मादक पदार्थ: स्वास्थ्य, अपराध और राष्ट्रीय सुरक्षा
प्रश्न
भारत में मादक पदार्थों की चुनौती सार्वजनिक स्वास्थ्य, संगठित अपराध और राष्ट्रीय सुरक्षा के त्रिकोण पर स्थित है। नशा मुक्त भारत के 2029 लक्ष्य तथा मौजूदा कानूनी-संस्थागत ढाँचे के संदर्भ में समग्र रणनीति सुझाइए।
आदर्श उत्तर
मादक पदार्थों की समस्या नशे के सेवन तक सीमित नहीं है। उससे उपचार का बोझ, परिवारों की आय-हानि, अपराधी नेटवर्क और आतंक-वित्तपोषण जुड़ते हैं। इसलिए 2029 तक मादक पदार्थ व्यापार उखाड़ने के लक्ष्य को स्वास्थ्य तथा सुरक्षा की संयुक्त नीति चाहिए।
चुनौती के परस्पर जुड़े आयाम
अफगानिस्तान और म्यांमार के निकट भारत की स्थिति तस्करी का जोखिम बढ़ाती है। समुद्री मार्ग, सीमापार ड्रोन और डिजिटल माध्यम निगरानी कठिन बनाते हैं। अवैध आय हवाला, धन-शोधन और हथियार खरीद में लग सकती है; वहीं निर्भरता युवाओं को शोषण तथा छोटे अपराधों की ओर धकेलती है।
समग्र रणनीति
- आपूर्ति और वित्त पर प्रहार: स्वापक औषधि एवं मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम के अंतर्गत बड़े आपूर्तिकर्ताओं की जाँच के साथ वित्तीय स्रोत, अग्रदूत रसायन तथा संपत्ति-शृंखला का पता लगाया जाए। केवल बरामदगी पर्याप्त नहीं है।
- संस्थागत समन्वय: स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, राज्य पुलिस, सीमा बल, तटरक्षक और वित्तीय खुफिया इकाइयों के बीच समयबद्ध सूचना-साझेदारी हो। अंतरराष्ट्रीय सहयोग से सीमा-पार जाँच मजबूत बने।
- माँग में कमी: नशा मुक्त भारत अभियान तथा राष्ट्रीय कार्ययोजना को विद्यालयी परामर्श, परिवार-आधारित रोकथाम और प्रशिक्षित सामुदायिक कार्यकर्ताओं से जोड़ना चाहिए।
- उपचार और पुनर्वास: निर्भर व्यक्ति के लिए सुलभ उपचार, मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ, पुनर्वास और आजीविका-सहायता उपलब्ध हों। कलंक उपचार लेने में बाधा बनता है।
प्रगति का आकलन गिरफ्तारियों अथवा जागरूकता कार्यक्रमों की संख्या से आगे बढ़कर बड़े नेटवर्क टूटने, उपचार तक पहुँच और पुनर्वास की निरंतरता से होना चाहिए। साक्ष्य-आधारित प्रवर्तन तथा मानवीय स्वास्थ्य नीति मिलकर ही टिकाऊ नशामुक्ति और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।