वस्तुनिष्ठ प्रश्न-संग्रह • पृष्ठ 66
एक सवाल हल कीजिए, उसका कारण समझिए, फिर आगे बढ़िए। करंट अफेयर्स, विषयवार अध्ययन और विगत वर्षों के प्रश्न अब एक जगह।
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1301–1320 / 4666 प्रश्न
प्रश्न-संग्रह
प्रश्न खोलकर हल करेंमौलाना अबुल कलाम आजाद द्वारा निकाला गया पत्र कौन-सा था?
उत्तर और पूरी व्याख्या
व्याख्या
- अल-हिलाल आजाद का प्रसिद्ध उर्दू साप्ताहिक था।
युवा बंगाल आंदोलन की मुख्य सीमाओं (Limitations) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
युवा बंगाल आंदोलन की मुख्य सीमाओं (Limitations) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
विकल्प (a) सही है। यंग बंगाल आंदोलन का दायरा अत्यंत सीमित रहा क्योंकि उनका उग्र बौद्धिक अतिवाद आम जनता की वास्तविकताओं और समस्याओं से पूरी तरह कटा हुआ था; वे केवल किताबी बहस और पश्चिमी जीवनशैली तक सिमट गए।
यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में निम्नलिखित में सबसे हाल की भारतीय प्रविष्टि कौन थी?
उत्तर और पूरी व्याख्या
क्यों?
- गरबा को 2023 में यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया गया।
- अन्य तीन प्रविष्टियाँ इससे पहले सूचीबद्ध हो चुकी थीं।
यूरोपीय शक्तियों के भारत आगमन के संदर्भ में: डचों ने पूर्वी तट पर गजपति शासकों द्वारा दी गई भूमि पर कारखाने स्थापित किए।अल्फोंसो डी अल्बुकर्क ने …
- डचों ने पूर्वी तट पर गजपति शासकों द्वारा दी गई भूमि पर कारखाने स्थापित किए।
- अल्फोंसो डी अल्बुकर्क ने बीजापुर सल्तनत से गोवा लिया।
- अंग्रेज़ ईस्ट इंडिया कंपनी ने विजयनगर प्रतिनिधि से पट्टे पर ली भूमि पर मद्रास में कारखाना स्थापित किया।
उत्तर और पूरी व्याख्या
क्यों?
- गोवा 1510 में अल्बुकर्क ने बीजापुर से छीना।
- मद्रास की भूमि स्थानीय नायक/विजयनगर राजनीतिक परंपरा के प्रतिनिधि से पट्टे पर मिली; पहला कथन सही नहीं है।
रखमाबाई प्रकरण, 1884 किन मुद्दों से संबंधित था?महिला शिक्षा का अधिकारसहमति की आयुदांपत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना
- महिला शिक्षा का अधिकार
- सहमति की आयु
- दांपत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना
उत्तर और पूरी व्याख्या
क्यों?
- मामला बाल विवाह, सहमति की आयु और दांपत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना से जुड़ा था।
रजनी पाम दत्त ने ‘वे साम्राज्यवाद से लड़ते भी थे और सहयोग भी करते थे’ किस राजनीतिक समूह के लिए कहा?
उत्तर और पूरी व्याख्या
व्याख्या
- BPSC की अंतिम Series-A उत्तर-कुंजी के अनुसार सही उत्तर (a) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस है।
रणजीत सिंह के दरबार में कार्यरत विभिन्न विदेशी जनरलों और विशेषज्ञों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. जीन-बैप्टिस्ट वेंचुरा (इत…
रणजीत सिंह के दरबार में कार्यरत विभिन्न विदेशी जनरलों और विशेषज्ञों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. जीन-बैप्टिस्ट वेंचुरा (इतालवी): पैदल सेना (Infantry) के संगठनकर्ता 2. जीन-फ्रांस्वा अलार्ड (फ्रांसीसी): घुड़सवार सेना (Cavalry) के कमांडर 3. पाओलो अवीताबाइल (इतालवी): पेशावर के प्रशासक व सेनापति 4. क्लॉड ऑगस्ट कोर्ट (फ्रांसीसी): तोपखाना (Artillery) के विशेषज्ञ उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सभी चार युग्म सही सुमेलित हैं। रणजीत सिंह की सेना में नेपोलियन के पूर्व अधिकारी थे: वेंचुरा (इन्फैंट्री), अलार्ड (कैवेलरी), कोर्ट (तोपखाना), और अवीताबाइल (पेशावर के गवर्नर व नागरिक प्रशासक)।
रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा बंगाल विभाजन के विरोध में रचित प्रसिद्ध गीत 'आमार सोनार बांला' (Amar Sonar Bangla) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचा…
रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा बंगाल विभाजन के विरोध में रचित प्रसिद्ध गीत 'आमार सोनार बांला' (Amar Sonar Bangla) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह गीत विभाजन विरोधी जुलूसों में लाखों बंगालियों द्वारा सड़कों पर गाया जाने वाला प्रमुख गान बन गया। 2. 1971 में मुक्ति संग्राम के बाद यह गीत बांग्लादेश का 'राष्ट्रगान' (National Anthem) बना। 3. रवींद्रनाथ टैगोर विश्व के एकमात्र ऐसे कवि हैं जिनके लिखे दो गीत दो अलग-अलग देशों के राष्ट्रगान हैं (भारत और बांग्लादेश)। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों कथन सही हैं। रवींद्रनाथ टैगोर ने विभाजन के विरोध में 'आमार सोनार बांला' लिखा जो 1971 में बांग्लादेश का राष्ट्रगान बना। टैगोर दो देशों (भारत व बांग्लादेश) के राष्ट्रगान के रचयिता हैं।
रवीन्द्रनाथ टैगोर ने अपनी नाइटहुड उपाधि किस घटना के विरोध में त्यागी?
उत्तर और पूरी व्याख्या
व्याख्या
- BPSC की अंतिम उत्तर-कुंजी के अनुसार सही उत्तर (c) जलियाँवाला बाग हत्याकांड है।
राजनीति पर प्रारंभिक ग्रंथ ‘नीतिसार’ किसने लिखा?
उत्तर और पूरी व्याख्या
क्यों?
- ‘नीतिसार’ का लेखक कामंदक माना जाता है; यह प्राचीन भारतीय राजनीति और राज्यकला का महत्वपूर्ण ग्रंथ है।
राजनीतिक संगठन और संस्थापक का सही मिलान चुनिए: I. खाकसार, II. सोशलिस्ट पार्टी, III. इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी, IV. फॉरवर्ड ब्लॉक; a. सुभाषचंद्र बोस…
उत्तर और पूरी व्याख्या
क्यों?
- खाकसार–इनायतुल्लाह मशरिकी, सोशलिस्ट धारा–जयप्रकाश नारायण, इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी–बी. आर. आंबेडकर और फॉरवर्ड ब्लॉक–सुभाषचंद्र बोस सही मिलान है।
राजमहल की पहाड़ियों में रहने वाली 'पहाड़िया जनजाति' (Paharia Uprising - 1778) के विद्रोह को शांत करने के लिए ब्रिटिश अधिकारी ऑगस्टस क्लीवलैंड (Au…
राजमहल की पहाड़ियों में रहने वाली 'पहाड़िया जनजाति' (Paharia Uprising - 1778) के विद्रोह को शांत करने के लिए ब्रिटिश अधिकारी ऑगस्टस क्लीवलैंड (Augustus Cleveland) ने कौन-सी नीति अपनाई थी?
उत्तर और पूरी व्याख्या
विकल्प (a) सही है। राजमहल के पहाड़ियों के निरंतर हमलों से निपटने के लिए 1778 में भागलपुर के कलेक्टर ऑगस्टस क्लीवलैंड ने तुष्टीकरण नीति (Pacification policy) अपनाई: पहाड़िया सरदारों को मासिक पेंशन दी गई और उनके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने का वचन दिया गया।
राजस्थान की राजपूत रियासतों (जोधपुर, जयपुर, उदयपुर, कोटा आदि) द्वारा अंग्रेजों के साथ सहायक संधियां करने का मुख्य काल कौन-सा था?
राजस्थान की राजपूत रियासतों (जोधपुर, जयपुर, उदयपुर, कोटा आदि) द्वारा अंग्रेजों के साथ सहायक संधियां करने का मुख्य काल कौन-सा था?
उत्तर और पूरी व्याख्या
विकल्प (b) सही है। 1817–1818 में लॉर्ड हेस्टिंग्स के समय चार्ल्स मेटकाफ की कूटनीति से राजस्थान की लगभग सभी प्रमुख राजपूत रियासतों (करौली, कोटा, जोधपुर, मेवाड़, जयपुर, बीकानेर आदि) ने मराठों व पिंडारियों के हमलों से तंग आकर अंग्रेजों से सहायक संधियां कीं।
राजा प्रवरसेन के बारे में विचार कीजिए: (a) वह वाकाटक वंश का वास्तविक संस्थापक था। (b) उसका साम्राज्य उत्तर में बुंदेलखंड से दक्षिण में हैदराबाद त…
उत्तर और पूरी व्याख्या
क्यों?
- प्रवरसेन प्रथम वाकाटक शक्ति के वास्तविक विस्तारकर्ता माने जाते हैं और दिए गए कथनों में एक से अधिक संयोजन सही हैं; अंतिम कुंजी में (D) है।
राजा राममोहन राय (1772–1833) के धार्मिक और दार्शनिक विचारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उन्होंने 1809 में फारसी भाषा में प्…
राजा राममोहन राय (1772–1833) के धार्मिक और दार्शनिक विचारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उन्होंने 1809 में फारसी भाषा में प्रसिद्ध पुस्तक 'तुहफत-उल-मुवाहिदीन' (Gift to Monotheists / एकेश्वरवादियों को उपहार) लिखी। 2. उन्होंने वेदांत और उपनिषदों का बंगाली भाषा में अनुवाद किया ताकि यह सिद्ध किया जा सके कि मूल हिंदू धर्मग्रंथ एकेश्वरवाद का समर्थन करते हैं। 3. उन्होंने मूर्तिपूजा, कर्मकांड और पुरोहितवाद का कड़ा खंडन किया, किंतु उन्होंने यह भी माना कि यदि कोई व्यक्ति तार्किक आधार पर मूर्तिपूजा करता है, तो उसे अनुमति दी जा सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
कथन 3 गलत है क्योंकि राजा राममोहन राय ने मूर्तिपूजा का कभी भी किसी भी रूप में समर्थन नहीं किया; उन्होंने इसे समाज में अंधविश्वास और पुरोहितवादी शोषण का मूल कारण मानकर इसका पूर्णतः विरोध किया। कथन 1 और 2 सही हैं (1809 की पुस्तक तुहफत-उल-मुवाहिदीन और उपनिषदों का अनुवाद)।
राजा राममोहन राय के अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण और विश्व-बंधुत्व की भावना के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
राजा राममोहन राय के अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण और विश्व-बंधुत्व की भावना के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
विकल्प (a) सही है। राममोहन राय सच्चे अंतरराष्ट्रीयतावादी (Internationalist) थे। वे विश्व भर में चल रहे स्वतंत्रता संग्रामों का समर्थन करते थे। नेपल्स में क्रांति के दमन पर उन्होंने शोक जताया और स्पेनिश अमेरिका की क्रांति की विजय पर कलकत्ता में जश्न का आयोजन किया था।
राजा राममोहन राय के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: उन्हें पूर्व की पारंपरिक दार्शनिक प्रणालियों से गहरा प्रेम और सम्मान था।वे चाहते थ…
- उन्हें पूर्व की पारंपरिक दार्शनिक प्रणालियों से गहरा प्रेम और सम्मान था।
- वे चाहते थे कि भारतीय तर्कसंगत और वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा मानव गरिमा और सामाजिक समानता के सिद्धांत अपनाएँ।
उत्तर और पूरी व्याख्या
क्यों?
- राममोहन राय ने भारतीय दार्शनिक परंपरा का अध्ययन और सम्मान किया, साथ ही अंधविश्वास और रूढ़ियों की आलोचना की।
- उन्होंने आधुनिक विज्ञान, तर्क, मानव गरिमा और स्त्री-पुरुष समानता का समर्थन किया।
राजा राममोहन राय के सती प्रथा विरोधी अभियान और 1829 के विनियम XVII (Regulation XVII of 1829) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 18…
राजा राममोहन राय के सती प्रथा विरोधी अभियान और 1829 के विनियम XVII (Regulation XVII of 1829) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 1818 में अपनी भाभी अलकमंजरी के सती होने की हृदयविदारक घटना के बाद उन्होंने सती प्रथा के विरुद्ध आजीवन अभियान छेड़ा। 2. उन्होंने प्राचीन धर्मग्रंथों (जैसे मनुस्मृति और याज्ञवल्क्य स्मृति) के श्लोकों के आधार पर सिद्ध किया कि सती प्रथा हिंदू धर्म का अनिवार्य अंग नहीं है। 3. 4 दिसंबर 1829 को गवर्नर-जनरल लॉर्ड विलियम बेंटिंक ने विनियम XVII द्वारा बंगाल में सती प्रथा को अवैध और गैर-कानूनी घोषित किया (1830 में मद्रास और बंबई में लागू)। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों कथन सही हैं। 1818 में अपनी भाभी की सती होने के बाद उन्होंने सती विरोधी अभियान छेड़ा। शास्त्रों से साबित किया कि यह अमानवीय प्रथा है। 4 दिसंबर 1829 को बेंटिंक ने विनियम XVII द्वारा सती प्रथा को अवैध और हत्या के समतुल्य घोषित किया।
राजा–वंश युग्मों पर विचार कीजिए: नन्नुक — चंदेलजयशक्ति — परमारनागभट्ट द्वितीय — गुर्जर-प्रतिहारभोज — राष्ट्रकूट कितने युग्म सही हैं?
- नन्नुक — चंदेल
- जयशक्ति — परमार
- नागभट्ट द्वितीय — गुर्जर-प्रतिहार
- भोज — राष्ट्रकूट
कितने युग्म सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
क्यों?
- नन्नुक चंदेल वंश के प्रारंभिक शासक और नागभट्ट द्वितीय गुर्जर-प्रतिहार थे।
- जयशक्ति चंदेल था और प्रसिद्ध भोज परमार वंश से जुड़ा था।
रामकृष्ण परमहंस (1836–1886) के धार्मिक उपदेशों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वे दक्षिणेश्वर (कलकत्ता) के काली मंदिर के मुख्य …
रामकृष्ण परमहंस (1836–1886) के धार्मिक उपदेशों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वे दक्षिणेश्वर (कलकत्ता) के काली मंदिर के मुख्य पुजारी थे और उनका मूल नाम गदाधर चट्टोपाध्याय था। 2. उन्होंने सिद्ध किया कि ईश्वर तक पहुंचने के सभी मार्ग (हिंदू, इस्लाम, ईसाई आदि) समान रूप से सत्य हैं; उनका प्रसिद्ध कथन था: "जतो मत, ततो पथ" (जितने मत, उतने पथ)। 3. उन्होंने पारंपरिक हिंदू मूर्तिपूजा को आध्यात्मिक साधना का एक वैध साधन माना, किंतु मानवता की सेवा को ही सच्ची ईश्वर भक्ति बताया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों कथन सही हैं। रामकृष्ण परमहंस (गदाधर) दक्षिणेश्वर के संत थे। उनका सिद्धांत था "जतो मत, ततो पथ" (जितने मत, उतने पथ)। उन्होंने सभी धर्मों को ईश्वर प्राप्ति का मार्ग माना और सेवा भाव पर बल दिया।