2013 · Q3
प्रश्न
कुछ लोगों का मानना है कि मूल्य समय और परिस्थिति के साथ बदलते रहते हैं, जबकि अन्य दृढ़ता से मानते हैं कि कुछ सार्वभौमिक और शाश्वत मानवीय मूल्य हैं। इस संबंध में उचित औचित्य के साथ अपनी धारणा प्रस्तुत कीजिए।
मॉडल उत्तर
मूल्यों की प्रकृति के संबंध में 'नैतिक सापेक्षवाद' ( Moral Relativism) और 'नैतिक सार्वभौमिकतावाद' (Moral
Universalism) दोनों में आंशिक सत्य है, और मेरा दृष्टिकोण इन दोनों के 'स्तरीय समन्वय' का है। (1) परिधीय/व्यावहारिक मूल्य समय
के साथ बदलते हैं: खान-पान, वेशभूषा, जातिगत पदानुक्रम या लैंगिक भूमिकाओं से जुड़े सामाजिक मूल्य समय और ज्ञान के विकास के साथ
बदलते हैं (जैसे—सती प्रथा व बाल विवाह का अंत तथा LGBTQ+ अधिकारों की स्वीकृति)। (2) केंद्रीय/शाश्वत मानवीय मूल्य
अपरिवर्तनीय हैं: सत्य, करुणा, न्याय, अहिंसा और मानवीय गरिमा जैसे 'फाउंडेशनल मूल्य' देश-काल से परे शाश्वत हैं—चाहे वह 2500 वर्ष
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पूर्व बुद्ध व सुकरात का युग हो या वर्ष 2026 का एआई ( ) युग। निष्कर्ष: शाश्वत मूल्य 'वृक्ष की जड़' हैं जो स्थिर रहते हैं, जबकि उनकी
अभिव्यक्ति के सामाजिक नियम 'शाखाओं और पत्तों' की तरह समय के अनुसार बदलते रहते हैं।
मॉडल उत्तर स्रोत PDF पर आधारित है; पठनीयता के लिए टंकण, विराम-चिह्न और स्पष्ट OCR त्रुटियों का संपादकीय परिष्कार किया गया है। प्रश्न क्रमांक/शब्द-सीमा सत्यापन के बाद प्रकाशित हैं।