र बने।
इस भाग में क्या पढ़ना है?
1. प्रागैतिहासिक बिहार एवं पुरातात्त्विक साक्ष्य
| कालखंड | प्रमुख स्थल | मुख्य साक्ष्य |
|---|---|---|
| पुरापाषाण | मुंगेर–भीमबांध क्षेत्र, गया–राजगीर क्षेत्र और दक्षिणी बिहार के पथरीले भाग | हस्तकुठार, खुरचनी और पत्थर के फलक जैसे उपकरण। |
| मध्यपाषाण | पैसरा, मुंगेर | सूक्ष्म पाषाण उपकरण तथा औजार-निर्माण गतिविधि के साक्ष्य। |
| नवपाषाण | चिरांद (सारण), चेचर (वैशाली), ताराडीह (गया), सेनुआर/सेनुआ (रोहतास) आदि | पॉलिशदार पत्थर के औजार, हड्डी/सींग के उपकरण, मृद्भांड, कृषि और स्थायी निवास के साक्ष्य। |
| ताम्रपाषाण | चिरांद, चेचर, सोनपुर, ताराडीह, ओरियुप आदि | काला-लाल मृद्भांड, तांबे की वस्तुएँ और विकसित ग्रामीण संस्कृति। |
चिरांद का महत्व
सारण जिले का चिरांद गंगा–घाघरा क्षेत्र का बहुस्तरीय पुरास्थल है। यहाँ नवपाषाण से आगे की सांस्कृतिक परतें, हड्डी और सींग के औजार तथा कृषि-पशुपालन से जुड़े साक्ष्य बिहार के प्रागैतिहासिक अध्ययन को विशेष महत्व देते हैं।
2. साहित्यिक स्रोतों में प्राचीन बिहार
- ऋग्वेद: “कीकट” का उल्लेख मिलता है, जिसे कई इतिहासकार पूर्वी भारत/मगध क्षेत्र से जोड़ते हैं; इसकी सटीक भौगोलिक पहचान पर मतभेद है।
- शतपथ ब्राह्मण: विदेघ माधव और गौतम राहूगण की कथा में सदानीरा नदी का उल्लेख मिलता है; सामान्यतः इसे गंडक से पहचाना जाता है।
- अंगुत्तर निकाय: 16 महाजनपदों की सूची का प्रमुख बौद्ध स्रोत।
- भगवती सूत्र: जैन परंपरा में महाजनपदों और समकालीन राजनीतिक इकाइयों का महत्वपूर्ण संदर्भ।
3. बिहार से जुड़े प्रमुख महाजनपद
| महाजनपद | मुख्य क्षेत्र | राजधानी | महत्व |
|---|---|---|---|
| मगध | पटना, गया, नालंदा, जहानाबाद, अरवल और आसपास | गिरिव्रज/राजगृह; बाद में पाटलिपुत्र | राजनीतिक और साम्राज्यवादी विस्तार का केंद्र; हर्यंक, शिशुनाग, नंद और मौर्य शक्ति का आधार। |
| अंग | भागलपुर–मुंगेर क्षेत्र | चंपा | पूर्वी गंगा क्षेत्र का समृद्ध व्यापारिक राज्य; बिंबिसार ने अंग को मगध में मिलाया। |
| वज्जि संघ | वैशाली और उत्तर-मध्य बिहार | वैशाली | लिच्छवियों सहित अनेक कुलों का गणसंघ; प्राचीनतम ज्ञात गणतंत्रीय व्यवस्थाओं में गिना जाता है। |
4. मगध का उत्कर्ष एवं प्रमुख राजवंश
हर्यंक वंश
- बिंबिसार: राजगृह से शासन; अंग विजय और वैवाहिक कूटनीति के माध्यम से मगध का विस्तार। बुद्ध और महावीर दोनों की परंपराओं से उसका नाम जुड़ा है।
- अजातशत्रु: वज्जि–लिच्छवि संघ के विरुद्ध दीर्घ संघर्ष; उसके शासनकाल में पाटलिग्राम की सामरिक महत्ता बढ़ी। प्रथम बौद्ध संगीति राजगृह में उसके संरक्षण से जुड़ी मानी जाती है।
- उदयिन: परंपरागत परीक्षा-साहित्य में पाटलिपुत्र को राजधानी बनाने का श्रेय दिया जाता है।
शिशुनाग वंश
शिशुनाग ने अवंती को मगध में मिलाकर पश्चिमी प्रतिद्वंद्विता समाप्त की। कालाशोक के समय वैशाली में द्वितीय बौद्ध संगीति आयोजित हुई मानी जाती है।
नंद वंश
- महापद्म नंद: नंद शक्ति के विस्तार से जुड़ा प्रमुख शासक; पुराणों में व्यापक विजय की परंपरा मिलती है।
- धनानंद: नंद वंश का अंतिम प्रमुख शासक; उसके पतन के बाद चंद्रगुप्त मौर्य और चाणक्य से जुड़ी मौर्य सत्ता का उदय हुआ।
5. बौद्ध एवं जैन धर्म — बिहार विशेष
बौद्ध धर्म
- बोधगया: उरुवेला क्षेत्र में निरंजना नदी के निकट पीपल वृक्ष के नीचे सिद्धार्थ गौतम को ज्ञान प्राप्त हुआ; आज का महाबोधि मंदिर परिसर उसी परंपरा का प्रमुख स्थल है।
- राजगृह: सप्तपर्णी गुफा प्रथम बौद्ध संगीति से जुड़ी है।
- वैशाली: द्वितीय बौद्ध संगीति और बुद्ध के अंतिम उपदेशों की परंपरा से जुड़ा प्रमुख केंद्र।
- पाटलिपुत्र: अशोक के काल में तृतीय बौद्ध संगीति की थेरवाद परंपरा का प्रमुख स्थल।
| संगीति | स्थान | संरक्षक | मुख्य परंपरा |
|---|---|---|---|
| प्रथम | राजगृह | अजातशत्रु | महाकश्यप की अध्यक्षता; बुद्ध-वचनों के प्रारंभिक संकलन की परंपरा। |
| द्वितीय | वैशाली | कालाशोक | संघ-अनुशासन और विनय संबंधी मतभेदों से जुड़ी। |
| तृतीय | पाटलिपुत्र | अशोक | थेरवाद परंपरा में मोग्गलिपुत्त तिस्स से संबद्ध। |
| चतुर्थ | कश्मीर | कनिष्क | सर्वास्तिवाद परंपरा से जुड़ी; बौद्ध दार्शनिक साहित्य के विकास में महत्वपूर्ण। |
जैन धर्म
- महावीर: 24वें तीर्थंकर; वैशाली–वज्जि क्षेत्र से उनकी जन्म-परंपरा जुड़ी है। पारंपरिक जैन कालक्रम 599 ईसा पूर्व मानता है, जबकि आधुनिक विद्वानों में अलग कालक्रम भी प्रचलित है।
- पावापुरी: महावीर के निर्वाण का प्रमुख जैन तीर्थ; जल मंदिर विशेष प्रसिद्ध है।
- पाटलिपुत्र परिषद: प्रारंभिक जैन आगमों के संरक्षण-संकलन की परंपरा से जुड़ी; श्वेतांबर–दिगंबर विभाजन को एक दीर्घ ऐतिहासिक प्रक्रिया के रूप में समझना अधिक उचित है।
6. मौर्य साम्राज्य और बिहार
चंद्रगुप्त मौर्य
- चाणक्य/कौटिल्य से जुड़ी परंपरा के साथ नंद सत्ता को हटाकर मौर्य साम्राज्य की स्थापना।
- सेल्यूकस निकेटर के साथ संघर्ष और संधि के बाद उत्तर-पश्चिम में मौर्य प्रभाव मजबूत हुआ।
- मेगस्थनीज: सेल्यूकस का राजदूत; पाटलिपुत्र में रहकर “इंडिका” लिखी। उसके विवरण में नगर प्रशासन के 6 बोर्ड/समितियों और सामाजिक वर्गीकरण का उल्लेख मिलता है।
कुम्हरार और पाटलिपुत्र
पटना के कुम्हरार उत्खनन से प्रसिद्ध 80-स्तंभीय सभागार के अवशेष मिले हैं। इसकी सटीक प्रकृति पर विद्वानों में मतभेद रहा है; इसे कभी राजकीय सभा और कभी अशोककालीन बौद्ध सभागार से जोड़ा गया है।
अशोक और बिहार के पुरास्थल
- लौरिया नंदनगढ़: पश्चिमी चंपारण का प्रसिद्ध अशोक स्तंभ और स्तूप-क्षेत्र।
- लौरिया अरेराज: पूर्वी चंपारण में अशोक का स्तंभ-लेख।
- रामपुरवा: पश्चिमी चंपारण के अशोक स्तंभ—सिंह और वृषभ शीर्षों के लिए प्रसिद्ध।
- सासाराम: अशोक का लघु शिलालेख।
- बराबर गुफाएँ: जहानाबाद में मौर्यकालीन चमकदार पॉलिश वाली शैल-कट गुफाएँ; कई अभिलेख आजीवकों को दान का उल्लेख करते हैं।
- नागार्जुनी गुफाएँ: दशरथ मौर्य के अभिलेख और आजीवक परंपरा से संबद्ध।
7. गुप्त एवं पाल काल
गुप्त काल
- चंद्रगुप्त प्रथम: लिच्छवि राजकुमारी कुमारदेवी से विवाह और राजा–रानी प्रकार के सिक्कों के लिए प्रसिद्ध।
- समुद्रगुप्त: प्रयाग प्रशस्ति उसका प्रमुख अभिलेखीय स्रोत है; इसे हरिषेण ने रचा।
- चंद्रगुप्त द्वितीय: चीनी यात्री फाह्यान भारत आया और पाटलिपुत्र का वर्णन किया।
- नालंदा: 5वीं शताब्दी से महाविहार का संगठित शैक्षणिक उत्कर्ष स्पष्ट होता है; परंपरा इसकी स्थापना/प्रमुख संरक्षण को कुमारगुप्त प्रथम से जोड़ती है।
पाल काल
- गोपाल: पाल वंश का संस्थापक; ओदंतपुरी महाविहार की स्थापना परंपरागत रूप से उसी से जोड़ी जाती है।
- धर्मपाल: भागलपुर के अंतीचक स्थित विक्रमशिला महाविहार की स्थापना; नालंदा को भी व्यापक संरक्षण।
- देवपाल: नालंदा के लिए दक्षिण-पूर्व एशियाई शासकों से जुड़े दान-सम्बंधों का अभिलेखीय प्रमाण मिलता है।
- कला: पालकालीन कांस्य प्रतिमाएँ और नालंदा–गया की बौद्ध मूर्तिकला पूर्वी भारत की विशिष्ट कला परंपरा का हिस्सा हैं।
8. BPSC के पिछले वर्षों के प्रश्न
- 69वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा (2023): शतपथ ब्राह्मण में किस नदी को “सदानीरा” कहा गया है? उत्तर: गंडक नदी।
- 68वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा (2023): विक्रमशिला महाविहार की स्थापना किस पाल शासक ने की? उत्तर: धर्मपाल।
- 67वीं BPSC पुनर्परीक्षा (2022): प्रथम बौद्ध संगीति कहाँ आयोजित हुई थी? उत्तर: राजगृह।
- 67वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा (2022): पाटलिपुत्र के मौर्यकालीन विशाल सभागार की संरचना में किस सामग्री का व्यापक उपयोग हुआ था? उत्तर: लकड़ी और पत्थर के स्तंभों से युक्त स्थापत्य; कुम्हरार का 80-स्तंभीय सभागार इसका प्रमुख पुरातात्त्विक साक्ष्य है।
- 66वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा (2020): बुद्ध को ज्ञान किस नदी के निकट प्राप्त हुआ था? उत्तर: निरंजना नदी, बोधगया।
- 66वीं BPSC पुनर्परीक्षा (2020): मगध की प्रारंभिक राजधानी कौन-सी थी? उत्तर: गिरिव्रज/राजगृह।
- 65वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा (2019): मौर्य समाज के सात वर्गों का विवरण किस स्रोत में मिलता है? उत्तर: मेगस्थनीज की “इंडिका”।
- 64वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा (2018): वैशाली की गणतंत्रीय व्यवस्था किस प्रमुख गण से जुड़ी थी? उत्तर: लिच्छवि।
- 63वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा (2017): नालंदा महाविहार के प्रारंभिक गुप्तकालीन संरक्षण को किस शासक से जोड़ा जाता है? उत्तर: कुमारगुप्त प्रथम।
- 56वीं–59वीं BPSC (2015): बराबर की गुफाएँ किस संप्रदाय से विशेष रूप से जुड़ी हैं? उत्तर: आजीवक संप्रदाय।
अद्यतन: 5 अक्टूबर 2026