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अभ्यास से समझ तक

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-संग्रह • पृष्ठ 30

एक सवाल हल कीजिए, उसका कारण समझिए, फिर आगे बढ़िए। करंट अफेयर्स, विषयवार अध्ययन और विगत वर्षों के प्रश्न अब एक जगह।

4666 प्रश्न संग्रह में3816 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित
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प्रश्न-संग्रह

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विषयवार प्रश्न-सेट • इतिहास और संस्कृति1857 के विद्रोह के समय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री और भारत के गवर्नर-जनरल क्रमशः कौन थे?

1857 के विद्रोह के समय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री और भारत के गवर्नर-जनरल क्रमशः कौन थे?

उत्तर और पूरी व्याख्या

विकल्प (a) सही है। 1857 के विद्रोह के समय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री लॉर्ड पामर्स्टन (1855–58) थे और भारत के गवर्नर-जनरल लॉर्ड कैनिंग (1856–62) थे।

विषयवार प्रश्न-सेट • इतिहास और संस्कृति1857 के विद्रोह के स्वरूप (Nature of the Revolt) पर विभिन्न इतिहासकारों के दृष्टिकोण के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. सर जॉन ल…

1857 के विद्रोह के स्वरूप (Nature of the Revolt) पर विभिन्न इतिहासकारों के दृष्टिकोण के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. सर जॉन लॉरेंस एवं सीले : "पूर्णतः देशभक्तिरहित और स्वार्थी सिपाही विद्रोह" (Wholly unpatriotic and selfish Sepoy Mutiny) 2. एल.ई.आर. रीस (L.E.R. Rees) : "धर्मान्धों का ईसाइयों के विरुद्ध युद्ध" (A war of fanatics against Christians) 3. टी.आर. होम्स (T.R. Holmes) : "बर्बरता और सभ्यता के बीच संघर्ष" (Conflict between civilization and barbarism) 4. जेम्स आउट्रम एवं डब्ल्यू. टेलर : "अंग्रेजों के विरुद्ध हिंदू-मुस्लिम षड्यंत्र" (A Hindu-Muslim conspiracy) उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सभी चार युग्म सही सुमेलित हैं। ब्रिटिश लेखकों ने विद्रोह को छोटा करने के लिए इसे 'सिपाही विद्रोह' (लॉरेंस), 'धर्मान्धों का ईसाइयों के विरुद्ध युद्ध' (रीस), 'बर्बरता बनाम सभ्यता' (होम्स), या 'हिंदू-मुस्लिम षड्यंत्र' (आउट्रम) कहा।

विषयवार प्रश्न-सेट • इतिहास और संस्कृति1857 के विद्रोह में 'हिंदू-मुस्लिम एकता' के अभूतपूर्व पहलू के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. विद्रोही सिपाहियों और नेताओं ने चाहे…

1857 के विद्रोह में 'हिंदू-मुस्लिम एकता' के अभूतपूर्व पहलू के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. विद्रोही सिपाहियों और नेताओं ने चाहे वे हिंदू हों या मुस्लिम, सर्वसम्मति से बहादुर शाह जफर को अपना सम्राट स्वीकार किया। 2. विद्रोह के दौरान दिल्ली और बरेली में मुस्लिम नेताओं द्वारा हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए गो-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था। 3. वरिष्ठ ब्रिटिश अधिकारी चार्ल्स बाल (Charles Ball) ने स्वीकार किया कि अंग्रेजों द्वारा हिंदू और मुस्लिम विद्रोहियों के बीच फूट डालने के सभी प्रयास पूरी तरह विफल रहे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों कथन सही हैं। 1857 के विद्रोह में हिंदू-मुस्लिम एकता बेमिसाल थी। बहादुर शाह जफर सर्वमान्य नेता थे, गो-हत्या पर प्रतिबंध लगाया गया, और अंग्रेजों के सांप्रदायिक फूट डालने के सभी प्रयास विफल रहे।

विषयवार प्रश्न-सेट • इतिहास और संस्कृति1857 के विद्रोह में निम्नलिखित में से किन प्रमुख शक्तियों/शासकों ने अंग्रेजों की सक्रिय सैन्य सहायता की थी? 1. ग्वालियर के सिंधिया और हैदराबाद के…

1857 के विद्रोह में निम्नलिखित में से किन प्रमुख शक्तियों/शासकों ने अंग्रेजों की सक्रिय सैन्य सहायता की थी? 1. ग्वालियर के सिंधिया और हैदराबाद के निज़ाम (सालार जंग) 2. नेपाल के राणा जंग बहादुर 3. पटियाला, नाभा और जींद के सिख शासक 4. कश्मीर के महाराजा गुलाब सिंह / रणवीर सिंह नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

उत्तर और पूरी व्याख्या

सभी चारों शासक सही हैं। सिंधिया, निज़ाम, नेपाल के जंग बहादुर, पटियाला-जींद के सिख शासक और कश्मीर के राजा ने अंग्रेजों को सैनिक, रसद और वित्तीय सहायता देकर 1857 के विद्रोह को कुचलने में अहम भूमिका निभाई।

विषयवार प्रश्न-सेट • इतिहास और संस्कृति1857 के विद्रोह में महिलाओं की अप्रतिम भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. झांसी : रानी लक्ष्मीबाई एवं उनकी अंगरक्षक झलकार…

1857 के विद्रोह में महिलाओं की अप्रतिम भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. झांसी : रानी लक्ष्मीबाई एवं उनकी अंगरक्षक झलकारी बाई 2. अवध : बेगम हजरत महल एवं उदा देवी (सिकंदर बाग की वीरांगना) 3. रामगढ़ (मध्य प्रदेश) : रानी अवंतीबाई लोधी उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों युग्म सही सुमेलित हैं। झांसी में लक्ष्मीबाई व झलकारी बाई, लखनऊ में हजरत महल व उदा देवी, तथा रामगढ़ में रानी अवंतीबाई लोधी ने नेतृत्व किया।

BPSC विगत वर्ष • इतिहास और संस्कृति • 20201857 के विद्रोह में सक्रिय रूप से भाग लेने वालों में कौन शामिल थे?
1857 के विद्रोह में सक्रिय रूप से भाग लेने वालों में कौन शामिल थे?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर(e) उपर्युक्त में से कोई नहीं/उपर्युक्त में से एक से अधिक

व्याख्या

  • BPSC की अंतिम कुंजी में एक से अधिक विकल्प सही होने के कारण E स्वीकार किया गया।
विषयवार प्रश्न-सेट • इतिहास और संस्कृति1857 के विद्रोह से पूर्व ग्रामीण क्षेत्रों में विद्रोह के संदेश के गुप्त प्रसार के लिए किन पारंपरिक प्रतीकों का प्रयोग किया गया था?

1857 के विद्रोह से पूर्व ग्रामीण क्षेत्रों में विद्रोह के संदेश के गुप्त प्रसार के लिए किन पारंपरिक प्रतीकों का प्रयोग किया गया था?

उत्तर और पूरी व्याख्या

विकल्प (a) सही है। 1857 के विद्रोह के संदेश को गांव-गांव पहुंचाने के लिए चपाती (रोटी) और लाल कमल के फूल का गुप्त प्रतीकात्मक रूप से आदान-प्रदान किया गया था।

विषयवार प्रश्न-सेट • इतिहास और संस्कृति1857 से पूर्व के जन-विद्रोहों और 1857 के महाविद्रोह के बीच अंतरसंबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रारंभिक विद्रोहों ने य…

1857 से पूर्व के जन-विद्रोहों और 1857 के महाविद्रोह के बीच अंतरसंबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रारंभिक विद्रोहों ने यह सिद्ध कर दिया कि ब्रिटिश शासन की स्थापना शांतिपूर्ण नहीं थी, बल्कि इसे भारतीय समाज के हर वर्ग के निरंतर प्रतिरोध का सामना करना पड़ा था। 2. इन आंदोलनों ने दमित वर्गों में प्रतिरोध की एक स्थानीय परंपरा का निर्माण किया, जिसने 1857 के विस्फोट के लिए बारूद तैयार किया। 3. प्रारंभिक विद्रोहों की मुख्य दुर्बलता उनका स्थानीयकृत, असंबद्ध और पारंपरिक अतीतगामी (Restorative) स्वरूप था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों कथन सही हैं। इन विद्रोहों ने साबित किया कि ब्रिटिश सत्ता को जनता ने कभी स्वेच्छा से स्वीकार नहीं किया। इन आंदोलनों ने स्थानीय स्तर पर प्रतिरोध की चेतना जीवित रखी, यद्यपि उनके पास आधुनिक राष्ट्रीय दृष्टि का अभाव था।

विषयवार प्रश्न-सेट • इतिहास और संस्कृति1857 से पूर्व के प्रमुख जन-विद्रोहों और उनके संबंधित कालखंडों के निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. संन्यासी विद्रोह: 1763–1800 2. पाइक विद्रो…

1857 से पूर्व के प्रमुख जन-विद्रोहों और उनके संबंधित कालखंडों के निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. संन्यासी विद्रोह: 1763–1800 2. पाइक विद्रोह: 1817 3. कोल विद्रोह: 1831–1832 4. संथाल विद्रोह: 1855–1856 उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सभी चारों युग्म सही सुमेलित हैं। संन्यासी विद्रोह (1763–1800), पाइक विद्रोह (1817), कोल विद्रोह (1831–32) और संथाल हूल (1855–56)।

विषयवार प्रश्न-सेट • इतिहास और संस्कृति1857 से पूर्व ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में हुए प्रमुख 'सिपाही विद्रोहों' (Sepoy Mutinies) के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजि…

1857 से पूर्व ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में हुए प्रमुख 'सिपाही विद्रोहों' (Sepoy Mutinies) के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. बक्सर का सिपाही विद्रोह (1764): हेक्टर मुनरो के समय मीर कासिम के साथ मिलने का प्रयास 2. वेल्लोर का सिपाही विद्रोह (1806): नई पगड़ी, दाढ़ी काटने और तिलक पर प्रतिबंध के विरुद्ध 3. बैरकपुर का सिपाही विद्रोह (1824): 47वीं रेजिमेंट द्वारा समुद्र पार बर्मा जाने से इंकार करना 4. फिरोजपुर का सिपाही विद्रोह (1844): सिंध में अतिरिक्त भत्ते (Bhatta) की मांग को लेकर उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सभी चार युग्म सही सुमेलित हैं। 1764 में बक्सर में हेक्टर मुनरो के समय पहली बार सिपाहियों ने बगावत की; 1806 में वेल्लोर में धार्मिक प्रतीकों पर रोक के विरुद्ध; 1824 में बैरकपुर में बर्मा जाने से इंकार; और 1844 में फिरोजपुर में सिंध भत्ते को लेकर विद्रोह हुआ।

विषयवार प्रश्न-सेट • इतिहास और संस्कृति1857 से पूर्व ब्रिटिश शासन के विरुद्ध हुए जन-विद्रोहों (People's Resistance) के सामान्य चरित्र और अंतर्निहित कारणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनो…

1857 से पूर्व ब्रिटिश शासन के विरुद्ध हुए जन-विद्रोहों (People's Resistance) के सामान्य चरित्र और अंतर्निहित कारणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कंपनी की भू-राजस्व नीतियों ने पारंपरिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था और भू-स्वामित्व व्यवस्था को पूरी तरह नष्ट कर दिया था। 2. विस्थापित शासकों, जमींदारों और धार्मिक प्रमुखों ने अक्सर इन विद्रोहों को नेतृत्व प्रदान किया क्योंकि औपनिवेशिक विस्तार ने उनकी सामाजिक- आर्थिक स्थिति को छीन लिया था। 3. ये प्रारंभिक विद्रोह व्यापक अखिल भारतीय राष्ट्रवादी चेतना से प्रेरित थे और आधुनिक लोकतांत्रिक राज्य की स्थापना का लक्ष्य रखते थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

कथन 3 गलत है क्योंकि 1857 से पूर्व के विद्रोह स्थानीय और क्षेत्रीय सीमाओं में बंधे थे। उनमें आधुनिक राष्ट्रवाद या लोकतांत्रिक राज्य की अवधारणा का अभाव था; उनका चरित्र मूलतः पारंपरिक और अतीतगामी (Restorative) था। कथन 1 और 2 सही हैं।

विषयवार प्रश्न-सेट • इतिहास और संस्कृति1857 से पूर्व भारतीय समाज में व्याप्त सामाजिक एवं धार्मिक असंतोष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 1850 का 'धार्मिक अयोग्यता अधिन…

1857 से पूर्व भारतीय समाज में व्याप्त सामाजिक एवं धार्मिक असंतोष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 1850 का 'धार्मिक अयोग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act / Lex Loci Act) ने धर्म परिवर्तन करने वाले हिंदुओं को अपनी पैतृक संपत्ति से वंचित होने से सुरक्षा प्रदान की, जिसे रूढ़िवादी हिंदुओं ने धर्म पर आघात माना। 2. सती प्रथा का उन्मूलन (1829) और हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम (1856) को रूढ़िवादी भारतीयों द्वारा अपने सामाजिक रीति-रिवाजों में विदेशी हस्तक्षेप माना गया। 3. ईसाई मिशनरियों की आक्रामक धर्म परिवर्तन गतिविधियों और सेना तथा जेलों में ईसाई धर्म के प्रचार ने जनता के मन में यह आशंका भर दी कि अंग्रेज उनका धर्म नष्ट करना चाहते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों कथन सही हैं। 1850 के धार्मिक अयोग्यता अधिनियम ने ईसाई बनने पर पैतृक संपत्ति के अधिकार को सुरक्षित किया जिसे धर्म पर हमला माना गया। सती और विधवा पुनर्विवाह सुधारों को रूढ़िवादी समाज ने विदेशी हस्तक्षेप माना। मिशनरियों के आक्रामक प्रचार ने जनता को आशंकित किया।

विषयवार प्रश्न-सेट • इतिहास और संस्कृति1858 के अधिनियम के तहत भारत के गवर्नर-जनरल के पदनाम और स्थिति में क्या परिवर्तन किया गया?

1858 के अधिनियम के तहत भारत के गवर्नर-जनरल के पदनाम और स्थिति में क्या परिवर्तन किया गया?

उत्तर और पूरी व्याख्या

विकल्प (a) सही है। गवर्नर-जनरल को 'वायसराय' (Viceroy / क्राउन का प्रतिनिधि) की उपाधि दी गई। लॉर्ड कैनिंग भारत के अंतिम गवर्नर-जनरल (कंपनी के अधीन) और पहले वायसराय (क्राउन के अधीन) बने।

विषयवार प्रश्न-सेट • इतिहास और संस्कृति1858 के बाद ब्रिटिश क्राउन द्वारा देशी रियासतों के प्रति अपनाई गई नीति में आए युगांतकारी परिवर्तन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: …

1858 के बाद ब्रिटिश क्राउन द्वारा देशी रियासतों के प्रति अपनाई गई नीति में आए युगांतकारी परिवर्तन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. महारानी विक्टोरिया की उद्घोषणा (1858) द्वारा देशी राज्यों के किसी भी नए भू-भाग के विलय (Annexation) पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया और हड़प नीति समाप्त कर दी गई। 2. शासकों को पुत्र न होने पर दत्तक पुत्र गोद लेने का अधिकार पुनः बहाल कर दिया गया। 3. ब्रिटिश सरकार ने देशी शासकों को साम्राज्य की रक्षा के लिए 'तरंग-रोधक' (Breakwaters in the storm) के रूप में देखा और उनका संरक्षण किया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों कथन सही हैं। 1857 के विद्रोह के बाद अंग्रेजों ने समझ लिया कि रियासतें ब्रिटिश साम्राज्य की रक्षा में 'तूफान में तरंग-रोधक' (Breakwaters) का काम करती हैं। अतः विलय नीति समाप्त कर दी गई, गोद लेने का अधिकार बहाल हुआ और रियासतों को ब्रिटिश शासन का सहयोगी बनाया गया।

विषयवार प्रश्न-सेट • इतिहास और संस्कृति1861 में आगरा में शिव दयाल साहब (तुलसी राम) द्वारा स्थापित 'राधास्वामी सत्संग' (Radhaswami Movement) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजि…

1861 में आगरा में शिव दयाल साहब (तुलसी राम) द्वारा स्थापित 'राधास्वामी सत्संग' (Radhaswami Movement) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह एक ईश्वर की अवधारणा, गुरु की सर्वोच्चता और संतों के सत्संग पर बल देता है। 2. इसने सभी प्रकार के मंदिर, तीर्थ और बाह्य कर्मकांडों को अनावश्यक माना। 3. इसने संन्यास के बजाय गृहस्थ जीवन जीते हुए नैतिक और सादगीपूर्ण जीवन व्यतीत करने का उपदेश दिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों कथन सही हैं। 1861 में आगरा में शिव दयाल साहब (तुलसी राम) ने राधास्वामी सत्संग की नींव रखी। एक ईश्वर, गुरु की महत्ता और गृहस्थ जीवन में सादगी का संदेश दिया।

विषयवार प्रश्न-सेट • इतिहास और संस्कृति1863 में कलकत्ता में नवाब अब्दुल लतीफ द्वारा स्थापित 'मोहम्मडन लिटरेरी सोसाइटी' (Mohammedan Literary Society) का मुख्य उद्देश्य क्या था?

1863 में कलकत्ता में नवाब अब्दुल लतीफ द्वारा स्थापित 'मोहम्मडन लिटरेरी सोसाइटी' (Mohammedan Literary Society) का मुख्य उद्देश्य क्या था?

उत्तर और पूरी व्याख्या

विकल्प (a) सही है। 1863 में नवाब अब्दुल लतीफ ने कलकत्ता में 'मोहम्मडन लिटरेरी सोसाइटी' बनाई ताकि बंगाल के मुस्लिम युवाओं में अंग्रेजी शिक्षा और आधुनिक विचारों का प्रसार किया जा सके।

विषयवार प्रश्न-सेट • इतिहास और संस्कृति1866 में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में मोहम्मद कासिम नानौतवी और रशीद अहमद गंगोही द्वारा स्थापित 'देवबंद आंदोलन' (Deoband Movement) के संदर्भ …

1866 में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में मोहम्मद कासिम नानौतवी और रशीद अहमद गंगोही द्वारा स्थापित 'देवबंद आंदोलन' (Deoband Movement) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह अलीगढ़ आंदोलन के पश्चिमीकरण और ब्रिटिश-समर्थक रुख के विरोध में स्थापित एक पुनरुत्थानवादी (Revivalist) आंदोलन था। 2. इसका मुख्य उद्देश्य कुरान और हदीस की शुद्ध शिक्षाओं का प्रसार करना तथा विदेशी शासकों के विरुद्ध जिहाद की भावना को जीवित रखना था। 3. देवबंद के उलेमाओं ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गठन का स्वागत किया और 1888 में सर सैयद अहमद खान की पैट्रियोटिक एसोसिएशन के विरुद्ध फतवा जारी किया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों कथन सही हैं। 1866 में देवबंद दारुल उलूम बना। यह अलीगढ़ के पश्चिमीकरण का विरोधी था। इसने कांग्रेस की स्थापना का स्वागत किया और 1888 में सर सैयद अहमद खान की ब्रिटिश-परस्त राजनीति के खिलाफ फतवा जारी किया।

विषयवार प्रश्न-सेट • इतिहास और संस्कृति1866 में ब्रह्म समाज के प्रथम विभाजन (First Schism) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. देवेंद्रनाथ टैगोर और केशव चंद्र सेन के बीच …

1866 में ब्रह्म समाज के प्रथम विभाजन (First Schism) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. देवेंद्रनाथ टैगोर और केशव चंद्र सेन के बीच सभी धर्मों के समावेश, अंतरजातीय विवाह और गैर-ब्राह्मणों द्वारा उपवीत (यज्ञोपवीत) धारण करने के मुद्दे पर गहरे मतभेद उत्पन्न हुए। 2. केशव चंद्र सेन के नेतृत्व वाले धड़े ने 'भारतीय ब्रह्म समाज' (Brahmo Samaj of India) की स्थापना की। 3. देवेंद्रनाथ टैगोर के नेतृत्व वाले मूल ब्रह्म समाज को 'आदि ब्रह्म समाज' (Adi Brahmo Samaj) कहा गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों कथन सही हैं। 1866 में ब्रह्म समाज में पहला विभाजन हुआ। केशव चंद्र सेन के प्रगतिशील गुट ने 'भारतीय ब्रह्म समाज' (Brahmo Samaj of India) बनाया, जबकि देवेंद्रनाथ के रूढ़िवादी गुट को 'आदि ब्रह्म समाज' (Adi Brahmo Samaj) कहा गया।

विषयवार प्रश्न-सेट • इतिहास और संस्कृति1866 में लंदन में दादाभाई नौरोजी द्वारा स्थापित 'ईस्ट इंडिया एसोसिएशन' (East India Association) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1.…

1866 में लंदन में दादाभाई नौरोजी द्वारा स्थापित 'ईस्ट इंडिया एसोसिएशन' (East India Association) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसका उद्देश्य ब्रिटिश जनता और संसद को भारतीय मामलों से अवगत कराना तथा भारत के कल्याण के लिए ब्रिटिश नीतियों को प्रभावित करना था। 2. लॉर्ड लिडवेन इसके प्रथम अध्यक्ष बने और दादाभाई नौरोजी इसके मानद सचिव थे। 3. इस एसोसिएशन ने बंबई, कलकत्ता और मद्रास में अपनी शाखाएं स्थापित कीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों कथन सही हैं। 1866 में लंदन में दादाभाई नौरोजी ने ईस्ट इंडिया एसोसिएशन की स्थापना की ताकि ब्रिटिश संसद और जनता को भारत के हितों से अवगत कराया जा सके। प्र. सं. सही उत्तर व्याख्या (Detailed Historical Explanation)

विषयवार प्रश्न-सेट • इतिहास और संस्कृति1867 में बंबई में स्थापित 'प्रार्थना समाज' (Prarthana Samaj) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसकी स्थापना केशव चंद्र सेन की महा…

1867 में बंबई में स्थापित 'प्रार्थना समाज' (Prarthana Samaj) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसकी स्थापना केशव चंद्र सेन की महाराष्ट्र यात्रा की प्रेरणा से डॉ. आत्माराम पांडुरंग ने की थी। 2. 1870 में महादेव गोविंद रानाडे और आर.जी. भंडारकर के इसमें शामिल होने के बाद इसे व्यापक बौद्धिक और सामाजिक विस्तार मिला। 3. प्रार्थना समाज ने हिंदू धर्म से अलग होने के बजाय उसके भीतर रहकर ही भक्ति संतों (जैसे तुकाराम, नामदेव) की परंपरा के आधार पर सुधार की रणनीति अपनाई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों कथन सही हैं। 1867 में केशव चंद्र सेन की प्रेरणा से डॉ. आत्माराम पांडुरंग ने प्रार्थना समाज बनाया। 1870 में रानाडे और भंडारकर जुड़े। इसने हिंदू धर्म से अलग होने के बजाय महाराष्ट्र के वारकरी संतों (तुकाराम) की परंपरा के आधार पर सुधार किए।