महिला बंदियों, बच्चों की गरिमा और कारागार सुधार
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प्रश्न
महिला बंदियों और उनके बच्चों की गरिमा तथा अधिकारों की रक्षा में भारतीय कारागार प्रणाली की प्रमुख समस्याओं का विश्लेषण कीजिए। नई NHRC सलाह के संदर्भ में संस्थागत सुधार सुझाइए।
यह अध्ययनसार का मौलिक अभ्यास प्रश्न है, वास्तविक UPSC विगत वर्ष प्रश्न नहीं।
आदर्श उत्तर
भूमिका: जेल में स्वतंत्रता सीमित हो सकती है, किंतु अनुच्छेद 14 और 21 से प्राप्त समानता, जीवन तथा गरिमा के अधिकार समाप्त नहीं होते। अक्टूबर 2026 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की सलाह ने महिलाओं और उनके बच्चों के लिए दस सुधार-क्षेत्र निर्धारित कर दो महीने में कार्रवाई-रिपोर्ट माँगी।
प्रमुख समस्याएँ
- व्यवस्था और स्वास्थ्य: कई स्थानों पर महिला कर्मचारियों, सुरक्षित स्वच्छता सुविधाओं, मासिक धर्म सामग्री, प्रसूति एवं मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पर्याप्त उपलब्धता चुनौती है।
- विचाराधीन बंदियों की कठिनाई: कमजोर विधिक सहायता, जमानत की प्रक्रियागत बाधाएँ तथा लंबी अभिरक्षा परिवार और आजीविका को प्रभावित करती हैं।
- बच्चों का अधिकार: जेल में साथ रहने वाले तथा बाहर रहने वाले बच्चों की शिक्षा, पहचान-पत्र, पोषण, सुरक्षित देखभाल और माँ से संपर्क में व्यवधान होता है।
- सामाजिक पुनर्स्थापन: रिहाई के बाद रोजगार की कमी पुनर्वास कठिन बनाती है। विदेशी नागरिक बंदियों की भाषा तथा दूतावास संबंधी आवश्यकताएँ अलग हैं।
संस्थागत सुधार
- प्रवेश से पुनर्वास तक: गिरफ्तारी, चिकित्सा परीक्षण, रिकॉर्ड, न्यायालय में पेशी और रिहाई की एकीकृत संवेदनशील प्रक्रिया तैयार हो।
- विभागीय समन्वय: जेल, स्वास्थ्य, महिला-बाल विकास, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और बाल संरक्षण संस्थाओं के स्पष्ट उत्तरदायित्व तय हों।
- न्याय तक पहुँच: नियमित जमानत समीक्षा, निःशुल्क विधिक सहायता, सुरक्षित मुलाकात तथा गोपनीय शिकायत निवारण सुलभ हों।
- जवाबदेही: राज्यवार निरीक्षण, समयबद्ध कार्रवाई-रिपोर्ट और स्वास्थ्य, शिक्षा तथा पुनर्वास के परिणाम-सूचक प्रकाशित किए जाएँ; व्यक्तिगत गोपनीयता सुरक्षित रहे।
निष्कर्ष: सुधार का लक्ष्य केवल कारागार का बेहतर प्रबंधन नहीं, बल्कि स्त्री की संवैधानिक गरिमा और बच्चे के सर्वोत्तम हित को न्याय-प्रशासन का आधार बनाना है।