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मौलिक अभ्यास प्रश्न • GS-II/III

जीवनरक्षक औषधियों के पेटेंट में नवाचार और जनहित

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15 अंकशब्द-सीमा: 250 शब्द29 अक्टूबर 2026

प्रश्न

जीवनरक्षक दवाओं पर पेटेंट परीक्षण में सार्वजनिक स्वास्थ्य और औषधि-नवाचार के संतुलन की विवेचना कीजिए।

यह अध्ययनसार का मौलिक अभ्यास प्रश्न है, वास्तविक UPSC विगत वर्ष प्रश्न नहीं।

आदर्श उत्तर

भूमिका: औषधि पेटेंट नई खोज के लिए निवेश प्रोत्साहित करता है, लेकिन अनुचित एकाधिकार उपचार महँगा कर सकता है। भारतीय पेटेंट अधिनियम, 1970 नवाचार और सार्वजनिक स्वास्थ्य में संतुलन का आधार देता है।

नवाचार को प्रोत्साहन

  • नवीनता, आविष्कारशील कदम एवं औद्योगिक उपयोगिता की कसौटी वास्तविक खोज को सीमित अवधि का संरक्षण देती है।
  • स्पष्ट वैज्ञानिक प्रकटीकरण भविष्य के अनुसंधान और पेटेंट-समाप्ति के बाद सार्वजनिक ज्ञान को मजबूत करता है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा

  • धारा 3(d): ज्ञात पदार्थ के कुछ नए रूपों की पेटेंट-योग्यता में वास्तविक प्रभावकारिता की कसौटी अनावश्यक विस्तार सीमित करती है।
  • धारा 3(e): केवल घटकों के गुणों के योग वाले मिश्रण पर पेटेंट प्राप्त नहीं किया जा सकता।
  • धारा 3(i): मानव अथवा पशु के उपचार की निर्दिष्ट विधियों से संबंधित अपवर्जन है।
  • पूर्व-अनुदान विरोध: वैज्ञानिक साक्ष्य से समाज किसी कमजोर पेटेंट दावे को चुनौती दे सकता है; BPaL प्रकरण में जनस्वास्थ्य समूहों की आपत्तियाँ इसी व्यवस्था का उदाहरण हैं।
  • अनिवार्य लाइसेंस: कानून में निर्धारित परिस्थितियों में पहुँच सुनिश्चित करने का उपाय है, किंतु यह आवेदन-अस्वीकृति से अलग है।

वर्तमान संदर्भ और चुनौतियाँ

अक्टूबर 2026 में BPaL दवा-संयोजन से जुड़े एक विशिष्ट पेटेंट आवेदन की अस्वीकृति रिपोर्ट हुई। इससे अन्य सभी पेटेंट स्वतः समाप्त नहीं होते। जेनेरिक उत्पादन के साथ गुणवत्ता, नियामकीय मंजूरी और दवा आपूर्ति महत्त्वपूर्ण हैं।

आगे की राह

पारदर्शी पेटेंट परीक्षण, सार्वजनिक आदेश, अनुसंधान निवेश, गुणवत्ता-नियंत्रित जेनेरिक उत्पादन और सरकारी खरीद व्यवस्था का संयुक्त विकास जरूरी है।

निष्कर्ष: संतुलित व्यवस्था वास्तविक खोज को पुरस्कार तथा मरीज को उचित मूल्य पर उपचार दोनों प्रदान करती है।

आधिकारिक संदर्भ तथा स्रोत